कन्हैया कुमार का जीवन परिचय Kanhaiya Kumar Biography in hindi

कन्हैया कुमार का जीवन परिचय Kanhaiya Kumar Biography in hindi कन्हैया, जो की एक बेहतरीन वक्ता के रूप पर आज पूरे देश में जाने जाते हैं। अपने वक्तव्य से कुमार ने अच्छे-अच्छे नेता का भी बोलती बंद कर दी है। कन्हैया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के स्टूडेंट विंग “अखिल भारतीय छात्र परिषद” के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

कन्हैया कुमार का जीवन परिचय Kanhaiya Kumar Biography in hindi

कन्हैया कुमार का जीवन परिचय Kanhaiya Kumar Biography in hindi
नाम-कन्हैया कुमार
जन्म तिथि-13 जनवरी 1987
जन्म स्थान-बेगूसराय, बिहार, भारत
माता का नाम-मीनादेवी
पिता का नामजय शंकर सिंह
राष्ट्रीयता-भारतीय
भाई बहन–प्रिंस और मणिकांत (छोटा भाई)
योग्यताअफ्रीकी अध्ययन में पीएचडी
धर्महिन्दू
जातिभूमिहार ब्राह्मण
पेशावक्ता

साल 2015 में कन्हैया कुमार को जेएनयू  में छात्र संघ अध्यक्ष पद के हेतु चुना गया था। ऐसा कहा जाता है कि चुनाव के 1 दिन पहले दी गई अपनी बेहतरीन भाषण के दम पर ही कन्हैया कुमार ने छात्र संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत हासिल की थी।

साल 2016 में जेएनयू में एक काश्मीरी अलगाववादी और 2001 में भारतीय संसद भवन पर हुए हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु  की फांसी  के सजा के खिलाफ एक रैली में कन्हैया द्वारा देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में उस पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था। और इसी के बाद से वह चर्चा का विषय रहे।

आज हम इस लेख के माध्यम से आप तक कन्हैया कुमार के जीवन से जुड़ी कई सारी महत्वपूर्ण बातें सांझा कर रहे है।

कन्हैया कुमार का जीवन परिचय

13 जनवरी 1987 को बिहार के बेगूसराय में कन्हैया कुमार का जन्म हुआ था। वे  जाति से एक भूमिहार ब्राह्मण है। कन्हैया के पिता का नाम जयशंकर सिंह और माता का नाम मीना देवी है। जहां इनके पिता एक जमींदार थे वही माता मीना देवी एक आंगनवाड़ी संचालक थीं।

कन्हैया के और दो भाई है, जिनका नाम प्रिंस और मणिकांत सिंह है। आपको यह भी बता दें कि कन्हैया कुमार की अभी तक शादी नहीं हुई है।  कन्हैया कुमार के भाई मणिकांत सिंह असम में एक कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर नौकरी करते हैं।

कन्हैया कुमार की प्रारंभिक शिक्षा मसदनपुर मध्य विद्यालय और बरौनी RKC हाई स्कूल से पूरी हुई है। इसके बाद कन्हैया कुमार ने पटना कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स में भूगोल की डिग्री हासिल की। 

कुमार ने इसके बाद पोस्ट ऑफ ग्रेजुएशन की शिक्षा नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से प्राप्त की। इसके साथ ही कन्हैया ने अपने करियर में जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। 

कन्हैया कुमार जेएनयू में एक छात्र संघ के अध्यक्ष थे। उन्हे राष्ट्रीय बदनामी के उद्देश्य से उकसाया गया था। कन्हैया पर वर्ष 2001 में संसद भवन हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु के फांसी के विरोध में जेएनयू के एक रैली में  देश विरोधी नारे लगाने का आरोप था। 

इनपर बीजेपी के एक सांसद महेश गिरी और फिर इसके बाद साल 2016 में एबीवीपी की शिकायत के बाद  देशद्रोह का मुकदमा दर्ज़ हुआ था। हालाकी कन्हैया ने  इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। अपने स्नातक की पढ़ाई के दिनों के दौरान ही कन्हैया कुमार राजनीति में इंटरेस्ट लेने लगे थे।

