जिग्नेश मेवानी का जीवन परिचय Jignesh Mevani Biography in Hindi

जिग्नेश मेवानी का जीवन परिचय Jignesh Mevani Biography in Hindi: जिग्नेश मेवानी जो एक भारतीय राजनीतिज्ञ है। वे गुजरात विधानसभा में वडगाम निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा के एक सदस्य है। जिग्नेश मेवानी पहले एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। साल 2016 में जिग्नेश मेवानी ने गुजरात में हुए जातीय वर्गीकरण में निम्न जातियों के रूप में माने जाने वाले दलितों के हितों का नेतृत्व किया था। उनके इस प्रयास से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली, राजनीति में दलितों के लिए नई रोशनी बनकर उभरे मेवानी आज भारतीय राजनीति का एक बड़ा चेहरा बन चुके है।

जिग्नेश मेवानी का जीवन परिचय Jignesh Mevani Biography in Hindi

जिग्नेश मेवानी का जीवन परिचय Jignesh Mevani Biography in Hindi
नामजिग्नेश नटवरलाल मेवानी
जन्म11 दिसंबर 1982
जन्म स्थानअहमदाबाद, गुजरात, भारत
धर्महिंदू
जातिअति पिछड़ा वर्ग
माताचंद्राबेन
पितानटवर लाल शंकर लाल मेवाड़ा
भाई बहनदर्शन (छोटा भाई)
राष्ट्रीयताभारतीय
पेशासामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता, राजनीतिज्ञ
राजनीतिक पार्टीकांग्रेस (पूर्व में निर्दलीय)

जिग्नेश मेवानी का जन्म 11 दिसंबर 1982 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। हालांकि उनका परिवार फैजाबाद जिले के मिऊ गांव का मूल निवासी है। जिग्नेश मेवानी के पिता का नाम नटवरलाल शंकरलाल मेवानी था। वही माता का नाम चंद्रबेन तथा भाई का नाम दर्शन था।

मेवानी की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा स्वास्तिक विद्यालय अहमदाबाद से और बाद की शिक्षा माध्यमिक शाला विश्वविद्यालय से पूर्ण हुई।  उन्होंने साल 2003 में HK आर्ट्स कॉलेज अहमदाबाद से ही अंग्रेजी साहित्य स्नातक कला की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद साल 2004 में इन्होंने पत्रकारिता के साथ साथ जनसंचार में भी डिप्लोमा किया। इसके पश्चात साल 2004 से 2007 तक उन्होंने अभियान नामक एक पत्रिका में जो गुजराती भाषा में थीं। उसमें एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया। इन सबके बाद साल 2013 में इन्होंने अहमदाबाद के बीपी लो कॉलेज से कानून में स्नातक तक की पढाई कंप्लीट किया। 

जिग्नेश मेवानी ने कानून के साथ-साथ मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई भी की है। और वह एक पत्रकार भी रह चुके है। जिग्नेश ने मुंबई के एक अखबार में रिपोर्टर के तौर पर नौकरी भी की है। पेशे से एक वकील जिग्नेश को साहित्य में काफी रूचि थी।

अहमदाबाद के जिस मेघानी नगर क्षेत्र में जिग्नेश रहते थे, वह क्षेत्र दलितों का प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता था। दलित समाज की जो भी समस्याएं होती थी, उसे पूरा करने की प्रयाप्त ऊर्जा जिग्नेश मेवानी के पास थी। 

जिग्नेश मेवानी हिंदी और गुजराती के साथ-साथ फ्लूएंस इंग्लिश भी बोल लेते हैं। जिग्नेश मेवानी ने दिल्ली में जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) में छात्रों के संघर्ष में भी अपनी उपस्थिति दिखाई थी।

मुकुल सिन्हा जो कि एक हुमन राइट्स एक्टिविस्ट हैं उनके “जन संघर्ष मंच” से भी जिग्नेश मेवानी जुड़े हुए थें। जन संघर्ष मंच से जुड़कर जिग्नेश ने दंगा पीड़ितों और मजदूर यूनियन के लिए लड़ाई लड़ी थी। बाद में वह आम आदमी पार्टी के एक प्रवक्ता भी बने थे।

जिग्नेश मेवानी के चर्चा में आने की खास वजह

सबसे पहले जिग्नेश उस समय चर्चा में आए थे जब ऊना में गौ रक्षा के नाम लेकर दलितों को पीट दिया गया था। और उस हिंसा के बाद जब विरोध आंदोलन हुआ था उसकी अगुआई जिग्नेश मेवानी ने ही की थी।

इस बार गौ संरक्षण समूह के सदस्यों ने यह दावा किया था कि पूरे राज्य भर में विरोध प्रदर्शन हुआ है। और जिग्नेश मेवानी ने इस पर दलितों की अस्मिता यात्रा निकाली जो 15 अगस्त 2016 तक जारी रही और इसमें दलित महिलाएं और पुरुषों की संख्या लगभग 20000 तक थीं। 

इस यात्रा में दलितों ने गौ के शव हटाने की अपने पारंपरिक नौकरी से मुंह मोड़ लेने की प्रतिज्ञा कर लिया था। इस अस्मिता यात्रा के सहारे जिग्नेश मेवानी ने दलितों के सम्मान के लिए और उत्थान के लिए सरकार से जमीन की मांग की थी।

और वह सभी दलितों की नजर में एक लाडला और समाज सेवक नेता के तौर पर उभर कर सामने आये। और उनका नाम देश में एक चर्चित युवा नेता के तौर पर सामने आया।

इसके बाद वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव आया, जिग्नेश मेवानी एक चुनावी रैली में थें। इस दौरान जिग्नेश मेवानी ने कुछ ऐसा कह दिया जो धर्म से संबंधित था और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

