नैतिकता पर सुविचार अनमोल वचन | Morality Quotes In Hindi

नैतिकता पर सुविचार अनमोल वचन | Morality Quotes In Hindi: नैतिकता मनुष्य के आचार विचार को प्रदर्शित करने वाला नैतिक गुण  हैं जो उचित और अनुचित के मध्य फर्क करता हैं. जिसका आधार पवित्रता न्याय एवं सत्य हैं. इस गुण द्वारा सभ्य समाज की स्थापना संभव हैं. प्रत्येक व्यक्ति को समाज द्वारा निर्धारित इन मानदंडों में रहना चाहिए. प्रो कोपर के अनुसार नैतिकता का अर्थ- नैतिकता के साथ व्यवहार के कुछ नियम जुड़े हैं। आज हम नैतिकता पर सुविचार में  (MORALITY QUOTES) नैतिकता की परिभाषा और अर्थ के बारे में दार्शनिकों के थोट्स जानेगे.

नैतिकता पर सुविचार अनमोल वचन | Morality Quotes In Hindi

नैतिकता पर सुविचार अनमोल वचन | Morality Quotes In Hindi

बुद्धिमता के मामलों में अंतिम विचार सर्वश्रेष्ठ होते है, जबकि नैतिकता के मामले में सर्वप्रथम विचार सर्वश्रेष्ठ होते हैं.

“नैतिकता” मनुष्य की वह आवश्यक श्रृंगार है , जो उसके अन्तःकरण में सुंदरता और निखार लाती है ।
फलस्वरूप एक व्यवस्थित ,संपन्न और मर्यादित परिवार और समाज का विनिर्माण होता है।
पर हम इस विषय में किसी इंसान के उदारता को आमंत्रित नहीं कर सकते ।
एक मानव के अस्तित्व और परिभाषा के अनुकूल हर मनुष्य को नैतिक होना चहिए । ,……

Hihindi

सत्यनिष्ठा नैतिकता का ह्रदय / केन्द्रीय भाव हैं.

नैतिकता का आधार, सदा सर्वदा के लिए असत्य भाषण का त्याग हैं.

नैतिकता का आधार, सदा सर्वदा के लिए असत्य भाषण का त्याग हैं.

पूर्ण नैतिकता का अर्थ है अपने आचरण को इस प्रकार नियमित करना कि किसी को कष्ट न पहुचाया जाए.

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सही कहा जाए तो नैतिकता वह सिद्धांत नहीं है, जिसके द्वारा हम सुखी हो सकते है, परन्तु वह सिद्धांत है जिसके द्वारा हम अपने सुख का पात्र बन सकते हैं.

प्रेम विष बन जाएगा यदि वह नैतिक चिन्तन द्वारा पूरी तरह आबद्ध नहीं हैं.

सबं पंथ परस्पर भिन्न होते है, क्योंकि वे मनुष्यों द्वारा प्राप्त हैं, नैतिकता सर्वत्र समान है, क्योंकि यह परमात्मा द्वारा प्रदत्त हैं.

नैतिकता का तात्पर्य नियमों की उस व्यवस्था से है जिसके द्वारा व्यक्ति का अन्तःकरण अच्छे और बुरे का बोध प्राप्त करता है।

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नैतिक नियम, नियमों की वह व्यवस्था है जो अच्छे और बुरे से सम्बद्ध है तथा जिसका अनुभव अंतरात्मा द्वारा होता है।

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नैतिकता कर्तब्य के भावना पर अर्थात उचित व अनुचित पर बल देती है

किंग्स्ले डेविड

नैतिकता पर सुविचार

मनुष्य की आधारशिला उसके नैतिक मूल्यों में दर्शित होती है।


मानवता रूपी उच्च आदर्शों का पालन कर अपने पूर्वजों के ज्ञान स्वरूप शिक्षा को जीवन में अपनाने से जीवन को सही दिशा मिलती है।


विचारणीय तथ्य ही हमें नैतिक मूल्यों को पहचानने की क्षमता देते हैं। मनुष्य में जागरूकता और सत्य की ज्योति की प्राप्ति विचार करके ही होती है।


इन्सान की पहचान उसके कर्मों से ही होती है। इन्सान स्वयं ही उसे भुगतता है और अपने कर्मों के फल की प्राप्ति इन्सान को स्वयं ही होती है।


