इस्लाम क्या है इसका इतिहास कहानी Islam Kya Hai In Hindi

इस्लाम क्या है इसका इतिहास कहानी Islam Kya Hai In Hindi: भारत, बंगलादेश, इंडोनेशिया, साउदी अरब इत्यादि दुनिया के अनेक देशों में इस्लाम धर्म के अनुयाई रहते है, अतः कई बार गैर मुस्लिम इस्लाम धर्म के विषय पर जानकारी पाने हेतु इंटरनेट पर इस्लाम धर्म क्या है? सर्च करते है।

इस्लाम क्या है इसका इतिहास कहानी What Is Islam Kya Hai In Hindi

इस्लाम क्या है इसका इतिहास कहानी Islam Kya Hai In Hindi

आज के इस लेख के माध्यम से हमारा प्रयास उन सभी को इस्लाम धर्म की सभी महत्वपूर्ण जानकारियां आसान शब्दों में पहुंचाना है। जिससे उन्हें इस्लामिक धर्म से जुड़ी सभी जानकारियां पाने के लिए किसी अन्य लेख को ना पढ़ना पड़े तो आइए शुरुआत करते है।

इस्लाम क्या है? What Is Islam In Hindi

इस्लाम दुनिया के सबसे बड़े धर्मों में से एक माना जाता है। जिसका अर्थ है दुनिया में हर ५ में से एक व्यक्ति मुसलमान है दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा धर्म होने के बावजूद इस धर्म के प्रति ग़ैर मुसलमानों के साथ साथ मुसलामों में भी कई गलतफहमियां हैं।

ऐसा माना जाता है की इस्लाम की स्थापना हजरत मुहम्मद ने की थी लेकिन गहराई से बात करें तो इस्लाम की स्थापना हज़रत आदम ने की थी जिन्हें इस दुनिया का पहला इंसान और मुसलमानों के पहले नबी (Prophet) माना जाता है। और यही से धीरे धीरे इस्लाम का विस्तार हुआ।

इस्लाम धर्म में केवल अल्लाह को ईश्वर माना जाता है और केवल उसी की इबादत और उसके हुक्मों का पालन करने के लिए कहा जाता है।

अगर कोई मुसलमान अल्लाह के सिवा किसी और को ईश्वर मानता है तो उसे शिर्क (शरीक करना) कहा जाता है जिसकी इस्लाम में बहुत बड़ी सज़ा है।

इस्लाम शब्द का अर्थ Meaning Of Islam In Hindi

इस्लाम शब्द अरबी भाषा का शब्द है जो कि दो शब्दों सलाम और सिलम के मिलन से बना है। इसमें सलाम का अर्थ है शान्ति और सिलम का मतलब है एक अल्लाह (ईश्वर ) के सामने बिना किसी शर्त के नतमस्तक (झुक) जाना।

इस तरह इस्लाम का अर्थ हुआ बिना किस शर्तों के अल्लाह के आगे नतमस्तक हो जाना और उसके दिए हुक्मों का पालन करना।

इस प्रकार देखा जाए तो मुसलमान वो है जिसने अपने आप को अल्लाह को समर्पण कर दिया यानिकि इस्लाम धर्म के नियमों का पालन करने लगा। एक सच्चा मुसलमान उसे माना जाता है जो ये मानता हो की अल्लाह का कोई दूसरा साथी या ईश्वर नहीं है और हज़रत मोहम्मद साहब अल्लाह के आखरी नबी हैं।

नमाज़ क्या है?

नमाज़ अल्लाह की इबादत करने का एक ज़रिया है। इस्लाम में इसे इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक का दर्जा दिया गया है। मुसलमान पर दिन के 5 वक्त की नमाज़ फ़र्ज़ की गयी है। नमाज़ परहेज़गारी सिखाती है और ये अल्लाह से मांगने का एक ज़रिया है।

नमाज़ को सलाह या सलात भी कहा जाता है। इस्लाम में औरतों और मर्दों दोनों पर नमाज़ फ़र्ज़ है। कुरआन शरीफ में भी इसका बार बार ज़िक्र किया गया है। औरतें अपने घर में और मर्द मस्जिद में नमाज़ अदा करते हैं हालांकि कुछ स्थितयों में मर्द नमाज़ घर पर या जहां पर हैं वहां से अदा कर सकते हैं।

नमाज़ पढ़ने के कुछ उसूल होते हैं जिसके बिना नमाज़ नहीं हो सकती। नमाज़ के लिए हम जिस जगह नमाज़ पढ़ रहे हैं वो स्वच्छ होनी चाहिए, शरीर का स्वच्छ होना चाहिए और वुज़ू भी किया होना चाहिए। इसके साथ साथ व्यक्ति की नमाज़ के लिए नीयत भी साफ होनी चाहिए।

कुरान शरीफ क्या है?

