मायावती का जीवन परिचय | Mayawati Biography in Hindi

मायावती का जीवन परिचय | Mayawati Biography in Hindi समाज में राजनीतिक साम्राज्य की छाप दिख जाती है जो भारत जैसे देश में अनेक राजनीतिज्ञों की छवि को सामने लाते हैं। देश के प्रति उनके कार्य एवं प्रगति पथ पर देश की सफलता को दिखाते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में हर नेता अपनी सशक्त छाप, अपने व्यक्तित्व एवं कार्य कौशल के माध्यम से सबके सामने समक्ष आते हैं और लोगों के मध्य एक सशक्त छवि बनाते हैं। आज हम ऐसी ही एक शख्सियत के जीवन के अनेक पहलुओं से अवगत होते हैं, जो नारी होकर एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरी। 

मायावती का जीवन परिचय | Mayawati Biography in Hindi

मायावती का जीवन परिचय Mayawati Biography in Hindi

राजनीति क्षेत्र में पुरुषों के मध्य जिन्होंने अपनी विशिष्ट छाप स्थापित की है। माया वती एक विख्यात नाम राजनीतिक क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है जिन्होंने सिद्ध करके दिखाया है कि मजबूत हौसलों से अपना एक मुकाम पाया जा सकता है।

कौन है मायावती?

राजनीतिक क्षेत्र में अपनी क्षमता, अपने कार्य कौशल, प्रतिभा से अपनी सशक्त पहचान बनाने वाली महिला मायावती को लोग ‘आयरन लेडी’, ‘बहन जी’ के नाम से भी जानते हैं। माया वती का पूरा नाम ‘मायावती प्रभुदास’ है कहीं कहीं उन्हें ‘माया वती नैना कुमारी’ के नाम से भी जाना जाता है। 

भारत के इतिहास में पहली दलित महिला जो ‘उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री’ बनी। राजनीति के क्षेत्र में आने से पूर्व वह एक ‘शिक्षिका’ भी रह चुकी थी और राजनीति में ‘बहुजन समाज पार्टी’ (बसपा) पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। वह 4 साल तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। 

एक कुशल राजनीतिज्ञ, योग्य मंत्री, राज्यसभा की सदस्या, पिछड़े वर्ग अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उत्थान में सहयोगी रही हैं, जो प्रशंसनीय है। अपने कार्यकाल में राज्य के प्रति उनके कार्य कौशल, कुशल कानून एवं शासन व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सफल स्वरूप देने के लिए सराही गई हैं।

परिचय

व्यक्तिगत नाम – आयरन लेडी, बहन जी, कुमारी माया वती
जन्म की तारीख – 15 जनवरी वर्ष 1956
आयु – 65 वर्ष
कार्य – राजनेत्री, मुख्यमंत्री
आयु – 65 वर्ष
कार्य शुरुवात – शिक्षिका
नागरिकता – भारतीय
धर्म – हिन्दू

मायावती का जन्म

अपने माता-पिता का नाम गर्व से ऊँचा करने वाली माया वती का जन्म ’15 जनवरी 1956′ को ‘नई दिल्ली’ के ‘श्रीमती सुचेता कृपलानी हॉस्पिटल’ में हुआ था। माया वती मुख्यतः उत्तर प्रदेश के गौतम नगर के छोटे से गाँव बादलपुर से हैं। माया वती हिंदू परिवार से ताल्लुक रखती हैं। माया वती के पिता जी का नाम प्रभु दास एवं माता जी का नाम रामरती है।

उनके पिताजी गौतम बुद्ध नगर के बादलपुर में डाक विभाग में कार्य करते थे। इसलिए उस वक्त सपरिवार वही रहते थे। माया वती के छह भाई एवं दो बहने हैं। उनके एक भाई आनंद कुमार भी राजनेता हैं।

मायावती की शिक्षा

मायावती का शिक्षा कार्यकाल काफी सराहनीय रहा है। उन्होंने पढ़ाई के क्षेत्र में स्नातक की शिक्षा वर्ष 1975 में दिल्ली के ‘कालिंदी वीमेन कॉलेज’ से की थी। इसके बाद वर्ष 1976 में बी.एड की डिग्री उन्होंने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के वी.एम.एल.जी कॉलेज से वर्ष 1983 मेरठ विश्वविद्यालय से की थी।

 तत्पश्चात कानून की पढ़ाई करने के लिए उन्होंने एल.एल.बी दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और कानून की डिग्री प्राप्त की। वे पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सर्विस की परीक्षा की तैयारी भी करती थी। बी.एड करने के बाद वे राजनीति में जाने से पूर्व दिल्ली के स्कूल में शिक्षिका के रूप में पढ़ाती भी थी।

