कामिनी राय की जीवनी | Kamini Roy Biography In Hindi

कामिनी राय की जीवनी Kamini Roy Biography In Hindi bengali: 12 अक्टूबर 1864 को बंगाल की भूमि पर एक बंगाली भाषा की कवयित्री, सामाजिक कार्यकर्ता एवं महिला सेवक का जन्म हुआ था. आज राय का जन्मदिन हैं इस अवसर पर गूगल डूडल के रूप में सम्मान दिया गया हैं. इनके जीवन परिचय, इतिहास कहानी योगदान को जानते हैं.

Kamini Roy Biography In Hindi

Kamini Roy Biography In Hindi

Poet Kamini Roy Poems, Kobita, Books Biography In Hindi: गणित विषय में पढ़ाई करने वाली कामिनी राय ब्रिटिश भारत की पहली स्नातक महिला थी. गणित विषय से रुझान रखने वाली राय ने बंगाली की कविताएँ कम उम्रः में ही लिखना शुरू कर दिया था. आजीवन महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली कामिनी की आज 155 वीं जन्म जयंती मनाई जा रही हैं.

बंगाली कवि, शिक्षाविद, और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद की जाने वाली राय का जन्म 12 अक्टूबर 1864 के दिन बंगाल के बासदा जिले में हुआ था. भारत विभाजन के बाद यह पूर्वी पाकिस्तान वर्तमान में बांग्लादेश में स्थित हैं. हिन्दू परिवार में जन्मी कामिनी का संबंद्ध समृद्ध परिवार से था. इनके एक भाई कलकत्ता के मेयर थी जबकि उनकी एक बहिन नेपाल के राज परिवार में नर्स थी.

बालपन में ही इन्हें कविताएँ लिखने का शौक लग गया. वर्ष 1886 में बेथ्यून महाविद्यालय से इन्होने संस्कृत विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की. वह ऐसा करने वाली ब्रिटिश भारत की प्रथम महिला बनी. इसी महाविद्यालय की एक जूनियर छात्रा अबला बोस से इनकी मुलाक़ात हुई, जो समाज सेवा के कार्य में रत थी. दोनों ने मिलकर नारी अधिकारों विधवाओं की स्थिति सुधारने तथा बालिका शिक्षा के लिए काम करने की प्रतिज्ञा की.

महिलाओं को वोट देने की पक्षधर

आजादी संग्राम के बीच पली बढ़ी कामिनी रॉय खासकर महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंतित रहा करती थी. पति केदार नाथ के देहावसान के बाद इन्होने कविता लेखन शुरू किया. इनकी कविताओं का केंद्र भारत की महिला थी. अपनी कविताओं के द्वारा महिला जागृति का अभियान चलाया. इन्होने बंग महिला समिति से सदस्यता ली और महिलाओं को वोट का अधिकार दिलाने की पैरवी की.

वह अपने इस प्रयास में अन्तः कामयाब भी हुई जब वर्ष 1926 में बंगाल सरकार ने महिलाओं को मताधिकार दे दिया. वर्ष 1933 में कामिनी रॉय का देहांत हो गया.

रचनाएं

परतंत्र भारत में कॉलेज शिक्षा तक जाने वाली पहली महिला कामिनी रॉय की नारी संवेदना उनकी रचनाओं की मुख्य विशेषता हैं. इनके पिताजी चंडी चरण सेन न्यायाधीश और एक लेखक, ब्रह्म समाज के सदस्य थे. उनके कवयित्री बनने के सफर में सेन का बड़ा योगदान था. रॉय को अपने घर में ही पढ़ने के लिए बहुत सी पुस्तकें मिल जाया करती थी. घर में एक बड़ा पुस्तकालय सा था.

गणित पढ़ने वाली कामिनी को कविता रचना में रूचि जगी. वह एक अच्छी निबंधकार एवं गुंजन रचनाकार भी थी. बच्चों के लिए इन्होने बालिका शिखर आदर्श की रचना की. इनकी मुख्य कविताएँ महश्वेता, पुंडरीक, पौराणिकी, दीप ओ धूप, जीबन पाथेय, निर्माल्या, माल्या ओ निर्माल्या और अशोक संगीत हैं.

लेखन और नारीवाद

कामिनी रॉय सरल एवं स्पष्ट भाषा में लेखनी लिखती थी. इन्होने 1889 में छन्दों का पहला संग्रह आलो छैया और कुछ वक्त बाद दो और किताबों का प्रकाशन भी करवाया. वैवाहिक जीवन में प्रवेश के बाद कुछ समय के लिए इन्होने लेखनी को विराम दे दिया.

19 वीं सदी के भारत में जब महिलाओं की शिक्षा से पहुँच दूर दूर तक नहीं थी. ऐसे में महिला अधिकारों की बात करना और नारी हकों के लिए आवाज उठाने का बीड़ा उठाना एक साहसिक कार्य था. वह एक गर्ल्स स्कूल में अपने भाषण के दौरान कहती हैं कि नारी शिक्षा से हमारा आशय उनके सर्वांगीण विकास एवं क्षमताओं को पूर्ण करने में सहयोग देना हैं.

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दोस्तों Kamini Roy Biography In Hindi के इस आर्टिकल में कामिनी रॉय के बारे में दी गई जानकारी आपकों कैसी  लगी, इसके सम्बद्ध में अपनी राय, विचार सवाल कमेंट कर जरुर बताए. लेख पसंद आया हो तो अपने फ्रेड्स के साथ भी शेयर करे.

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