जयपुर पर्यटन स्थल सूची Important Places In Jaipur To See In Hindi

जयपुर पर्यटन स्थल सूची Important Places In Jaipur To See In Hindi: गुलामी शहर अर्थात पिंक सिटी के नाम से विख्यात जयपुर शहर राजस्थान की राजधानी हैं. भारत के प्रमुख महानगरों में गिने जाने वाले जयपुर शहर एक मेट्रो सिटी व आधुनिक तरीके से बसाया गया नगर हैं. places to visit in jaipur जयपुर के टॉप पर्यटन स्थल – 2021 में घूमने की जगहें में शहर के नजदीक तथा प्रसिद्ध स्थानों के बारे में यहाँ जानकारी साझा कर रहे हैं.

जयपुर पर्यटन स्थल सूची Important Places In Jaipur To See In Hindi

Important Places In Jaipur To See In Hindi जयपुर पर्यटन स्थल सूची

tourist places in jaipur points of interest jaipur tour In Hindi: आमेर राजपूताने का अहम राजनीतिक केंद्र रहा हैं, 18 नवम्बर 1726 को आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने जयपुर शहर की स्थापना की,

समस्त सुविधाओं से सम्पन्न व राज्य के केंद्र में स्थित होने के कारण राजस्थान के गठन के बाद इसे राजधानी  का दर्जा दिया गया था. आज jaipur tourist attractions का केंद्र हैं. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक़ राज्य में सर्वाधिक विदेशी यात्री यही आते हैं.

यहाँ के भव्य एवं प्राचीन महल बीते जमाने के राजशाही जीवन की तस्वीर आँखों के सामने ले आते हैं. जयपुर के भवन यहाँ की शानदार होटले यात्रियों को बार बार आकर राजस्थानी मेहमाननवाजी का आनन्द उठाने के लिए प्रेरित करती हैं.

What jaipur famous places में आकर्षक ढंग से बसा गुलाबी नगर अपनी अनूठी पहचान लिए हुए हैं. शहर के इतिहास के अनुसार वेल्स के प्रिंस 1876 में जयपुर की यात्रा पर आए थे.

उनके स्वागत में जयसिंह ने शहर के समस्त भवनों को गुलाबी रंग से पुतवा दिया था. भारत के योजनाबद्ध तरीके से बसे शहरों में जयपुर का पहला स्थान हैं. यहाँ आपकों Best places to visit in jaipur for couples के लिए इन्फोर्मेशन दे रहे हैं.

जयपुर के दर्शनीय स्थल की सूची List Of best places to visit in jaipur

जयपुर का पूर्व नाम जयनगर था. भारत के पेरिस, दूसरा वृंदावन व गुलाबी नगर के रूप में प्रसिद्ध जयपुर नरेश सवाई रामसिंह द्वितीय 1835-80 ने जयपुर की सभी इमारतों पर प्रिंस एडवर्ड के 1876 में जयपुर आगमन पर गुलाबी रंग करवाया,

तभी से जयपुर गुलाबी नगर कहलाने लगा. बिशप हैबर ने इस नगर के बारे में कहा था कि नगर का परकोटा मास्को के क्रेमलिन नगर के समान था.

जयपुर के दर्शनीय स्थल महत्वपूर्ण क्यों है (Why Jaipur’s Tourist Places are important In Hindi)

यदि आपके जेहन में यह सवाल आ रहा हो कि मुझे खाली समय में भ्रमण के लिए जयपुर ही क्यों जाना चाहिए तो आपके इस सवाल का जवाब देने का प्रयत्न करेंगे.

राजस्थान का राजधानी शहर जयपुर अपनी वास्तु एवं स्थापत्य कला की धरोहर के लिए विश्व भर में जाना जाता हैं. यही वजह है कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में विदेश पर्यटक जयपुर आते हैं.

अगर आप इतिहास से जुड़ी चीजों को देखने में रूचि रखते हैं आप महल, दुर्ग, आदि के भ्रमण के शौकीन है तो आप जयपुर जरुर आए, शहर की ये धरोहरें आपकों बीते युग में ले जाएगी.