कुरान शरीफ इस्लाम धर्म का सर्वोच्च ग्रंथ है। इसे दुनिया में सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली किताबों में गिना जाता है। इस किताब में इस्लाम के अनुसार ज़िंदगी के जीने के तरीकों और अल्लाह के द्वारा बताये गए निर्देशों के पालन करने के तरीकों के बारे में बताया गया है।

इससे पहले भी इस्लाम धर्म में कई ग्रंथ आ चुके हैं लेकिन कुरान शरीफ को सबसे अंतिम और सर्वोच्च माना जाता है। इसे पूरा होने में लगभग 23 साल का समय लगा था। कुरान शरीफ में 30 पारे (पाठ), 114 सूरतें (अध्याय) और 6666 आयतें (श्लोक) हैं।

काफी सारे मुसलमान इसे अरबी में पढ़कर रख देते हैं लेकिन इसे हम किसी भी भाषा में पढ़ सकते हैं ताकि हम इसमें लिखी गयी बातों को अच्छे से समझ सकें और उनपर अमल कर सकें। इसे पहली बार हज़रत मोहम्मद को हीरा नाम की गुफा में सुनाया गया था।

शिया और सुन्नी कौन हैं?

मुख्य रूप में इस्लाम धर्म दो समुदायों में बंटा हुआ है जिसमें शिया और सुन्नी शामिल हैं। असल में हज़रत मोहम्मद के इस दुनिया से जाते ही मुसलमानों में विवाद पैदा हो गया जिसके कारण मुसलमान दो भागों में बंट गए। शिया और सुन्नियों के बीच में ये नफरत तब से लेकर अब तक चली आ रही है।

जब हज़रत मोहम्मद इस दुनिया से गए तो कुछ लोगों को लगा अब उत्तराधिकारी हज़रत मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद अली को होना चाहिए वहीं दूसरी तरफ लोगों का मानना था कि उनका नेतृत्व अबू बकर को करना चाहिए।

ज़्यादा लोग उस समय अबू बकर के पक्ष में थे इसलिए अबू बकर को खलीफा बनाया गया। माना जाता है बाद में कर्बला की जंग में हज़रत इमाम की दोस्तों और परिवार के साथ हत्या कर दी गयी जिसके दुख में शिया लोग मोहर्रम के दिन मातम मनाते हैं।

सुन्नियों की संख्या 90 से 95 प्रतिशत है और शिया केवल 5 से 10 प्रतिशत ही हैं लेकिन फिर भी अज़रबैजान, ईरान और इराक जैसे देशों में शिया समुदाय की बहुमत है।

हालांकि दोनों समूहों की अधिकांश रीति रिवाज़ और आस्थाएं एक जैसी ही हैं।

हज़रत मोहम्मद कौन थे?

हज़रत मोहम्मद को इस्लाम धर्म का संस्थापक माना जाता है। हज़रत मोहम्मद इस्लाम धर्म के आखिरी नबी (संदेश वाहक) थे जो पहले के नबियों की शिक्षाओं को प्रस्तुत करने और पुष्टि करने आये थे।

हज़रत का जन्म 570 ईसवी में सऊदी अरब शहर में हुआ था। आपके पिता का नाम अब्दुल मुत्तलिब और माता का नाम आमिना बिन्त वहब था।

मोहम्मद शब्द का अर्थ है जिसकी अत्यंत तारीफ की गयी जो। आपके जन्म से पहले ही आपके पिता का निधन हो गया था और कुछ सालों बाद ही आपकी माता का भी निधन हो गया। अनाथ होने के बाद आपकी परवरिश आपके चाचा के द्वारा की गयी।

लगभग 9 सालों की उम्र से ही वह व्यपारक यात्राओं पर जाया करते थे। उनके सादगी से भरे इस जीवन ने लोगों को बहुत बड़ा संदेश दिया था। लगभग 40 वर्ष की उम्र में आपकी पहली शादी खदीजा के साथ हुई। लगभग 62 साल की उम्र में सऊदी अरब के ही मदीना शहर में आपका निधन हो गया।

रोज़ा क्या है?