 इसके बाद वे साल 2002 ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन से जुड़ गए। और इसके बाद पटना में रहकर ही नालंदा विश्वविद्यालय से उन्होंने एम. ए. किया। साल 2011 में  पीएचडी करने हेतु कन्हैया ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में नामांकन लिया।

इसके बाद कन्हैया ने जेएनयू में नामांकन हेतु प्रवेश परीक्षा दिया और उस में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद साल 2018 में उन्हें सीपीआई में प्रवेश मिला। और साल 2019 में कन्हैया कुमार ने अंततः सीपीआई की सीट से बेगूसराय से लोकसभा का चुनाव लड़ा।

कन्हैया एक राजनीतिज्ञ के रूप में

कन्हैया का पूरा परिवार शुरूआत से ही CPI कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया का कट्टर समर्थक रहा है। अपनी पढ़ाई के दौरान ही कन्हैया कुमार भी (AISF) ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के सदस्य बन गए थे।

साल 2015 में कन्हैया को फेडरेशन का अध्यक्ष भी चुना गया। इस चुनाव में कन्हैया कुमार ने AISA, ABVP, SFI, NSUI, के सदस्यों को हराकर अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। इसके साथ ही कुमार ने जेएनयू के अध्यक्ष पद पर (AISF) की ओर से पहली बार फतह हासिल की।

कन्हैया के बारे में उनके दोस्त से पूछने पर उन्होंने बताया कि कन्हैया एक बेहतरीन वक्ता है। चुनाव के दौरान दिया गया उनका भाषण उनके  अध्यक्ष पद के दौरान जीते गए चुनाव का कारण माना जाता है। 

कन्हैया कुमार के चर्चा में आने की वजह

साल 2016 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक रैली में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाए गए थे। इस मामले की जांच में दिल्ली पुलिस ने कन्हैया को मुख्य आरोपी बनाया था। इस मामले को लेकर पूरे देश में जगह-जगह बवाल छिड़ रहा था। 

इस मामले में भाजपा कन्हैया कुमार के ऊपर काफी आक्रामक हो गई थी। हालांकि जब कन्हैया से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके ऊपर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। अंततः 13 फरवरी 2016 को दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार को इस मामले में गिरफ्तार भी कर लिया था।

इसके अलावा जेएनयू के कुलपति द्वारा गठित एक अनुशासित टीम भी इस मामले की जांच कर रही थी। शुरुआती जांच के आधार पर कुमार के अलावा सात अन्य छात्रों को भी एकेडमी से वंचित कर दिया गया था।

पूरे विश्व में सबसे बड़ी छात्र संघ AISF (all India student federation) ने भी कन्हैया कुमार के इस मामले में विरोध किया था। कन्हैया के ऊपर जब देशद्रोह का केस चल रहा था। उसी समय कन्हैया की एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई जिसका नाम BIHAR TO TIHAR (बिहार टू तिहार) था।

लेकिन मामले की सुनवाई में कोई ठोस सबूत नहीं मिलने पर कन्हैया कुमार को जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद जब कन्हैया रात को 10:30 बजे जेएनयू कैंपस में पहुंचे तो सैकड़ों छात्र उनके इंतजार में खड़े थे। और उनके स्वागत की तैयारी कर रहे थे।

इस दौरान जब कन्हैया जेएनयू में पहुंचे तो उन्होंने रात को ही करीब 50 मिनट तक भाषण दिया। और इस भाषण में कन्हैया ने बीजेपी और आरएसएस पर ताबड़तोड़ हमला बोला। इस मामले के बाद से कन्हैया कुमार आर एस एस और भाजपा के कट्टर विरोधी के तौर पर बनकर उभरा। 

