आलस्य पर अनमोल वचन सुविचार | Laziness Quotes in Hindi

आलस्य पर अनमोल वचन सुविचार | Laziness Quotes in Hindi : आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु माना गया हैं. एक आलसी व्यक्ति अपना बहुमूल्य समय यूँ ही गवां देता है जिसके लिए उसे जीवन भर पछताना पड़ता हैं. जिन व्यक्तियों के चरित्र में यह अवगुण होता है अक्सर सफलता इनसे दूर ही रहती हैं. यदि आज भारत में गरीबों की संख्या अधिक है तो इसकी एक वजह यहाँ के लोगों के आलस्य के कारण भी हैं. लोग अक्सर काम टालने और आलस में समय को बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ते हैं. हमें इस दुर्गुण से हमेशा ही दूर रहना चाहियें. आज    आपके लिए हम आलस्य पर अनमोल वचन (Laziness Quotes) में दार्शनिकों के थोट्स पढ़ेगे.

आलस्य पर अनमोल वचन सुविचार | Laziness Quotes in Hindi

आलस्य पर अनमोल वचन सुविचार | Laziness Quotes in Hindi

वह मनुष्य ही क्या है यदि उसके जीवन का मुख्य व्यापार केवल खाना और सोना हैं, वह सचमुच पशु से अधिक कुछ नही हैं.


हम अवस्था की अपेक्षा निक्कमेपन से अधिक बुड्ढ़े हो जाते हैं.


अधीरता और आलस्य ये दो ऐसे पाप हैं जिनसे अन्य पाप जन्म लेते हैं.


आलस्य समस्त मनोविज्ञान का जनक हैं.


आलस्य वह कीड़ा है जो मस्तिष्क को खाकर खोकला बना देता हैं.

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कुछ न बनने का मार्ग है कुछ न करना.


आलस्य केवल दुर्बल दिमाग वालों की शरणस्थली हैं.


संभवतः मनुष्य एकमात्र ऐसा जीव हैं जिसको आलसी कहा जा सकता हैं.


एक आलसी, चीटीं के पास जाओं, उसकी जीवन पद्धतियों पर विचार करों और ज्ञानी बन जाओं.


आलस्य वह है जो समस्त बुराइयों का स्रोत, कुआँ और मूल होता हैं.


आलस्य बुद्धि/ समझदारी में जंग लगा देता हैं.


आलस्य पवित्रता के पोत की चट्टान अव लगकर नष्ट हो जाना हैं.


आलस्य प्रलोभन का केंद्र स्थल, रोग का पालना, समय का नाशक, प्रसन्नता को खा जाने वाला कीड़ा, जिसके पास कोई काम नही हैं, उसका जीवन महत्वहीन हैं उसमें कोई नवीनता नही होती हैं. और जब नवीनता कब्र में लेटा दी जाती है तो आराम से दफनाना तो इसके बाद शीघ्र होगा ही.


व्यस्तता का अभाव आराम करना नही हैं, खाली दिमाग दुखित दिमाग होता हैं.


एक आलसी/ निकम्मा दिमाग शैतान की कार्यशाला होता हैं.


आलसी व्यक्ति सदैव कुछ करने की इच्छा रखते हैं.


ऐसा लगता है मानो शैतान ने जानबुझकर अनेक सद्गुणों की सीमाओं पर बाधाओं के रूप में आलस्य को स्थापित कर दिया हैं.

आलस्य पर सुविचार

आलस्य जीवन की वह बाधा है जो मनुष्य को सफल नहीं होने देती है। असफलता की ओर ले जाती है।


आलसी मनुष्य कभी अपना कार्य समय पर नहीं करते हैं जिससे उनके मनोरथ कभी पूरे नहीं होते हैं व अपना मार्ग भटक जाते हैं।


आलस्य वो दुर्गुण है जिससे जीवन परेशानियों से भर जाता है। जीवन में कष्टों से सामना करना पड़ता है।


आलस्य मनुष्य जीवन में लक्ष्य पूर्ति में रुकावट बनती है। मनुष्य कभी आलस्य के दम पर अपने कार्य पूर्ण नहीं कर सकता है और न ही अपने सपने साकार कर सकता है।


जीवन में आलस्य करना मतलब अपना जीवन अंधेरे की ओर ले जाना होता है। रोशनी के लिए आलस को दूर करना ज़रूरी है वरना जीवन अंधकारमय हो जाता है।