मायावती का निजी जीवन

माया वती जितनी कर्मठ है उतना ही उनमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा है। राजनीति जैसे क्षेत्र में जहाँ पुरुषों की सियासत हर तरफ ज्यादा दिखती है उन्होंने नारी के रूप में अपने दृढ़ व्यक्तित्व एवं आत्मविश्वास के बल पर अपनी एक सफल जगह बनाई। 

माया वती अविवाहित हैं। उन्हें पढ़ना और लिखना पसंद है। उनके पसंदीदा राजनेता कांशीराम है जिनसे वे काफी प्रभावित हैं।

मायावती की पसंदीदा रुचियाँ

प्रिय भोजन – राजस्थानी, मांसाहारी
प्रिय शौक –लिखना, पढ़ना, वाद्ययंत्र बजाना
प्रिय नेता – कांशीराम
प्रिय संगीत – धार्मिक
प्रिय व्यायाम – एरोबिक्स

मायावती का करियर

माया वती का कार्यक्षेत्र, उनकी पढ़ाई के प्रति लगन को देखकर पता चल जाता है। उन्होंने राजनीति में प्रवेश से पूर्व दिल्ली के इंद्रपुरी जेजे कॉलोनी में एक शिक्षिका के रूप में अपने करियर की शुरुवात की थी और साथ ही साथ ‘सिविल सर्विस’ की पढ़ाई भी कर रही थी। 

इसी दौरान माया वती राजनेता कांशीराम के संपर्क में आई और उनके विचारों से इतनी प्रभावित हुई कि कांशीराम द्वारा राजनीति में प्रवेश करने के आग्रह को स्वीकृति दी। 

उन्होंने कांशीराम द्वारा वर्ष 1984 में बहुजन समाज पार्टी जिसका चुनाव चिन्ह हाथी है कि स्थापना करने पर इस पार्टी में शामिल हो गई थी। वर्ष 1989 में संसद के सदस्य के रूप में माया वती का चयन हुआ। माया वती वर्ष 1994 में राज्य सभा के उच्च सदन की पहली बार सदस्य बनी थी।

माया वती के करियर के विभिन्न सफल पहलू काफी सराहनीय हैं। उनके करियर के विभिन्न रूप इस प्रकार हैं:

राजनीतिक कार्यकाल

  • वर्ष 1984 में माया वती राजनेता कांशीराम से इतनी प्रभावित हुई थी कि उनके द्वारा प्रेरित करने पर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गई थी।
  • वर्ष 1989 में अपनी पहली जीत लोकसभा का चुनाव लड़ कर हासिल की जहाँ वो जनता दल के मंगल राम प्रेमी के विपक्ष खड़ी थी। उन्होंने बिजनौर निर्वाचन क्षेत्र से मंगल राम प्रेमी को 8879 के मतों से हराया था।
  • वर्ष 1984 में माया वती राज्यसभा की सदस्य के रूप में चुनी गई थी।
  • वर्ष 1995 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद के कार्यभार को संभाला एवं 3 जून से 18 अक्टूबर 1995 तक सफलतापूर्वक अपना कार्य किया। मायावती पार्टी प्रमुख भी नियुक्त की गई।
  • वर्ष 1996 में उन्होंने 2515 मतों के अंतर से जीत हासिल की जहाँ वह हरौरा निर्वाचन क्षेत्र के वर्ष 1996 से वर्ष 1988 तक उत्तर प्रदेश की विधायक थी।
  • वर्ष 1997 में 21 मार्च से 20 सितंबर के अल्प समय में मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कार्य किया था।
  • वर्ष 1988 में माया वती ने अपनी दूसरी जीत हासिल की जहाँ उन्होंने अकबरपुर निर्वाचन क्षेत्र से डॉ ललिता प्रसाद कन्नौजिया को लगभग 25,179 मतों के अंतर से हराया था।
  • वर्ष 1999 में अकबरपुर क्षेत्र में अपने स्थान को स्थापित करने के लिए उन्होंने 53,386 मतों के अंतर स्वरूप राम पियारे सुमन को हराया था।
  • मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने 3 मई वर्ष 2002 से 29 अगस्त वर्ष 2003 में अपना अल्प कार्यकाल पूरा किया था।
  • मायावती का चुनाव वर्ष 2004 में राज्यसभा के लिये हुआ था जहाँ उन्होंने वर्ष 2004 से 5 जुलाई 2007 में राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यभार संभाला था।
  • माया वती ने अपने मुख्यमंत्री पद के चौथे कार्यकाल के स्थापित रूप को बनाए रखने के लिए 58,269 के भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की तत्पश्चात 5 जुलाई वर्ष 2004 को लोकसभा से त्यागपत्र भी दिया।
  • माया वती विधानसभा चुनाव में वर्ष 2007 में श्रीनगर सीट से समाजवादी पार्टी के आर ए उस्मानी से हार गई थी। लेकिन उनकी पार्टी को अत्यधिक बहुमत मिलने की वजह से उन्हें पुनः उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बन गई और अपना कार्यभार 15 मार्च 2012 तक संभाला।
  • 3 अप्रैल 2012 में उनका चयन राज्यसभा के लिए हुआ था।
  • वर्ष 2014 में माया वती उत्तर प्रदेश से भारी सीटों से हार गई थी इसके पश्चात उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
  • वर्ष 2017 में बहुजन समाज पार्टी विधानसभा में 403 सीटों में से सिर्फ 19 सीटें ही जीत पाई। इस वर्ष उन्हें असफलता मिली।
  • वर्ष 2018 में माया वती ने पार्टी की हार के बाद राज्यसभा से त्यागपत्र दे दिया था।

