कपिल देव का जीवन परिचय | Kapil Dev Biography in Hindi

कपिल देव का जीवन परिचय | Kapil Dev Biography in Hindi जैसा कि हम सभी को ज्ञात है कि भारत में क्रिकेट को एक विशेष दर्जा प्राप्त है, जहां हर क्रिकेटर को लोगों के द्वारा काफी प्यार और अपनापन प्राप्त हुआ है। आज तक भारतीय क्रिकेट टीम में कई ऐसे खिलाड़ियों ने शिरकत की है जिन्होंने अपने देश का नाम हमेशा ऊंचा बनाए रखा और युवा वर्ग के लिए भी एक नई प्रेरणा का स्रोत बन कर उभरे हैं। ऐसे में आज हम आपको  कपिल देव के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिन्हें भारतीय क्रिकेट के हीरो के नाम से भी जाना जाता है।

कपिल देव का जीवन परिचय | Kapil Dev Biography in Hindi

कपिल देव का जीवन परिचय Kapil Dev Biography in Hindi

कपिल देव का पूरा नाम

ऐसे तो हम सभी इन्हें प्यार से कपिल पाजी या कपिल देव कहते हैं लेकिन इनका पूरा नाम कपिल देव निखंज है जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है।

जन्म

कपिल देव का जन्म 6 जनवरी सन 1959 को चंडीगढ़ में हुआ था। इनका बचपन चंडीगढ़ में ही बीता है। इनके पिता का नाम श्री रामलाल निखंज और माता का नाम श्रीमती राजकुमारी था। 

उनके पिता लकड़ी का व्यवसाय करने वाले बिजनेसमैन बन गए थे और माता  हाउसवाइफ थी। कपिल देव सात भाई-बहन थे जिसमें से इनका नंबर छठवें स्थान पर था।

शिक्षा

शुरुआती समय में कपिल देव का मन पढ़ाई में नहीं लगता था लेकिन फिर भी उन्होंने पढ़ाई को महत्व दिया, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी स्कूल चंडीगढ़ से प्रारंभ की और वहीं पर अपना पूरा स्कूली जीवन व्यतीत किया।

 उसके बाद वह कॉलेज की पढ़ाई के लिए सेंट एडवर्ड कॉलेज में गए। धीरे-धीरे इनकी रूचि क्रिकेट की ओर होने लगी और  क्रिकेट को भी  आगे बढ़ाने का काम करते रहे।

कपिल देव का विवाह

कपिल देव ने रोमी भाटिया से सन 1980 में विवाह किया था, जिसके बाद उनकी एक लड़की का भी जन्म हुआ जिसका नाम उन्होंने अमिया देव रखा था।

शुरुआती क्रिकेट

वैसे तो इन्हें बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई। जहां उन्होंने हरियाणा के लिए पहला मैच 1975 में खेला था जिसमें उन्होंने शानदार जीत दिलाई।

इसके बाद उन्होंने 1977 में जम्मू कश्मीर में खेले गए एक क्रिकेट मैच में 8 विकेट लेते हुए शानदार प्रदर्शन किया था।

कपिल देव की टेस्ट मैच में शुरुआत

शुरुआत उन्होंने वनडे क्रिकेट से की थी लेकिन धीरे-धीरे टेस्ट मैच में भी उन्होंने बल्लेबाजी करना शुरू किया। उन्होंने 1978 में टेस्ट मैच खेलने की शुरुआत कर दी थी अपना पहला मैच उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। इस मैच में उन्होंने काफी अच्छा प्रदर्शन किया और उनके अंदर एक महान खिलाड़ी देखा जाने लगा।

कप्तानी का सफर

ऐसे तो कपिल देव को कप्तान बनने का मौका उस समय ही मिल गया था, जब उन्होंने वेस्टइंडीज का दौरा किया था। उस समय ऐसा माना जाता था कि क्रिकेट जगत में वेस्टइंडीज से अच्छी टीम कोई नहीं हो सकती। 

