गौ गिरिराज व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व | Gau Giriraj Vrat Katha Puja Vidhi

गौ गिरिराज व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व | Gau Giriraj Vrat Katha Puja Vidhi Giriraj Vrat 2022 सितम्बर माह में पड़ रहा हैं. इस दिन गौ गिरिराज व्रत रखा जाएगा. भादों शुक्ल त्रयोदशी को यह व्रत किया जाता हैं. इस दिन गौ (गाय) माता की पूजा के साथ साथ लक्ष्मी नारायण की पूजा किये जाने का भी विधान हैं. गौ गिरिराज व्रत रखने वाले स्त्री पुरुष को सवेरे जल्दी उठकर नित्य कर्मों से मुक्त होकर विष्णु जी की प्रतिमा को स्नान कर घर में स्वच्छ स्थान पर स्थापित करना चाहिए.

गौ गिरिराज व्रत कथा पूजन विधि महत्व Giriraj Vrat Katha Puja Vidhi

गौ गिरिराज व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व Gau Giriraj Vrat Katha Puja Vidhi

गौ गिरिराज व्रत के दिन सोलह श्रृंगार कर गौ माता की आरती उतारे तथा निम्न मंत्र के साथ उनका पूजन करने से प्राणिमात्र की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.

पंचगाव समुत्पन्ना: मथ्यमाने महोदधौ।

तेषां मध्ये तु या नन्दा तस्मै धेन्वे नमो नम:।।

इसका आशय यह हैं, कि समुद्र मंथन के समय पांच गायें उत्पन्न हुई थी, जिनमें से एक का नाम नंदा है इस नंदा गाय को हमारा बारम्बार नमस्कार. इस दिन नीचे दिया गया मंत्र बोलकर ब्राह्मण को दान में गाय दी जाती हैं.

गावो ममाग्रत: सन्तु गावो में सन्तु पृष्ठत:।

गावो में पार्श्वत: सन्तु गवां मध्ये वसाम्यहम।।

इस मंत्र का अर्थ यह है कि हे भगवान अगले जन्म में मुझे गायों के बिच ही जन्म देना. मेरे आगे गाय हो, पीछे गाय हो, अगल-बगल में गाय हो तथा मैं दिन रात गौ के बिच ही रमण करू.

गौ गिरिराज व्रत रखने वाले ब्राह्मण को गाय देकर आदर सम्मान के साथ उन्हें विदा करे एवं उनसें आशीर्वाद लेवें. जो प्राणी गौ गिरिराज का व्रत धारण करता हैं वह सैकड़ों अश्वमेध तथा राजसूय जैसे यज्ञ के समान फल पाता हैं.

श्री गिरिराज जी महाराज की आरती

ब्रजभूमि ब्रजांगना बृजवासी बृजराज
यह चारों के मुकुट है जय जय श्री गिरिराज।

Telegram Group Join Now

श्री कृष्ण चरण रज मस्तक धरि बैठो है गिरिराज
जो गिरिराज कृपा करे सफल करे सब काज।

कबीर कबीर क्या कहे, जा यमुना के तीर
एक एक गोपी प्रेम में, बह गये कोटि कबीर।

दीनन को हितकारी है भक्तन को रखवारो
सब देवन को देव कहावे सात कोस वारो।

एक रूप से पूजत है दूजो रहयो पूजाय
सहस्त्र भुजा फैलाय के माँग माँग के खाय।

वैष्णव से वैष्णव मिले, यह पूरब की पहचान
और लागे टांकी प्रेम की, तो निकले हीरा खान।

कोई तन दुःखी कोई मन दुःखी, कोई धन बिन रहे उदार
थोड़े थोड़े सब दुःखी, सुखी श्री गिरिराज को दास।

गौ गिरिराज व्रत/पूजन सामग्री 

  • तांबे का लोटा 
  • शुद्ध पानी 
  • गंगाजल 
  • दान देने हेतु अनाज या फिर दक्षिणा 
  • पीले रंग के कपड़े 
  • विष्णु जी की प्रतिमा या फिर मूर्ति अथवा फोटो 
  • हल्दी या फिर चंदन अथवा कुमकुम अथवा 
  • चावल के दाने 
  • प्रसाद के लिए मिठाई 
  • भोग के लिए मिठाई 
  • 6 से 7 केले के पत्ते 
  • चौकी 
  • चौकी पर बिछाने के लिए लाल अथवा पीला 
  • धूप, दीप, अगरबत्ती, माचिस
  • कपड़ा
  • लाल सिंदूर 