इसके बाद जितने भी भाजपा और आरएसएस विरोधी लोग थें वे कन्हैया के समर्थन में आ गए। और इतने बड़े जन समर्थन के बाद कन्हैया लगातार बीजेपी और आरएसएस पर कई भाषणों के जरिए हमला करते रहे। और यही वजह है कि आज वह पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए है। हालांकि जितने भी बीजेपी और आरएसएस समर्थक लोग हैं वह भी कुमार के विरोध में हो गए।

कन्हैया कुमार 8 मार्च 2016 को भारतीय सेना पर दिए गए अपने भड़काऊ बयान की वजह से भी एक बार फिर से चर्चा में आ गए थे। 

एक कांग्रेस नेता के तौर पर कन्हैया कुमार

लोकसभा 2019 के चुनाव में CPI की तरफ से लड़े चुनाव में मिली करारी हार के बाद कन्हैया कुमार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया। हालांकि चुनाव में मिली हार के बाद कन्हैया की पापुलैरिटी को एक बड़ा झटका लगा। और इससे उनकी पार्टी CPI का जन समर्थन दिन-ब-दिन घटता जा रहा था।

ऐसे में लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद और पार्टी के समर्थन में लगातार कमी आने के बाद कन्हैया ने अंततः साल 2021 में CPI से विदा लेकर कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली।

कन्हैया की शादी और बच्चे

फिलहाल इन सभी मामलों से देश में अपनी पहचान बनाने वाले कन्हैया कुमार के बारे में ऐसी जानकारी मिली की उनकी अभी तक शादी नहीं हुई है, और उनकी किसी के साथ अफेयर की भी कोई जानकारी या सूचना नहीं हैं।

कन्हैया की नेटवर्थ

अपनी लोकसभा के चुनावी भाषण में कन्हैया कुमार ने अपने नेटवर्थ का भी जिक्र किया है। 2019 के चुनावी भाषण में कन्हैया ने अपनी संपत्ति का जिक्र करते हुए बताया था कि उनकी कुल संपत्ति लगभग 8 लाख से अधिक की है। 

कन्हैया कुमार से जुड़े कुछ रोचक और अनसुने तथ्य

  1. कुमार का जन्म बिहार के तेघरा विधानसभा क्षेत्र में हुआ था जहां से CPI पार्टी को सबसे ज्यादा समर्थन दिया जाता है।
  2. कन्हैया के पिताजी पैरालेसिस के शिकार है और वह पिछले कई सालों से बिस्तर पर ही सारा काम करते हैं।
  3. कुमार की माता एक आंगनवाड़ी की संचालक है और वही बड़े भाई असम किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सुपरवाइजर है।
  4. कन्हैया ने साल 2002 में पटना कॉमर्स ऑफ कॉलेज में दाखिला लिया और यहीं से उनकी राजनीतिक कैरियर की शुरुआत हुई।
  5. अपने स्कूल के दिनों में इनकी अभिनय में काफी रुचि थी। और वह इंडियन पीपुल्स थिएटर के एक सक्रिय सदस्य भी थे।
  6. पटना में ही अध्ययन के दौरान कुमार ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन से सदस्य के तौर पर जुड़े।
  7. पटना में पोस्ट ग्रेजुएट के पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद इन्होंने आगे के अध्यनन के लिए जेएनयू में दाखिला लिया।
  8. साल 2015 में कन्हैया कुमार AISF के ऐसे पहले सदस्य बने जिन्होंने जेएनयू में छात्र संघ के अध्यक्ष के पद पर जीत हासिल की।
  9. कन्हैया के करीबी लोगों उन्हे बेहतरीन वक्ता बताते हैं। ऐसा कहते हैं कि अध्यक्ष पद चुनाव के 1 दिन पहले दिए गए भाषण ही उकी जीत का कारण बनी।
  10. भारत के 17 वी लोकसभा चुनाव में कुमार ने जब CPI की ओर से बेगूसराय की लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा तो उसमें उन्हें चार लाख बाइस हजार मत के बहुत बड़े अंतर से करारी हार का सामना करना पड़ा था।

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निष्कर्ष

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