श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार का महत्व और कविता | Janmashtami Vrat Katha Vidhi Mahatva In Hindi

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार का महत्व कविता Janmashtami Vrat Katha Vidhi Mahatva In Hindi का त्योंहार योगेश्वर श्री कृष्ण का जन्मदिन हैं. देश भर के हिन्दू जन मानस के अतिरिक्त कई अन्य देशों में भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं. हिन्दू कलेंडर के अनुसार भादो मास की कृष्ण अष्टमी के दिन श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. कहते हैं इसी दिन उन्होंने अपने मामा कंस का वध किया था. श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ब्रज और मथुरा कान्हा के गीतों और भजनों से सराबोर हो जाती हैं. सभी मन्दिरों को विशेष सजावट के साथ सजाने के बाद श्री कृष्ण-राधा की झाकियाँ भी निकाली जाती हैं. दही हांडी, झुला झुलाना और रासलीला जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता हैं. जन्माष्टमी के अवसर पर इनके भक्त व्रत रखने के साथ ही भगवान श्री कृष्ण की पूजा अराधना भी करते हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार का महत्व और कविता

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार का महत्व और कविता Janmashtami Vrat Katha Vidhi Mahatva In Hindi

2021 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार Krishna Janmashtami 2021 Date Time Muhurat

30 अगस्त को हैं. भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता हैं. इसी दिन मथुरा के राजा कंस की जेल में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था. इसी कारण इस तिथि को कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता हैं.

इस दिन सभी मन्दिरों में भजन कीर्तन तथा झांकिया निकाली जाती हैं. इस तिथि को भक्तगण कृष्ण का उपवास रखते हैं तथा मध्यरात्रि को प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण करते हैं.

  • कृष्ण जन्माष्टमी मुहूर्त्त (Krishna Janmashtami Muhurat)
  • निशीथ पूजा मुहूर्त :23:59:27 से 24:44:18 तक
  • अवधि :0 घंटे 44 मिनट
  • जन्माष्टमी पारणा मुहूर्त :05:57:47 के बाद 31,
  • दही हाण्डी मंगलवार, अगस्त 31, 2021 को

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत

श्री कृष्ण से आस्था रखने वाले भक्त उनके जन्म अवसर पर व्रत अवश्य रखते हैं. जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद पुरे दिन के व्रत का सकल्प कर व्रत आरम्भ किया जाता हैं. अगले दिन जब कृष्ण अष्टमी की समाप्ति के यानि पारण के समय व्रत तोडा जाता हैं.

अष्टमी के दिन भगवान् कृष्ण की पूजा का समय मध्यरात्री निशीथ के समय माना जाता हैं, जो इस वर्ष 43 मिनट की अवधि का समय हैं. इस समय के दौरान कृष्ण की पूजा अर्चना की जाती हैं.

पुरे विधि विधान के नियमो के साथ सभी सोलह मन्त्रो के उच्चारण के साथ कृष्ण की पूजा अराधना की की जाती हैं.तथा अगली सुबह पारण के समय अष्टमी व्रत को तोडा जाता हैं.

जन्माष्टमी व्रत विधि (krishna janmashtami vrat vidhi)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन कृष्ण की प्रतिमा पर दूध. दही तथा तेल को छिड़क कर पालने में झुलाया जाता हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को व्रत धारण करने से मनुष्य के सातों जन्म के पाप धुल जाते हैं.

कुछ स्थानों पर जन्माष्टमी के दूसरे दिन नन्द महोत्सव भी मनाया जाता हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजन विधि के अनुसार पलंग पर देवकी की मूर्ति के साथ श्रीकृष्ण जी को विराजमान कराया जाता हैं.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार का महत्व

आज से तक़रीबन 5 हजार वर्ष पूर्व आराध्य देव भगवान् श्री कृष्ण का जन्म वर्तमान यूपी के मथुरा में हुआ था. ब्रज और कृष्ण नगरी के नाम से मशहूर इस नगरी से भक्तो का गहरा लगाव हैं.

कालांतर में यह हिंदुओ का यह महान पर्व बन चूका हैं. जन्माष्टमी के दिन कृष्ण नगरी भक्तो के गायन से गुजं उठती हैं, दूर देश से भक्त इस दिन यहाँ आकर इस जन्माष्टमी कार्यक्रम में शामिल होते हैं. जन्माष्टमी के दिन मथुरा का द्रश्य बेहद मनभावन होता हैं.

इस दिन मुख्यत बिना अन्न ग्रहण किये व्रत रखा जाता हैं. फलाहार ग्रहण किया जा सकता हैं. मध्यरात्रि को जन्माष्टमी मनाने के बाद ही भोजन लिया जाता हैं, विभिन्न राज्यों में कृष्ण जन्माष्टमी अलग-अलग तरीके से मनाई जाती हैं.

