भारतीय सेना के वीरों की गौरव गाथा कहानी Indian Army In Hindi Story

भारतीय सेना के वीरों की गौरव गाथा कहानी Indian Army In Hindi Story Brave Soldier Life Love Story: हम जितने सुकून से अपने घरों में सोते हैं, जो मर्जी वो काम करते हैं कभी सोचा है यह आजादी किसके बदौलत है? कैसे हम यह बेबाक जिंदगी जी पा रहे हैं। जवाब है भारतीय सेना! जिसकी बदौलत हम इतनी आजादी से अपनी जिंदगी जी पाते हैं। भारतीय सेना  सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में दिन के 24 घंटे हमारी सुरक्षा के लिए दुश्मनी से बॉर्डर पर लड़ने के लिए तैयार रहती है। 

इंडियन आर्मी के वीरों की गौरव गाथा कहानी Indian Army In Hindi Story

भारतीय सेना के वीरों की गौरव गाथा कहानी Indian Army In Hindi Story

अगर देश की सीमा पर यह आर्मी ना हो तो देश में आए दिन दंगे फसाद और मौत का खूनी खेल खेला जाएगा। लेकिन जिस सेना ने हमें इतनी आज़ादी दी है। 

कभी सोचा है, इस आजादी को देने के लिए उन्हें क्या कीमत चुकानी पड़ती है? यदि नहीं, तो आज हम आपको अपनी कहानियों के माध्यम से बताना चाहेंगे। यह कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर लिखी गई हैं।

अपने परिवार की फिक्र के बिना, जान की बाजी लगाकर आईओंदुश्मनों की गोलियों का जवाब देने के लिए हमेशा रहता है, आज हम आपको उन्हीं वीरों की कहानी अपने शब्दों में सुनाने जा रहे हैं। ताकि देश का हर व्यक्ति इंडियन आर्मी के महत्व को जान पाए और सेना का दिल से सम्मान करें। 

इंडियन आर्मी की कहानी – 1

यूपी के एक छोटे से शहर में एक राकेश का नाम लड़का रहता था। राकेश का मन बचपन से ही देश सेवा करना था। इसलिए बड़े होकर राकेश ने फौज में दाखिला लिया और एक अच्छा सिपाही बन गया।

आर्मी जॉइन करने के कुछ समय बाद राकेश ने शादी कर ली थी। शादी के बाद सिर्फ 2 महीने वह अपने पत्नी के साथ रहा और उसके बाद उसे फिर से सीमा पर लड़ने के लिए बुला लिया गया था। 

राकेश के जाने के बाद उसकी पत्नी को भी काफी अकेलापन महसूस होता, लेकिन वह अपने पति की भावनाओं का और उनके फैंसलों का सम्मान करती थी। 

शादी को बीते 2 साल हो चुके थे, अब राकेश की पत्नी मां बनने वाली थी। लेकिन गर्भवती होने के बाद भी राकेश की पत्नी को यह सारा समय अकेला ही रहना पड़ा क्योंकि इस समय राकेश सीमा पर अपनी ड्यूटी में तैनात था।

वक्त बीतता गया और 9 महीनों बाद राकेश की पत्नी ने एक छोटी सी बच्ची को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद भी राकेश उस बच्ची को देखने के लिए नहीं आ पाया क्योंकि उसे एक के बाद एक अलग-अलग जगहों पर भेजा जा रहा था। 

“फौजी की जिंदगी ऐसे ही होती हैं! उनके पास ना तो परिवार के लिए समय होता है और ना ही परिवार की देखरेख के लिए लेकिन उनके अंदर जितना अपने देश के प्रति प्रेम होता है उतना ही प्रेम अपने परिवार के लिए भी होता है।“ 

राकेश की पत्नी ने अपनी छोटी सी बच्ची का नाम सोनी रखा था। जब सोनी 3 साल की हो गई तब राकेश घर वापस आए। इस समय पहली बार राकेश ने सोनी को देखा, अपने बच्चे को सामने देखकर उसकी आंखों से आंसू निकल आए थे। 

उन्होंने अपनी बच्ची को बहुत सारा प्यार किया और अपनी छुट्टियों का समय अपनी बच्ची के साथ खेलने बताया। कुछ समय तक राकेश अपनी पत्नी और बच्चे के साथ ही रहे। लेकिन जब भी उन्हें बुलाया जाता तो उन्हें जाना पड़ता था। 

