जल परिवहन पर निबंध | Essay On Water Transport In Hindi

Essay On Water Transport In Hindi नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं. आज हम जल परिवहन पर निबंध लेकर आए हैं. इससे पूर्व हमने सड़क और वायु परिवहन के बारें में जाना हैं. जल परिवहन को सबसे सस्ता एवं माल ढोने में प्रयुक्त सर्वाधिक प्राचीन परिवहन माध्यम माना जाता हैं. जल परिवहन क्या है इसका इतिहास, लाभ आदि के बारे में इस निबंध, भाषण, अनुच्छेद, पैराग्राफ में हम विस्तार से जानेंगे.

जल परिवहन पर निबंध | Essay On Water Transport In Hindi

जल परिवहन पर निबंध | Essay On Water Transport In Hindi

पृथ्वी के जलीय भागों के माध्यम से होने वाला व्यक्तियों और वस्तुओं का आवागमन जल परिवहन कहलाता हैं. जल परिवहन सस्ता व सुविधाजनक होता हैं. भारी माल परिवहन के लिए यह परिवहन का उत्तम साधन माना जाता हैं. यह परिवहन का बहुत प्राचीन साधन हैं. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी भारतीय जल परिवहन का उल्लेख मिलता हैं. रेलों के संचालन से पूर्व यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और परिवहन का प्रमुख साधन था.

भारत में जल परिवहन की दृष्टि से ब्रह्मपुत्र नदी सर्वश्रेष्ठ हैं. गंगा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा आदि में भी नावों से माल का परिवहन होता हैं. वर्षा ऋतु में नदियों में बाढ़, गर्मियों में पानी की कमी, मिट्टी का आ जाना आदि बाधाओं के कारण यह परिवहन अधिक विकसित नहीं हो पाया हैं.

आज विश्व अर्थव्यवस्था में उद्योग व व्यापार की वृद्धि के साथ साथ विश्व के महाद्वीपों को जोड़ने के सस्ते तथा सुलभ साधन के रूप में जल परिवहन का महत्व बढ़ गया हैं. पैकिंग उद्योग के विकास के कारण भी जल परिवहन का महत्व बढ़ा हैं.

जल परिवहन की विशेषताएं (Water transport features)

  • जल परिवहन सबसे सस्ता परिवहन साधन हैं. जल परिवहन के लिए किसी मार्ग के निर्माण की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं. यह इंधन की बचत करता हैं, पर्यावरण हितैषी होता है तथा परिवहन में कम लागत आती हैं. अनुरक्षण व्यय भी अपेक्षाकृत कम होता हैं.
  • जल परिवहन सबसे धीमी गति का परिवहन साधन हैं. परिवहन किये जा रहे माल के समय का साधारण महत्व हो तो जल परिवहन सर्वोत्तम हैं.
  • जल परिवहन भारी तथा अधिक स्थान घेरने वाले कच्चे माल को ढोने के लिए विशेष उपयुक्त होता हैं. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कच्ची धातुएँ, खनिज तेल, कोयला, लकड़ी, रासायनिक पदार्थ, भारी मशीने, वस्त्र वाहन, सीमेंट आदि का आवागमन जल परिवहन द्वारा ही होता हैं.
  • जलयानों के संचालन में कम इंधन, कम धन तथा कम व्यक्तियों की आवश्यकता होती हैं.
  • जल परिवहन में जल मार्गों को गहरा करने, पोताश्रयों के निर्माण करने, विशाल जलयानों को तैयार करने आदि पर व्यय के कारण आरम्भिक व्यय अधिक करना पड़ता हैं.
  • विभिन्न स्तर वाली नहरों को एक तल से दूसरे तल पर लाने के लिए लॉक बनाने की आवश्यकता होती हैं.
  • नहरों के निर्माण में अत्यधिक पूंजी व्यय करनी पड़ती हैं.
  • जल परिवहन ने पृथ्वी के दूरस्थ क्षेत्रों तक भारी सामान को पहुंचाना सम्भव किया हहिं.
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जल परिवहन को दो भागों में विभक्त किया जा सकता हैं.

  1. अंत स्थलीय या आंतरिक जल परिवहन
  2. सागरीय या महासागरीय जल परिवहन

आंतरिक जल परिवहन– स्थलीय भागों पर जल क्षेत्रों में परिवहन को आंतरिक जल परिवहन कहा जाता हैं. नदियाँ, नहरें व झील आन्तरिक जल परिवहन के माध्यम हैं. आंतरिक जलमार्गों का विकास नदियों व नहरों में पानी की मात्रा, प्रवाह की निरन्तरता व इनकी चौड़ाई पर निर्भर करता हैं.

