प्राथमिक उपचार पर निबंध Essay On First Aid In Hindi

नमस्कार आज का निबंध प्राथमिक उपचार पर निबंध Essay On First Aid In Hindi पर दिया गया हैं. सरल भाषा में स्टूडेंट्स के लिए प्राथमिक चिकित्सा क्या है इसके टूल महत्व आदि पर निबंध दिया गया हैं. उम्मीद करते है प्राथमिक उपचार के निबंध में दी जानकारी पसंद आएगी.

प्राथमिक उपचार पर निबंध Essay On First Aid In Hindi

प्राथमिक उपचार पर निबंध Essay On First Aid In Hindi

कई बार हमारे आसपास अचानक, घर, बाहर या स्कूल में कहीं भी दुर्घटना घट जाती हैं. आपके स्कूल में अचानक जब किसी बच्चे की तबियत खराब हो जाती है तो उसे स्कूल के मेडिकल रूम में तुरंत चिकित्सा / उपचार प्रदान किया जाता हैं.

अचानक कई बार घर या बाहर भी तबियत खराब हो जाती है या दुर्घटना घट जाती हैं. ऐसी स्थिति में जब तक डॉक्टर नहीं आता. तब तक मरीज को निगरानी में रखना चाहिए. और उसे तुरंत प्राथमिक चिकित्सा/ प्राथमिक उपचार (First Aid) देनी चाहिए.

प्राथमिक उपचार को फर्स्ट एड कहते हैं. सभी को घर में फर्स्ट एड बॉक्स जरुर रखना चाहिए. इस प्राथमिक उपचार पेटी में पट्टी, दवाई, रुई का पैकेट, डिटोल की शीशी, दर्द निवारक दवाई, कैंची आदि होनी चाहिए. इन चोटों पर आप रोगों को तुरंत प्राथमिक उपचार दे सकते हैं.

प्राथमिक उपचार किसे कहते है अर्थ व परिभाषा (what is first aid in hindi Information )

अचानक किसी इंसान या पशु को चोट लग जाने या दुर्घटना हो जाने पर अप्रशिक्षित अर्थात आम लोगों द्वारा किया जाने वाला उपचार प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) कहलाता हैं.

इस तकनीक का उपयोग रोगी को ठीक करने की बजाय उचित चिकित्सा मिलने तक के समय का सदुपयोग करके उन्हें दर्द, चोट, पीड़ा में राहत उपलब्ध करवाना होता हैं.

कई बार दुर्घटना की स्थिति में कई घंटे तक अस्पताल नहीं पहुच पाते हैं. इस दौरान बहुत से लोग दम तौड़ लेते हैं. इस प्रकार के भयानक नतीजों से बचने के लिए प्राथमिक उपचार का सहारा लिया जाता हैं.

कई बार यह लोगों के जीवन को बचाने में भी कारगर सिद्ध होता हैं. यह प्रणाली कुछ प्रयोगात्मक चिकित्सा के मूल सिद्धांतों पर कार्य करती हैं.

इसलिए प्रत्येक जागरूक नागरिक को प्राथमिक उपचार के मूल सिद्धांतों तथा अलग अलग परिस्थियों में इसके उपयोग की जानकारी रखनी चाहिए.

प्राथमिक उपचार की आवश्यक बातें

प्राथमिक उपचार की अपनी सीमाएं है जिसके भीतर ही इसका उपयोग करना चाहिए, इसका कार्य चिकित्सा का स्थान लेना नहीं हैं. बल्कि यह डॉक्टर के आने से पूर्व का उत्तरादायित्व निर्वहन हैं.

जो किसी प्रशिक्षित चिकित्सक के आने के साथ ही प्राथमिक चिकित्सा की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं. एक प्राथमिक उपचारक व्यक्ति को विभिन्न हालातों में व्यक्ति में स्थिति उनकी समस्या दवा कब कैसे दी जानी हैं आदि का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए.

प्राथमिक चिकित्सा देने से पूर्व रोगी के हालत पर अवश्य विचार करना चाहिए.  यदि व्यक्ति घायल है तथा वह अपनी पीड़ा के बारे में बता सकता है तो उसकी मदद लेनी चाहिए, अन्यथा चोट की पहचान के लिए बोहोश पड़े व्यक्ति के ईलाज में आस पास के लोगों से भी राय लेनी चाहिए.

एक अच्छे प्राथमिक उपचारक को पीड़ित की दुर्घटना का पता कर लेना बहुत जरुरी हैं. उसे ज्ञान होना चाहिए कि व्यक्ति की यह स्थिति आग, बिजली का तार, विषैली गैस, केले का छिलका या बिगड़ा घोड़ा अथवा किसी अन्य कारणों से हुई हैं. इसके बाद ही उपचार का तरीका काम में लेना चाहिए.

एक प्राथमिक उपचारक में विवेकी, व्यवहारकुशल, युक्तिपूर्ण, निपुण, स्पष्टवक्ता, विवेचक, अध्यवसायी, सहानुभूतियुक्त आदि गुण होने जरुरी हैं.

प्राथमिक उपचार के सिद्धांत (principles of first aid in hindi)

एक प्राथमिक उपचारक को पीड़ित व्यक्ति के सम्बन्ध में डॉक्टर के आने तक मृत घोषित नहीं करना चाहिए. जहाँ तक संभव हो व्यक्ति को घटनास्थल से थोडा दूर आरामदायक जगह पर ले लेना चाहिए.

उपचार में ध्यान रखे सबसे पहले शरीर के उन्ही भागों को देखे जहाँ से अधिक रक्त बह रहा हो. यदि व्यक्ति श्वास लेने में कठिनाई महसूस कर रहा है तो उसे कृत्रिम श्वास दे.