इस्लाम धर्म में हर साल हिजरी कैलेंडर के अनुसार रमज़ान का महीना आता है जिसमें सभी मुसलमान रोज़ा रखते हैं। चाँद को देखकर रमज़ान का महीना तय होता है। इसमें सूर्योदय के समय से लेकर सूर्यास्त के समय तक कुछ भी खाया पिया नहीं जाता।

कुछ न खाने पीने के अलावा बुरा न बोलना, देखना, सुनना और बुरे कामों से बचना शामिल हैं। हालांकि रमज़ान के अलावा भी बुरे कामों से बचना चाहिए। इस महीने लोग खूब अल्लाह की इबादत करते हैं इसलिए इसे इबादत का महीना भी कहा जाता है। रमज़ान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है।

रमज़ान के 29 या 30 वे दिन चाँद दिखता है जिसके अगले दिन ईद का त्यौहार मनाया जाता है। इसे ईद-उल-फ़ित्र भी कहा जाता है। इस दिन लोग ईद की नमाज़ पढ़ते हैं और खुशियां मनाते हैं। इस दिन को सेवैयां बनाकर खाने और खिलाने का रिवाज़ भी है।

हज क्या है?

हिजरी कैलेंडर के बाहरवें महीने में हज का समय आता है। हज हर सक्षम मुसलमान को करना चाहिए। हज की परंपरा हज़रत इब्राहीम के समय से चली रही है।

हज पर जाना अक्सर हर मुसलमान का सपना होता है और इसे इस्लाम धर्म में बेहद स्वाब का काम माना जाता है। हर साल लाखों लोग हज के लिए आवेदन करते हैं लेकिन कुछ लोगों को ही हज करने का मौका मिलता है।

हज का समय इस्लामिक कैलेंडर की 8 से 12 तारीख के दौरान किया जाता है जिसमें काबा (जिसकी तरफ रुख करके सारे मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं ) के इर्द गिर्द विशेष इबादत की जाती है। इसमें और भी काम शामिल हैं जैसे शैतान के प्रतीक को पत्थर मारना आदि।

उमरा की परंपरा भी इसी तरह ही है। उमरा और हज में बस इतना अंतर है कि हज समय आने पर किया जाता है लेकिन उमरा हम साल के किसी भी समय कर सकते हैं।
ज़कात क्या है?

ज़कात आमदनी में से कुछ हिस्सा ज़रूरतमंदों को दान में देना है। इसे पांच स्तंभों में से एक माना गया है। इसमें हमारी आमदनी में से जो भी बचत हुई है उसका 2.5 फीसद हिस्सा किसी ज़रूरतमंद को देना है।

अल्लाह ने इसपर भी पैमाने और हक तय किये हैं जिसमें सबसे पहला हक फकीर का आता है। ये वह व्यक्ति होता है जिसकी आमदनी कम होती है लेकिन खर्चा ज़्यादा। जैसे की अगर किसी की आमदन ₹10,000 रूपये है लेकिन खर्च उसका हर महीने ₹20,000 रूपये आता है तो उसे हम ज़कात दे सकते हैं।

इस्लाम के 5 स्तंभ कोनसे हैं?

इस्लाम धर्म में हर सच्चे मुसलमान पर फ़र्ज़ कुछ बुनियादी कार्य हैं जिन्हें 5 भागों में बांटा गया है जो कि ये हैं:-

  1. शहादत: केवल एक अल्लाह को मानना और ये मानना कि हज़रत मोहम्मद साहब अल्लाह के आखरी नबी हैं।
  2.  नमाज़: दिन में 5 बार नमाज़ पढ़ना।
  3. रोज़ा: रमज़ान के महीने में सारे रोज़े रखना और रोज़े के दौरान कुछ ना खाना पीना।
  4. ज़कात: अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा ज़रूरतमंदों को दान में देना।
  5. हज: अगर मुमकिन हो सकते तो जीवन मे एक बार हज अवश्य करना।

बता दें की शहादत, नमाज़ और रोज़ा हर व्यक्ति को करनी चाहिए मगर जो सक्षम नहीं हैं उनके लिए हज्ज और ज़कात पर छूट होती है।

अन्तिम शब्द

तो साथियों हमें पूर्ण आशा है इस्लाम धर्म क्या है? और यह धर्म हमें क्या सिखाता है? पूर्ण जानकारी आपको मिल चुकी होगी। अगर आपके लिए इस लेख में दी गई जानकारी उपयोगी साबित हुई है तो इसे शेयर करके अन्य लोगों तक यह जानकारी जरूर पहुंचाएं।

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