दरअसल चुनावी रैली में अपने भाषण के दौरान जिग्नेश मेवानी ने भीड़ जुटी जनता से जैसे ही  “अल्लाह हु अकबर”  के नारा लगाने को कहा। वहां मौजूद भीड़ ने जिग्नेश मेवानी को जवाब देते हुए मोदी मोदी के नारे लगाना शुरु कर दिया।

इसके बाद साल 2017 में 20 दिसंबर को जिग्नेश मेवानी ने एक विवादित बयान दिया था जिसके बाद से वह फिर चर्चा के पात्र बने। दरअसल अपने बयान में जिग्नेश ने कहा था कि “नरेंद्र मोदी जी को अब राजनीति से रिटायर हो जाना चाहिए और हिमालय की ओर चला जाना चाहिए।” 

राजनीति में

दरअसल विवादों के जरिए खुद को चर्चा में लाने के बाद जिग्नेश ने वर्ष 2017 में ही खुद को विधानसभा चुनाव में अजमाना चाहा। और इसके बाद वह बडगाम निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा सीट पर चुनाव लडे, इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी के समर्थन में रहने की घोषणा कर दी 

इसके बाद 2017 में 18 दिसंबर को जब परिणाम आया तो बडगाम निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा सीट पर जिग्नेश मेवानी ने जीत हासिल कर लिया था। और अब वह एक विधायक के रुप में विधानसभा की सदस्यता प्राप्त कर चुके थे। 

एक राजनीतिज्ञ के तौर पर जिग्नेश दलितों के हित के लिए “आजादी कुछ आंदोलन”  चला चूके हैं। दरअसल जब ऊना में गोरक्षा के लेकर दलितों की पिटाई हुई थी, तो उसके विरोध में जिग्नेश मेवानी ने करीब 20000 दलितों को लेकर यह शपथ दिलाई थी कि आज के बाद कोई भी दलित मरे हुए जानवर नहीं उठाएगा और मैला नही ढोएगा।

जिग्नेश ने सभी दलितों से यह कहा था, कि वह अपने लिए सरकार से कोई दूसरे कार्य की बात करें। इसके बाद जिग्नेश मेवानी “दलित अस्मिता यात्रा” को भी जन्म दे चूके हैं। हालांकि इन सभी कार्यों के लिए घूमने हेतु जिग्नेश के पास दूसरे नेताओं की तरह कोई कार या बड़ी गाड़ी नहीं थी।

लेकिन उनके पास दलितों का सपोर्ट और मेहनत करने की लगन और ऐसी ऊर्जा थी, कि वह दलितों को उनके अधिकार एवम उन्हें  समाज में  सम्मान और न्याय दिला सके।

जिग्नेश की शादी और बच्चे।

जिग्नेश मेवानी की शादी हुई है या नहीं हुई है इस बारे में पर्याप्त जानकारी हमारे पास उपलब्ध नहीं है। हालांकि हमें जैसे ही इस बारे में ज्ञात होगा हम आपको अपडेट कर देंगे।

जिग्नेश मेवानी की नेटवर्थ।

2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में अपनी रैली के दौरान जिग्नेश मेवानी ने अपने नेटवर्थ का जिक्र करते हुए बताया था कि उनकी कुल संपत्ति लगभग 10 लाख तक की है। फिलहाल एक विधायक के तौर पर जिग्नेश ने अपनी मासिक आय के बारे में बताया कि उनकी मासिक आय 47 हजार है जिसमें अन्य भत्ता शामिल है। 

मेवानी से जुड़ी हुई कुछ रोचक और अनसुनी जानकारियां।

  • जिग्नेश का जन्म मेहसाणा जिला के मेऊ गांव में एक दलित परिवार में हुआ था।
  • उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा अहमदाबाद के ही स्वास्तिक विद्यालय से पूर्ण हुई थी।
  • पढ़ाई पूरी करने के बाद जिग्नेश मेवानी ने एक अखबार रिपोर्टर के तौर पर नौकरी भी की है।
  • जिग्नेश पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अधिवक्ता बने और इसके साथ ही एक सामाजिक कार्यकर्ता भी बन गए 
  • इसी दौरान सौराष्ट्र जिले के ऊना में गौ हत्या के आरोप में जब दलितों की पिटाई हुई थी तो उस समय जिग्नेश मेवानी दलितों का सहारा बने।
  • गुजरात में दलितों के लिए सहारा के तौर पर जिग्नेश मेवानी ने एक समिति की गठन किया है जिसका नाम “ऊना दलित लड़त अत्याचार समिति” हैं।
  • साल 2016 में जिग्नेश ने दलितों के लिए एक सभा आयोजित की जिसमें करीब 20,000 से अधिक दलित शामिल हुए थे। और सभी ने यह प्रतिज्ञा ली थी कि आज के बाद कोई भी दलित मवेशियों के शव और नाला नाली साफ नहीं करेगा।
  • साल 2017 के विधानसभा चुनाव में ही जिग्नेश ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की।
  • अपने चुनावी कैरियर की शुरुआत में ही मेवानी ने यह घोषणा कर दी थी  कि वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी को समर्थन करेंगे।
  • इसके बाद चुनाव जीतकर विधानसभा की सदस्यता लेने के बाद जिग्नेश मेवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी।
  • दरअसल चुनाव जीतने के बाद जिग्नेश मेवानी ने नरेंद्र मोदी को अपनी टिप्पणी में एक पुराना व्यक्ति बताते हुए उनको राजनीति से रिटायर हो जाने की और हिमालय की ओर निकल जाने की सलाह दे डाली थी।
  • जिग्नेश राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक भी हैं।
  • मेवानी दलितों के अति प्रिय नेता है और उन्हें दलितों का पूरा समर्थन मिलता है।

निष्कर्ष

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