आंतरिक जलमार्गों को प्रभावित करने वाले तत्व (Elements Affecting Internal Waterways)

  • नदियों में जलप्रपात व घुमावदार प्रवाह व मोड़ अधिक नहीं होने चाहिए
  • नदियों में जल की गहराई सर्वत्र समान हो तथा पानी की मात्रा समान ही रहे क्योंकि शुष्क हो जाने या बाढ़ आ जाने से परिवहन में बाधाएं आएगी.
  • नदियाँ हिम के प्रभाव से सर्वथा मुक्त हो
  • नदियों के मार्ग में रपट, झरने और चट्टाने नीं हो, मार्ग दलदला न हो
  • नदियों का मार्ग तंग व गहरी घाटियों में न होकर मैदानी भाग के सघन जनसंख्या वाले प्रदेशों या औद्योगिक क्षेत्रों में ही हो.
  • नदी का बहाव धीमा हो.
  • नदियों में मौसमी प्रवाह से जल की मात्रा बढ़ने व नदी का मार्ग बदलने से परिवहन प्रभावित होता हैं.

महासागरीय या सामुद्रिक जल परिवहन– सागरों महासागरों में परिवहन को महासागरीय परिवहन कहा जाता हैं. महासागरीय जलमार्ग वे समुद्रीय जलमार्ग हैं. जिनमें एक देश से दूसरे देश के मध्य महासागरीय जलपोतों द्वारा मानव व माल का परिवहन किया जाता हैं. महासागरीय जलमार्गों द्वारा परिवहन सस्ता होता हैं. अतः भारी मालों को जलमार्गों द्वारा ही भेजा जाता हैं. महासागरों में न तो कहीं रेल पटरियाँ बिछाई जाती हैं. और न ही सडकें बनाई जाती हैं.

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सामुद्रिक परिवहन के लाभ (Benefits of maritime transport)

  • ये विभिन्न स्तरीय देशों के मध्यम सम्पर्क जोड़ते हैं.
  • सामुद्रिक परिवहन में जहाजों से जल सतह पर निम्नतम संघर्षण होता हैं. इस कारण कम शक्ति से अधिक माल ढोया जा सकता हैं. थोड़ी शक्ति के द्वारा ही भारी सामान के जहाज चले जाते हैं, क्योंकि जल में तरलता होती है और भूमि की सी रूकावट नहीं होती हैं. रेल के इंजन की अपेक्षा स्टीमरों को कम ईंधन की आवश्यकता होती हैं.
  • स्थल पर गाड़ियों के टकराने, पटरी पर से उतर जाने, पुल इत्यादि टूट जाने तथा अन्य प्रकार की बहुत सारी दुर्घटनाओं के खतरे रहते हैं, किन्तु महासागरों में खतरों की संख्या कम होती हैं.

सामुद्रिक परिवहन की सीमाएं (Maritime transport limits)

  • जलमग्न चट्टानों का खतरा
  • जल की गहराई में अंतर
  • जल घनत्व में अधिक परिवर्तन
  • हिमशैलों के आने और टकराने का भय
  • सागरीय जल का जम जाना

अक्षांशीय क्षेत्रों में सागरीय जल जम जाता हैं. अतः उन क्षेत्रों में सामुद्रिक परिवहन सम्भव नहीं हैं. पूर्व सोवियत संघ की लम्बी उत्तरी तट रेखा इसी कारण उपयोगी नहीं हैं.

भारत में जल परिवहन (Water transport in india In Hindi)

भारत में जल परिवहन की दृष्टि से ब्रह्मपुत्र नदी सर्वश्रेष्ठ हैं. गंगा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा आदि में भी नावों से माल का परिवहन होता हैं.

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भारत के प्रमुख बंदरगाह – भारत की 7517 किमी लम्बी तटरेखा पर 12 मेजर व 200 छोटे बन्दरगाह स्थित हैं. भारत के पश्चिम तट पर कांडला, बम्बई, मारमागोआ, न्यू मैंगलोर व कोचीन, विशाखापत्तनम, चेन्नई, एन्नौर, तूतीकोरन बन्दरगाह हैं. छोटे बन्दरगाहों का संचालन व देखरेख सम्बन्धित राज्य सरकारों द्वारा किया जाता हैं. एन्नोर बन्दरगाह के अतिरिक्त अन्य समस्त मेजर पोर्टों के संचालन पोर्ट ट्रस्ट द्वारा किया जाता हैं. सर्वाधिक छोटे बन्दरगाह महाराष्ट्र में हैं.

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