बीते पल पर कविता और शायरी Past Moment Poem Shayari In Hindi

बीते पल पर कविता और शायरी Past Moment Poem Shayari In Hindi में बीते पल (क्षण, समय ) पर कविता प्रस्तुत की जा रही हैं. जिन्दगी का एक अच्छा पल आपकों जीरों से हीरो बना सकता हैं, वही एक बुरे पल का वक्त राजा से रंक तक ला सकता हैं. इसलिए कीमती जिन्दगी के हर एक पल को बेहतर तरीके से जिए और सोच समझकर निर्णय ले, तो यकीनन बीते पल पर पश्चाताप की बजाय आपकों गर्व होने लगेगा.

जीवन में कुछ भी स्थिर नहीं हैं जो आता हैं उसे बीतना जरुर हैं. चाहे वो वक्त / समय ही क्यों न हो. जब जीवन के पुराने लम्हे बीतने लगते हैं तो यादों के रूप में अपने पदचिह्न छोड़ जाते हैं. कभी खुशी तो कभी गम के बीते पलों की याद की गाठ बाँध के जीवन के साथ चलने का यत्न कर कोई करता रहता हैं.

बीते पल पर कविता और शायरी Past Moment Poem Shayari In Hindi

बीते पल पर कविता और शायरी Past Moment Poem Shayari In Hindi

यही कही खोया था मैंने,
बिता हुआ पल,
आंसू टपक पड़े,
जब देखा आज.

आकाश की उंचाइयो पर उड़ते,
परिंदों के काफिले,
पेड़ की लताओं से
अठखेलिया करता,
प्रकृति की सपना.

रात में चाँद को देखना,
सितारों से बाते करना,
ठंडी हवाओं का सहारा,
अनुभूतियो के इस आगन में
उसका आना.

वो ही पुरानी सड़के,
वो ही पुराने मकान,
जिनको देखा करता था बचपन,
वो पुराने आदमी, वही अफ़साने
कहाँ बिछुड़ गये, वो पुराने अपने.

यहीं कही खोया था मैंने,
बिता हुआ पल,
आसू टपक पड़े,
जब देखा आज
-दीपक अर्काय

थकना नही

अब तक जैसे पार किये हैं
परिश्रम के पथ
अब तुम थकना नही
टिका टिप्पणी की
आधियाँ चलेगी
कर्कश तूफ़ान आएगा
पर तुम रुकना नही
कीर्तिमान बन जाए जब
पाठ्यपुस्तिका में
तुम्हारे गीत आए,
तब मजिल को समझ जाना
निकट
-मोनिका पारिक

बीते हुये पल

कल जब जीवन के पन्नों पर,तुम पीछे को जाओगे।
पलकों पर होंगी बूंदें,पर मंद-मंद मुस्काओगे।।

वो भी क्या दिन थे जब,संदेशों में बातें होती थीं।
हम दोनों थे खोये रहते,दुनियाँ की रातें होती थीं।।

उन बीती घड़ियों में जब कदम कदम मैं साथ चलूंगा।
फिर अपनी जिद पर शायद,मन ही मन पछताओगे।।

कल जब…..

मैं कैसे कैसे मन में स्वप्न सजाया करता था।
तेरी मोहक बातों में मैं खो जाया करता था।।

अस्तित्व मिटाया मैंने,तेरा रूप सजाने को।
अब बोलो आईना कैसे,जान मेरी झुठलाओगे।।

कल जब…….

क्यों मेरा था दामन छोड़ा,बस इतना समझाकर जाते।
मैंने था यह जीवन सौंपा,इसको आग लगाकर जाते।।

तुम खुश हो यह सोच सोच,मैनें खुद को बहलाया है।
तुम बतलाओ कैसे,अपने मन को समझाओगे।।

बीते हुए पल कविता

बीते हुए पल को याद कर
दिल आज भी उठता है मचल
होंठों पर एक मीठी सी मुस्कान
कर ठहर जाती है,संवर जाता है
आज और आने वाला कल।

कितने हसीन थे वो बीते हुए पल
जब हम साथ रहते थे हर दिन हर पल
हाथों में हाथ डाल दूर तक जाते थे निकल
सोचते थे वक्त थम जाए ना आए कल।

बीते पल / कल्पना लालजी

मन मेरा फिर आज किया मैं भी बच्चा बन जाऊँ
छोड़ झमेले दुनियादारी के मीलों की फिर दौड लगांऊ
छूमंतर हो गया बचपना कैसे और कब जान न पाया
आँख खुली जब मेरी एक दिन राशन का थैला हाथ में पाया
गिल्ली डंडा और पतंगे रख तकिये के नीचे सोता था
मेरी कन्नी काटी किसने बरसों बीते जान न पाया
दौड भाग की बात न पूछो आगे ही आगे रहता था
कड़ी धूप और वर्षा को भी हँसते–हँसते सहता था
अठखेलियां बचपन की याद आज भी आती हैं
कानो से जब किलकारियां अनजाने ही टकराती हैं
कहाँ उड़ गए सोने के पल आज़ादी के साँझ–सवेरे
छोड़ गए क्यों बेड़ियों में जकड़े मेरे अरमान सारे

बीते हुए पल याद आते हैँ

बीते हुए सब वो प्यार भरे पल,
लगता है जैसे बस गुज़रे हो कल,
कल ही तो हम सब साथ थे,
सब एक साथ और हाथों में हाथ थे।

