चिड़ियाघर की सैर पर निबंध Essay on Visit to A Zoo in Hindi And English Language

Essay on Visit to A Zoo in Hindi And English चिड़ियाघर की सैर पर निबंध: Zoo Essay For Students and children in various length, 100, 150, 200, 250, 300, 350, 400, 500 words essay giving blow. how I spent my last Sunday (visit to zoo essay) describe zoo trip scene in short paragraph helpful for students they read in class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9. the zoo is placed there kept wild animals in cages for visiter. monkey, lion, bear, tiger, elephant and many spices birds in our city zoo, there I go visit a zoo. read out this Hindi & English Language essay On Zoo.

Essay on Visit to A Zoo in Hindi & English

चिड़ियाघर की सैर पर निबंध Essay on Visit to A Zoo in Hindi And English Language

प्रिय साथियो आपका स्वागत है Essay on Zoo in Hindi में आज हम आपके साथ चिड़ियाघर पर निबंध साझा कर रहे हैं. कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 तक के बच्चों को चिड़ियाघर की सैर पर निबंध लिखने को कहा जाता हैं, तो  आप सरल भाषा में लिखे गये इस हिन्दी निबंध को परीक्षा के  लिहाज से याद कर लिख सकते हैं.

अंग्रेजी में निबंध

last Sunday I visited the zoo. my father also went with me. there was a great rush at the booking window. I bought two tickets. then we went inside the zoo.

first of all, we saw birds. they were lovely. then we moved to towards the cage of the monkeys. the jumped and shook the cages.

now we went to another section. there were big animals. there were many kinds of them. they had been bought from all parts of the world.

we saw tigers, lions, and bears. they looked horrible. a lion gave a loud roar. all the people were frightened.

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in the end, we went to see the elephants. many children enjoyed rides of them.

we were now very tired. we returned on the way back. we also saw kangaroos. we got into a bus and come back home. we had a good time (or thus I spent my last Sunday)

चिड़ियाघर की सैर पर निबंध (Zoo Essay in Hindi)

लम्बें समय से मुझे चिड़ियाघर की सैर करने का मन कर रहा था. आखिर पिछले रविवार को मै अपने पिताजी के साथ चिड़ियाघर की यात्रा पर गया. वहां टिकट बुकिंग खिड़की पर बहुत भीड़ थी. मैंने दो टिकट खरीदी एवं हम अंदर चले गये.

सर्वप्रथम हम पक्षियों के पिंजरे की तरफ गये. वहां बहुत सुंदर सुंदर पक्षी थी. दूसरी तरफ कुछ बन्दर एक पिंजरे में उछल कूद कर रहे थे. हमने काफी समय उन बंदरों की उछल कूद देखने में बिताया.

अब हम चिड़ियाघर के अगले भाग में पहुच गये. यहाँ पर दुनिया के विभिन्न भागों से लाए गये तरह तरह के जानवर थे. जिनमें बाघ, शेर व भालू आदि थे. तभी शेर ने जोर से दहाड़ मारी, कि सभी लोग अचानक डर गयें.

आखिरी वक्त में हमने हाथियों को देखा. कुछ बच्चों ने इन पर सवारी करने का लुफ्त भी उठाया. काफी समय बिताने के साथ ही हम कुछ थक चुके थे.

आखिर में हमनें कंगारू को देखा और बस पकड़कर घर की तरफ चल दिए. इस तरह पिछला रविवार मेरे लिए काफी अच्छा रहा, जिसमें मैंने मेरे शहर के चिड़ियाघर की सैर की.

चिड़ियाघर पर निबंध | Essay on Zoo in Hindi

मनुष्य द्वारा पशु पक्षियों के लिए निर्मित कृत्रिम आवास को चिड़ियाघर कहा जाता हैं. चिड़ियाघर बनाने का उद्देश्य मनोरंजन के अतिरिक्त पशु पक्षियों का संरक्षण एवं कृत्रिम प्रजनन द्वारा उनकी संख्या में वृद्धि करना भी होता हैं.

चिड़ियाघर की सैर से न केवल मनोरंजन होता हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार के पशु पक्षियों के बारे में करीब से जानने का मौका मिलता हैं. यह ऐसी जानकारी है, जिसे किताबों के माध्यम से प्रदान नहीं किया जा सकता. इसलिए स्कूल के बच्चों को विशेष तौर पर चिड़ियाघर की सैर पर ले जाया जाता हैं.