उस दौर के राजा महाराजाओं की जीवन पद्धति को आप बेहद नजदीक से अनुभव कर सकते हैं. जयपुर में आप उन राजशाही महलों को होटलों के रूप तब्दील हुए न सिर्फ देख सकते है बल्कि वहां ठहर कर एक बेहतरीन अनुभव भी पा सकते हैं.

राजे रजवाड़ों एवं अपनी मेहमानवाजी के लिए विख्यात पुराने जयपुर को गुलाबी नगर कहा जाता हैं. संस्थापक सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा यहाँ कई स्थलों का निर्माण कराया गया था जो आज के मेट्रो सिटी जयपुर के प्रमुख टूरिस्ट प्लेस लिस्ट में शुमार हैं.

जयपुर देश का योजनाबद्ध रूप से व्यवस्थित पहला नगर हैं आप यहाँ की वास्तुकला एवं कारीगरों की कुशलता को देख कर तारीफ़ किये बगैर नहीं रह पाएगे.

जयपुर और आस पास के दर्शनीय स्थान लिस्ट Places To see in jaipur and around In Hindi

यदि हम जयपुर के दर्शनीय स्थल की सूची की बात करें तो शहर में इतने पर्यटन स्थल है जिन्हें आप एक दो दिन के दौरान आसानी से देख सकते हैं.

यहाँ के मुख्य स्थलों में सिटी पैलेस, हवा महल, आमेर का किला, जन्तर मन्तर, परकोटा, चिड़ियाघर, नाहरगढ़, जयगढ़, हाथी सफारी आदि मुख्य हैं. यहाँ आपकों एक एक स्थल के बारें में फोटो के साथ विस्तार से जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं.

जयपुर शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थल गलता जी (Important Places In Jaipur To See galta JI In Hindi)

गलताजी जयपुर स्थित अहम धार्मिक स्थल है जो शहर से 10 किमी की दूरी पर हैं. जहाँ मंदिर, मंडप और पवित्र कुंडो के साथ सुंदर प्राकृतिक नजारा पेश करता हैं.

गलता जी की पहाड़ी पर कृपा राम जी द्वारा बनाया गया सूर्य मन्दिर शहर में खड़े होकर स्पष्ट देखा जा सकता हैं. यहाँ स्थित 7 कुंडों में से गलता कुंद को सर्वाधिक पवित्र माना गया हैं इसमें कभी जल खत्म नहीं होता हैं.

जयपुर शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थल गलता जी

जयपुर के बनारस के नाम से प्रसिद्ध पवित्र कुंड यहाँ गालव ऋषि का आश्रम था. वर्तमान में मंकी वैली के नाम से प्रसिद्ध. गलत को उत्तर तोताद्री माना जाता हैं. संत कृष्णदास पयहारी ने यहाँ रामानंदी संप्रदाय की स्थापना की.

जयपुर शहर में देखने योग्य जगह स्थान हवामहल (jaipur me ghumne layak jagah Hawa Mahal In Hindi)

गुलाबी नगरी के प्रतीक के रूप में विख्यात हुए हवामहल का निर्माण वर्ष 1799 में सवाई प्रतापसिंह ने करवाया था. इसके वास्तुविद लालचंद उस्ता थे.

हवामहल पांच मंजिला पिरामिड आकार की खिड़कियों व ताखों से युक्त भवन हैं. इसकी पांच मंजिलों के नाम शरद मंदिर, रतन मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर हैं.

जयपुर शहर में देखने योग्य जगह स्थान हवामहल

50 फीट की उंचाई वाले हवामहल में 953 झरोखे अथवा खिड़कियाँ है जिनमें से कुछ एक लकड़ी की हैं. यदि आप जयपुर के दो पर्यटन स्थलों को कम से कम समय में देखना चाहते है तो आप हवामहल एवं सिटी पेलेस घुमने आ जाइए.

