कारगिल युद्ध कहानी Kargil War Story In Hindi

कारगिल युद्ध कहानी Kargil War Story In Hindiकारगिल युद्ध की कहानी देश के लोगों को सीमा पर लड़ रहे वीर शहीदों की गाथा सुनाती हैं। कारगिल का युद्ध भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण युद्ध में से एक हैं। इस युद्ध को भारत ने बड़ी शान से जीता था। हालांकि इस जीत के लिए कई जवान शहीद हुए हैं।

कारगिल युद्ध कहानी Kargil War Story In Hindi

कारगिल युद्ध कहानी Kargil War Story In Hindi

आज हम आपको इस लेख में कारगिल युद्ध की पूरी कहानी (1999 Kargil War Story In Hindi) बताने वाले है। इस लेख में आप जानेंगे कि किस तरह कारगिल युद्ध का आरंभ हुआ और इस तरह हमारे देश के भारतीय जवानों ने कारगिल के पहाड़ों पर चढ़कर पाकिस्तान को हराया।

कारगिल का युद्ध “ ऑपरेशन विजय “ के नाम से जाना जाता है। कारगिल युद्ध की शुरुआत मई और जून के महीने में 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई था। कश्मीर के कारगिल जिले में हुए इस निर्णायक युद्ध ने विश्व को भारत की शक्ति से परिचित करवाया।

बात 1999 की उस समय पाकिस्तानी सेना और कश्मीर के उग्रवादी भारतीय जमीन पर कब्जा करने का भरपूर प्रयत्न कर रहे थे। पाकिस्तानी नेताओ और वहां के नागरिकों द्वारा दिए गए बयान के अनुसार इस युद्ध में केवल पाकिस्तानी उग्रवादी (जो कश्मीर में रहते हैं) उन्होंने भाग लिया था।

लेकिन ऐसा नहीं था क्योंकि जांच के दौरान बरामद हुए दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता था कि पाकिस्तान की सेना ने भी इस युद्ध में भाग लिया था।

कारगिल के इस युद्ध में 30,000 भारतीय सैनिक और 50,000 घुसपैठिए शामिल हुए थे। युद्ध में भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना भी मौके पर मौजूद थीं।

वायु मार्ग से हमला करके भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के कई जगहों को अपने कब्जे में ले लिया था। यह लड़ाई तकरीबन दो वर्षों तक जारी रही, भारतीय सेना की बहादुरी, जाबांजी के सामने पाकिस्तान के नापाक इरादे फेल हो गए।

यह मामला अंतराष्ट्रीय स्तर पर गया, जिसमें विभिन्न देशों ने भारत का साथ दिया और इस तरह उग्रवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को मजबूरन युद्ध से भागना पड़ा।

कारगिल का युद्ध ऊंचाइयों पर लड़ा गया था। विषम परिस्थितियों में लड़ाई होने के कारण दोनों देश की सेनाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।

बता दें परमाणु बम बनाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ी गई यह पहली सशस्त्र लड़ाई थी।

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए इस युद्ध में संकट के बादल काफी पहले से मडरा रहे थे।

युद्ध से ठीक पहले पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जहांगीर करामात के बीच 1998 में‌ मतभेद काफी ज्यादा बढ़ चुके थे।

करामात की सेवानिवृत्ति में किस व्यक्ति को सेना प्रमुख बनाया जाए इस बात पर बहस चल रही थी। इस युद्ध से पहले राष्ट्रपति नवाज शरीफ को सत्ता के बारे में बहुत बुराई की जा रही थीं। इन सब से परेशान होकर राष्ट्रपति नवाज शरीफ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया जिसके बाद जहांगीर को राष्ट्रपति बनाया गया।

दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना और कश्मीर के उग्रवादी एक साथ मिलकर भारतीय सीमा को पार करके भारतीय भूमि पर जबरन कब्जा कर रहे थे। जिसके कारण सम्पूर्ण देश पाकिस्तान से नाराज हो गया था।

पर चूंकि भारतीय सेना ऐसे ही भारतीय गौरव को मिट्टी में मिलते नहीं देख सकती थे। जिस वजह से कुछ ही समय बाद दोनों देशों के बीच छिड़ा यह विवाद कारगिल युद्ध में तब्दील हो गया।

पाकिस्तान की ओर से इस युद्ध की शुरुआत 3 मई 1999 में ही शुरू की गई थी पाकिस्तानी सैनिकों ने हजारों घुसपैठियों के साथ मिलकर कारगिल की जमीन को अपने कब्जे में ले लिया था।

पाकिस्तान की इस गंदे चाल के बारे में जब भारतीय सरकार को जानकारी मिली। तब उन्होंने भारतीय सेना के साथ मिलकर ऑपरेशन विजय चलाया। ताकि भारतीय सेना इन घुसपैठियों को खदेड़ कर पाकिस्तान वापस भगा सके।

इस युद्ध की मुख्य तौर पर शुरुवात 3 मई 1999 में हुई जब एक चरवाहे ने 50,000 पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा जमीन पर किए कब्जे की जानकारी भारतीय सरकार को दी।