खैर, जीवन में सैर का जो आनन्द हैं, वह शायद ही किसी अन्य कार्य में मिले. सैर के लिए कुछ लोग अपनी ऐतिहासिक स्थान का चयन करते हैं. तो कुछ लोगों को आधुनिक महानगरों की सैर करने में आनन्द आता हैं मुझे चिड़ियाघर की सैर करना अच्छा लगता हैं.

मैं पिछले वर्ष मार्च के महीने में दिल्ली के चिड़ियाघर की सैर करने गया था. वैसे तो इसका नाम नेशनल जुलोजिकल पार्क ऑफ़ इंडिया है, किन्त यह दिल्ली चिड़ियाघर के नाम से प्रसिद्ध हैं. यह दिल्ली के पुराना किला के दक्षिणी छोर पर स्थित हैं. एवं भारत के कुछ बड़े चिड़ियाघरों में से एक हैं.

इसमें पशु पक्षियों एवं सरीस्रपों की एक हजार से अधिक प्रजातियों को उनके कृत्रिम आवास में रखा गया हैं. मैं अपने मित्रों के साथ चिड़ियाघर की सैर पर गया था. सुबह के समय सैर करने का एक अलग ही आनन्द होता हैं तथा दोपहर के बाद चिड़िया घर के सभी प्राणियों को देखना संभव नहीं हो पाता हैं.

इसलिए मैं करीब सुबह नौ बजे ही चिड़ियाघर पहुँच गया था. हम सबने प्रवेश टिकट लेने के बाद चिड़ियाघर में प्रवेश किया. इस चिड़ियाघर के प्रवेशद्वार के पास ही एक खूबसूरत उद्यान हैं. सबसे पहले हम उसी उद्यान में गये, चूँकि चिड़ियाघर के भीतर पीने के पानी को छोड़कर कोई अन्य खाद्य पदार्थ ले जाना मना था.

इसलिए हम लोग उस उद्यान के पास स्थित फ़ूड पार्लर में नाश्ता करने के लिए गये. नाश्ता करने के बाद हम लोग थोड़ी देर तक उद्यान में बनी कुर्सियों पर बैठे. रवि अपने साथ कैमरा भी लेकर आया था. उसने उसी समय फोटोग्राफी करना शुरू कर दिया.

अपने छोटे से फोटो सेशन के समाप्त होने के बाद हम सभी चिड़ियाघर के विभिन्न प्राणियों को देखने के लिए चल दिए. सबसे पहले हम बाघ को देखने पहुंचे.

बाघ अपने लिए निर्मित कृत्रिम आवास में मस्त होकर आराम कर रहा था. उसके बाहर चारों ओर लोहे की बड़ी जाली बनी हुई थी, ताकि वह बाहर न आ सके. बच्चे उसे देखकर खूब खुश हो रहे थे.

बाघ के पिजरे से थोड़ी ही दूर पर बंदरों का आवास हैं. बंदरों की शरारत पिंजरे के भीतर भी कम नहीं थी. बाहर से लोग उन्हें केले एवं अन्य खाद्य पदार्थ दे रहे थे.

बंदरों की सभी प्रजातियों को एक के बाद एक क्रमिक रूप से बने पिंजरों में रखा गया था. वन मानुष, लंगूर एवं गोरिल्ला सभी के लिए अलग अलग पिंजरें बने थे.

बंदरों को देखने के बाद हम हिरणों के आवास के पास पहुंचे. लगभग छः फुट ऊँचे बाड़े के भीतर उनके रहने की व्यवस्था की गयी थी. उन्मुक्त विचरण के ध्येय से उनके लिए एक बड़ा मैदान बनाया गया था. मैदान के बीच में कई प्रकार के छायादार वृक्ष लगे हुए थे.

उन पेड़ों के नीचे हिरण दोपहर में आराम करते नजर आते हैं. हिरणों के बाड़े से कुछ दूर जाने पर हमें चिड़ियों की चहचाहट सुनाई पड़ी. हम लोग उस ओर बढ़ गये. देखा कई बड़े बड़े पिंजरों के भीतर रंग बिरंगी चिड़ियाँ इस तरह जोर जोर से चहचहा रही थी, मानों आपस में बातें कर रही हो.

