कार्तिक पूर्णिमा कब है इसका महत्व पूजा विधि | kartik purnima importance, Puja Vidhi, Vrat Katha In Hindi)

kartik purnima in hindi Kartik Purnima 2018 का व्रत २३ नवम्बर को शुक्रवार के दिन किया जाता हैं. यह दिन हिंदू के लिए विशिष्ट महत्व का दिन है. इस दिन गुरू नानक साहब का जन्म हुआ था. इस कारण इन्हें नानक जयंती के रूप में भी मनाया जाता हैं. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता हैं, इस दिन को कई अन्य नामों जैसे कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान, त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से जानते है. इस दिन गंगा स्नान करना पुण्यकारी माना गया हैं. कहते है इस दिन मात्र स्नान करने से जो फल प्राप्त होता है जो साल के ३६५ दिन के गंगा स्नान से होता है.

कार्तिक पूर्णिमा कब है इसका महत्व पूजा विधि | kartik purnima importance, Puja Vidhi, Vrat Katha In Hindi)कार्तिक पूर्णिमा कब है इसका महत्व पूजा विधि | kartik purnima importance, Puja Vidhi, Vrat Katha In Hindi)

Kartik Poornima Vrat Vidhi in Hindi Story and Vrat Vidhi in Hindi, कार्तिक पूर्णिमा व्रत विधि और पूजा विधि: इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते है. इस तिथि को भगवान् मत्स्यावतार का जन्म हुआ था. इस दिन गंगा स्नान, दीप दान, अन्य दान का विशेष महत्व है. त्रिदेवों ने इसे महापुनित पर्व कहा है. इस तिथि को अगर कृतिक नक्षत्र पर चंद्र हो तथा विशाखा नक्षत्र पर सूर्य तब. पद्म योग होता है जिसका बड़ा ही महत्व है.

चंद्र दर्शन पर शिवा, प्रीति, संभूति, अनुसूया, क्षमा, सन्तनी इन छहों कृतिकाओं का पूजन वन्दना करने से संभूत पुण्य फल मिलता है. इस रात्रि में व्रतोउरांत वृष दान देने से शिवलोक प्राप्त होता है. इस दिन कार्तिक के व्रत को धारण करने वालों को ब्राह्मण भोजन हवन तथा दीपक जलाने का भी विधान है. इसी शुभ दिन में गुरू नानक का जन्म हुआ था. अतः इस दिन को गुरू नानक जयंती सहोत्साह मनाई जाती है.

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व (kartik purnima importance)

इस पूर्णिमा की कथा के अनुसार माना जाता है कि भगवान् शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था. इसी वजह से इसे त्रिपुर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन भक्त व्रत रखते है तथा कृतिकाओं के साथ उनकी पूजा भी करते है. इस दिन दीपदान, गंगा स्नान तथा विष्णु जी पूजा का भी विशेष महत्व है.

गंगा स्नान तथा दीपदान के बाद जरूरतमंदों को दान देना चाहिए. देश के कोने कोने में बसे लोग कार्तिक पूर्णिमा को गंगाजी तक नही पहुच पाते है. वे इस पुण्य की प्राप्ति के लिए गंगा जल को पानी में डालकर कुशा के साथ इस स्नान को घर पर ही कर सकते हैं. मौसमी फल, उड़द की काली दाल, चावल आदि वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया हैं.


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