जीवन में सुख, समृद्धि, खुशहाली आलस्य का त्याग करके ही प्राप्त की जा सकती है।


आलसी मनुष्य कुछ नहीं करना चाहता जिससे वह अपना स्वास्थ्य भी बिगाड़ देता है। उसका मन मस्तिष्क भी आलसी हो जाता है। ऐसे मनुष्यों के पास कार्य न करने के बहाने कई होते हैं।


जीवन संघर्षों में आलस्य से कभी जीत हासिल नहीं की जा सकती है। जीत के लिए मेहनत करनी पड़ती है।


मनुष्य का आलस्य ही उसे जीवन में खुशी से दूर कर देता है वो सो कर अपना जीवन नष्ट कर लेते हैं। आलस्य की वजह से मनुष्य सक्रिय नहीं रह पाता है।


आलसी मनुष्य कभी दूसरे मनुष्य के संपर्क में नहीं रह पाते हैं और अपने तक सीमित हो जाते हैं। मनुष्य अपना कार्य भी सुचारू रूप से नहीं कर पाते हैं।


आलस्य मनुष्य जीवन को विफलता की ओर ले जाती है और जीवन में मनुष्य अपना सम्मान खो देता है।


आलस्य से जीवन में कोई नयापन नहीं आ पाता है और मनुष्य न कुछ अच्छा सीख पाता है।


आलसी मनुष्य कुछ पाने के लिए बिना कुछ किए सब कुछ पाना चाहते हैं। बिना मेहनत का कुछ भी मिला टिकता नहीं है।


आलसी मनुष्य अपना जीवन लापरवाही की वजह से किसी बात पर सही ध्यान नहीं रख पाते हैं।


आलस्य के कारण मनुष्य अपने सुनहरे मौके गवां देते हैं और जिंदगी खुशी पूर्वक जी नहीं पाते हैं।


आलसी मनुष्य को कभी किसी कार्य में मन नहीं लगता जिससे उसके कार्य समय से पूर्ण नहीं होते हैं जिस कारण मनुष्य अपने ध्येय सें दूर हो जाते हैं।


आलसी मनुष्य की कभी कथनी करनी में समानता नहीं मिलती है।


आलस्य मनुष्य को विश्वासपूर्ण नहीं बना पाती है उसके व्यक्तित्व में विश्वास का गुण रिक्त होता है क्योंकि आलस के कारण वह जो कहता है उसे अपनी कथनी करनी अनुसार निभा नहीं पाता है।


कार्य के प्रति आलस्य सही नहीं होता है और कार्य पूर्ति में बाधा साबित होता है। मनुष्य आलस्य के कारण अपना जीवन निरर्थक कर लेता है।


मनुष्य को तरोताज़ा महसूस करने के लिए आलस्य का त्याग करना चाहिए तभी ताज़गी महसूस होगी।


आलस्य को दूर करके ही मनुष्य अपने जीवन में स्फूर्ति ला सकता है।


आलस में पड़कर मनुष्य को कुछ करने को मन नहीं करता है जिस वजह से उसे जीवन में नीरसता मिलती है।


आलस के कारण मनुष्य अपने जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता को दूर कर देता है और जीवन का सही उद्देश्य पूर्ण नहीं कर पाता है।


आलस जो करता है वो अपने जीवन में काफी कुछ खो देता है खुशी से दूर होता जाता है।


आलस्य जीवन पथ पर नीचे की ओर गिरा देता है कभी ऊँचा उठने नहीं देता है।


आलस्य मनुष्य का वो दुर्गुण है जो सद्गुण से हटकर सफल मार्ग को असफल मार्ग बना देता है।


आलस्य को दूर करके ही मनुष्य अपने जीवन की परेशानियों को दूर कर सकता है।


आलसी मनुष्य को कोई पसंद नहीं करता है जिस वजह से वह अकेला रह जाता है।


आलस्य की वजह से मनुष्य को कड़वे शब्द सुनने पड़ते हैं एवं जीवन कठिनाइयों से भर जाता है।


आलस्य मनुष्य की अच्छाई में वो रुकावट है जो जीवन के लिए सुख के रास्ते बंद कर देती है।