देखते ही देखते कुछ साल ऐसे ही बीत गए अब सोनी 8 साल की हो चुकी थी। राकेश ज्यादा से ज्यादा समय बाहर ही रहते थे और सिर्फ त्योहारों में या बेहद महत्वपूर्ण कार्यों में अपने परिवार से मिलने आ पाते थे। 

सोनी का पूरा समय अपनी माता के साथ ही बीतता था। बचपन से ही पिता को अपने पास में देखकर वह अपने पिता को बहुत ज्यादा मिस करती थी। वहीं पिता भी अपनी  बच्ची को देखने के लिए अक्सर फ्री टाइम में वीडियो कॉल करते थे।

हर साल की तरह इस बार भी राकेश त्यौहार में घर आने वाला था 10 दिनों के बाद होली थी  सोनी बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि उसके पिता त्यौहार पर घर आने वाले थे और वह अपने साथ ढेर सारे खिलौने व चॉकलेट लाने वाले थे। 

अपने पिताजी के इंतजार में सोनी बार-बार अपनी माता से पूछती की मां पिताजी कब घर आएंगे।

 तो उसकी मां कहती कि बेटा होली के आने में अभी 10 दिन बाकी है, पापा आएंगे और ढेर सारी खिलौने तुम्हारे लिए लेकर आएंगे।

लेकिन बच्चे का मन कहां मानने वाला था सोनी ने अपनी मां से कहा कि पिताजी को फोन कीजिए उनसे कहिए कि जल्दी से घर वापस आ जाए। और मेरे लिए ढेर सारे रंग और चॉकलेट लाना बिल्कुल ना भूलें। 

काफी जिद करने के कारण सोनी की मां राकेश को फोन लगाती है और उनसे कहती है कि आपकी बेटी आपसे मिलने की जिद कर रही है तो जल्दी आने की कोशिश कीजिएगा। 

बेटी की नटखट बातों को सुनकर राकेश कहता है कि मुझे मेरी बेटी से मेरी बात करवाओ, बाप बेटी काफी देर तक एक दूसरे से बात करते हैं और फिर फोन रख देते हैं। 

अपनी बेटी की ख्वाहिश को पूरी करने के लिए राकेश कर्नल के पास 3 ‌ दिन बाद से होली तक छुट्टी लेने के लिए जाता है।

कर्नल से अनुमति पाने के बाद राकेश वापस अपनी ड्यूटी पर जाता है, पर अचानक उसके पास बमबारी होने लगती है। 

एक हम सीधा वहां जाकर गिरता है जहां राकेश खड़ा होता है जिसके कारण राकेश के शरीर पर भी बम के छींटे पड़ जाते हैं जिससे राकेश के हाथ और पैर पर काफी चोट लग जाती है।

बम का असर पूरे शरीर में फैलने से रोकने के लिए और राकेश की जान बचाने के लिए डॉक्टर्स को मौके पर ही राकेश का हाथ काटना पड़ता है।

अपने इन हालातों को देखकर राकेश को बहुत बुरा लगता है वह सोचता है कि अब वह सोनी के साथ होली कैसे मनाएगा?

राकेश को इस हालत में देखकर उसकी पत्नी और बच्ची दोनों ही डर जाएंगे जिसकी वजह से उन दोनों की होली भी खराब हो जाएगी। 

इन सब बुरे विचारों को सोचते सोचते अचानक राकेश ने आंखों में आंसू आ जाते हैं क्योंकि उसे अपनी बच्ची सोनी के लिए बहुत बुरा लगता हैं राकेश सोचता है कि वह अपनी छुट्टी कैंसिल कर ले और घर ना जाए। 

फौज में राकेश का एक प्यारा दोस्त होता है, दोस्त का नाम अनुज था। अनुज के साथ राकेश अपने मन की सारी बातें कहा करता था। राकेश की आंखों में आंसू देख कर अनुज से पूछता है कि क्या हुआ राकेश तुम्हारी आंख में आंसू ?

क्या हुआ?

तब राकेश अनुज से कहता है कि तुम तो मेरे हालत से वाकिफ ही हो, मुझे बताओ अब मै अपनी नन्ही बच्ची के पास ऐसी हालत में जाऊं तो जाऊं कैसे?