लेकिन उन्होंने होने वाले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए वेस्टइंडीज को भी हराने का जज्बा पैदा किया था और यही वजह है कि आने वाले मैचों में भी उन्होंने बेहतर प्रदर्शन कर दिखाया।

यादगार 1983 का वर्ल्ड कप

1983 वर्ल्ड कप एक ऐसा समय था जब लोग क्रिकेट को बहुत प्यार करने लगे थे और देशवासी चाहते थे कि इस बार का वर्ल्ड कप उनके घर में ही आए। हालांकि पिछले कुछ मैचों से भारत का प्रदर्शन कुछ खास नहीं था और आलोचकों ने यह तक कह दिया था कि कोई उम्मीद नहीं है कि भारत वर्ल्ड कप जीतेगा।

लेकिन 1983 के हर मैच में कपिल देव ने बेहतर बल्लेबाजी करते हुए कई सारी टीमों से जीत  प्राप्त की, जिसमें सेमीफाइनल में उन्होंने जिंबाब्वे को हराया। साथ ही साथ उन्होंने लगभग 175 रन बनाए थे और कई अहम मौकों पर विकेट भी चटकाए थे। यही नहीं उन्होंने एक बेहतरीन साझेदारी किरमानी के साथ मिलकर की थी।

जिसे लगभग 27 सालों तक कोई भी तोड़ नहीं पाया था जिसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है।

धीरे-धीरे मैच का रोमांच बढ़ता ही जा रहा था और कपिल देव ने भी हर टीम के खिलाफ काफी अच्छा प्रदर्शन किया और इसी वजह से ही लोगों के मन में यह बात घर करने लगी थी कि हो सकता है भारत भी वर्ल्ड कप जीत जाए।

वर्ल्ड कप के समय हुई यह घटना

जब वर्ल्ड कप का मैच हो रहा था, उसी समय बीबीसी की हड़ताल शुरू हो चुकी थी और इस वजह से उस समय होने वाले मैच का टेलीकास्ट सही तरीके से नहीं हो पा रहा था,

जिसकी वजह से क्रिकेट प्रेमियों के दिल में हलचल मची हुई थी और वह आगे के मैच को देखना चाहते थे लेकिन इस हड़ताल की वजह से क्रिकेट प्रेमी मैच को नहीं देख पाए।

वर्ल्ड कप में हुई शानदार जीत

जब 1983 वर्ल्ड कप में भारत ने इंग्लैंड को हराकर फाइनल में प्रवेश किया उस समय लोगों के दिल में अपने खिलाड़ियों के प्रति प्रेम भाव और उमड़ पड़ा था और उन्होंने इस बात की खुशी  मना ली थी.

कि भारत ही वर्ल्ड कप जीतेगा हालांकि भारत का वर्ल्ड कप जीतना आसान नहीं था क्योंकि उनका फाइनल मैच वेस्ट इंडीज के साथ होने वाला था और उस समय वह भी एक मजबूत टीम के रूप में हमारे सामने थी।

ऐसे में कपिल देव की शानदार कप्तानी और बल्लेबाजी की बदौलत साथ ही साथ अन्य क्रिकेट खिलाड़ियों के सहयोग के माध्यम से भारत ने 1983 के फाइनल में वेस्ट इंडीज को 184 रनों का लक्ष्य देकर उन्हें मात्र 140 में ढेर करके यह वर्ल्ड कप जीत लिया।

 जिसके बाद भारत की टीम भी अन्य टीमों की अपेक्षा कहीं अधिक प्रतिभाशाली और शक्तिशाली बन कर उभर चुकी थी। ऐसे में वर्ल्ड कप की ट्रॉफी हाथ में लेना सभी क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए बहुत ही रोमांचक सफर था।

कपिल देव को दी जाने वाली प्रमुख उपलब्धियां

कपिल देव का नाम महान क्रिकेटरों में शुमार है ऐसे में उनके नाम कुछ मुख्य उपलब्धियां हैं जिनके बारे में हम आपको विस्तार से जानकारी देना चाहते हैं— 