मायावती का कार्यभार मुख्यमंत्री के रूप में इस प्रकार है:-

  • माया वती जून वर्ष 1995 में समाजवादी पार्टी में प्रवेश कर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री नियुक्त हुई एवं मुख्यमंत्री के पद का कार्यभार संभाला।
  • वर्ष 1995 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में प्रथम दलित महिला के रूप में माया वती ने इतिहास रचा। इस वर्ष कार्यकाल समय अल्प रहा।
  • विधायक के रूप में वर्ष 1996 से वर्ष 1998 तक मायावती उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा में कार्यरत रही।
  • वर्ष 1997 में माया वती पुनः उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी एवं कुछ महीने कार्यरत रही।
  • वर्ष 2002 में माया वती ने अपनी पार्टी को बीजेपी से जोड़कर तीसरी बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं।
  • वर्ष 2003 में मुख्यमंत्री के रूप में ज्यादा समय नहीं रहीं क्योंकि बीजेपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया था जिस कारण उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा इसी दौरान कांशीराम का देहांत हो गया इसके बाद माया वती ‘बाजपा’ की अध्यक्ष बन गई थी।
  • माया वती वर्ष 2007 में पुनः उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी और अपने संपूर्ण कार्यकाल को सफलतापूर्वक संपूर्ण किया और साथ ही साथ संसद राज्यसभा सदस्या के रूप में भी कार्यभार को संभाला।

मायावती के शासन काल के मुख्य कार्य की रूपरेखा इस प्रकार है:

माया वती का शासन काल काफी सफल रहा है और उनके शासनकाल में अनेक प्रशंसनीय कार्य किए गए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में माया वती एक कुशल राजनीति के रूप में उभरी हैं एवं उनके कार्यकाल में अनेक उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।

 उन्होंने अनेक विभिन्न कॉलेज खुलवाए जैसे सात मेडिकल, छह इंजीनियर, दो होम्योपैथिक, चौबीस से ज्यादा पॉलिटेक्निक, दो पैरामेडिकल, छह विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय, दो सौ से ज्यादा डिग्री कॉलेज, 572 हाई स्कूल, 5549 से ज्यादा प्राइमरी स्कूल, आई आई टी क्षेत्र में 100 से ज्यादा केंद्र खोले गए, 6 नए मंडल बनाए गए।

इसके अलावा 23 नवीन जिले, 45 से ज्यादा तहसीलों का गठन हुआ, 23 जिला अस्पताल, सत्र न्यायालय, अधिकारी कार्यालय, विकास भवन, पुलिस लाइन, ए.आर.टी.ओ ऑफिस, डाइट केंद्र खोले गए, 40 से ज्यादा विकासखंड बनाए गए, 28,419 से ज्यादा अंबेडकर ग्राम, 2400 सामुदायिक केंद्र, 2 इंटरनेशनल एयरपोर्ट खोले गए। एक मुख्यमंत्री के रुप में मायावती का शासन कल काफी सराहनीय रहा है।

मायावती पर लिखी गई पुस्तकें

  • आयरन लेडी कुमारी माया वती’

लेखक – वरिष्ठ पत्रकार ‘मोहम्मद जमील  अख्तर’,  प्रकाशन श्री कांशीराम द्वारा 14 अप्रैल 1999 को डॉ. अंबेडकर जयंती पर किया गया था।

  • लेखक अनुभवी पत्रकार ‘अजय बोरु’ के द्वारा लिखी ‘मायावती की राजनीतिक जीवनी’ नामक पुस्तक। 

मायावती द्वारा लिखित पुस्तकें

  • ‘बहुजन समाज और उसकी राजनीति’ प्रकाशन कांशीराम द्वारा 3 जून वर्ष 2000 में किया गया था।
  • ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट का सफरनामा’ पुस्तक का प्रकाशन कांशीराम द्वारा वर्ष 2006 में किया गया।
  • वहीं ‘माई स्ट्रगल रिडेन लाइफ एंड ऑफ बहुजन समाज’ उनकी पुस्तक 15 मार्च 2008 कांशीराम जयंती की पूर्व संध्या पर प्रकाशित की गई।