लगभग एक हजार झरोखों वाले इस महल में ताज़ी एवं ठंडी हवा का अनुभव शायद ही संसार में और कहि सुलभ हो.वर्ष 2005 में राजस्थान सरकार ने हवा महल के नवीनीकरण के लिए 45 हजार लाख रूपये का व्यय किया था. यही वजह है कि सैंकड़ों वर्ष पुरानी यह इमारत आज भी अपने पुराने स्वरूप में खड़ी हैं.

पिंक सिटी जयपुर ट्रिप विजिटिंग प्लेसेस लिस्ट जंतर मन्तर (jaipur ghumne layak jagah Jantar Mantar In hindi)

1734 में सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित यह उनकी पांच वेधशालाओं में से सबसे बड़ी हैं. अन्य वेधशालाएं दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी एवं मथुरा में हैं. यहाँ का रामयंत्र प्रसिद्ध हैं.

पुराने जमाने में यह एक खगोलीय वेधशाला हुआ करती थी जहाँ अंतरिक्ष अनुसन्धान एवं खोज के कार्य किये जाते थे.

पिंक सिटी जयपुर ट्रिप विजिटिंग प्लेसेस लिस्ट जंतर मन्तर

जयसिंह द्वारा निर्मित जयपुर का जन्तर मन्तर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर सूचि में लिस्टेड किया हैं. आज भी यहाँ उस दौर के निर्मित 14 यंत्र उपलब्ध है जिन्हें पर्यटक देख सकते हैं.

सवाई जयसिंह ने वेधशाला निर्माण से पूर्व कई देशों में अपने दूत भेजे तथा वहां से खगोल शास्त्र के ग्रंथ मंगवाए तथा उनके गहन अध्ययन के बाद जन्तर मन्तर में स्थित सभी यंत्रो का निर्माण करवाया. आपको जानकर ताज्जुब होगा आज भी जयपुर का कलैंडर इन्ही यंत्रों की मदद लेकर बनाया जाता हैं.

जयपुर का महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल अल्बर्ट हॉल म्यूजियम (jaipur famous places Albert Hall Museum in hindi

वर्ष 1876 में प्रिंस अल्बर्ट द्वारा शिलान्यास एवं सर स्विंटन जैकब द्वारा रूपांकित यह इमारत भारतीय व फारसी शैली का मिश्रण हैं.

यह सवाई रामसिंह द्वितीय द्वारा अकाल राहत कार्यों के तहत प्रारम्भ किया गया तथा महाराजा माधोसिंह के काल में 1887 में सर एडवर्ड ब्रेड फोर्ड ने उद्घाटन किया.

जयपुर का महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल अल्बर्ट हॉल म्यूजियम

शहर की बाहरी दीवार के नये द्वार के पास स्थित यह इमारत राजस्थान के सबसे प्राचीन संग्रहालय के रूप में अपनी पहचान रखती हैं.

स्थानीय शासक रामसिंह इसे टाउन हॉल बनाना चाहते थे मगर माधोसिंह द्वितीय ने इसे कला संरक्षण के लिए म्यूजियम बनाना उचित समझा.

जयपुर संग्रहालय को केन्द्रीय सरकारी संग्रहालय के नाम से भी जाना जाता हैं. यहाँ कई प्राचीन चित्र, दरिया, कीमती धातुएं एवं वस्तुएं देखने के लिए आज भी उपलब्ध हैं.

जयपुर का हाथी महोत्सव – Jaipur Elephant Festival In Hindi

यदि आप होली के अवसर पर जयपुर आ रहे है तो आप शहर में आयोजित हाथियों के उत्सव का आनन्द ले सकते है यह हाथी फेस्टिवल हर साल जयपुर में मनाया जाता हैं.

इस दिन हाथियों की विशेष सजावट की जाती हैं उनके सजावट के आभूषण एवं अनुशासन के दृश्य को देखकर सभी मोहित हो जाते हैं. इस साल 10 मार्च के दिन जयपुर में हाथी महोत्सव मनाया गया था.

