Gautama Maharishi Story In Hindi | गौतम महर्षि की कहानी इतिहास

Gautama Maharishi Story In Hindi | गौतम महर्षि की कहानी इतिहास : भारतीय ऋषि परम्परा में महर्षि गौतम का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता हैं ऋग्वेद में भी इनके बारे में उल्लेख मिलता हैं, वे वैदिक काल के एक महर्षि एवं मन्त्र द्रष्टा थे उनकी पत्नी का नाम अहिल्या था जिसके बारे में रामायण में भी उल्लेख आता हैं. गौतम जयंती 2019 के अवसर पर हम गौतम ऋषि एवं अहिल्या की कहानी आपकों बता रहे हैं.

Gautama Maharishi Story In Hindi | गौतम महर्षि की कहानी इतिहास

Gautama Maharishi Story In Hindi | गौतम महर्षि की कहानी इतिहास

gautam rishi and ahilya story in hindi: अहिल्या ऋषि गौतम के श्राप के चलते पत्थर बन गयी थी जिस पर भगवान श्रीराम के चरण लगते ही वह फिर से जीवित हो गयी थी. बताया जाता हैं कि ब्रह्माजी ने श्रेष्ट गुणों से अहिल्या को बनाया, उनके बाद अहिल्या की देखभाल  के लिए एक योग्य व्यक्ति की तलाश में थे. ऋषि गौतम सर्व ज्ञानी तथा बुद्दिमान भी थे अतः उन्होंने अहिल्या के युवा होने पर ऋषि के यहाँ भेज देगे.

जब अहिल्या बड़ी हुई तब ब्रह्माजी उन्हें महर्षि के आश्रम ले गये तथा इस बात का निर्णय किया कि वे उनकी शादी किसी साधु से ही करेगे मगर इस शर्त यह रखी कि जो कोई पृथ्वी का चक्कर लगाकर सबसे पहले आएगा, उसी का विवाह अहिल्या से होगा.

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सभी देव तथा ऋषि पृथ्वी के चक्कर लगाने के लिए चल पड़ते हैं उसी समय ऋषि गौतम की कामधेनु गाय बछड़े के जन्म दे रही थी, ऋषि उसकी मदद कर रहे थे. जब अहिल्या ने उनका त्याग व प्रेम देखा तो उन्ही से विवाह करने की इच्छा जताई. अब अहिल्या की इच्छा के मुताबिक़ ब्रह्माजी ने उनका विवाह गौतम ऋषि से सम्पन्न करवा दिया. सभी देवता और ऋषि इस विवाह से पूरी तरह इर्ष्या के भाव में थे.

अहिल्या गौतम के विवाह से सबसे अधिक दुखी इंद्र हुए, क्योंकि वे अहिल्या को जब से ब्रह्माजी ने बनाया वे उन्हें पाने के लिए पागल थे. उन्होंने अपनी वासना की तृप्ति के लिए एक योजना भी बनाई मगर वे इसमें नाकामयाब रहे थे. इंद्र ने अब एक नया जाल बुना तथा जब गौतम ऋषि अपने आश्रम में नहीं थे तो वह उनका भेष बनाकर आश्रम में गया.

उसने अहिल्या से प्रणय की प्रार्थना कि कुछ कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता हैं कि यह इंद्र का धोखा था जिसे अहिल्या समझ नहीं पाई वहीँ कुछ में बताया जाता हैं वह यह जानते हुए कि ऋषि के भेष में इंद्र हैं फिर से उसने उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने की स्वीकृति दी.

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यह सब कुछ होने के बाद जब इंद्र ऋषि की कुटिया से बाहर निकले तो गौतम ऋषि ने उन्हें देख लिया. वे सब कुछ समझ गये तथा क्रोध में उन्होंने अहिल्या को पत्थर बन जाने का श्राप कर दिया, लज्जा के मारे जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया और वह पत्थर बन गयी. ऋषि को कुछ समय बाद जब क्रोध शांत होता हैं तो वे अहिल्या को श्राप मुक्ति का उपाय देते हैं कि जब श्रीराम के कदम तुम्हे स्पर्श करेगे तब तुम श्राप मुक्त हो जाओगी.

एक बार गुरु विश्वामित्र भगवान् राम के साथ भ्रमण कर रहे थे तो जब उन्होंने गौतम ऋषि के सुने पड़े आश्रम के बारे में जाना तो विश्वामित्र ने उन्हें अहिल्या की पूरी कहानी बताई जिसे सुन भगवान् राम ने श्राप मुक्त किया. गौतम ऋषि के क्रोध का परिणाम इंद्र को भी भुगतना पड़ा, चूँकि उन्होंने अहिल्या के स्त्री धर्म को नष्ट किया अपनी वासना की पूर्ति के लिए पराई नारी पर नजर डाली ऋषि ने श्राप दिया कि तेरे शरीर पर हजार स्त्री यौनी उत्पन्न होगी. कुछ ही वक्त में इंद्र का शरीर स्त्री यौनी से भर गया तो वह गिदगिड़ाकर ऋषि से क्षमा याचना करने लगा इस पर ऋषि गौतम ने उन यौनियों को आँखों में बदल दिया.

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आशा करते हैं दोस्तों आपकों Gautama Maharishi Story In Hindi का यह लेख अच्छा लगा होगा, Gautama Jayanti 2019 की डेट ६ अप्रैल हैं इस पर्व की शुभकामनाएं देते हैं. कथा पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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