व्यापारिक बैंक के कार्य व अर्थ । Meaning & Functions of Commercial Bank in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम व्यापारिक बैंक के कार्य व अर्थ । Meaning & Functions of Commercial Bank in Hindi में हम व्यापारी बैंक (कमर्शियल बैंक इन हिंदी) में जानेंगे कि व्यापारिक बैंक क्या है इसका अर्थ बैंक के कार्य क्या है साख आदि के बारे में निबंध एस्से के रूप में जानकारी दी गईं हैं।

व्यापारिक बैंक के कार्य व अर्थ Meaning & Functions of Commercial Bank in Hindi

व्यापारिक बैंक के कार्य व अर्थ । Meaning & Functions of Commercial Bank in Hindi

वर्तमान युग मे बैंक एक सर्वप्रचलित एवं सर्व उपयोगी शब्द है, जिसके अर्थ से साधारणतया सभी अवगत है, किन्तु इसके इतिहास की तरफ जाए तो पता चलता है कि बैंक शब्द की व्युत्पत्ति इटेलियन भाषा के बंको banco शब्द से हुई है। इटली में लोग बैंचों पर बैठकर मुद्रा परिवर्तन का कार्य करते थे।

कालांतर में जो फ्रांसीसी भाषा के बैंके bank में बदलता हुआ अंग्रेजी भाषा में बैंक Bank कहा जाने लगा। कालांतर में बैंक शब्द का प्रयोग मुद्रा का लेन देन करने वाली संस्थाओं के रूप में किया जाने लगा।

एक अन्य धारणा के अनुसार बैंक शब्द की व्युत्पत्ति जर्मन भाषा के banck बैंक शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है सम्मिलित स्कंध कोष, अतः बैंक शब्द की उतपत्ति के बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता हैं।

आधुनिक बैंकिंग का विकास यूरोप में हुआ था, ततपश्चात यह समूचे विश्व में फैल गया।

बैंक पूंजी का उपयोग करने वालों तथा बचत करने वालों के बीच सेतु का कार्य करते हैं. चेक एक ऐसा आदेश पत्र है, जो किसी बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चेक पर नामित व्यक्ति को एक निर्धारित राशि के भुगतान का आदेश हैं. चेक में जारी दिनाकं, भुगतान प्राप्तकर्ता का नाम, राशि अंकों व शब्दों में चेक जारी करने वाले की खाता संख्या, चेक जारी करने वाले के हस्ताक्षर आदि होते हैं.

बैंक वह संस्थान है जो जनता से मांगे जाने वाले पुनर्भुगतान योग्य या चेक द्वारा निकलवाने योग्य जमाएं स्वीकार करता है तथा ऋण प्रदान करने का कार्य भी करता हैं. वाणिज्यिक बैंक बचतों को सुरक्षित रखने, बचत को गतिमान करने व संसाधनों को आंवटन करके के काम आते हैं.

बैंक की परिभाषा व अर्थ definition and meaning of bank in hindi

बैंक शब्द का अर्थ एवं कार्य स्पष्ट करते हुए अनेक अर्थशास्त्रियों ने इसकी परिभाषा प्रस्तुत की है, जो इस प्रकार हैं।

फिण्डले शिराज के अनुसार बैंकर वह व्यक्ति, फर्म या कम्पनी है जिसके पास व्यवसाय के लिए कोई ऐसा स्थान हो जहां मुद्रा अथवा करेंसी की जमा द्वारा साख का कार्य किया जाता है और जिसकी जमा का ड्राफ्ट, चैक या आर्डर द्वारा भुगतान किया जाता हैं।

क्राउथर के अनुसार बैंक का कार्य अन्य लोगों से ऋण लेकर बदले में अपना ऋण प्रदान करके मुद्रा का निर्माण करना है।

भारतीय बैंकिंग कम्पनीज एक्ट 1949 के अनुसार बैंकिंग से तात्पर्य ऋण देने अथवा विनियोजन के लिए जनता का धन जमा करना है, जो मांग करने पर लौटाया जा सकता है तथा चैक ड्राफ्ट अथवा अन्य किसी प्रकार की आज्ञा द्वारा निकाला जा सकता है।