जयपुर का हाथी महोत्सव

इसे देखने के लिए देश विदेश से बड़ी संख्या में आगन्तुक जयपुर आते हैं. हाथी महोत्सव का यह विशाल कार्यक्रम चौगान स्टेडियम में आयोजित होता हैं. होली के दिन कुछ फुर्सत के पल निकालकर शहरवासी इसमें भाग लेते हैं.

जयपुर में हर साल हाथियों के उत्सव का आयोजन होता है, जिसे एलिफेंट फेस्टीवल कहते हैं।

‘जयपुर एलिफेंट फेस्टिवल’ के नाम से प्रसिद्ध यह त्यौहार दर्शकों के लिए सबसे शानदार दृश्य होता है। फेस्टीवल में मादा हाथियों को गहनों की तरह सजाया जाता है और विभिन्न समारोहों में भाग लेने के लिए उन्हें दुल्हन की तरह तैयार किया जाता है, जिसमें परेड, हाथी पोलो और हाथी नृत्य शामिल हैं।

हाथियों के चलने के साथ उनके आभूषणों की झंकार, दृश्य को देखने के लिए तैयार किए जाने वाले अनुशासन के साथ मिलकर दृश्य को अद्भुत बनाती है।

यह शो जयपुर शहर में होता है, जहां भारत के साथ-साथ विदेशों से भी लोग इस खूबसूरत त्योहार के साक्षी बनते देखे जा सकते हैं। इस साल यह फेस्टीवल 21 मार्च को आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए प्रवेश नि:शुल्क है।

