कार्तिक पूर्णिमा कब है इसका महत्व पूजा विधि | kartik purnima importance, Puja Vidhi, Vrat Katha In Hindi)

कार्तिक पूर्णिमा कब है इसका महत्व पूजा विधि kartik purnima importance, Puja Vidhi, Vrat Katha In Hindi कार्तिक पूर्णिमा 2022 का व्रत 8 नवम्बर को हैं. यह दिन हिंदू के लिए विशिष्ट महत्व का दिन है. इस दिन गुरू नानक साहब का जन्म हुआ था. इस कारण इन्हें नानक जयंती के रूप में भी मनाया जाता हैं. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता हैं, इस दिन को कई अन्य नामों जैसे कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान, त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से जानते है. इस दिन गंगा स्नान करना पुण्यकारी माना गया हैं. कहते है इस दिन मात्र स्नान करने से जो फल प्राप्त होता है जो साल के ३६५ दिन के गंगा स्नान से होता है.

कार्तिक पूर्णिमा kartik purnima In Hindi

कार्तिक पूर्णिमा कब है इसका महत्व पूजा विधि kartik purnima importance, Puja Vidhi, Vrat Katha In Hindi

Kartik Poornima Vrat Vidhi in Hindi Story and Vrat Vidhi in Hindi, कार्तिक पूर्णिमा व्रत विधि और पूजा विधि: इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते है. इस तिथि को भगवान् मत्स्यावतार का जन्म हुआ था.

इस दिन गंगा स्नान, दीप दान, अन्य दान का विशेष महत्व है. त्रिदेवों ने इसे महापुनित पर्व कहा है. इस तिथि को अगर कृतिक नक्षत्र पर चंद्र हो तथा विशाखा नक्षत्र पर सूर्य तब. पद्म योग होता है जिसका बड़ा ही महत्व है.

चंद्र दर्शन पर शिवा, प्रीति, संभूति, अनुसूया, क्षमा, सन्तनी इन छहों कृतिकाओं का पूजन वन्दना करने से संभूत पुण्य फल मिलता है. इस रात्रि में व्रतोउरांत वृष दान देने से शिवलोक प्राप्त होता है.

इस दिन कार्तिक के व्रत को धारण करने वालों को ब्राह्मण भोजन हवन तथा दीपक जलाने का भी विधान है. इसी शुभ दिन में गुरू नानक का जन्म हुआ था. अतः इस दिन को गुरू नानक जयंती सहोत्साह मनाई जाती है.

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व (kartik purnima importance)

इस पूर्णिमा की कथा के अनुसार माना जाता है कि भगवान् शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था. इसी वजह से इसे त्रिपुर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है.

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भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन भक्त व्रत रखते है तथा कृतिकाओं के साथ उनकी पूजा भी करते है. इस दिन दीपदान, गंगा स्नान तथा विष्णु जी पूजा का भी विशेष महत्व है.

गंगा स्नान तथा दीपदान के बाद जरूरतमंदों को दान देना चाहिए. देश के कोने कोने में बसे लोग कार्तिक पूर्णिमा को गंगाजी तक नही पहुच पाते है.

वे इस पुण्य की प्राप्ति के लिए गंगा जल को पानी में डालकर कुशा के साथ इस स्नान को घर पर ही कर सकते हैं. मौसमी फल, उड़द की काली दाल, चावल आदि वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया हैं.

 कार्तिक पूर्णिमा कब मनाई जाती है, इसका क्या महत्व क्या है। हिंदू धर्म के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को क्या करना उचित एवं क्या अनुचित होता है अगर यह जानना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए ही है। इसके साथ साथ हम आपको इससे संबंधित और भी जानकारी देंगे जो आप के लिए खास है और आपको जानना जरूरी है।

 कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का क्या महत्व है?

हिंदू धर्म के अनुसार पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन सारे देवी देवता पृथ्वी पर उतरकर गंगा में जाकर स्नान करते हैं तो हमें भी इस दिन गंगा में जाकर अवश्य स्नान करना चाहिए।

अगर हम गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं तो सामान्य पानी में गंगा जल डालकर स्नान जरूर करें। हिंदू धर्म में जाना जाता है कि ऐसा करने से आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और लक्ष्मी का वास होता है। इसके अलावा हिंदू धर्म में यह भी मान्यता है कि इस दिन आपको अपने यथाशक्ति के अनुसार धन और वस्त्र का दान करना चाहिए।