हर पिंजरे के बाहर भीतर रखे पक्षी के विवरण के रूप में पक्षी का नाम, उसका वैज्ञानिक नाम एवं उसकी प्रजाति के बारे में लिखा था. राकेश अपने साथ एक नोटबुक ले गया था.

जन्तु विज्ञान का छात्र होने के कारण उसे पक्षियों से बहुत लगाव हैं. हम पक्षियों के इन विवरणों को अपनी नोटबुक में लिखता जा रहा था.

रवि हर कोण से सभी पक्षियों के फोटो लेने में व्यस्त था. मेरी नजर इन पक्षियों के एक एक क्रियाकलाप पर थी. मैं ये देख रहा था कि ये कैसे उड़ते हैं और इनकी क्या विशेषता हैं.

इस चिड़ियाघर में सरीसृप प्राणियों के लिए भी एक विशेष प्रकार का कृत्रिम आवास बनाया गया हैं. घड़ियाल एवं मगरमच्छों के लिए ऐसे जलाशय बनाए गये हैं. जिनके माध्यम से सैलानियों को भी उनका दर्शन सुलभ होता हैं.

यहाँ साँपों की लगभग पचास प्रजातियों को रखा गया है. इन साँपों के आवास को एक ओर से शीशे से ढका गया हैं. जिनके माध्यम से दर्शक उन्हें देखते हैं.

नाग, अजगर, करैत इत्यादि के अतिरिक्त कुछ विदेशी साँपों को भी यहाँ प्रदर्शन के लिए रखा गया हैं. इनके लिए विशेष प्रकार की व्यवस्था भी की गई हैं. साँपों को इतने नजदीक से देखना वास्तव में बहुत रोमांचक था.

सांपो को देखने के बाद हम सफेद बाघ को देखने को पहुचे. सफेद बाघ को मैंने पहली बार यहाँ देखा था. दुनियां में बाघों की संख्या काफी कम हैं. विश्वभर में सफेद बाघों की कुल संख्या मुश्किल से बीस या पच्चीस के आस पास ही होगी.

बाघ के आवास के पास ही तेंदुएं का भी आवास हैं. हम जिस समय वहां थे, उस समय तेंदुआ अपने एक साथी के साथ पेड़ पर बैठा हुआ था. रवि के लिए यह अच्छा मौका था. उसने अपना कैमरा निकाला और विभिन्न कोणों से तेंदुए के फोटो खीचना शुरू कर दिया.

अब तक हम लोग काफी थक चुके थे. इसलिए हम लोग पास ही बने एक उद्यान में एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गये. वहीँ पर एक छोटा सा रेस्तरा बना था.

मैं चिप्स एवं कुछ अन्य खाद्य पदार्थ वहां से ले आया. खाने के बाद हमने फलों का जूस पिया. थोड़ी देर में ही हमारी थकान दूर हो गई और फिर हम सैर को निकल पड़े.

हमने अभी तक जिराफ, भालू, हाथी, लकडबग्घा एवं गैंडे जैसे जानवरों को नहीं देखा था. हम उनकी खोज में आगे निकल पड़े. सबसे पहले हमें भालुओं का एक झुण्ड दिखाई पड़ा. उसके बाद थोड़ा आगे बढ़ने पर हमें जिराफ के भी दर्शन हो गये.

चिड़ियाघर के ही एक कर्मचारी ने बताया कि गैंडे का जलाशय घड़ियाल के जलाशय से ही नजदीक हैं. हम घड़ियाल को देख चुके थे. हम उसके जलाशय की ओर बढ़ गये.

गैंडे अपने बच्चों के साथ कीचड़ में अठखेलियाँ करने में व्यस्त थे. गैंडों को देखने के बाद हम चिड़ियाघर के अन्य प्राणियों को देखने पहुंचे.

दिनभर चिड़ियाघर की सैर करने के बाद शाम को हम लोग घर के लिए चल पड़े. चिड़ियाघर की मेरी यह सैर कई अर्थों में मेरे लिए रोमांचक एवं अविस्मरणीय साबित हुई.

आज भी जब मैं चिड़ियाघर में रवि द्वारा खीची गई, तस्वीरों को देखता हूँ तो लगता हैं जैसे वह कल की ही बात हो. इस सैर में हम सभी को खूब आनन्द आया.

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