  • शाकंभरी माता का मन्दिर- सांभर में स्थित प्रसिद्ध मन्दिर हैं, शाकंभरी माता चौहानों की कुलदेवी हैं.
  • चील माता की डूंगरी चाकसू– यहाँ पर शीतला माता का मन्दिर हैं. शीतला माता का परम्परागत पुजारी कुम्हार होता हैं. यह मन्दिर जयपुर के महाराजा श्री माधोसिंह ने बनवाया था.
  • श्री गोविन्द देव मन्दिर– गौड़ीय सम्प्रदाय के इस मन्दिर का निर्माण वर्ष 1735 में सवाई जयसिंह द्वारा करवाया गया तथा यहाँ पर वृंदावन से लाइ गई गोविन्द देवजी की प्रतिमा प्रतिस्थापित की गई. यह सिटी पैलेस के पीछे बने जयनिवास बगीचे के मध्य स्थित हैं.
  • जगत शिरोमणि मंदिर आमेर– इस मन्दिर का निर्माण राजा मानसिंह प्रथम की रानी कनकावती ने अपने पुत्र जगतसिंह की याद में बनवाया था, जो असमय मृत्यु को प्राप्त हो गये थे.
  • आमेर की शिलामाता का मंदिर– आमेर के राजप्रसाद के जलेब चौक के दक्षिण पश्चिम कोने में शिलादेवी का दुग्ध धवल मंदिर हैं. शिलामाता कच्छवाहा राज परिवार की आराध्य देवी थी. इस मूर्ति को जयपुर के महाराजा मानसिंह प्रथम 1604 ई में बंगाल से लाए थे. वर्तमान मंदिर का निर्माण सवाई मानसिंह द्वितीय ने करवाया.
  • पद्मप्रभु मंदिर, पदमपुरा बाड़ा– जयपुर नगर से 35 किमी दूर ग्राम पदमपुरा में इस विशाल दिगम्बर जैन मंदिर की स्थापना वर्ष 1945 में की गई थी.
  • जमुवाय माता का मंदिर– जयपुर के निकट जमुवारामगढ़ में स्थित इस मन्दिर का निर्माण कछवाहा वंश के संस्थापक दुलहराय ने करवाया था. जमुवायमाता कछवाहों की कुल देवी हैं.
  • जलमहल– जयपुर आमेर मार्ग पर मानसागर झील में स्थल जल महल के निर्माण का श्रेय सवाई जयसिंह को दिया जाता हैं. सवाई जयसिंह ने जयपुर की जलापूर्ति हेतु गर्भावती नदी पर बाँध बनवा कर मानसागर तालाब बनवाया था.
  • सिटी पैलेस (चन्द्रमहल)– यह जयपुर राजपरिवार का निवास था. दीवाने आम में महाराजा का निजी पुस्तकालय तथा शस्त्रागार हैं. पूर्व के मुख्य द्वार को सिरह ड्योढ़ी कहते हैं. सात मंजिले इस महल का प्रथम तल सुखनिवास महल कहलाता हैं. चन्द्र महल का निर्माण सवाई जयसिंह द्वारा विद्याधर भट्टाचार्य के निर्देशन में करवाया गया था.
  • जल निवास उद्यान– चन्द्र महल के सामने स्थित उद्यान जिसे राजा जयसिंह ने बनवाया था. इस उद्यान के उत्तर में ताल कटोरा हैं. इस उद्यान के ठीक मध्य में गोविन्द देव जी का मन्दिर बना हुआ हैं.
  • सवाई मानसिंह संग्रहालय– इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1959 में पूर्व नरेश मानसिंह द्वितीय ने की थी.
  • महाकवि बिहारी का प्रासाद, आमेर– बिहारी, तुलसी के समकालीन कवि केशव के पुत्र थे. ये आमेर नरेश मिर्जा राजा जयसिंह के दरबारी कवि थे. उन्होंने आमेर में स्थित इसी प्रासाद में रहकर बिहारी सतसई की रचना की.
  • सामोद महल– यह ऐतिहासिक महल राजा बिहारीदास ने बनवाया था.
  • रामबाग– ऐतिहासिक शाही उद्यानों की श्रंखला में रामबाग सिरमौर हैं. वस्तुतः यह केसर बडारण का बाग़ कहा जाता हैं जो सन 1836 में बनवाया गया था.
  • मांजी का बाग– यह उद्यान महाराजा सवाई जयसिंह ने 1729 में अपनी सिसोदिया रानी के लिए बनवाया था.
  • विश्व वृक्ष उद्यान– जयपुर की दक्षिण पूर्व दिशा में झलाना डूंगरी पर्वतीय अंचल में इस उद्यान की स्थापना विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर 21 मार्च 1986 को की गई थी.
  • अशोक विहार– राजधानी जयपुर के ह्रदयस्थल शासन सचिवालय के पीछे इस उद्यान की स्थापना वन विभाग द्वारा वर्ष 1985 में की गई, इस उद्यान में मृग वन भी हैं.
  • गैटोर की छतरियाँ– जयपुर के शासकों का शाही श्मशान घाट केवल सवाई इश्वरी सिंह की छतरी यहाँ नहीं हैं. महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय से लेकर महाराजा माधोसिंह तक के राजाओं और उनके पुत्रादि की स्मृति में ये छतरियाँ पंचायतन शैली में बनी हैं.