मनुष्य को सफलता से अधिक अपने मूल्यों के प्रति सजग रहना चाहिए।


मनुष्य स्वार्थ के वशीभूत सिर्फ अपना भला करता है लेकिन नैतिक मूल्य अपनाकर मनुष्य सभी के हित के संदर्भ में विचार करता है जो सभी के लिए हितकर होते हैं।


मनुष्य के जीवन में विश्वास बहुत अहम् भूमिका निभाता है जिसको प्राप्त करना मुश्किल है। विश्वास को आसानी से खोया तो जा सकता है लेकिन सबसे मुश्किल काम है विश्वास को जीवन में स्थायित्व रखना।


मनुष्य नैतिकता के रूप में सोच की ओर अग्रसर होता है लेकिन अनैतिकता रूप में वो अपनी सीमा लांँघ जाता है। सोच को सही दिशा देकर ही नैतिकता के करीब पहुंँचा जा सकता है।


नैतिकता के मार्ग पर चलकर उच्च विचारधारा को आदर्श रूप में ग्रहण कर मनुष्य सफलता की दिशा की ओर बढ़ता है।


जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन कर मनुष्य सही राह का चुनाव कर पाता है।


अनेक मनुष्यों में सफलता, शोहरत, पैसा तो दिखता है लेकिन ऐसे मनुष्य कम नज़र आते हैं जिनमें इन सब के साथ विनय का गुण भी है दिखाई पड़ता है।


मनुष्य को अपनी भावनाओं का तो ख्याल रहता है लेकिन दूसरे की भावनाओं के प्रति अक्सर मनुष्य एक तरफा हो जाते हैं। नैतिकता दोनों ओर की भावनाओं को प्रधानता देती है जिससे मनुष्य में दो तरफा भावनाओं की समझ आती है।


मनुष्य जन्म लेना ही काफी नहीं होता अपने कर्तव्यों का पालन करना ही वास्तविक रूप से मनुष्य कहलाता है।


घमंड मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है एवं अहितकारी भी। मनुष्य भले कितनी भी सक्षमता प्राप्त कर ले लेकिन घमंड को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।


बच्चे खुद से इतना नहीं सीखते जितना वह बड़ों को देखकर सुनकर सीखते हैं। बच्चे बड़ों का अनुसरण करते हैं बड़ों से ही नैतिक मूल्य को ग्रहण करते हैं।


नैतिकता बच्चों को संस्कार स्वरूप बचपन में सिखाई गई हो तो बड़े होने पर उनमें इसका अभाव नहीं दिखता है।


मनुष्य अपनी बात कहना चाहता है। वह चाहता है कि दूसरे उसकी बात सुने और समझें तो मनुष्य को दूसरों की बात भी सुननी और समझनी चाहिए।


मनुष्य पर बातों का असर काफी पड़ता है मुख्यत: बचपन में जो बातें बच्चों को सिखाई जाती हैं उसका असर हर उम्र में दिखाई पड़ता है।


व्यवहार मनुष्य की वो पहचान है जो दिल पर असर करती है। दूसरों से अच्छे बर्ताव से पेश आना चाहिए। एक दूसरे की पहचान तो हो जाती है लेकिन दिल जीतना मनुष्य के व्यवहार पर निर्भर करता है।


मनुष्य की बातें अच्छी हो तो पढ़ी जाती हैं लेकिन मात्र बातें अच्छी होने से मनुष्य की अच्छाई नहीं दिखती है उसके व्यवहार और सोच में भी अच्छाई एवं सकारात्मकता होनी चाहिए।


मुश्किलें जीवन का हिस्सा होती हैं जिसका सामना हर किसी को करना पड़ता है लेकिन बुरे वक्त में कौन हमारा साथ देता है और परेशानियों में हमारी कौन मदद करता है वो इंसान हमेशा याद रहता है।


हर कोई चाहता है कि उसका कार्य उसके बोलने से हो जाए लेकिन हम जो चाहते हैं वैसा नहीं होता है। जीवन में धैर्य बनाए रखना चाहिए उचित मार्ग ही मिलता है। किसी बात की जल्दबाज़ी या जिद्द से बेहतर है धैर्य को अपने स्वभाव में शामिल करना।


मनुष्य चाहता है कि सभी उसका सम्मान करें तो स्वयं उसको भी सभी को सम्मान देना चाहिए।