आलस्य में समय व्यर्थ करने के कारण समय मनुष्य का साथ नहीं देता है।


आलसी मनुष्य के कार्य सिद्ध नहीं होते बल्कि अधूरे ही रहते हैं।


आलस्य में जीवन व्यतीत करना जीवन डूबने के समान है।


आलसी की भाँति जीवन जीने वाले का जीवन व्यर्थ समान है।


आलस्य कार्य पूर्ण में रुकावट है और ज़हर समान है एवम् परिश्रम ही मनोरथ पूरे कर सकता है।


आलस्य एक प्रकार की बीमारी है जिसे मनुष्य को अपने जीवन से रोग मुक्त करना चाहिए।


मनुष्य अगर अपने जीवन में खुश रहना चाहता है तो आलस्य को दूर भगाना पड़ेगा।


आलस्य गरीबी को आमंत्रित करती है, आलस्य गरीबी समान है।


आलस्य मन मस्तिष्क को निर्जीव कर देता है।


मनुष्य आलस्य के कारण कितना जोखिम उठाता है। अगर मनुष्य को ज्ञान हो तो जीवन सफल बनाया जा सकता है।


आलस्य मनुष्य को कभी संतुष्टि नहीं दे सकता है।


आलस्य से कभी कोई सार्थक प्रेरणा प्राप्त नहीं होती है।


आलस्य ईश्वर की दी गई  जिंदगी को अपमानित करने के समान है अगर हाथ पैरों का इस्तेमाल अपने कार्य के लिए ना किया जाए, मन मस्तिष्क को जागरूक ना करा जाए।


आलसी मनुष्य का संसार में किसी कार्य में दिल नहीं लगता है, कुछ नहीं करना चाहते हैं और अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं।


आलस्य से कई दुर्गुण उत्पन्न होते हैं जो जीवन को पीछे धकेल देते हैं।


इंसान अगर अपना वर्तमान सही नहीं करता तो आलस्य के कारण अपना भविष्य बर्बाद कर लेता है।


आलस्य एक तरह से मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है जो उसका कभी भला नहीं कर सकता है।


आलसी मनुष्य कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाते जब उन्हें ज़रूरत होती है।


आलस जीवन को नष्ट करने में सहयोग देता है जबकि मेहनत जीवन बना देती है।


आलसी मनुष्य मेहनत करने से व कोशिश करने से दूर भागते हैं और अपना जीवन मुश्किल बना लेते हैं।


आलसी मनुष्य अपने काम को पूरा करने का आसान तरीका खोजते रहते हैं कभी समय पर कार्य नहीं करते हैं जिस वजह से उनका कार्य हमेशा अधूरा रह जाता है।


ईश्वर भी उन्हीं का साथ देते हैं जो काम करते हैं। आलसीपन ईश्वरीय कृपा से भी वंचित कर देते हैं।


आलस एक सज़ा है जो मनुष्य अपने जीवन में अपनाकर अपना समय उस सज़ा को भोगने में लगा देता है।


आलस्य किसी मनुष्य को कोई प्रेरणा नहीं देती है बल्कि आगाह करती है कि आलस्य से जीवन तबाह हो जाता है।


मनुष्य अगर आलस्य को अपने जीवन में आदत बना ले तो उसका पतन निश्चित है।


मनुष्य आलस्य को दूर कर ही उद्यमी बन सकता है।


मेहनत जीवन निखार देती है तो आलस जीवन बिगाड़ देती है।


आलस्य कभी किसी का सगा नहीं हो सकता है।


आलस्य जीवन के लिए अभिशाप समान है जिससे मुक्ति मात्र जीवन से आलस्य को दूर करने पर ही प्राप्त होती हैं।


आलस्य मनुष्य को जवानी में वृद्ध कर देती है। आलस्य के कारण मनुष्य अपनी उम्र से ज्यादा उम्र का लगता है और शरीर भी शिथिल हो जाता है, पर्याप्त स्फूर्ति नहीं मिलती है।


आलस्य का त्याग करके ही सिद्धि प्राप्त की जा सकती है चाहे मनुष्य असहाय हो या रोगग्रस्त हो या जवान ही क्यों ना हो।


आलसी मनुष्य जब अपना हित करने का सामर्थ्य खो देता है तो दूसरों के लिए भी हितकारी साबित नहीं होता है।


आलस्य बुद्धि हर लेती है और विद्या को नष्ट करने के लिए ज़िम्मेदार होती है।

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