जीवित्पुत्रिका जितिया व्रत 2022 कथा, डेट मुहूर्त पूजा विधि और महत्व | jivitputrika vrat katha Puja Vidhi Mahatva in hindi

जीवित्पुत्रिका जितिया व्रत 2022 कथा, डेट मुहूर्त पूजा विधि और महत्व | jivitputrika vrat katha Puja Vidhi Mahatva in hindi जीवित्पुत्रिका व्रत को हिंदी में जिउतिया तथा नेपाली भाषा में जितिया भी कहा जाता हैं. जीवित्पुत्रिका व्रत उत्तर भारत में किया जाने वाला मुख्य व्रत हैं. जिसे बच्चें की माँ द्वारा अपने पुत्रों की सुख सम्रद्धि तथा दीर्घायु के लिए आश्विन कृष्ण सप्तमी से नवमी तिथि तक तीन दिन निर्जला उपवास रखा जाता हैं. पुत्र कल्याण के लिए किया जाने वाला यह व्रत हर साल सितम्बर माह में किया जाता हैं. जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व महाभारत काल से चला आ रहा हैं. जिसके पीछे कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं.

जीवित्पुत्रिका जितिया व्रत 2022 कथा, डेट मुहूर्त पूजा विधि और महत्व

जीवित्पुत्रिका जितिया व्रत 2022 कथा, डेट मुहूर्त पूजा विधि और महत्व | jivitputrika vrat katha Puja Vidhi Mahatva in hindi

यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता हैं. इस दिन सूर्य नारायण की पूजा की जानी चाहिए. व्रत रखने वाला स्वयं स्नान करके भगवान सूर्यनारायण की मूर्ति को स्नान करावें और भोग लगावे तथा आचमन कराकर धूप, दीप आदि से पूजा करे. भोग को प्रसाद के रूप में बाँट देवे.

इस दिन बाजरा और चने से बने हुए पदार्थ भोग में लगाएं तथा काटे हुए फल व शाक आदि नही खाए न ही काटे जाने चाहिए. इस व्रत को करने से जिनके पुत्र होते है परन्तु जीवित न रहते हो, जीवित रहने लगते हैं. साथ ही मृतवत्सा (बच्चों का मरण) दोष दूर हो जाता हैं.

jivitputrika vrat katha (जीवित्पुत्रिका व्रत या जुतिया व्रत कथा)

एक समय की बात है भगवान श्रीकृष्ण द्वारकापुरी में निवास करते थे. उसी समय एक ब्राह्मण भी द्वारिका नगरी में रहा करता था. उसके सात बेटे जन्म लेते ही मर चुके थे. इस हालात से ब्राह्मण बहुत परेशान था. एक दिन वह ब्राह्मण भगवान कृष्ण के पास जाकर बोला.

हे भगवान, आपके राज्य में आपकी कृपा से मेरे सात पुत्र हुए, मगर एक भी पुत्र जीवित नही रहा इसका क्या कारण हैं. यदि आप अपने राज्य में दुखी नही देखना चाहते है तो कोई उपाय बताइए.

तब भगवान बोले सुनों ब्राह्मण- इस बार तुम्हारे जो पुत्र होगा, उसकी उम्रः तीन वर्ष हैं. उसकी उम्रः बढ़ाने के लिए तुम भगवान सूर्यनारायण की पूजा होने वाले जीवित्पुत्रिका व्रत को धारण करो. इससे तुम्हारे पुत्र की आयु बढ़ेगी. ब्राह्मण ने वैसा ही किया. जब वह सपरिवार हाथ जोड़कर खड़ा होकर इस प्रकार विनती कर रहा था.

सूर्यदेव विनती सुनों पाऊ दुःख अपार
उम्रः बढाओं पुत्र की कहता बारम्बार

इतना सुनते ही सूर्य का रथ वहां रुक गया. ब्राह्मण की विनती से प्रसन्न होकर सूर्य ने अपने गले से एक माला ब्राह्मण पुत्र के गले में डाल दी और आगे चले गये. थोड़ी देर में यमराज उस ब्राह्मण पुत्र का प्राण लेने आया. यमराज को देखकर ब्राह्मण और ब्राह्मणी भगवान कृष्ण को झूठा तथा कपटी इत्यादि कहने लगे.

