पीरियड्स क्या होता है Periods Kya Hote Hai In Hindi

पीरियड्स क्या होता है Periods Kya Hote Hai In Hindi: एक निश्चित उम्र के बाद हार्मोन्स में बदलाव के चलते लड़कियों को पीरियड्स आना शुरू होते हैं और यह टाइम उनके लिए बेहद कठिनाई भरा होता है। परंतु दुर्भाग्यवश आज भी इस विषय को एक गुप्त मुद्दा समझते हुए इसपर खुलकर बात नहीं की जाती। अतः इस विषय पर जागरूकता न होने एवं जानकारी के अभाव के चलते लड़कियों एवं महिलाओं को पीरियड के समय होने वाली समस्या और भी अधिक बढ़ जाती है।

पीरियड्स क्या होता है Periods Kya Hote Hai In Hindi

पीरियड्स क्या होता है Periods Kya Hote Hai In Hindi

अतः आज हम इस महत्वपूर्ण टॉपिक पीरियड्स क्या है? कब& क्यों होते हैं? और पीरियड्स के दौरान क्या चीजें करनी चाहिए? कि यह जानकारी आप तक लेकर आए हैं ताकि आप दूसरों तक भी सही जानकारी पहुंचा सके।

Periods क्या है?

लड़के और लड़कियां जब किशोरावस्था में पहुंचते हैं तो उनके शरीर में काफी सारे बदलाव होते हैं। जैसे कि लड़कों के टेस्टिस में स्पर्म बनना शुरू हो जाते हैं और लड़कियों की छाती में बदलाव होने लगता है। इसी किशोरावस्था के साथ लड़कियों में शुरू होता है पीरियड्स का सिलसिला जिसमें महिलाओं को कुछ दिनों तक यौनि से रक्तस्राव होता है और उन्हें काफी मुश्किलों से गुज़रना पड़ता है।

इसकी शुरुआत 8 से 13 वर्ष की उम्र से हो सकती है। आमतौर पर ब्रैस्ट की बढ़ोतरी के लगभग 2 सालों बाद इसकी शुरुआत होती है। बता दें कि जिन लड़कियों का वजन ज़्यादा होता है उन्हें ये जल्दी शुरू होते हैं और जिनका वजन कम होता है या फिर जो किसी एक्टिविटी जैसे नृत्य, जिम्नास्टिक या किसी और खेल में भाग लेती हैं उनके लिए इसकी शुरुआत देरी से हो सकती है।

Periods क्यों होते हैं?

असल में जब कोई महिला Mature होती है तो उसका शरीर गर्भधारण के लिए तैयार हो जाता है। यौवन में प्रवेश करने पर लड़की के शरीर में काफी सारे बदलाव होते हैं जिस के साथ ये पीरियड्स का सिलसिला शुरू हो जाता है।

इस हार्मोनल प्रभाव के कारण महिला का अंडाशय अंडे बनाना शुरू कर देता है। महिला के गर्भाशय में हर महीने एक परत का निर्माण होता है जो कि खून और म्यूकस से बनी होती है। जब पुरुष का स्पर्म और महिला कि ये परत मिलते हैं तो भ्रूण का निर्माण होता है।

लेकिन पुरुष का स्पर्म न मिलने पर यह परत यौनि के द्वार से बाहर निकल आती है जो कि खून और म्यूकस को साथ लेकर आती है। इसकी वजह से महिला को ब्लीडिंग और मुश्किलें होती हैं। इसी ब्लीडिंग की प्रकिर्या को हम मासिक धर्म, पीरियड्स या महावारी के नाम से जानते हैं।

Periods कब आते हैं?

हर महिला को हर महीने पीरियड्स आने की संभावना होती है। एक औसत पीरियड का अंतराल 28 दिनों का होता है। यानिकी पीरियड्स की अवधि के पहले दिन से अगली अवधि के पहले दिन तक 28 दिनों का अंतर हो सकता है।

हालांकि ये ज़रूरी नहीं है कि 28 दिनों का ही अंतर हो। 28 दिन इसकी एक सामान्य संख्या है। असल में इसका होना 21 दिन से लेकर 35 दिनों तक सामान्य माना जाता है।

और भी कई चीजों पर ये गैप निर्भर करता है जैसे कि अगर किसी महिला ने अपना वजन घटाया है या बढ़ाया है तो इसका असर उसके पीरियड्स चक्र पर पड़ सकता है।

Periods के लक्षण?