साधारणतया सुबह मन्दिरों और मूर्तियों की साफ़ सफाई व् श्रृंगार के बाद पंजीरी, पंचामृत के साथ आरती की जाती हैं.

कृष्ण विष्णु जी के अवतार माने जाते हैं, उनका जन्मदिवस यानि जन्माष्टमी को भारत के अधिकतर राज्यों में भिन्न भिन्न तरीकों व् नामों जानते हैं. कही इन्हे अष्टमी रोहिणी कहते हैं तो कही श्री जयंती, कृष्ण जयंती और रोहिणी अष्टमी, कृष्णाष्टमी जबकि कुछ स्थानों पर गोकुलाष्टमी के नाम से जाना जाता हैं.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी कथा

जब इंद्र देवता नारद जी से कृष्ण जन्माष्टमी के पावन व्रत की कथा सुनाने के लिए निवेदन करते हैं, तो नारद जी कहते हैं, सुनो इंद्रा द्वापर युग के आरम्भ में कंस नाम से एक पापी का जन्म होता हैं. जो बुरे कार्यो में लीन रहने के साथ ही मानव का दुशमन बन जाता हैं.

एक बार वह ज्योतिष से अपने अंत कहानी के बारे में जानना चाहता हैं, तो इस पर वह पंडित कहता हैं कि हे कंस तुम्हारी मृत्यु तुम्हारी ही बहिन के पुत्र के हाथो होगी. जो सूर्योदय के समय तुम्हारा अंत करेगा, अनर्थियो के अंत के कारण वो इस संसार में कृष्ण के नाम से प्रसिद्ध होगा.

आगे कंस पूछता हैं, महाराज यह भी बताए कि किस दिन देवकी का पुत्र मेरा वध करेगा. हे राजन, भादो मास की शुक्ल अष्टमी के दिन कृष्ण और तुम्हारा भयकर युद्ध होगा, जिनमे आपका वध होगा और कृष्ण की विजय होगी. इस कथा को पूर्ण विस्तारित रूप से इंद्र के निवेदन पर नारद जी आगे कहते हैं.

अब तक देवकी की सातों संतानों को कंस इस भय से मार डालता था, ताकि कही उनका विनाश न हो जाए. अपने जीवन रक्षा की खातिर उन्होंने अपने सिपाहियों को देवकी की पहरेदारी का हुक्म दिया.

कंस का आदेश पाने के बाद वे देवकी की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखने के लिए उनके घर पहरा देने लगे. एक दिन पानी भरने के लिए देवकी तालाब की ओर निकल गईं.

तालाब की मेड पर बने वृक्ष की छाया में बैठकर वह विलाप करने लगी, तभी वहां पर यशोदा नामक दूसरी स्त्री जल भरने आती हैं. तथा उनके विलाप करने का कारण जानना चाहती हैं.

इस पर देवकी अपनी पूरी व्यथा बताती हैं. तभी यशोदा कहती हैं, कि मै भी गर्भवती हु, संभवत मुझे पुत्री की प्राप्ति होने पर मै आपके पुत्र की रक्षा की खातिर अपने पास रख लुंगी आप मेरी बेटी को रख लेना.

उसी समय पर कंस द्वारा देवकी का पता पूछे जाने पर उन्हें पानी भरने के लिए तालाब पर जाने की बात कहने पर द्वारापालो को फटकार कर उन्हें निगरानी में देवकी के पीछे भेजा जाता था. उसी वक्त देवकी यशोदा के साथ बात-चीत कर लौट आती हैं.

ज्यो-ज्यो देवकी के गर्भावस्था के दिन बढ़ने लगे, कंस का भय कई गुना बढ़ने लगा. तथा बहिन देवकी को पूरी तरह कैद में बंद कर दिया गया. उनकी कोठरी के बाहर ताला लगवा दिया गया.

कई दानवो को उनकी सुरक्षा में लगा दिया गया. वृष राशी में कृष्ण पक्ष अष्टमी की अर्धरात्रि को बुधवार की रात भगवान् कृष्ण ने जन्म लिया. उनके जन्म के साथ ही देवकी की कोठरी के ताले स्वत: ही टूट गये तथा सभी दानव द्वारपालों को गहरी नीद सुला दिया.

अवसर पाकर देवकी ने वसुदेव से कहा- पतिदेव आप इस पुत्र को गोकुल गाँव के नन्दबाबा और यशोदा के घर छोड़ आए. तभी वसुदेव कान्हा को टोकरी में रखकर रात के अँधेरे में निकल गये. घनघोर रात में उन्हें तेज प्रवाह के साथ बहती यमुना को पार करना सबसे बड़ी चुनोती थी.