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर स्पष्ट है कि बैंक एक ऐसी संस्था है जो अपने ग्राहकों को धन सम्बन्धी समस्त लेन देन की सुविधा प्रदान करती हैं।

व्यापारिक बैंक के कार्य functions Of Commercial Bank In Hindi

व्यापारिक बैंक का कार्यक्षेत्र वर्तमान युग मे बहुत विस्तृत हो गया हैं। ये बैंक अपने ग्राहकों को समस्त सुविधाए प्रदान करते है। वित्तीय समाशोधन के अतिरिक्त ग्राहकों को बीमा, लॉकर सुविधा, निवेश आदि के अवसर भी प्रदान करते हैं। परम्परागत रूप से बैंकों द्वारा किये जाने वाले प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं।

  1. जमाएं स्वीकार करना
  2. ऋण प्रदान करना
  3. साख निर्माण
  4. एजेंसी सेवाएं
  5. अन्य सेवाए

जमाएं स्वीकार करना

व्यापारिक बैंकों का प्रमुख कार्य अपने ग्राहकों की जमाएं स्वीकार करना हैं। ग्राहक अपने चालू अथवा बचत खातों में अपनी छोटी छोटी बचतों से एकत्रित कोषों पर अपने ग्राहकों को ब्याज अदा करता हैं।

  • बचत खाता – इस प्रकार के खाते छोटे बचतकर्ता अथवा नॉकरी पेशा लोग बैंकों में खुलवाते हैं। इन जमाओं पर बैंक एक निश्चित दर से ब्याज भी अदा करता है। इसमें ब्याज दर कम होती हैं।
  • चालू खाते -इस प्रकार के खाते व्यापारी अथवा उद्योगपति बैंकों में खुलवाते है जिनका दैनिक नकद लेन देन अधिक होता है। इन जमाओं पर बैंक एक न्यूनतम दर से ब्याज भी अदा करता हैं।
  • अवधि जमाएं – बैंकों द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए जो जमाएं स्वीकार की जाती है उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट अथवा अवधि जमाएं कहा जाता है, इन पर ब्याज की दर ऊंची होती है।
  • मांग जमाएं – जबकि मांग जमाएं वे जमाएं होती है जो ग्राहक के द्वारा किसी भी समय मांगे जाने पर बैंकों को अदा करनी पड़ती है, ऐसी जमाओं पर ब्याज दर कम होती हैं।

वर्तमान दौर में आम लोगों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करवाने हेतु प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत शून्य राशि पर भी खाते बैंकों द्वारा खोले जाते है। इन खातों में नियमित लेन देन करने वाले ग्राहकों को बैंक 5000 रु तक की अधिविकर्ष सुविधा प्रदान करते है।

ऋण प्रदान करना Gives Loan

व्यापारिक बैंकों का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य ऋण प्रदान करना है। बैंक अपने ग्राहकों को ऋण सुविधा प्रदान करता है। ये बैंक मुख्यतः गृह, शिक्षा, विवाह एवं वाहन इत्यादि के लिए ऋण प्रदान करते हैं।

बैंक अपने ग्राहकों की जमाओं को एकत्रित राशि से ही साख सृजन का कार्य करता है। ऋण चुकाने के लिए बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को एक निश्चित समयावधि का विकल्प प्रदान किया जाता है। प्रायः परिसंपत्ति हेतु दिए जाने वाले ऋण दीर्घकालीन ऋण होते है। बैंक द्वारा कमजोर वर्गों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत सरल ऋण उपलब्ध करवाए जाते हैं।

अधिविकर्ष

सुविधा के अंतर्गत व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों को उनके खातों में अधिविकर्ष सीमा उपलब्ध करवाती है। अल्प समय के लिए ग्राहक उस सीमा तक जमा धन से अधिक राशि निकलवा सकते है। यह सुविधा बैंक अपने प्रतिष्ठित साख वाले व्यवसायी वर्ग के ग्राहकों को ही उपलब्ध करवाती हैं।