गौ गिरिराज व्रत/पूजन विधि

  1. बता दें कि जो भी महिलाएं गौ गिरिराज का व्रत रखना चाहती हैं उन्हें गुरुवार के दिन सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त के समय में उठ जाना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त अर्थात सुबह 3:30 बजे से लेकर के 5:30 बजे के बीच का समय। 
  2. ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद उन्हें सबसे पहले ताजे पानी से स्नान करना चाहिए और उसके बाद उन्हें साफ और स्वच्छ पीले रंग के कपड़े या फिर लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
  3. कपड़े पहनने के बाद उन्हें एक तांबे के पात्र में शुद्ध जल लेना चाहिए और उसके अंदर उन्हें चावल के थोड़े से दाने और कुमकुम डालना चाहिए। इसके बाद सबसे पहले उन्हें यह जल भगवान सूरज को अर्पित करना चाहिए। उसके बाद बार-बार यही क्रिया करते हुए उन्हें पीपल के पेड़ को भी जल चढ़ाना चाहिए और तुलसी के पेड़ को भी जल चढ़ाना चाहिए।
  4. जल चढ़ाने के बाद महिलाओं को केले के चार से पांच पत्ते लेने चाहिए और उसके जरिए उन्हें एक मंडप सजाना चाहिए और मंडप के अंदर उन्हें एक पीले कपड़े पर चौकी की स्थापना करनी चाहिए और उसके ऊपर भी उन्हें एक लंबा सा केले का पत्ता बिछा देना चाहिए।
  5. इसके बाद महिलाओं को भगवान लक्ष्मी नारायण यानी कि भगवान विष्णु जी की फोटो या फिर उनकी मूर्ति को उस चौकी के ऊपर रखना चाहिए और फिर उन्हें शुद्ध पानी से या फिर गंगाजल से स्नान करवाना चाहिए।
  6. पानी से या फिर गंगाजल से स्नान करवाने के बाद महिलाओं को पूरे विधि-विधान से भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा करनी चाहिए और उनकी पूजा करने के बाद किसी भी देशी गाय की पूजा भी महिलाओं को अवश्य करनी चाहिए।‌ इस पूजा के दरमियान उन्हें नीचे दिए गए मंत्रों का जाप भी करना चाहिए।

पंचगॉव समुत्‍पन्‍ना: मध्‍यमाने महोदधौ।

तेसा मध्‍ये तु यानन्‍द तस्‍मै धेन्‍वे नमो नम:।।

गावों मामग्रम: सन्‍तु गावों में सन्‍तुपृष्‍ठत:।

गावों में पार्श्‍वत: सन्‍तु गवॉं मध्‍ये वासभ्‍यहम।।

7. इतनी सब विधि कर लेने के बाद महिलाओं को जितना हो सके उतना यथाशक्ति के अनुसार भिखारी को या फिर ब्राह्मण को दान देना चाहिए और उनका आदर सत्कार करके उन्हें विदा करना चाहिए।

8. ब्राह्मण को विदा करने के बाद अथवा भिखारी को दान देने के बाद महिलाओं को फलाहार कर के अपने व्रत का समापन करना चाहिए।

इस प्रकार से गिरिराज की व्रत की विधि पूरी होती है और कुछ ही समय में महिलाओं को इस व्रत का मनचाहा फल प्राप्त होता है।

गौ गिरिराज व्रत के फायदे

खास तौर पर जो महिलाएं हैं उन्हें ही यह व्रत करने के लिए कहा गया है और अधिकतर महिलाएं ही इस व्रत को करती हैं। महिलाओं की अपनी-अपनी कामनाएं होती हैं जिनमें से कई महिलाएं यह चाहती हैं कि उन्हें संतान के तौर पर सुयोग्य संतान की प्राप्ति हो इसीलिए जो महिलाएं संतान प्राप्ति चाहती हैं वह यह व्रत कर सकती हैं।

इसके अलावा जो महिलाएं अपने पति की लंबी आयु चाहती हैं वह भी गौ गिरिराज व्रत रख सकती हैं। इसके अलावा अगर महिलाओं की किसी प्रकार की कामना है तो वह इस व्रत को कर सकती हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो महिलाओं के लिए ही यह व्रत किया गया है।

इसलिए महिलाएं अपने किसी भी प्रकार की मनोकामना की पूर्ति के लिए इस व्रत को रख सकती हैं। जो भी लड़की अथवा महिलाएं इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करती हैं, भगवान लक्ष्मी नारायण की कृपा से उनकी सभी मनोकामनाएं काफी कम टाइम में पूरी होती हैं और उन्हें दीर्घायु की प्राप्ति होती है तथा चारों तरफ से उनकी उन्नति होती है।

गौ गिरिराज व्रत के नियम 

  1. जो भी महिलाएं गौ गिरिराज का व्रत रखना चाहती हैं उन्हें व्रत के दिन के दरमियान झूठ बोलने से बचना चाहिए।
  2. इस दिन महिलाओं को किसी की भी चुगली नहीं करनी चाहिए।
  3. जहां तक हो सके महिलाओं को इस दिन मौन व्रत का पालन करना चाहिए अथवा उन्हें कम से कम बोलने का प्रयास करना चाहिए।
  4. इस व्रत का फायदा तभी मिलता है जब इसे पूरे विधि-विधान से किया जाए। इसीलिए व्रत चालू करने से पहले इस व्रत की विधि के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर ले।
  5. व्रत में जो भी सामग्री लगती है उसे पहले ही ला करके रख ले ताकि आपको बार-बार परेशान ना होना पड़े।
  6. व्रत समापन के टाइम पर महिलाओं को सिर्फ फलाहार करने की सलाह दी जाती है।
  7. व्रत समाप्त होने के बाद यथाशक्ति भिखारी को अथवा ब्राह्मण को दान देना चाहिए तभी व्रत संपूर्ण माना जाता है और व्रत का फल महिलाओं को मिलता है।

यह भी पढ़े

उम्मीद करते है फ्रेड्स गौ गिरिराज व्रत कथा पूजन विधि एवं महत्व | Gau Giriraj Vrat Katha Puja Vidhi का यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा, अगर इस लेख में दी जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें.

Leave a Comment