जब यमुना की तेज धारा में कृष्ण का स्पर्श हुआ तो वह स्वत: स्थिर हो गईं, किसी तरह वासुदेव जी ने यमुना पार कर नन्दबाबा के यहाँ पहुचे और बालक कृष्ण को उन्हें सौपकर उनकी कन्या को अपने साथ लेकर कंस की बंदी में पहुच गये.

जब सुबह हुई तो कंस ने उन पहरेदारो को जगाया और उन्हें पता लगाने को कहा कि देवकी को क्या हुआ. जब द्वारपालों ने पुत्री प्राप्ति की सुचना कंस को दी. तो वह झपट कर उसने बच्ची को छीन लिया और पास ही पड़े पत्थर पर जोर से दे मारा.

वह कन्या विष्णु द्वारा धरती पर भेजी गई मायावी बालिका थी. पत्थर पर गिरते ही वह तेज गर्जना के साथ अन्तरिक्ष की ओर जाकर विद्युत के रूप में परिवर्तित हो गईं.

आकाश में जाते समय आकाशवाणी के साथ उन्होंने कहते हुए बोली मै विष्णु द्वारा भेजी गई मायावी बालिका हु. पापी तेरे अंत करने वाला गोकुल गाँव में नन्द बाबा के घर अवतरित हो चूका हैं. जिससे तेरा बचना नामुमकिन हैं,

तू चाहे जो कर ले. चिंता के मारे कंस ने पूतना नामक राक्षसी को कृष्ण का वध करने के लिए गोकुल भेजा. पुतनी बालक कान्हा को दूध पिलाने के बहाने अपनी गोद में लेकर मारना चाही. मगर भगवान कृष्ण ने उनके दूध को विष बनाकर पूतनी का वध कर डाला.

पूतना के वध से व्याकुल कंस ने कृष्ण को मारने के लिए कोए, घोड़े और बैल का रूप बनाकर राक्षसों को भेजा मगर उनका भी वही हुआ जो पूतना का हुआ.

कृष्ण जन्माष्टमी बधाई/ कविता

कृष्ण हैं जीनका नांम
हैं गोकुल उनका धामं
ऐसे गोपियों के श्याम कृष्ण
को सब-जन का प्रणाम
आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं


श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई एव शुभकामनाएं
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैयालाल की ||


माकन चोर नन्दबाबा के कीशोर, बाधि जिनने प्रेम की ड़ोर
राधे-कृष्ण जिन्हेँ,पूजती दुनिया सारी,
आवों कृष्ण के गुण गाए सब-मिल आज कृष्णाजन्माष्टमी मनाए.


नंदबाबा के घर आनन्द भयो,
जय कन्हैया लाल की.
जय बोलो गोपाल की,
हाथी दियो घोडा दियो
ओर दियो पालकी
यशोदा को लाल भयो
जय बोलो गोपाल की
जय बोलो गोपाल की
विश यु Happy Krishna Janmashtami


krshn jee ka kadam aapake ghar aae
aapake khushiya ka deep jalaaye
pareshaanee aapase aankhe churae
krshn janmaashtamee kee aapako subh kaamanaaye …
janmaashtamee badhaee ho !!!!!!!!!!!!!!!!!

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कृष्ण की आरती (krishna ki aarti hindi)

आरती श्री कृष्ण जी की कीजै !! टेक…
शकटासुर को जिसने मारा ! तरानाम्रत को आय पछारा !!
उसके गुण का वर्णन कीजै !! आरती ….
यमुनार्जुन वट जिसने तारे ! बकासूरादि असुर जिन मारे !!
उनकी कीर्ति वर्णन कीजैं !! आरती…….
जिसने धेनुक प्राण निकारे ! कालिया नाग नाथि के डारे !!
उसी नाथ का कीर्तन कीजैं !! आरती …
व्योमासुर को स्वर्ग पैठाया ! कुब्जा को जिसने अपनाया !!
दयावान के सुपरथ हुजैं !! आरती …..
वृषभासुर को जिसने मारे ! चारुणदिक सभी पछारे !!’
आरती यदुनंदन की कीजै !! आरती ……….
जिसने केसी केश उखारे ! कंसासुर के प्राण निकारे !!
आरती कंस हनन की कीजै !! आरती …
जिसने द्रोपदी की लाज बचाई ! नरसी जी का भात चढ़ाई !!
आरती भक्त वत्सल की की कीजै !! आरती …..
भक्तन के हैं जो रखवाले, रनवीरा मन बसने बारे
उन्हां पर बलिहारी हुजे !! आरती …

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