चोटिल व्यक्ति को कंबल, कोट, तथा गरम पानी की बोतल की मदद से शरीर को गर्म बनाए रखने का प्रयत्न करे. यदि व्यक्ति के हड्डी टूटी है या शरीर के किसी भाग में असहनीय दर्द है तो उसे आरामदायक स्थिति में ही लेटने दे.

व्यक्ति ने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया है तो उसे उन्हें तुरंत विषनाशक दे. पीड़ित व्यक्ति के कपड़ों के साथ अधिक छेड़छाड़ ना करे.

यदि वह कुछ खा पी सकता हैं. तो उसे चाय, काफी, दूध खिलाएं तथा बेहोश व्यक्ति को होश में लाने के लिए स्मेलिंग साल्ट का उपयोग करे.

खून बहने से रोकने के लिए प्राथमिक उपचार (first aid to Stop Bleeding In Hindi)

शरीर के अंगों से खून निकलने के कई कारण होते हैं. कई बार गिरकर चोट लगने से भी खून बहने लगता हैं. गर्मियों में नाक से खून आने लगता हैं.

ब्लड प्रेशर बढ़ने से भी नाक से खून आने लगता हैं और कान से भी खून बहने लगता हैं. यदि चोट लगने पर खूब बहे तो उसे रोकने के लिए पट्टी कसकर बाँध दे.

इसके बाद घाव को डिटोल से साफ़ करके दवाई लगा दे. नाक से खून निकलने पर रोगी को सीधा लिटा दे और नाक को थोड़ी देर के लिए बंद कर दे. और फिर छोड़े.

ऐसी क्रिया चार पांच बार करें. रोगी के सिर पर ठंडा पानी डालें. कान से खून बहने पर रोगी के कान को रुई से साफ़ करके वहां पर ठंडे पानी की पट्टी रखे. इन तरीकों से खून बहना रूक जाएगा.

आग से जलने पर प्राथमिक उपचार (First aid on fire burns In Hindi)

कई बार दूध, गर्म पानी, चाय या गर्म तेल गिरने से त्वचा झुलस जाती है और लापरवाही से कपड़े भी आग पकड़ लेते हैं. ऐसी दशा में जल्दी से कंबल या मोटे कपड़े से व्यक्ति को ढक देना चाहिए.

यदि त्वचा में छाले नहीं पड़े है तो ठंडा पानी डाले. छाले निकलने पर उन्हें फोड़ना नहीं चाहिए और वहां बोरिक एसिड छिड़कना चाहिए. आलू को कच्चा पीसकर या टूथपेस्ट लगाने से भी जले हुए स्थान पर राहत मिलती हैं.

जहर फैलने पर प्राथमिक उपचार (First Aid for Bites and Stings In Hindi)

कई बार सांप, बिच्छू और जहरीले जानवरों के काटने से डॉक्टर के आने तक शरीर में जहर फैलने की आशंका रहती हैं. इसलिए इनके काटने पर रोगी को सोने न दे, उसको गर्म कॉफ़ी या चाय दे.

काटनेवाले स्थान से थोड़ा ऊपर एक कसकर कपड़ा बाँध दे. इन प्राथमिक उपचार से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती हैं.

स्तब्धता (Shock) का प्राथमिक उपचार (Electric Shock First Aid in hindi)

यदि व्यक्ति का किसी अंग से रक्त बह रहा है तो ऊपर बताए गये तरीके से उनका खून बहने से रोके. गर्दन, छाती और कमर के कपड़े ढीले करके उसको किसी कपड़े से हवा दे.

उसे सीना नीचे कर उलटे लिटा दे तथा अच्छी तरह कम्बल से ढककर किसी गर्म वस्तु से उसका सेक करे. यह वह बेहोश हो गया है तो उन्हें साल्ट सुंघाएँ तथा होश में है तो उसे गर्म चाय पिलाकर कृत्रिम सांस दे. यदि उसका बहता खून नहीं रूक रहा हो तो एक्सटर्मिटीज को एलिवेशन दे.

सांप काटने पर प्राथमिक चिकित्सा (snake bite first aid in hindi)

सांप कई प्रकार के होते है कुछ सांप के काटने पर व्यक्ति के थोड़े से प्राथमिक उपचार से ही उसको राहत महसूस होने लगती हैं. मगर कुछ विषैले सांप के काटने पर व्यक्ति को यथासंभव चिकित्सक के पास लिए चलना चाहिए.

अक्सर सांप के काटे गये स्थान पर दो निशाँ हो जाते हैं. बहुत से ऐसी श्रेणी के सांप भी होते है जिसके काटने पर व्यक्ति को दिमाग सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं.

जिस स्थान पर सर्पदंश हुआ है वह स्थान सुन्न हो जाता है तथा लाल रंग का हो जाता हैं. उस भाग में कुछ गर्मी तथा सूजन की स्थिति हो जाती हैं.

तथा व्यक्ति को देखने में भी परेशानी होने लगती हैं. कई बार बात करने में, सांस लेने में या बेहोशी की स्थिति में व्यक्ति चला जाता हैं.

सांप काटने पर व्यक्ति को आराम कराए तथा उन्हें मन में दिलासा दिलाए कि वह ठीक हो जाएगा. सर्प के घांव को अच्छी तरह धोए. उस पर बर्फ का टुकड़ा रख दे जिससे विष का प्रसार कम हो जाता हैं.

होश ना आने पर ABC की पद्धति को अपनाए. व्यक्ति को विशेष रूप से सोने न दे ऐसा होने पर वह बेहोश हो सकता हैं. हर संभव कोशिश करे कि जल्द से जल्द उसे चिकित्सकीय सहायता पहुचाई जा सके.

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