भगवान कृष्ण अपना अनादर जानकर तुरंत सुदर्शन चक्र लेकर आ गये और बोले- इस माला को यमराज के ऊपर डाल दो. इतना सुनते ही ब्राह्मण उस माला को उठाने लगा कि यमराज डरकर भाग गया परन्तु यमराज की छाया वहां पड़ी रही. उस फूल की माला को छाया के ऊपर फेक दी, जिसके परिणामस्वरूप वह छाया शनि के रूप में आकर भगवान कृष्ण से प्रार्थना करने लगी.

भगवान कृष्ण को शनि के ऊपर दया आ गई और पीपल के वृक्ष पर रहने के लिए कहा. तब से शनि की छाया पीपल के वृक्ष पर निवास करने लगी. इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने उस ब्राह्मण के लड़के की उम्रः बढ़ा दी. इसीलिए हे भगवान जिस तरह उस ब्राह्मण के लड़के की उम्रः बढ़ाई है उसी तरह सबकी उम्रः बढ़ाना.

जीवित्पुत्रिका व्रत 2022 कब हैं तिथि मुहूर्त व समय ? (Jivitputrika Jitiya Vrat 2022 Dates and Muhurat)

आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन पुत्र की माँ द्वारा यह व्रत रखकर जीमूतवाहन की पूजा की जाती हैं. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अष्टमी तिथि के दिन जो महिला इस व्रत को रखकर पूजा पाठ, कथा वाचन तथा दान दक्षिणा देती हैं, उनकें पुत्र तथा पौत्रों का जीवन मंगलमय रहता हैं. इस व्रत का पारण नवमी तिथि लगने तक रहता हैं.

इस वर्ष जिउतिया व्रत 18 सितंबर 2022 को मनाया जायेगा.

अष्टमी तिथि की शुरुवात 17 सितंबर 2022 दोपहर 02:14 बजे
अष्टमी तिथि की खत्म 18 सितंबर 2022 अपराह्न 04:32 बजे

जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत करने का तरीका (jutiya & jitiya fasting jivitputrika vrat)

यह जितिया व्रत तीन दिन तक रखा जाता है, मगर इसका मुख्य दिन अष्टमी ही माना गया हैं

जितिया व्रत प्रथम दिवस – इसकी शुरुआत सप्तमी तिथि को होती है इस दिन एक पहर का भोजन कर उपवास रखा जाता है. पहले दिन के इस व्रत रखने वाली महिला को सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यादी कर्मों से निवृत होने के बाद पाठ पूजा करनी चाहिए तथा इसके बाद ही व्रत की शुरुआत करनी चाहिए. यह दिन नहाई खाई के नाम से जाना जाता हैं.

जीवित्पुत्रिका व्रत दूसरा दिवस– जीवित्पुत्रिका व्रत का दूसरा दिन अष्टमी तिथि को होता हैं. इस दिन निर्जला उपवास रखा जाता हैं, जिसके दौरान भोजन व जल के बिना ही व्रत किया जाता हैं इस दिन को खुर जितिया या जिउतिया भी कहा जाता हैं.

जितिया व्रत अंतिम दिवस नवमी तिथि जितिया व्रत का आखिरी दिन होता है इस दिन दोनों दिन का व्रत रखने के पश्चात पारण किया जाता हैं. इस दिन सभी तरह के भोज्य पदार्थ खाए जा सकते है मगर पहले भोजन में मडुआ या मरुआ की रोटी अवश्य खानी चाहिए.

जीवित्पुत्रिका व्रत महत्व  (Jivitputrika Vrat Mahatva & Significance)

जीवित्पुत्रिका व्रत आसोज माह की अष्टमी के दिन किया जाता हैं. इस व्रत को माताएं अपनी सन्तान की लम्बी आयु तथा सुखी जीवन के लिए पूजा करती हैं जिउतिया व्रत जीमूतवाहन माता की पूजा तथा कथा का श्रवण किया जाता हैं.

जिउतिया व्रत के नियम

  • इस व्रत को तीन दिन तक रखा जाता हैं तथा सप्तमी तिथि से उपवास की शुरुआत हो जाती है उपवास रखने वाली माताएं सूर्य के उदय से पूर्व ही खाती पीती है दिन के उदय के पश्चात खाना तथा पानी नही लिया जाता हैं.
  • व्रत रखने से पूर्व भोज्य सामग्री में मिष्ठान सामग्री होनी चाहिए, तीखे भोज्य पदार्थों का सेवन नही किया जाता हैं.
  • जीवित्पुत्रिका व्रत पूरी तरह निर्जला होता हैं अष्टमी के पारण के पश्चात ही खाया पीया जाना चाहिए.

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