मेरी छोटी बच्ची मुझे इस हालत में देख कर रोने लगेगी। और मै नहीं चाहता उसकी होली खराब हो

 इसीलिए मैं सोच रहा हूं कि मैं अपनी छुट्टी कैंसिल कर लूं। 

राकेश के इन बातों को सुनकर अनुज उससे कहता है कि तुम्हें अपनी छुट्टी कैंसिल नहीं करनी चाहिए।

 क्योंकि तुम्हारा यह हाथ तुम्हारी हकीकत है और कभी ना कभी यह तुम्हारे परिवार को जरूर पता चलेगी इसीलिए तुम्हें छुट्टी लेकर घर जरूर जाना चाहिए। 

ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अगर तुम अपने परिवार को खुद के बारे में नहीं बताओगे? पर उन्हें यह बात किसी और से पता चलेगी तो उन्हें बहुत बुरा लगेगा। 

अनुज राकेश को यह भी कहता है कि राकेश घर जाने पर तुम्हारा परिवार तुम्हें इस हालत में देखकर रोएगा, परेशान होगा लेकिन तुम्हें संयम रखते हुए उन्हें हौसला देना है। 

अनुज की इन बातों को सुनकर राकेश घर जाने के लिए मान जाता है।

 राकेश अनुज को उसका हौसला बढ़ाने के लिए और इस मुश्किल घड़ी में उसका साथ देने के लिए उसे शुक्रिया कहकर उसी शाम को ट्रेन पकड़ कर अपने घर के लिए निकल जाता है।

 ट्रेन के पूरे सफर के दौरान उसके मन में बस यही बात चल रही होती है कि उसके परिवार वाले उसकि हालत को देखकर क्या प्रतिक्रिया देंगे यह सोच सोच कर राकेश को बहुत चिंता होती है?

लेकिन वह किसी तरह स्टेशन से अपने घर जाता है और घर जाकर घर के दरवाजे को खट खटाता है‌ और आवाज देते हुए कहते हैं कि सोनी मैं आ गया हूं? आकर दरवाजा खोलो। 

अपने पिता की आवाज को सुनते ही सोनी दौड़ते हुए दरवाजे के पास आती है और दरवाजा खोलती हैं। 

सोनी की मां भी उसके साथ ही आती हैं राकेश एक हाथ से अपना सूटकेस उठाए हुए होता है और अपने कटे हुए हाथ को अपने पीठ के पीछे छुपा लेता है। 

अपने पिता को अपने सामने देखकर सोनी बहुत खुश हो जाती है और खुशी से चिल्लाने लगती है।

पर जब वो देखती है, उसके पिताजी ने एक हाथ पीछे छुपा रखा है तो वह अपने पिता से कहती है कि पिता जी आपने पीछे क्या छुपा रखा है? 

बताओ, बताओ ?

सोनी को मानो ऐसा लगता है कि वह उसके लिए कोई सरप्राइस लेकर आए हैं जिसे सोचकर वह मन ही मन खुश होने लगती हैं।

 तब राकेश प्यार से कहते है बेटा बताता हूं, पहले अंदर चलो।

 लेकिन सोनी कहां किसी की सुनने वाली थी। उसने राकेश की बात नहीं मानी और जिद करने लगी। 

अपनी बेटी को इस तरह जिद करते हुए देख कर सोनी की मां ने भी राकेश से कहा कि अब दिखा दीजिए ना क्या छुपा कर रखे हैं आप इसके लिए! 

लेकिन राकेश अपने उदास मन से सोनी की मां से कहता है कि राधिका इसे अंदर ले कर चलो उसके बाद में बताता हूं कि क्या बात है। 

राकेश की बात को सुनकर सोनी की मां सोनीको समझाते हुए कहती है कि बेटा तुम्हारे पिताजी काफी लंबा सफर तय करके आए हैं इसके वजह से बहुत थक गए हैं।

 अपने पिता जो को अंदर आने दो और थोड़ा आराम करने दो उसके बाद तुम खुद देख लेना कि वह तुम्हारे लिए क्या लाए हैं। 