  1. कपिल देव के लिए सबसे  गौरवान्वित करने वाला पल वह रहा, जब उन्हें 1983 के दरमियान बेहतर प्रदर्शन की वजह से “अर्जुन पुरस्कार” से नवाजा गया था। इस पुरस्कार के मिलने का मतलब यही है कि खेल के क्षेत्र में उनका योगदान सर्वश्रेष्ठ था।
  2. इसी क्रम में आगे लगभग 2 साल बाद 1982 में कपिल देव को “पदम श्री पुरस्कार” से सम्मानित किया गया था।
  3. वर्ल्ड कप जीतने के बाद ही कपिल देव को “विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर” का सम्मान दिया गया। ऐसा माना जाता है कि इस सम्मान को पाना हर क्रिकेट खिलाड़ी के लिए एक सपना ही होता है।
  4. इसके अलावा 1991 में कपिल देव को देश के उच्चतम पुरस्कार “पद्म भूषण” दिया गया था। यह पुरस्कार पाने वाले वे खेल जगत के कुछ ही खिलाड़ियों की कतार में आ चुके थे।
  5.  साथ ही साथ 2010 में उनकी विशेष प्रतिभा को देखते हुए “आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम” पुरस्कार देकर उन्हें सम्मानित किया गया था जहां उन्हें 2013 में भी “महान वैश्विक जीवित महापुरुष” का खिताब प्राप्त हुआ था।
  6. क्रिकेट में मिलने वाली महान उपलब्धियों के बाद सन 2008 में उन्हें “भारतीय क्षेत्रीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल” का पद दिया गया था। यह पद उन्हें अपने क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मिला था।

कपिल देव के जीवन के बारे में कुछ रोचक बातें

  1. ज्यादातर क्रिकेटरों को क्रिकेट खेलते देखा जाता है या फिर उन्हें विज्ञापनों में भी देख लिया जाता है लेकिन कपिल देव एक ऐसे खिलाड़ी थे। जो पर्दे पर दो फिल्मों में दिखाई दिए इसके अलावा उनके ऊपर भी एक फिल्म बनने वाली है। जिन दो फिल्मों में उन्होंने छोटी सी भूमिका निभाई थी वह “इकबाल” और “मुझसे शादी करोगी” है।
  2. कपिल देव को हमेशा एक जुझारू कप्तान के रूप में देखा गया है लेकिन एक बात यह भी सत्य है कि उन्हें किताबें लिखने का बहुत ज्यादा शौक है जिसकी वजह से वे अब तक तीन आत्मकथाएं लिख चुके हैं जिन्हें लोगों द्वारा खास पसंद भी किया गया है। इनकी लिखी गए आत्मकथा “स्टेट फ्रॉम माय हार्ट”, “गोड्स डिकी” और “क्रिकेट माई स्टाइल” है। जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से अपने अंदर होने वाले क्रिकेट के प्रति भावनात्मक रवैया को बताया है साथ ही साथ उस क्षण को भी उन्होंने इसमें जाहिर किया है जिसकी वजह से वे क्रिकेट जगत में आए थे।
  3. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने 2006 में व्यापार करने के उद्देश्य से दो रेस्टोरेंट्स खोले हैं, जो मुख्य रूप से चंडीगढ़ और पटना में स्थित हैं।

कपिल देव के जीवन में आया बुरा समय

1983 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को एक नया मुकाम मिल चुका था जहां अब आने वाले हर प्रतिस्पर्धा में उन्हें अच्छा कर गुजरने की होड़ मची हुई थी। ऐसे में हर खिलाड़ी यह कोशिश कर रहा था कि आगे बढ़ते हुए हर बार प्रतियोगिता जीती जाए। 

लेकिन 1984 में वेस्टइंडीज के खिलाफ हो रही टेस्ट मैचों में भारत को करारी हार मिली थी और यही वजह बताई जाती है कि जब कपिल देव के जीवन का बुरा समय शुरू हुआ था।

