धारा 375 आईपीसी क्या है | IPC Section 375 in Hindi

धारा 375 आईपीसी क्या है | IPC Section 375 in Hindi भारत में बलात्कार एक बहुत बड़ा अपराध है चाहे वो किसी भी धर्म, जाति के महिला का किया गया हों! इस अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता में काफी गंभीर सजा तय की गई है! यानी कि अगर कोई व्यक्ति किसी महिला का बलात्कार करता है तो आईपीसी धारा 375 के तहत उस व्यक्ति को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। 

धारा 375 आईपीसी क्या है | IPC Section 375 in Hindi

धारा 375 आईपीसी क्या है | IPC Section 375 in Hindi

अगर आपको नहीं पता कि बलात्कार करने पर भारतीय दंड संहिता में कौन सी सजा तय की गई है तो आप इस लेख को पढ़ सकते हैं क्योंकि इसमें हमने आपको बताया है कि IPC dhara 375 क्या है ? 

आईपीसी धारा 375 के अंतर्गत बलात्कार को परिभाषित किया गया है साथ ही इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि कौन-कौन सी गतिविधियों को बलात्कार की श्रेणी में गिना जाता है। इसलिए इस आर्टिकल में हम आपको महिलाओं पर होने वाले सबसे संगीन अपराध बलात्कार पर लगाए जाने वाले धारा 375 के बारे में बताएंगे। 

IPC की धारा 375 क्या है ? 

जैसा कि हमने आपको बताया कि आईपीसी धारा 375 बलत्कार पर लगाई जाने वाली धारा है, इस धारा में बलात्कार को कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है – 

  • अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के मुंह में, मूत्राशय में, योनि में या गुदा में अपने लिंग को बिना मर्जी के किसी भी हद तक डालता है तो यह बलात्कार की श्रेणी में आता है। 
  • इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के योनि में, मुंह में, मूत्राशय या फिर गुदा में लिंग के अलावा कोई और चीज डालता है तो वह भी बलात्कार ही माना जाएगा। 
  • किसी महिला के शरीर को तोड़ मरोड़ कर या उसे चोट पहुंचाकर जबरदस्ती उसके शरीर के निजी अंगों में लिंग डालता है तो वो भी बलात्कार में ही गिना जाएगा। 
  • इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के योनि, गुदा या फिर किसी भी निजी अंग में अपना मुंह डालता है या फिर किसी दूसरे व्यक्ति को उसके साथ ऐसा करने के लिए कहता है तो वह भी बलात्कार ही कहलाएगा। 

किसी महिला के साथ बलात्कार हुआ है यह बात तब प्रमाणित होगी जब नीचे बताए गए खंडों की पुष्टि की जाएगी। 

1. जब संभोग महिला के इच्छा के विरुद्ध किया गया हो ! 

Telegram Group Join Now

2. महिला की सहमति के बिना किया गया संभोग बलात्कार कहलाता हैं। ‌

3. महिला के किसी खास व्यक्ति को अपने गिरफ्त में लेकर अगर कोई व्यक्ति उसके साथ उसकी सहमति से संभोग करता है तो यह भी कानूनन अपराध है। 

4. अगर किसी महिला के पति की मृत्यु हो चुकी है और वह किसी व्यक्ति के साथ पूरी सहमति से उसके साथ सिर्फ यह सोचकर संभोग करती है कि वो उस व्यक्ति के साथ बाद में विवाह करेगी। लेकिन व्यक्ति ऐसा कुछ नहीं चाहता है बस वो महिला के साथ संभोग करना चाहता है तो यह भी बलात्कार ही माना जाएगा। 

5. अगर महिला नशे में है या फिर उसकी मानसिक स्थिति सही नहीं है तभी भी उसकी सहमति से किया गया संभोग बलात्कार के अंतर्गत गिना जाएगा। क्योंकि महिला की सहमति तब स्वीकार की जाएगी जब महिला अपने होश हवास में हो। 

6. अगर व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से कम और उसने महिला के साथ उसकी सहमति या फिर बिना उसकी सहमति के उसके साथ संभोग किया है तब भी इसे बलात्कार ही माना जाएगा। 

7. जब स्त्री अपनी सहमति संभोग के लिए सहमति देने में असमर्थ है फिर भी उसे सहमति मानकर संभोग करने पर वो बलात्कार ही कहलाता है।

आईपीसी धारा 375 का स्पष्टीकरण 

भारतीय दंड संहिता की धारा 375 को समझने के लिए इस स्पष्टीकरण को समझना बहुत जरूरी है – ऊपर के खंड तभी माने जाएंगे जब पुरुष महिला के योनि में लिंग डालेगा या फिर किसी भी तरीके से महिला की योनि को स्पर्श करेगा।

उपर्युक्त खंडों में सहमति शब्द का जो प्रयोग हुआ है उसका मतलब महिला की मजबूरी है जो वह यौन संबंध बनाते हुए पुरुष को इशारे, मौखिक या फिर गैरमौखिक तरीके से अपनी रजामंदी व्यक्त करती है। 

लेकिन इस सहमति में इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि अगर महिला फिर उसको अपनी योनि में प्रवेश करने से नहीं रोक रही है तो वो उसकी सहमति है क्योंकि हो सकता है कि महिला अपने होश हवास में ना हो या फिर उसने नसा किया हों। 

आईपीसी धारा 375 का अपवाद

आईपीसी धारा 375 में यह स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई पति अपनी पत्नी के साथ किसी भी तरह का यौन संबंध बनाता है या फिर मैथुन संभोग करता है तो यह बलात्कार नहीं माना जाएगा। अगर पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम है तो उसके साथ किसी भी तरीके से संभोग करने पर उस पर धारा 375 लगाई जाएगी। 