मनुष्य जीवन में सफलता चाहता है, आगे बढ़ना चाहता है यह अच्छी बात है लेकिन दूसरों को धोखा देकर या नीचा दिखा कर या नुकसान पहुंँचा कर कभी स्वयं की राह को सफल नहीं बनाना चाहिए।


मनुष्य को समाज में रहते हुए एक दूसरे के प्रति सोचना चाहिए, स्वार्थी नहीं बनना चाहिए। एक दूसरे की परवाह करना अच्छी बात है तभी सभी एक दूसरे के दुख दर्द को समझ पाएंँगे।


मनुष्य को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए विशेष रूप से जो करीब हैं उनकी ज़रूरत पड़ने पर सहायता करनी चाहिए।


मनुष्य एक भावनात्मक प्राणी है। मनुष्य को अपनी भावनाएंँ सोच समझकर व्यक्त करनी चाहिए। हर वक्त अपनी भावनाओं को किसी से भी बताना नहीं चाहिए। मनुष्य को सोच समझ कर विश्वास लायक व्यक्ति के समक्ष ही अपनी भावनाएंँ व्यक्त करनी चाहिए। 


मनुष्य में अच्छी बुरी आदतें होती है और ऐसी आदतों को मनुष्य को छोड़ देना चाहिए जिन आदतों से दूसरे परेशान हो क्योंकि किसी को परेशान करना अच्छी आदत नहीं होती है।


कौन सही है और कौन गलत है यह सिर्फ किसी की बातों से निर्णय नहीं लेना चाहिए। सही गलत का फैसला हकीकत को सही रूप से जान समझ कर करना चाहिए।


किसी के प्रति दुश्मनों की तरह साजिशें नहीं करनी चाहिए। मुख के आगे अच्छे बनकर पीठ पीछे साजिश नहीं रखनी चाहिए।


वाणी वो रस है जिसमें मिठास मिले तो दिल जीत लेती है और कड़वाहट हो तो दिल से निकाल देती है इसलिए बातों में प्रभाव लाना है तो मीठा बोलना चाहिए।


मनुष्य एक दूसरे से कितने वादे करते हैं लेकिन पूरे करना भूल जाते हैं। वादे निभाने के लिए करने चाहिए कभी वादे तोड़ने नहीं चाहिए जो दुखदाई होते हैं।


नैतिकता जीवन में कई गुणों को निखार देती है जिससे मनुष्य का जीवन निखरता ही है।


नैतिकता का पालन मनुष्य अपने अंतर्मन से सही रूप से कर पाता है जिसके द्वारा मनुष्य को अच्छे बुरे की समझ होती है।


नैतिकता के माध्यम से मनुष्य क्या सही है और क्या सही नहीं है इन विचारों पर सही निर्णय ले पाता है।


नैतिकता के मध्य सिर्फ सुखी होना जीवन का लक्ष्य नहीं होता है बल्कि खुद के द्वारा खुशी प्राप्त करना मूल ध्येय माना जाता है।


मनुष्य को अपना आचरण ऐसा बनाना चाहिए जिससे किसी को तकलीफ नहीं हो।


सत्य जितना जीवन के लिए सही है उतना ही असत्य जीवन के लिए उपयुक्त नहीं है। ऐसे में असत्य वाणी से अक्सर खुद को बचाए रखना चाहिए।


सत्य जीवन स्वरूप मूल रूप है जो मनुष्य को कठिन मार्ग की ओर उन्मुख तो करता है लेकिन कभी गलत दिशा नहीं बताता है बल्कि जीवन को सही रास्ता दिखाता है।


नैतिकता मनुष्य के लिए औषधि समान है जो मनुष्य में उत्पन्न बुराइयों का नाश करती है अगर मनुष्य नैतिक मूल्यों का सही रूप से पालन करें।


धर्म की पहचान मनुष्य के ईमान से होती है। मनुष्य अगर अपने ईमान के प्रति वफादार नहीं है फिर वह धर्म के प्रति भी वफादार नहीं हो सकता है।


रिश्तों को प्यार और नैतिकता स्वरूप निभाया जाए तो रिश्ते अपनी एक अलग पहचान बना लेते हैं।


मनुष्य को हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए। मनुष्य के पास जितनी भी जैसी भी क्षमता हो उसके हिसाब से मदद करनी चाहिए।


मनुष्य का व्यक्तित्व नैतिकता का पालन करने से निखरता है और सुरक्षित भी रहता है।

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