साख निर्माण

व्यापारिक बैंक का सबसे महत्वपूर्ण कार्य साख सृजन है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के समान उनका उद्देश्य भी लाभ कमाना होता है। बैंक अपने जमा धारकों से प्राप्त जमाओं को एकत्र राशि को ऋण के रूप में अन्य ग्राहकों को उपलब्ध करवाती हैं।

जिस पर नियत दर से ब्याज वसूल करती है। इसे ही बैंकों की साख निर्माण प्रक्रिया कहते है, जिसे हम आगे विस्तार से जानेंगे।

एजेंसी सेवाएं

व्यापारिक बैंकों द्वारा ग्राहकों को एजेंसी सेवाएं भी उपलब्ध करवाई जाती है। बैंक चेक, विनिमय, बिल ड्राफ्ट इत्यादि को स्वीकार / जमाकर अपने ग्राहकों को एजेंसी के रूप में वित्तीय सुविधा प्रदान करते हैं। व्यापारिक बैंक अपने खाताधारकों की सम्पति और वसीयत के कार्यकारक और न्यासी के रूप में कार्य करता हैं।

कमर्शियल बैंक के चेक दो प्रकार के होते है जो निम्न है।

  • वाहक चेक -इस प्रकार के चैक का नकद भुगतान बैंक चैक प्रस्तुत करने वाले वाहक को कर सकता हैं।
  • रेखांकित चैक / क्रॉस चेक – इस प्रकार के चैक में अंकित नाम वाले व्यक्ति के खाते में करता हैं।

कमर्शियल बैंक की अन्य सेवाएं व कार्य (फंक्शन)

  1. इंटरनेट बैंकिंग – व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों को 24 घण्टे अपनी सेवाएं देने के लिए इंटरनेट बैंकिंग की सेवाएं प्रदान करते है । इसके द्वारा ग्राहक घर बैठे अपने खातों से विभिन्न सेवाओं का शुल्क भुगतान आसानी से कर सकते हैं। इंटरनेट बैंकिंग के द्वारा ऑनलाइन शॉपिंग हेतु घर बैठे भुगतान किया जा सकता है। इस हेतु ग्राहकों को बैंक से लॉगिन आईडी और पासवर्ड जारी किया जाता है जो पूर्णतया गोपनीय रखना होता है ।
  2. एटीएम सुविधा – व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों को 24 घण्टे नकद आहरण की सुविधा प्रदान करने हेतु सार्वजनिक स्थानों पर एटीएम मशीन उपलब्ध करवाते हैं। कोई भी ग्राहक अपने एटीएम कार्ड से प्रतिदिवस निर्धारित सीमा तक राशि आहरित कर सकता हैं। इसके अतिरिक्त एटीएम नकद हस्तांतरण व खाते में नकद शेष की जानकारी भी उपलब्ध करवाता हैं। इसका पूरा अर्थ ऑटोमेटेड टेलर मशीन है। यह पूर्णतया कम्प्यूटरी कृत मशीन होती है जो बैंक सर्वर से जुड़ी होती हैं।
  3. मोबाइल बैंकिंग – वर्तमान युग में स्मार्टफोन का प्रचलन बढ़ने से व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों को मोबाइल एप के माध्यम से बैंकिंग सुविधा प्रदान करते है। ग्राहक अपने बैंक से सम्बंधित एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सुविधा का लाभ उठा सकता है। इंटरनेट बैंकिंग की तरह एक यूजर आईडी और पासवर्ड के जरिये ग्राहक सभी प्रकार के भुगतान अपने मोबाइल से कही भी कभी भी कर सकता हैं।
  4. लॉकर सुविधा – कमर्शियल बैंक निश्चित शुल्क पर अपने ग्राहकों को कीमती सामान सुरक्षित रखने के लिए अपने बैंक में लॉकर सुविधा प्रदान करता है। लोग इसमें कीमती जेवरात जमीन के कागजात व कानूनी दस्तावेज आदि सुरक्षित रखते हैं।
  5. क्रेडिट कार्ड सुविधा – कमर्शियल बैंक के फंक्शन में क्रेडिट कार्ड एक अहम कार्य हैं। बैंक अपने ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बैंकिंग सुविधा प्रदान करते है, इसके अंतर्गत व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों को उनके खाते पर एक निश्चित साख सीमा में कार्ड द्वारा भुगतान की सुविधा उपलब्ध करवाते है। क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कही भी कभी भी अल्प समय मे ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।

