धारा 315 आईपीसी क्या है | IPC Section 315 in Hindi

धारा 315 आईपीसी क्या है | IPC Section 315 in Hindi अगर आप आईपीसी धारा 315 के बारे मे जानना चाहते है की ये किस व्यक्ति पर कौन सा अपराध करने पर कब लगती है, इसमें सजा का क्या प्रावधान है? तथा यह जमानती अपराध है या गैर – जमानती अपराध है। और इस धारा के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को किस न्यायालय में पेश किया जाता है? साथ ही ये धारा 315 आईपीसी संज्ञेय अपराध है या गैर – संज्ञेय अपराध के अंतर्गत आती है? तो इन सभी बातों की जानकारी आज हम आपको Indian Penal Code (IPC) अर्थात भारतीय दण्ड संहिता की धारा 315 के बारे मे बताने वाले है।

धारा 315 आईपीसी क्या है | IPC Section 315 in Hindi

धारा 315 आईपीसी क्या है IPC Section 315 in Hindi

देश में शिशु यानी बच्चे के जन्म होने से पहले ही उसे कोई न मार दे या जन्म के बाद उसकी मॄत्यु न कर दे इसी अपराध को रोकने के लिए तथा ऐसा करने वाले व्यक्ति को कठोर से कठोर सजा देने का काम आईपीसी धारा 315 करती है। जिसके तहत अगर किसी व्यक्ति को इस धारा के तहत पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जाता है तो उसे जल्दी जमानत भी नहीं मिलती हैं।

क्योंकि आईपीसी 315 के तहत किया गया यह अपराध non-bailable offense के अंतर्गत आता है और इस मामले को Serious crime की श्रेणी मे रखा गया है।

आईपीसी धारा 315 क्या है | IPC 315 in hindi

इंडियन पीनल कोड की धारा 315 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे के जन्म होने से पहले कोई कार्य कर उस शिशु को जीवित पैदा होने से रोकता है। या उसके जन्म होने के बाद उसकी मॄत्यु करने के आशय से कोई अपराध करेगा।

जिससे उस शिशु की जन्म से पहले या जन्म के बाद उसकी मॄत्यु जानबूझ की जाएगी तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 315 के अंर्तगत करवाई की जाती है।

हालांकि अगर बच्चे के जन्म के दौरान अगर माता या बच्चे मे से किसी एक व्यक्ति को बचाने की परिस्तिथि मे यदि यह कार्य माता के जीवन को बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक किया गया हों तब उस व्यक्ति के खिलाफ किसी भी प्रकार की कारवाई नहीं होगी।

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 यानी की इस अपराध को भारतीय कानून के अंतर्गत सीरियस क्राइम के दायरे मे रखा गया है जिसके अंर्तगत दोषी व्यक्ति को लंबी अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है या आर्थिक दण्ड लगाया जा सकता है या फिर दोनों सजाओं से दण्डित किया जा सकता है।

आईपीसी धारा 315 के तहत सजा का क्या प्रावधान है?

अगर कोई व्यक्ति बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने का कार्य करता है या फिर उसके पैदा होने के बाद  मरने का कारण बनता है तो ऐसी परिस्थिति मे अगर उस पर लगाए गए आरोप सिद्ध हो जाते है तो उसे अधिकतम 10 साल तक का कारावास या जुर्माना तथा दोनों ही देना पड़ सकता है। 

इस धारा के तहत होने वाले गुनाह को समझौता करने योग्य कैटेगरी मे नही रखा गया है यानी की ये सीरियस क्राइम ऑफेंस है जिसे न्याधिश द्वारा बहुत ही गंभीरता से लिया जाता है।

आईपीसी धारा 315 के तहत जमानत कैसे मिलेगा?

आईपीसी धारा 315 के अंतर्गत किया हुआ अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी मे आता है अतः ये एक गैर-जमानती अपराध है यानी की अगर आप इस धारा के अतंर्गत पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाते हो और पुलिस के छानबीन के दौरान आपके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिलते है तो इस परिस्थिति में बेल मिलना लगभग असंभव हो जायेगा। क्युकी पहले से ये एक गैर-जमानती संज्ञेय अपराध है उपर से आपके खिलाफ सबूत भी है तो इसकी बहुत संभावना है की आपका bail सत्र न्यायालय द्वारा रिजेक्ट कर दिया जाए। 

अगर किसी को इस धारा के तहत गिरफ्तार किया गया है तो उसे अच्छे से अच्छा क्रिमिनल वकील ढूंढ कर उसे अपना case लड़ने के लिए देना चाहिए। क्योंकि अकसर कमजोर चार्जशीट, सबूत कम होने के अभाव मे या उस व्यक्ति के पहले कोई भी क्राइम न होने के कारण उसे बैल गैर-जमानती अपराध मे भी मिल सकता है लेकिन ये सारा कुछ सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होगा।

इंडियन पीनल कोड की धारा 315 किसी पर कोनसा अपराध करने पर लगती है?

