प्रथम विश्व युद्ध के कारण First World War Reason In Hindi

First World War Reason In Hindi प्रथम विश्व युद्ध के कारण: आज से तक़रीबन 104 वर्ष पूर्व एक ऐसा महायुद्ध लड़ा गया, जिसके परिणाम के स्वरूप विश्व के तीन महाद्वीपों के देशों के नक्शों तथा हालात पहले से पूरी तरह बदल गये. यह पहला विश्व युद्ध था. को 28 जुलाई 1914 से 1919 तक यानि चार साल और चार महीने तक धरती एवं आसमान और समुद्र में लड़ा गया था. युद्ध का परिणाम बड़ी तबाही, कुपोषण, आर्थिक हालात का जंजर स्वरूप के रूप में सामने आया. आज हम इस विश्व युद्ध के प्रमुख कारण के बारे में जानेगे.

प्रथम विश्व युद्ध के कारण First World War Reason In Hindi

प्रथम विश्व युद्ध के कारण First World War Reason In Hindi

First World War [1914-18] in Hindi First World War Kyu Hua: ग्लोबल वॉर या महायुद्ध की संज्ञा दिए जाने वाले पहले विश्व युद्ध को वॉर टू एंड आल वार्स भी कहा गया हैं.

अब तक विश्व के इतिहास में इतनी बड़ी लड़ाई कभी नहीं हुई थी. युद्ध के बाद आए आंकड़ों में सामने आई कि इस महायुद्ध में एक करोड़ 70 लाख लोग मौत के मुहं में चले गये जबकि 2 करोड़ से अधिक लोग घायल हो गये, मरने वाले तथा घायल होने वाले लोगों में सबसे बड़ी संख्या साधारण नागरिकों की थी.

किसके बिच लड़ा गया first world war in hindi

यह महायुद्ध केन्द्रीय शक्तियाँ व मित्र राष्ट्रों की संयुक्त सेनाओं के मध्य लड़ा गया था. जिसमें एक तरफ रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और जापान की सेनाए थी तो दूसरी तरफ ऑस्ट्रो- हंगेरियन, जर्मनी और टर्की थे.

यूरोप, एशिया व अफ़्रीका इन तीन महाद्वीपों के जल थल वायु क्षेत्र में लड़े गये युद्ध में शुरूआती जीत जर्मनी ने 1917 में हासिल की, वाकई में यह जीत नहीं जर्मनी की तबाही का कारण ही थी,

जिसने अमेरिका के जलपोतों को डुबो दिया था. जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका भी इस महायुद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो गया. उसी समय 1917 में रुसी क्रांति के चलते सोवियत रूस पीछे हट गया तथा अपना ध्यान आंतरिक स्थिति पर देने लगा.

तीन बड़े देशों ब्रिटेन , फ़्रांस और अमरीका ने आखिर 1918 के अंतिम दौर में जर्मनी को हरा दिया तथा आस्ट्रिया के साथ मिलकर उसने युद्ध विराम की संधि पर दस्तखत कर दिए.

प्रथम विश्व युद्ध के कारण (First World War Reason in hindi)

प्रथम विश्व युद्ध के लिए आठ मुख्य कारण जिम्मेदार थे, जिसके कारण यह महायुद्ध लड़ा गया था. एक एक कारण के बारें में यहाँ विस्तार से जानेगे.

राष्ट्रीयता की उग्र भावना– २० वीं सदी के शुरूआती दशकों में यूरोप के देशों में राष्ट्रीयता की भावना चरम पर थी. विभिन्न राज्यों में इस भावना ने बेहद उग्र रूप धारण कर लिया था.

सभी देश अपनी प्रगति तथा विस्तार पर ध्यान दे रहे थे. अपने हितों की पूर्ति के लिए वे किसी भी सीमा को पार करने के लिए तैयार थे, यही वजह थी कि राष्ट्रों के आपसी हितों में टकराव के कारण युद्धों की स्थिति तैयार कर दी. अपने देश को युद्ध जीताकार सभी देश अपनी सीमाओं की वृद्धि की महत्वकांक्षी थे.