कमर्शियल बैंक द्वारा साख सृजन loan by commercial bank in hindi

आधुनिक बैंकिंग प्रणाली में साख का महत्वपूर्ण स्थान है। देश के आर्थिक विकास में बैंकों की बड़ी भूमिका है। जहां बैंक एक ओर जनता से छोटी छोटी बचतों के जमाकर्ता के रूप में कार्य करता है वही इन छोटी छोटी बचतों से तैयार जमाओं से साख निर्माण का कार्य करते हुए उत्पादक कार्यों के लिए ऋण प्रदान करता है। अब हम समझने का प्रयास करते है कि व्यापारिक बैंक साख का निर्माण किस प्रकार करते है।

साख / ऋण का निर्माण 

बैंक साख सृजन का कार्य दो विधियों से करते हैं।

  1. कागजी मुद्रा के निर्गमन द्वारा
  2. प्रारम्भिक जमा और व्युत्प्न्न जमाओं द्वारा

कागजी मुद्रा के निर्गमन द्वारा – वर्तमान युग मे देश के केंद्रीय बैंक को ही कागजी मुद्रा जारी करने का एकाधिकार प्राप्त है। भारत मे नोट निर्गमन का कार्य भारतीय रिजर्व बैंक करता हैं। इसके लिए वह न्यूनतम कोष प्रणाली का उपयोग करता है। अतः केंद्रीय बैंक द्वारा साख का निर्माण करना कहलाता हैं।

व्युत्पन जमाओं द्वारा साख सृजन – बैंक मुद्रा अथवा साख मुद्रा का सम्बंध बैंको के पास जमा की गई छोटी छोटी बचत राशियों से आंकता है,जो चैक द्वारा निकलवाई जा सकती हैं। यह राशि मांग पर देय होती हैं। अतः इन्हें मांग जमा कहते हैं।

इस प्रकार की जमाओं के बढ़ने से ही अपनी कुल जमाओं से कई गुणा उधार देकर साख मुद्रा का निर्माण  करते है। इस प्रकार बैंक जितना अधिक ऋण देता है उतनी ही अधिक साख जमाएँ उत्पन्न होती हैं और अधिक ऋणों का निर्माण होता है। इसलिए कहा जाता है ऋण जमाओं को उतपन्न करते है और जमाएँ ऋणों को जन्म देती हैं।

प्रो होम के अनुसार व्युत्पन्न जमा का निर्माण ही साख का सृजन होता है। इस प्रकार व्यापारिक बैंक उनके पास जितनी राशि जमा के रूप में प्राप्त होती है उससे कई गुणा अधिक साख सृजन कर देते है। प्रो होम के अनुसार बैंक जमाएँ दो प्रकार की होती है प्रारम्भिक बैंक जमाएँ और द्वितीय व्युत्पन्न जमाएँ।

वाणिज्यिक बैंक का महत्व (Importance of commercial bank )

वाणिज्यिक बैंकों को वर्तमान सन्दर्भ में महत्वपूर्ण उपयोगिता हैं. इसके द्वारा अर्थव्यवस्था के विकास व उन्हें मजबूती प्रदान करने में योगदान दिया जा रहा हैं. इसके इस योगदान को निम्न बिन्दुओं के माध्यम से समझा जा सकता हैं.