धारा 375 के तहत बलात्कार की परिभाषा 

अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध, उसे डरा धमका कर या फिर उसे की सभी नशीली चीज देकर उसकी सहमति के बिना उसके साथ किसी भी तरीके से संभोग करता है, या फिर संभोग करने की चेष्टा करता है या महिला के निजी अंगों को जबरदस्ती छूने का प्रयास करता है तो उसे बलात्कार माना जाएगा। 

इसके अलावा अगर किसी महिला की उम्र 16 वर्ष से कम है तो उसके सहमति या फिर असहमति से किया गया संभोग भी बलात्कार कहलाएगा। 

आईपीसी धारा 375 की पूरी जानकारी 

आईपीसी धारा 375 में पुरुष और महिला किस तरह से संभोग करेंगे या फिर किस तरह से यौन संबंध बनाएंगे इस चीज के बारे में बताया गया है। आसान शब्दों में कहें तो इस धारा के अंतर्गत बलात्कार की परिभाषा दी गई है इसके अलावा यह भी बताया गया है कि किस परिस्थिति में किए गए संभोग को बलत्कार माना जाएगा और किसे नहीं है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि धारा 375 में जहां बलात्कार की परिभाषा व्यक्त की गई है वहीं धारा 376 में बलात्कार के अंतर्गत दिए जाने वाली सजा का उल्लेख है। 

बलात्कार के लिए क्या सजा है या फिर आईपीसी धारा 376 क्या है ? 

जैसे कि मैंने आपको बताया कि बलात्कार करने पर धारा 376 के अंतर्गत दंड देने का प्रावधान है। मतलब अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ ऊपर बताए गए परिभाषा के अनुसार बलात्कार करता है तो पुलिस द्वारा छानबीन करने के बाद और घटनास्थल पर मौजूद गवाहों की गवाही लेने के बाद अगर व्यक्ति का जुर्म साबित हो जाता है। 

तो व्यक्ति को धारा 376 के अंतर्गत कम से कम 7 साल के लिए जेल गया फिर ज्यादा से ज्यादा 10 साल के लिए जेल की सजा दी जाती है। अगर किसी व्यक्ति ने गंभीर तरीके से किसी महिला का बलात्कार किया है तो ऐसे हालात में उस व्यक्ति को उम्र भर के लिए कारावास की सजा दी जाएगी। इतना ही नहीं जेल की सजा के साथ-साथ अपराधी के ऊपर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

मतलब आईपीसी धारा 376 के अंतर्गत जज के पास यह अधिकार है कि वो आरोपी को जेल में डालने के साथ साथ उसपर आर्थिक जुर्माना भी लगा सकते हैं। ये आर्थिक जुर्माना व्यक्ति के हसीयत को देखकर और अपराध की गंभीरता को देखकर तय की जाती हैं। 

किस तरह के संभोग पर धारा 375 नहीं लगाया जाएगा ? 

मुंबई हाई कोर्ट में आए एक केस को समझने के बाद हाई कोर्ट जज ने ये statement दिया है कि अगर कोई 18 वर्ष से अधिक और वाली पढ़ी-लिखी लड़की शादी से पहले रिलेशनशिप में अपने बॉयफ्रेंड के साथ अपनी सहमति से संभोग करती है।

 तो ब्रेकअप हो जाने के बाद या फिर दोनों के बीच रिश्ते खराब होने पर लड़की लड़के के ऊपर बलात्कार का आरोप नहीं लगा सकती है। 

इस बात को कहने के साथ-साथ जज ने यह भी कहा था कि हमारे भारतीय समाज में शादी से पहले यौन संबंध बनाना सही नहीं माना जाता है लेकिन यह जानने के बाद भी अगर लड़की अपने प्रेमी के साथ या किसी भी व्यक्ति के साथ प्रेम में डूब कर उसे यौन संबंध बनाने से नहीं रोकती हैं तो फिर उसके संभोग को बलात्कार नहीं माना जाएगा। 

धारा 375 में वकील रखना क्यों जरूरी है ? 

भारतीय दंड संहिता की धारा 375 और धारा 376 में बलात्कार के लिए आजीवन कारावास की सजा तय की गई है जिसे 10 सालों तक और बनाया जा सकता है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति के ऊपर बलात्कार का आरोप लगाया जाता है।

तो उस व्यक्ति का ऐसे रूप से निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि ऐसे मामलों में बहुत ही कम देखने को मिलता है कि पुरुष निर्दोष हो। इसीलिए बलात्कार के केस में फंसे लोगों को अपनी बात जज के सामने पेश करने के लिए क्रिमिनल लायर्स की जरूरत पड़ती है। 

FAQ 

प्रश्न: धारा 376 में क्या सजा है? 

उत्तर: धारा 376 में व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है जिसे 10 सालों के लिए बढ़ाया भी जा सकता है इसके अलावा उस पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 

प्रश्न: धारा 376 कब लगती है?

उत्तर: धारा 375 के अंतर्गत व्यक्त किए गए बलात्कार का दुष्कर्म करने पर धारा 376 लगती है। 

प्रश्न: धारा 376 में जमानत कैसे होती है? 

उत्तर: धारा 376 एक गैर जमानती धारा हैं। यह धारा जिस व्यक्ति पर लगाया जाता है उसे किसी भी हालत में जमानत नहीं मिल सकता है। 

प्रश्न: आईपीसी की धारा 375 के कितने खंड है? 

उत्तर: आईपीसी की धारा 375 में 7 खंड है।

यह भी पढ़े

Leave a Comment