  • कनक वृन्दावन मंदिर– जलमहल के निकट स्थित मंदिर जिसका निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया था.
  • इसरलाट- जयपुर में त्रिपोलिया गेट के निकट स्थित इस सात खंडों की इमारत को महाराजा ईश्वरी सिंह ने राजमहल युद्ध में विजयी होने पर 1749 में बनवाया.
  • इसरलाट– जयपुर में त्रिपोलिया गेट के निकट स्थित इस सात खंडों की इमारत को महाराजा ईश्वरी सिंह ने राजमहल टोंक युद्ध में विजयी होने पर 1749 में बनवाया.
  • विराटनगर– जयपुर अलवर मार्ग पर स्थित प्राचीन स्थल, जहाँ बौद्ध धर्म के अवशेष मिले हैं. कहा जाता हैं कि पांडवों ने यहाँ अज्ञातवास का एक वर्ष व्यतीत किया था. यहाँ भीम की डूंगरी स्थित हैं. यहाँ अशोक के शिलालेख मिले हैं. विराट नगर में अकबर द्वारा बनवाई गई टकसाल मुगल गार्डन एवं जहाँगीर द्वारा बनाए गये स्मारक हैं.
  • साल्ट म्यूजियम– सांभर झील के किनारे बना म्यूजियम
  • विज्ञान उद्यान– जयपुर में 12 दिसम्बर 1994 को स्थापित
  • मुबारक महल– जयपुर के राजप्रासाद परिसर में स्थित इस महल का निर्माण महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय ने करवाया था. रियासत के मेहमानों को ठहराने के लिए वर्ष 1900 में निर्मित महल में मुगल यूरोपीय और राजपूत स्थापत्य कला का अद्भुत समन्वय हैं.
  • मुगल गेट– यह जयपुर जिले के विराट नगर में स्थित हैं.
  • आनन्द पोल, हवामहल– गुलाबी नगर जयपुर की पहचान हवामहल में स्थित राजकीय संग्रहालय का आंतरिक प्रवेश द्वार आनन्द पोल हैं.
  • आमेर दुर्ग– राजा मानसिंह प्रथम द्वारा वर्ष 1592 में निर्मित यह दुर्ग हिन्दू मुस्लिम शैली का समन्वित रूप हैं. रंग बिरंगे कांच की भव्य कलाकृति शीशमहल, सुख मन्दिर, जगत शिरोमणि, मावठा जलाशय, दिलाराम का बाग, केसर क्यारी दर्शनीय स्थल हैं.
  • जयगढ़ दुर्ग- राजा मानसिंह प्रथम द्वारा 1600 ई में निर्मित इस दुर्ग का नाम मिर्जा राजा जयसिंह के नाम विजयसिंह को कैद में रखा था. यहाँ मध्यकालीन शस्त्रास्त्रों का विशाल संग्राहालय व तोप ढालने का कारखाना हैं. कछवाहा राजाओं का राजकोष भी यहाँ रखा जाता था. एशिया की सबसे बड़ी तोप जयबाण तो महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित करवाई गई थी, यहाँ हैं. सुमट निवास, खिलबति निवास व विलास मंदिर जयगढ़ के प्रमुख महल हैं.
  • नाहरगढ़ (सुदर्शनगढ़) – यहाँ महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा वर्ष 1734 ई में मराठों के विरुद्ध सुरक्षा की दृष्टि से निर्मित करवाया गया. जयपुर के मुकुट के समान इस किले में महाराजा माधोसिंह द्वारा अपनी 9 पासवानों हेतु बनाये गये एक जैसे 9 महल हैं.
  • चौमुंहागढ़ चौमू– ठाकुर कर्णसिंह द्वारा 1595-97 ई के मध्य निर्मित. इसे धाराधारगढ़ एवं रघुनाथगढ़ भी कहते हैं. माधोसिंह ने यहाँ हवा मंदिर नाम से अतिथि गृह का निर्माण कराया.
  • नारायणा जयपुर-नरायणा में गौरीशंकर तालाब के निकट भोजराज बाग में खंगरोत शासकों की भव्य छतरियाँ हैं.
  • पन्ना मीणा की बावड़ी- आमेर में स्थित इस बावड़ी का निर्माण 17 वीं शताब्दी में मिर्जा राजा जयसिंह के काल में करवाया गया.
  • माधोराजपुरा का किला-जयपुर के महाराजा माधवसिंह प्रथम ने मराठों पर विजय के उपरान्त निर्मित करवाया.  इस किले के साथ टोंक के नवाब अमीर खां की बेगमों को बंधक बनाने वाले लदाणा के भरतसिंह नरूका की वीरता की रोमांचक दास्ता जुडी हुई हैं. यह किला जयपुर की फागी तहसील में स्थित हैं.
  • अन्य स्थल– देवयानी कुंड साभर, भारमल की छतरियाँ जयपुर, महारानी की छतरी जयपुर

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