इस दिन चावल का दान करना सबसे महत्वपूर्ण और शुभ कार्य माना जाता है। माना जाता है कि चावल का दान अगर आप कार्तिक पूर्णिमा के दिन करते हैं तो आपका हमेशा शुभ होगा और आपको पुण्य मिलेगा। लेकिन एक बात है कि इस दिन  आप अपने हिसाब से कुछ भी दान कर सकते हैं आप पर किसी की  जबरदस्ती नहीं है कि आपको दान ही करना है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन पृथ्वी पर आते हैं देवता-

हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार एवं शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा को देवी देवता स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक पर आते हैं और बनारस में गंगा स्नान करते हैं।

ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन दिवाली मनाई जाती है जिस के उपलक्ष्य में देवी देवता पृथ्वी पर आकर वाराणसी घाट पर गंगा में स्नान करके वापस स्वर्ग लोक में चले जाते हैं। 

इसलिए इस दिन देवी देवताओं के स्वागत के लिए घाटों पर दिए जलाए जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग अपने घरों और घर के बाहर भी दिए जलाते हैं ताकि वह भी देवी देवताओं का आदर सत्कार करें। पौराणिक कथा में यह कहा गया है कि जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें देवी देवता आशीर्वाद देते हैं और उन्हें पुण्य मिलता है। 

कार्तिक पूर्णिमा का यह है एक और नाम

हम आपको बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता हैं। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था जिसके बाद से कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाने लगा। 

आज के दिन दान पूर्ण करने का भी दिन है। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन दान पूर्ण करने से आपके घर में लक्ष्मी बरकरार रहती है और उनका वास आपके घर में बना रहता है। 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन यह काम नहीं किए जाते हैं!

कार्तिक पूर्णिमा के दिन कुछ ऐसे भी नियम है जिसकी वजह से आप कुछ ऐसे काम नहीं कर सकते जो आप चाहते हैं। जैसे कि अगर आप की लड़ाई किसी से हो जाती है तो आप किसी से भी ज्यादा बहस ना करें। साथ ही आप किसी से लड़ाई ना करें और उसे अपशब्द भी ना कहे। 

 आपको हर परिस्थिति में आपको कार्तिक पूर्णिमा के दिन खुद पर नियंत्रण रखना है और अपने मुंह को अपशब्द कहने से रोकना है। अगर आपको यह बात मालूम नहीं है तो आप जान लीजिए कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन आप भूल कर भी मांसाहारी भोजन ना करें। 

मांसाहारी भोजन के साथ ही आप कार्तिक पूर्णिमा के दिन नशे वाले पदार्थों का भी प्रयोग ना करें जैसे कि आप शराब गुटका खैनी आदि को हाथ भी न लगाएं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से आपको बुरा फल मिलता है। 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन आप किसी गरीब या असहाय का अपमान ना करें क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गरीब और असहाय लोगों को कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान दिया जाना बहुत ही शुभ है।

तो ऐसे में अगर आप उनको दान देने की बजाय उनका अपमान करेंगे तो यह आपके लिए बेहद खराब है। इसके साथ-साथ आप इस बात का भी ध्यान रखें कि आप कार्तिक पूर्णिमा के दिन बाल और नाखून काटने से बचें। 

कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त कब से कब तक है?

अगर आपको कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त नहीं पता है तो हम आपको बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 18 नवंबर को 11.00 बजकर 55 मिनट से ही शुरू हो गया है।

और यह शुभ मुहूर्त 18 नवंबर 11:00 बजकर 55 मिनट से लेकर के 19 नवंबर को दोपहर 2:00 बजे तक रहेगा। अगर आपको कोई शुभ कार्य घर में करना है तो आप 18 नवंबर को 11:55 से लेकर के 19 नवंबर 2:00 बजे तक कर सकते हैं। बता दें इस दौरान किए गए कार्य आपके लिए और आपके परिवार के लिए शुभ साबित होगा। 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर करे यह काम-

दोस्तों हम आपको बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर सबसे पहले तो आप को सूरज निकलने से पहले ही जाकर गंगा नदी में स्नान कर लेना है।

अगर आप गंगा नदी में स्नान करने में सक्षम नहीं है या आप गंगा नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो आप सामान्य पानी लेकर के उसमें गंगाजल मिला लें और स्नान करें। 

गंगा जल से या गंगा नदी में स्नान करने के बाद आप माता तुलसी और भगवान विष्णु की आरती करें और उनकी पूजा करें क्योंकि ऐसा करना शुभ माना जाता है।