लगातार उनका बुरा समय आगे बढ़ता रहा और अगले विश्व कप 1987 में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा जहां वे इंग्लैंड से हारकर सेमीफाइनल से बाहर हो गए थे। 1987 का दौर ही उनकी कप्तानी का आखिरी सफर माना गया जिसके बाद कप्तानी सुनील गावस्कर को दे दी गई और उन्हें उपकप्तान बना दिया गया था।

 उस समय ऐसा माना गया था कि कपिल देव का बुरा समय चल रहा है और इस वजह से ही लगातार उनके प्रदर्शन में गिरावट देखी गई।

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच

कपिल देव ने खुद को एक बेहतर कप्तान और खिलाड़ी के रूप में साबित कर दिया था लेकिन अगली पारी उनकी तब शुरू हुई जब उन्हें बीसीसीआई की टीम ने कोच का पद दिया था।

ऐसे में लगातार हार की वजह से उन पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगा जिससे वह बर्दाश्त नहीं कर सके और मात्र 10 महीने में ही उन्होंने कोच पद से इस्तीफा दे दिया था।

फिल्म

कपिल देव जैसे बेहतरीन खिलाड़ी कि जिंदगी पर भी एक फिल्म बनाने का प्रस्ताव रखा गया है जिसे कपिल देव की बायोपिक कहा जा सकता है। इस फिल्म का नाम “83” रखा गया है।

इसे निर्देशक कबीर खान द्वारा निर्देशित किया जाएगा जिसमें मुख्य भूमिका के रूप में रणवीर सिंह होंगे और उनकी पत्नी की भूमिका दीपिका पादुकोण निभाएंगी।

कपिल देव के शौक

वैसे तो कपिल देव को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था लेकिन इसके अलावा उन्हें टेबल टेनिस खेलने का बहुत शौक था। साथ ही साथ वे स्क्वैश खेलना पसंद करते है और  उन्हें जब भी समय मिलता था तो वह फिल्म भी देख लिया करते थे।

रिटायरमेंट

कपिल देव ने अपने देश के लिए खेलते हुए कई प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त की लेकिन वह समय भी आ ही गया जब उन्होंने खेल जगत को अलविदा कह दिया।

ऐसे में उन्होंने वनडे क्रिकेट से 17 अक्टूबर 1994 को रिटायरमेंट लिया और टेस्ट क्रिकेट से 23 मार्च 1994 को रिटायरमेंट ले लिया था।

कपिल देव की पसंदीदा शैली

जब भी वे क्रिकेट के मैदान में होते थे, तो हमेशा दाहिने हाथ के तेज मध्यम गेंदबाज के रूप में गेंदबाजी करना पसंद करते थे और दाहिने हाथ से बल्लेबाजी करना उन्हें भाता था।

ऐसे में उनका पसंदीदा शॉट “हुक एंड ड्राइव” माना जाता था। जब भी वे गेंदबाजी करते थे, तो उन्हें “आउट स्विंग” और “स्विंग यारकर” करना पसंद आता था।

कुल संपत्ति

एक अनुमान के अनुसार कपिल देव की कुल संपत्ति 220 करोड रुपए है जो आने वाले समय में विज्ञापनों और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से बढ़ भी सकती है।

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इस प्रकार से आज हमने आपको देश के महान क्रिकेटर कपिल देव का जीवन परिचय Kapil Dev Biography in Hindi के बारे में जानकारी दी है।

जब भी कोई खिलाड़ी आगे बढ़ता है तो हम उसके संघर्ष के बारे में नहीं सोचते बल्कि उसकी सफलता पर ही हमारा ध्यान केंद्रित हो जाता है ऐसे में यह बात नहीं भूलना चाहिए कि किसी भी सफलता के पीछे असफलता का हाथ होता है।

कपिल देव जी का जीवन भी क्रिकेट के लिए समर्पित रहा जिसमें उन्होंने भारत को कई विशेष सफलताएं दिलाई और एक नया मुकाम हासिल करने में मदद की। उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आएगा इसे अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। 

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