ये धारा किसी व्यक्ति पर तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति किसी बच्चे का जन्म होने से जान बूझ कर रोकता है, आपने अक्सर सुना होगा की अगर किसी के यहां बेटी का जन्म हो रहा होता है तो वो बच्ची को मां की कोख मे ही गिरवा देते है।

 या उसे किसी तरह मार देते है इसके अलावा कई बार अगर किसी शिशु का जन्म हो जाता है फिर चाहें वो लड़का हो या लड़की, तो उसे मारने हेतु कई बार उसे किसी कूड़े अथवा किसी ऐसी जगह छोड़ देते है जहां उसकी मृत्यु हो जाए।

 ऐसे घटिया अपराध को रोकने के उद्देश्य से इस धारा के अंतर्गत कटोर दंड का प्रावधान किया गया है। ये धारा इन्ही परिस्तिथियो मे से किसी व्यक्ति पर लगाई जा सकती है।

आईपीसी धारा 315 के तहत कैसे बचा जा सकता है ?

अगर कोई व्यक्ति किसी शिशु के जन्म से पूर्व या बाद में उसे मारने के उद्देश्य से कार्य करता है और पुलिस को कोई इस बात की रिपोर्ट करता है तो आप पर ये धारा लगेगी और आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा जिसके बाद पुलिस द्वारा छानबीन की जाएगी और कोर्ट मे चार्ज शीट दायर की जायेगी। accused के खिलाफ आरोप को साबित करने का भार Prosecution पक्ष पर है।

वही इस धारा के तहत लगाए आरोप से बचने के लिए आपको या तो ये सिद्ध करना होगा की आपने शिशु को जीवित पैदा होने से इसलिए रोकने का कार्य किया ताकि माता के जीवन को बचाए जा सके।

 या फिर अगर अभियुक्त के विरुद्ध Prosecution आरोप को साबित करने मे असफल रह जाती है तो इस परिस्थिति मे आपको मात्र सन्देह के आधार पर दंडित नहीं किया जा सकता है।

 इसलिए यह धारा अगर किसी पर लगे तो सबसे पहले अच्छे वकील को ढूंढ कर उसे अपना case हैंडल करने को दे दे। क्युकी इस  धारा के अधीन अपराध बहुत ही संज्ञेय है तथा अजमानतीय और अशमनीय है । 

Frequently Asked Questions

1.आईपीसी की धारा 315 के तहत क्या अपराध है?

अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने के इरादे से कोई काम करता है या उसके पैदा होने के बाद उसके मरने का कारण बनता है। तो ऐसी परिस्थिति मे उसे पुलिस द्वारा आईपीसी. की धारा 315 के तहत गिरफ्तार करके उस पर मुकदमा चलाया जायेगा।

 2. आईपीसी धारा 315 के तहत सजा क्या है?

इस धारा के तहत अगर व्यक्ति पर लगा अपराध साबित हो जाता है तो उसे न्यायालय द्वारा 10 साल तक की सजा सुनाई जा सकती है या जुर्माना तथा दोनों का प्रावधान है।

3.आईपीसी की धारा 315 जमानती अपराध है या गैर – जमानती अपराध?

आईपीसी की धारा 315 के तहत किया गया कार्य एक  गैर – जमानती सीरियस अपराध है यानी कि एक्यूज़्ड को बेल मिला मुस्किल है।

4.आईपीसी की धारा 315 के मामले को किस न्यायालय में पेश किया जा सकता है?

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 315 के तहत कार्य किए गए अपराध की सुनवाई के लिए इस मामले को सत्र न्यायालय यानी sessions court में पेश किया जाता है।

5.सक्षम साक्षी क्या है?

सक्षम साक्षी यह कहती है की सुनेंरोकेंदं0प्र0सं0 संहिता की धारा-315 के राहत ये नियम प्रतिपादित करती है कि ऐसा  व्यक्ति जो किसी भी अपराध के लिए किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष accused है।

वो अपनी प्रतिरक्षा (कममिदबम) के लिए सक्षम साक्षी होता है। और वह किसी अन्य साक्षी की तरह  Prosecution द्वारा अपने विरुद्ध या उसी विचारण में लगाए गए allegations को झूठा साबित करने के लिए शपथ पर साक्ष्य देने का आधिकार रखता है।

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