और माना जाता है कि ऐसा करने से आप पर माता तुलसी और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। ऐसा करने से आपके घर में लक्ष्मी का वास बना रहता है। 

देव दिवाली की कथा-

देव दिवाली की कथा देवताओं और महर्षि विश्वामित्र के बीच एक चुनौती से जुड़ी है। इस कथा का वर्णन हिंदु शास्त्र में किया गया है। शास्त्र के मुताबिक एक बार महर्षि विश्वामित्र ने अपने ज्ञान और साधना के बल पर त्रिशंकु के शरीर को स्वर्ग में भेज दिया।

जब त्रिशंकु के शरीर को स्वर्ग में देवताओं ने देखा तो सभी अचंभित रह गए। सारे देवता ये सोचने पर मजबूर हो गए कि आखिर ऐसा कैसे हो गया। बिना किसी की मृत्यु होए यह शरीर स्वर्ग में कैसे आ गया। फिर बाद में उन्हें यह पता चला कि महर्षि विश्वामित्र ने अपने विद्या के बल पर यह कारनामा किया है। 

देवताओं ने इस कारनामे को एक चुनौती समझी और वह महर्षि विश्वामित्र द्वारा त्रिशंकु के भेजे गए शरीर को वापस धरती पर भेजने लगे। जब वह त्रिशंकु के शरीर को वापस धरती पर भेजने लगे तो इसे विश्वामित्र जी ने अपना अपमान समझा और उन्होंने हार नहीं मानी। 

उन्होंने फिर से त्रिशंकु के शरीर को स्वर्ग में भेज दिया। जब देवताओं ने देखा कि बार-बार महर्षि विश्वामित्र त्रिशंकु के शरीर को स्वर्ग लोक में भेज रहे हैं तो देवताओं में खलबली मच गई और उन्हें महर्षि विश्वामित्र के पास आने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा। 

अंत में देवताओं को महर्षि विश्वामित्र के पास आना पड़ा और उन्हें कहना पड़ा कि ऐसा करने से दुनिया के रीति रिवाज पर पानी फिर जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने महर्षि विश्वामित्र जी से माफी भी मांगी।

इसके बाद ही महर्षि विश्वामित्र ने त्रिशंकु के शरीर को वापस पृथ्वी पर बुलाया। उसके बाद सारे देवता वापस स्वर्ग लोक चले गए और त्रिशंकु का शरीर वापस पृथ्वी पर आ गया। 

कार्तिक पूर्णिमा को यह सारे काम करने से होते हैं भगवान विष्णु प्रसन्न

कार्तिक पूर्णिमा को अगर आप विष्णु भगवान को प्रसन्न करने हेतु दिया जलाएंगे तो विष्णु भगवान प्रसन्न होंगे। ऐसा माना जाता है कि अपने घर में आसपास के मंदिरों में और पीपल के पेड़ के नीचे साथ ही गंगा नदी के किनारे पर दिया जलाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनकी दया दृष्टि आप पर बनी रहती है। इसके साथ यह भी मान्यता है कि आप जितने ज्यादा दिए जलाएंगे आपके ऊपर उतनी ही माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी। 

तुलसी नमन मंत्र

अगर आप तुलसी मंत्र पढ़कर माता तुलसी की पूजा करना चाहते हैं तो हम आपको नीचे तुलसी नमन मंत्र  भी बताते हैं जिससे आप तुलसी माता की आरती भी कर सकते हैं। 

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः।नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।। 

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म के अनुसार कार्तिक मास के अंतिम दिन यानी की पूर्णिमा के दिन को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। हिंदू शास्त्र में ऐसा वर्णन किया गया है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना अगर आप दिल से करेंगे तो आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी। 

इसके अलावा इस दिन का यह भी महत्व है कि इस दिन गरीब असहाय को दान भी दिया जाता हैं। आप जितना चाहते है दान करें। आपके पास और आपके घर लक्ष्मी माता का वास उतना ही ज्यादा होगा।

संक्षेप में कहें तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान भी करना बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन गंगा स्नान करने स्वयं स्वर्ग से देवी देवता आते हैं। 

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उम्मीद करते है दोस्तों कार्तिक पूर्णिमा कब है इसका महत्व पूजा विधि kartik purnima importance, Puja Vidhi, Vrat Katha In Hindi का यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा. अगर आपको कार्तिक पूर्णिमा के बारे में दी जानकारी पसंद आई हो तो अपने फ्रेड्स के साथ जरुर शेयर करें.

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