पर जाने क्यों आज ऐसा लगता है,
हर वो पल कुछ दूर सा लगता है,
क्यों आज सबकी याद यूं सताती है,
और आखों को नम सा कर जाती है।

वो बर्थडे की पार्टी ,वो मूवीज़ में जाना,
वो लड़ना-झगड़ना और फिर मान जाना,
वो पैसों की तंगी और टपरी की चाय,
बस मिल जाये कहीं मुफ्त का वाई-फाई।

वो बाइक की ट्रिप्सी, और आंटी के हाथ का खाना,
वो आधी रात को बने प्लान्स का सुबह शुन्य हो जाना,
वो फ़ोन पे घंटों बतियाना,
वो हर बार मेरा बर्थडे भूल जाना।

काश वो सारे पल फिर लौट के आजाएँ,
काश ये वक़्त वापस पलट जाए,
उन नालायक दोस्तों को फिर हमारी याद आजाए,
काश उन सबसे फिर मुख़्तसर मुलाकात हो जाए।

न जाने क्यों ये दिन बीते चले जा रहे है।

न जाने क्यों ये दिन
बीते चले जा रहे है।
हम खोई सी राहों में
खोते चले जा रहे है
अजीब लम्हा है
शुरू होते ही खत्म
होते चले जा रहे है
साँसों में वक्त का जेहर
घुलता चला जा रहा है
न जाने क्यों जिन्दगी को
ख्वाइशों में
गिरते चले जा रहे है

बीते पल हिंदी शायरी

लम्हों में कैद कर लो
प्यार फ़िक्र
मोहब्बत दोस्ती
और वफा की चाहते

रह न पाओगे
हमें भुला कर देख लो
यकीन न आए तो
आजमा कर देख लो


बीते हुए पल लौट कर न आएगे
जब तक जिन्दगी है मेरी जन
हर लम्हा साथ बिताएगे.


आज फिर उसकी गली से गुजरना हुआ
जहाँ से गुजरे जमाना हुआ


बीत रहे हो तुम भी तबसे, बीत रहे है हम भी कब से
साथ बीतें हम दोनों फिर, वो घड़ी कहाँ से लाऊ मैं


आती तो होगी जरुर जहन में बीते लम्हों की याद
करते तो होंगे वो याद मुझे कभी कभी


यादों की गिरफ्त में हैं ये दिल
उन बीते लम्हों से निकलना है मुश्किल


बीते पन्ने खुलने लगे है अब फिर से
उन्हें लगता है कि
फिर उन्ही कहानियों को हम दोहराया करेगे


लम्हें बीत जाते हैं
लौट के तो बस यादें ही आती है
जब कभी ये यादें हमें याद आती है
खूबसूरत पलों के कुछ प्यारे से स्पर्श दे जाती है
ख़ुशी के पलों की हंसी ले आती हैं
तो गम के पलों में आँखे भर आती हैं
ख़ुशी और गम के इस खेल में
अक्सर ये यादें ही बाजी मार जाती है


दिन ऐसा भी आएगा
कि फिर से जीना सीखा जाएगा
भूलके या भूलाके
आगे बड़ा जाएगा
अब मुश्किल होगा
क्या पता कब आसान हो जाएगा
आज नहीं हुआ
तो क्या हुआ कल हो जाएगा
बेशब्री से इन्तजार है मुझे उस कल का
जो बीती रातो पर हावी हो जाएगा.


जो बीत गया
वो पल लाए कैसे
और उन बीते पलों को
दिल से भूलाएँ कैसे
काश जी लेते
उन गुजरे पलों में
एक बार फिर हम
तो आज यादें बनकर
न रहती है
वो सारे पल
ख्यालों में मेरे ऐसे


बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही सही मुलाक़ात तो होगी.


बीते दिन

बीते दिन लौटे न कभी पर
बीते दिनों की कहानी बार बार याद आती है
उन यादों के प्रहार से
आँखे सदा नीरा बन जाती हैं
याद आते हैं बचपन के दिन
जब हम मचला करते थे
कुछ खाने की जिद्द को लेकर
फूला पचका करते थे
इस कुछ खाने का मतलब
कोई समझ नहीं पाता था
लेकिन माँ तो माँ होती है
माँ से कब छुप सकता था
घी और चीनी एक मिलाकर
चुपके से ले आती थी
खा लो बेटा कुरकुर कुरकुर
मुहं में मुझे खिलाती थी
बरसों बीते माँ से बिछड़े
याद अभी भी आती हैं
जब जब चिंता से घिर जाता
मेरी माँ बहुत याद आती हैं.


हर क्षण को जी लीजिए
खुद के लिए वो बीते पल लौटेंगे नहीं
शब्दों का प्रयोग एक हद में कीजिए
शब्द बाण जो छूट गये फिर लौटेंगे नहीं


कुछ सूने लम्हे थे ऐसे मेरे
जो पूरे रंगे थे हाथों को तेरे
एक ख्वाहिश है जो पूरी हो जाए
जब निकले जनाजा मेरा तो तू
जनाजे के साथ हो जाए
ये उसी के हाथ से रंगे लम्हे साहिब
कही ये लम्हें अधूरे ना रह जाए

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