आर्थिक विकास हेतु ऊँची बचत दर आवश्यक होती हैं. वाणिज्यिक बैंक जनता की बचतों को सुरक्षित रखकर उन्हें ब्याज भी प्रदान करते हैं. बैंक का यह कार्य समाज में बचत की प्रवृति को बढ़ावा देता हैं.

जनता से जो बचतें जमा होती है, उन्हें गतिमान करके बैंक अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न उत्पादकों तथा निवेशकों तक पहुचाते है. यदि बैंक नही होते तो बचतें सदैव बचतकर्ता के पास ही पड़ी रहती तथा कभी भी बचत उत्पादन हेतु उपयोग में नहीं आती.

बैंक संसाधनों का अनुकूलतम आंवटन करते हैं. प्राप्त बचतों को बैंक उन क्षेत्रों को उधार देते है, जहाँ लाभ की दर अर्थात प्रतिफल की दर अधिकतम हो. साथ ही बैंक उन क्षेत्रों में भी संसाधन आंवटित करते है जो सामाजिक कल्याण की दृष्टि से आवश्यक होते हैं.

वाणिज्यिक बैंकों के कार्य निम्न हैं.

  • जमाएं स्वीकार करना– बैंक द्वारा प्रदत्त सेवाओ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण और प्रथम कार्य जमाएं स्वीकार करना है. बैंक व्यक्तियों, फर्मों एवं अन्य संस्थाओं से जमाएं प्राप्त करती है, व्यापक रूप से ये जमाएं तीन प्रकार की होती हैं. चालू खाते की जमाएं, बचत खाते की जमाएं और स्थायी जमाएं. व्यवसायियों द्वारा चालू खाते में धन जमा करवाया जाता है. वे इसमें बार बार लेन देन कर सकते हैं. बैंक इन चालू जमाओ पर बहुत कम या शून्य ब्याज देते है. सामान्य जनता द्वारा अपनी धनराशि बचत खातों में जमा के रूप में रखी जाती हैं. बचत खाते की जमाओं में से रूपये निकालने में तथा बचत खाते में किये जाने वाले लेन देन पर कुछ प्रतिबन्ध होते हैं. इन जमाओं पर बैंक उचित ब्याज भी प्रदान करता हैं. चालू तथा बचत खाते की जमाओं को संयुक्त रूप से मांग जमाएं कहा जाता हैं. बैंक सर्वाधिक ब्याज स्थाई जमाओं पर प्रदान करते हैं. ये जमाएं लम्बी अवधि की होती हैं. अतः इन्हें अवधि या समय जमाएं भी कहते हैं.
  • ऋण प्रदान करना- वाणिज्यिक बैंक अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों जैसे कृषि, उद्योग, व्यापार आदि को ऋण प्रदान करते हैं. यह ऋण नकद, साख, अधिविकर्ष आदि अनेक रूपों में प्रदान किया जाता हैं. बैंक द्वारा विभिन्न व्यक्तियों व संस्थाओं को विभिन्न उद्देश्यों से दिए गये ऋणों पर ब्याज दर भी अलग अलग होती हैं. बैंक जमा पर जो ब्याज देते है, उससे अधिक ब्याज दिए गये ऋणों पर लेते हैं, कर्जदारों से लिए गये ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गये ब्याज के बीच का अंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत होता हैं.
  • अन्य कार्य- जमाएं स्वीकार करने तथा ऋण प्रदान करने के अतिरिक्त बैंक अपने ग्राहकों को कई प्रकार की सेवाएं भी प्रदान करते हैं. बैंक बिलों एवं चेकों का संग्रहण करते हैं. बीमा की किश्त आदि का नियमित भुगतान करते हैं. बैंक अनेक साखियीकी सूचनाएं एकत्रित कर उन्हें विभिन्न एजेंसियों को उपलब्ध करवाते हैं., वे धन के हस्तांतरण की सुविधा भी प्रदान करते हैं. सार रूप में यह कहा जा सकता हैं कि आर्थिक विकास तथा वित्तीय समावेशन में बैंक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं.

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