चरवाहे द्वारा कही गई बात की पुष्टि करने के लिए भारतीय सरकार ने 5 मई के दिन भारतीय सेना को पेट्रोलियम करने के लिए जब कारगिल भेजा तो पाकिस्तानी सैनिकों ने सैनिकों की पकड़कर उनमें से 5 लोगों की मौके पर ही हत्या कर दी।

और 9 मई को पाकिस्तानी सेना के बीच हुए मुठभेड़ में पाकिस्तानी सेना ने कारगिल में मौजूद भारतीय सेना के मौजूद गोला बारूद के स्टोर को नष्ट कर दिया था। इसके बाद भारतीय सेना में आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया।

10 मई के दिन लद्दाख के प्रवेश द्वार पर पहली बार काकसार और मुश्कोह सेक्टर में पाकिस्तानी सेना को देखा गया था। जिससे यह साफ साफ स्पष्ट हो गया था कि कारगिल में हुए जमीन कब्जे के पीछे पाकिस्तानी सेना और उग्रवादी घुसपैठियों का ही हाथ है।

26 मई के दिन भारतीय वायु सेना द्वारा कारगिल में दुश्मनों के खिलाफ हमला किया गया। इस दिन युद्ध में सेना को कार्यवाही में मिग-27 और मिग-29 नामक शक्तिशाली फाइटर जेट का भी इस्तेमाल करना पड़ा।

मई में शुरू हुई यह लड़ाई काफी दिनों तक चलती रही कभी भारतीय सेना पाकिस्तानियों को छठी का दूध याद दिलाते। तो कभी पाकिस्तानी चुपके से भारतीयों पर हमला करते रहे।।

कारगिल के युद्ध में मिसाइल के साथ साथ रॉकेट और बम का भी प्रयोग किया गया। कारगिल के युद्ध के दौरान तकरीबन 2 लाख 50 हजार गोले चलाए गए।

दुश्मनों को खदेड़ने के लिए 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेटों का इस्तेमाल किया गया था।

कारगिल के इस युद्ध में 17 दिनों तक प्रति सेकंड फायर किया गया। आजादी के बाद यह भारत की पहली लड़ाई थी जिसमें इतनी अधिक मात्रा में बम गोलों का प्रयोग किया गया था। यही कारण है कि कारगिल का युद्ध इतना लोक प्रसिद्ध है।

इस प्रकार यह युद्ध जून और जुलाई के महीने तक चला। आखिरकार 26 जुलाई के दिन पाकिस्तानियों को कारगिल से खदेड़ कर भगा दिया गया। और इस तरह भारतीय सेना ने बड़े ही गर्व से पाकिस्तानियों के खिलाफ इस जंग को जीता।

युद्ध कभी अच्छे परिणाम नहीं लाता है, इससे जन धन, माल इत्यादि की हानि होती है। और कारगिल के युद्ध में भी कुछ ऐसा ही हुआ था कारगिल युद्ध के बाद हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों की ही आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।

भारतीय सेना ने 26 जुलाई 1999 के दिन कारगिल का युद्ध जीत था। इसलिए 26 जुलाई के इस दिन को हर वर्ष विजय दिवस के रुप में मनाया जाता है। 2 महीने तक लड़े गए युद्ध में देश को भारतीय सेना की बहादुरी, निडरता, देशप्रेम की झलक मिली

यह युद्ध देशवासियों को भारतीय सेना के सम्मान करने का संदेश देता है। क्योंकि उन्हीं के कारण आज हम बेफिक्र होकर अपने घर पर सोते हैं।

कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर लड़ी गई इस युद्ध में भारत ने अपने 527 से ज्यादा वीर योद्धाओं को खोया था, और 1300 से ज्यादा वीर घायल हो चुके थे। वहीं कारगिल के इस युद्ध में पाकिस्तान के 2700 सैनिक मारे गए और 250 पाकिस्तानी सैनिक जंग छोड़ कर भाग गए।

कारगिल के इस युद्ध के बाद नवाज़ शरीफ़ की सरकार को हटाकर परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति बनाया गया।

कारगिल के युद्ध में देश प्रेम की अपार भावना देखने को मिली क्योंकि इस युद्ध में ना सिर्फ सेना पर लड़ रहे जवानों के रक्त में उबाल आया था बल्कि देश के नागरिकों के खून में भी उबाल आया था।

कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सरकार ने देश की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए बजट बनाए और रक्षा बजट को भी बढ़ाया।

कारगिल युद्ध की जानकारी देश के हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए और लोगों के मन में देश प्रेम की भावना का संचार करने के लिए कारगिल युद्ध के ऊपर बॉलीवुड में एल ओ सी कारगिल, लक्ष्य और धूप जैसी यादगार फिल्में बनाई गए।

पाकिस्तानियों की हर चाल पर भारतीय सरकार ने हमेशा ही मुंह तोड़ जवाब दिया है और कारगिल का युद्ध इस बात का प्रमाण है।

इस खूंखार लड़ाई ने सिर्फ भारतीय सेना हृदय में देश प्रेम की भावना का संचार किया था बल्कि पूरे देश कि जनता इस युद्ध में घर बैठे अपनी सेना के विजयी होने के लिए प्रार्थना कर रही थी।

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