बिस्मार्क की गुप्त नीतियाँ- इन्हें गुप्त नीतियों का जन्मदाता भी कहा जाता हैं. जर्मनी ने फ़्रांस पर हमला कर दो बड़े प्रदेशों को अपने साथ मिला लिया. फ़्रांस अपने प्रतिशोध की निरंतर योजनाएं तैयार कर रहा था.

वह किसी भी कीमत पर अपने खोये हुए प्रदेशों को प्राप्त करना चाहता था. दूसरी तरफ फ्रांस पर दवाब बढाने के लिए जर्मनी ने रूस, आस्ट्रिया और इटली के साथ संधि कर दी. मदद के लिए अब फ़्रांस को अमेरिका रूस एवं ब्रिटेन के पास जाने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं था.

कैसर विलियम की नीतियाँ– यह जर्मनी का महत्वकांक्षी शासक था, जो अमेरिका व रूस की तरह जर्मनी को अंतर्राष्ट्रीय शक्ति बनाने का इच्छुक था. वह अपने साम्राज्य के विकास के लिए अपना अधिकाँश व्यय सेना पर करता था.

उसने कई बड़े जलपोतों का निर्माण करवाया, ब्रिटेन ने सम्राट को ऐसे न करने का सुझाव भी दिया मगर वह किसी कि नही सुनता था. अतः ब्रिटेन को मजबूरी में अमेरिका और रूस की तरफ जाना पड़ा.

जर्मनी की पूर्वी नीति– जर्मनी किसी तरह अपने साम्राज्य को बड़ा करना चाहता था मगर पश्चिम यूरोप के अधिकतर देश एक दूसरे से मिल चुकी थे,

अतः उसने पूर्व को अपना रास्ता चुना तथा टर्की के साथ अपने सम्बन्ध मजबूत किये उसने आस्ट्रिया तथा के साथ भी अच्छे रिश्ते बनाएं इस कारण से विश्व में दो गुट तैयार हो गये जिसके आपसी विवादों के चलते प्रथम विश्व युद्ध का जन्म हो गया.

रूस फ़्रांस तथा इंग्लैंड की संधि– पहले  विश्व युद्ध का मूल कारण फ़्रांस और जर्मनी की आपसी कटुता थी. 1900 तक जर्मनी का शासक बिस्मार्क रूस का अच्छा दोस्त था.

मगर इस संधि के समापन के बाद विलियम द्वितीय ने रूस के साथ सम्बन्ध बनाने की बजाय आस्ट्रिया तथा टर्की को अहमियत दी, जिसका नतीजा यह हुआ कि रूस फ़्रांस के साथ चला गया तथा 1893 में उन्होंने एक संधि कर दी.

उधर भले ही फ्रांस और ब्रिटेन एक समय एक दुसरे के दुश्मन थे. मगर जर्मनी के प्रभुत्व के सामने दोनों एक हो गये तथा 1904 में फ्रांस और ब्रिटेन के मध्य एक समझौता हो गया,

इसके तीन साल बाद 1907 में तीनों राष्ट्र फ्रांस रूस तथा ब्रिटेन के मध्य एक साझा करार हो गया, जिसके परिणामस्वरूप यूरोप दो भागों में विभाजित हो गया.

अन्य कारण- 18 जून 1914 को आस्ट्रिया के उत्तराधिकारी आर्कड्यूक फ्रांसिस की हत्या प्रथम विश्व युद्ध का बड़ा कारण था. जिसका शक ब्रिटेन फ्रांस और रूस के संयुक्त मौर्चे पर गया.

इस वर्ल्ड वॉर का एक अन्य सबसे बड़ा कारण सैन्य शक्ति था. दोनों गुटों के देश अपनी अपनी सेना को आधुनिक हथियारों से लैस कर रहे थे.

हथियारों की इस होड़ ने विश्व शांति पर खतरा पैदा कर दिया आगे जाकर यह एक भयानक महासंग्राम में तब्दील हो गई जिन्हें हम प्रथम विश्व युद्ध कहते हैं.

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