अवार्ड्स और उपलब्धियाँ

  • उन्हें ‘पॉल हैरिस हेलो पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था । वर्ष 2003 में यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और रोटरी इंटरनेशनल ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में पोलियो उन्मूलन के कार्य की सराहना करते हुए अवार्ड दिया था।
  • माया वती को ‘राष्ट्रीय साहू पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया जो राष्ट्रीय साहू मेमोरियल ट्रस्ट ने दिया था।
  • वर्ष 2007 में माया वती को भारत की 15वीं सबसे सशक्त महिला के रूप में सूची में अंकित किया गया था।
  • वर्ष 2008 में दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिला के रूप में 59वें स्थान पर फोर्ब्स पत्रिका में उन्हें अंकित किया गया था।
  • एक न्यूज़वीक के लेख में मायावती को वर्ष 2009 में भारत के ‘बराक ओबामा’ और ‘संभावित प्रधानमंत्री’ के रूप में दर्शाया गया था।

रोचक तथ्य

  • बॉलीवुड माया वती के जीवन पर वृत्तचित्र रिलीज करने की सोच रहा है जिसमें विद्या बालन मूल भूमिका में नजर आएँगी।
  • माया वती द्वारा 104 करोड़ रुपए पार्टी के खाते में जमा किये गए जो चुनावी सुर्खियों में रहे।
  • प्रथम चुनाव की जीत माया वती ने लोकसभा चुनाव मुजफ्फरनगर के कैराना सीट से हासिल की थी।
  • माया वती चार बार मुख्यमंत्री के पद पर सफल रूप से कार्यभार संभाल चुकी हैं : वर्ष 1995 वर्ष 1997, वर्ष 2002 से 2003 वर्ष 2007 से 2012 तक।
  • माया वती पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर है वह अपने परिवार के साथ न रहकर अलग रहती हैं।
  • मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्होंने माधव सेवा आश्रम को एक लाख धनराशि दान में दी थी।
  • माया वती अपने मुख्यमंत्री समय के दौरान अपनी कड़ी सुरक्षा की वजह से सुर्खियों में रही उनकी सुरक्षा के लिए 415 सुरक्षाकर्मी लगाए गए थे।
  • माया वती ने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान एक साथ तीन कक्षायें उत्तीर्ण की थी।
  • वर्ष 1986 में उनका गला खराब हुआ था, अधिक तेज़ आवाज़ में भाषण की वजह से ऐसा डॉक्टर का मत था।

विवाद

माया वती का राजनीति कार्यकाल काफी सफल रहा है लेकिन राजनीति में नेताओं से जुड़े कई विवाद समक्ष आ ही जाते हैं नेता किसी न किसी विवाद के घेरे में पड़ ही जाते हैं। मायावती भी इन से अछूती नहीं रही। कुछ विवाद इस प्रकार हैं:

  • माया वती की ख्याति और उनकी धनराशि से संबंधित विवाद के कारण ‘ताज कॉरिडोर केस’ में घोटाले की वजह से मायावती के घर में वर्ष 2003 में सीबीआई ने छापा मारा जिस कारण अधिक धन संपदा समक्ष आई।
  • माया वती अपने जन्मदिन के खर्चे  की वजह से भी विवाद के केंद्र में आ जाती हैं।अपने समर्थकों द्वारा रुपए के हार को पहनाया जाना फिजूल खर्च के रूप में माना गया। उनके समर्थकों ने तो वर्ष 2009 में उनके जन्मदिन दिवस को हर साल ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में घोषित कर दिया था।
  • माया वती के पास अत्यधिक धनराशि का होना उन्हें इनकम टैक्स के घेरे में ला देता है। सीबीआई द्वारा अधिक संपत्ति रखने पर मायावती पर प्रश्न उठाया गया लेकिन समर्थकों ने बचाव के रूप में तोहफे का रुप बता दिया।

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माया वती नाम अपने आप में पहचान है। एक मजबूत नारी के रूप में भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में राजनीति क्षेत्र में अपनी सफल जगह बनाने वाली महिला मायावती का संपूर्ण जीवन मार्ग प्रशस्त स्वरूप सीख देता है।

मायावती ने अपने आत्मविश्वास, दृढ़संकल्प, मेहनत एवं कार्य कौशल आदि विशेषताओं से राजनीतिक क्षेत्र में इतिहास रचकर अग्रणीय बन गई हैं। प्रस्तुत मायावती का जीवन परिचय Mayawati Biography in Hindi लेख मायावती के संदर्भ में उनके जीवन के स्वरूप को अच्छे से दर्शाता है।

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