राकेश सोनी और उसकी मां तीनों ही घर के अंदर चले आते हैं घर के अंदर आने के बाद राकेश सोनी को कहता है कि बेटा आप थोड़ी देर के लिए अपने कमरे में जाओ मुझे आपकी मां से कुछ जरूरी बात करनी है।

अपने पिता की बात सुनकर सोनी एक अच्छे बच्चे की तरह अपने कमरे में चली जाती है। 

अब राकेश सोनी की मां से कहता है कि राधिका मैंने तुम्हें सोनी से अलग इसलिए बात करने के लिए बुलाया है ताकि तुम मेरी परेशानी को समझ सको। 

क्योंकि मेरी परेशानी को जानने के बाद अगर तुम ही परेशान होकर रोने लगोगे तो सोनी को कौन समझाएगा। 

राकेश की इन बातों को सुनकर सोनी की मां घबरा जाती है और पूछती है कि क्या हुआ? आप इतने परेशान क्यों है?

आप अपनी परेशानी मुझे बताइए अपनी पत्नी के इन बातों को सुनकर राकेश उससे कहता है कि देखो तुम रोना मत क्योंकि तुम्हें खुद को संभालना होगा, यह कहता हुआ वह अपना कटा हुआ हाथ उसे दिखाता है। 

अपने पति के इस हालत को देखकर राकेश की पत्नी की आंखों से आंसू गिरने लगते हैं वह बहुत रोने लगती है।

राकेश कहता है देखो अगर तुम ऐसे रोवोगी तो सोनी को कौन समझाएगा कौन उसे संभालेगा! फिर राकेश अपनी इस दुर्घटना की पूरी जानकारी अपनी पत्नी के साथ साझा करता है। कुछ देर बाद उसकी पत्नी शांत होती है और उसे अहसास होता है कि अब रोने से कुछ नहीं होगा।

राकेश अपनी पत्नी से कहता है कि हमें यह सोनी को यह बात प्यार से समझानी होगी कि यही अब हकीकत है। और हमें इस बात का दुख मनाएं बिना इसे स्वीकार करना होगा।  अपनी पत्नी को समझाने के बाद राकेश अपनी बेटी सोनी को अंदर बुलाता है।

राकेश सोनी को वह सारे गिफ्ट देते हैं जो वह उसके लिए लेकर आए थे। इसमें सोनी के पसंदीदा खिलौने भी थे। और वह उन खिलौनों से खेलने लगती है।

पर कुछ पल भर बाद सोनी को अपने पिता का कटा हुआ हाथ दिख जाता है। और जोर से पापा…. चिल्लाते हुए सोनी रोने लगती है,

यह देकर राकेश और सोनी की मां दोनों प्यार से उस बच्ची के सिर को सहलाते हुए उसे चुप कराते हैं। फिर सोनी की मां कहती है क्या हुआ बेटा, पापा तुम्हारे पसंद के खिलौना लाने भूल गया क्या?  सोनी रोते रोए कहती है पापा का हाथ!   राकेश मुस्कुराता है, तो ये बात है!  देखो, बेटा बॉर्डर में ऐसे हादसे होते रहते हैं। 

हम फौजी है, और हमारा जीना और मरना सभी भारत माता के लिए ही है हमें यह तक नहीं पता होता कि हम अगले पल कहां रहेंगे क्या हम अपने परिवार के पास जिंदा लौटेंगे या नहीं। 

हमें पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य को निभाना होता है। हमारे परिवार और तीज त्योहारों से ज्यादा जरूरी देश की सुरक्षा करना है और देश के ऊपर तो हम मर मिटने के लिए तैयार हैं। 

 तुम एक बहादुर लड़की हो। और तुम्हें परेशानियों को देखकर घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका सामना करना चाहिए।

अब जो बीत गया है उस पर ध्यान देकर हम आने वाले सुख को क्यों खराब करें? जीवन में सुख का आना जाना लगा रहता है पर इंसान को विपत्ति के समय घबराना बिल्कुल नहीं चाहिए।

राकेश के इन शब्दों को सुनकर सोनी चुप हो जाती है, और कहती है पापा मैं भी आपकी तरह देश की सेवा करूंगी और border पर जाऊंगी।

यह सुनकर राकेश कहते है बेटा मुझे गर्व है, की मै तुम्हारी जैसी बहादुर लड़की का पिता हूं।

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