अगर हमारे पास पीरियड्स के लक्षणों की जानकारी पहले से हो तो हम पीरियड्स आने के लक्षणों को नोटिस करके पहले हो चौकन्ना हो सकते हैं और खुद को इन मुश्किल दिनों के लिए तैयार कर सकते हैं। ये हैं पीरियड्स के कुछ लक्षण:-

  • सूजन
  • स्तनों में दर्द
  • चिड़चिड़ापन
  • रोना आना
  • बेचैनी
  • सिरदर्द
  • पीठदर्द
  • वजन बढ़ना
  • अधिक खाना या खाने कि तीव्र इच्छा
  • मुहांसे

पीरियड्स के और भी लक्षण हो सकते हैं जो हर महिला के हिसाब से कम या ज़्यादा हो सकते हैं आप खुद में नोटिस कर सकती हैं।

Periods आने पर क्या करें?

Periods आने पर आपको आराम करना चाहिए और ज़्यादा काम नहीं करना चाहिए। अगर काम ज़्यादा आवश्यक है तो काम को हल्के हल्के से कर सकती हैं। हो सकता है आप को अपनी कोई पसंदीदा चीज़ खाने की या करने की अधिक लालसा हो जो कि अक्सर पीरियड्स में होती है।

अगर वह चीज़ जोखिम भरी नहीं है तो खा सकती हैं क्योंकि ऐसा करने पर अलग तरह का सकून मिलता है जिससे आपके पीरियड्स की परेशानी कुछ हद तक कम हो सकती है। इन दिनों में आपको ज़्यादा से ज़्यादा आराम की आवश्यकता होती है।

Periods आने पर क्या न करें?

खाना ना छोड़ें

पीरियड्स आने पर चिड़चिड़ेपन या बेचैनी की वजह से ऐसा हो सकता है कि हमें भोजन करने का मन ना करे। लेकिन हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये ऐसा समय होता है जिस से महिलाओं के शरीर को अधिक ताकत की ज़रूरत होती है।

ऐसे में भोजन ना करके आप खुद के लिए खतरा बुला सकती हैं। हो सके तो अपने भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य विटामिन से भरपूर चीज़ों को ज़रूर शामिल करें।

ज़्यादा काम ना करें

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि इन दिनों में हमे अधिक आराम की ज़रूरत होती है इसलिए हमें पीरियड्स के दौरान काम से परहेज़ करना चाहिए और आराम करना चाहिए।

अगर काम ज़्यादा आवश्यक है तो उस काम को हल्के से कर सकती हैं या फिर बीच बीच में ब्रेक लेकर उस काम को कर सकती हैं।

यौन संबंध ना बनाएं

अगर आप सोच रही हैं कि पीरियड्स के दौरान यौन संबंध बनाने से प्रेगनेंसी नहीं होगी तो आप बिलकुल गलत सोच रही हैं। क्योंकि पीरियड्स के दौरान भी प्रेग्नेंसी का खतरा रहता है। इसके अलावा पीरियड्स के दौरान यौन संबंध बनाने से और भी कई तरह के इंफेक्शन हो सकते हैं। इसलिए आप पीरियड्स के दौरान यौन संबंध बनाने से परहेज करें।

मेनोपॉज क्या होता है?

45 की उम्र के बाद महिलाओं को मेनोपॉज होता है जिसमें महिलाओं का अंडाशय अंडे बनाना बंद कर देता है जिस के कारण महिलाओं को पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं। इस दौरान बाल झड़ने लगते हैं और यौनि में रूखापन आ जाता है। जरूरी नहीं है कि 45 वर्ष की आयु में ही पीरियड्स आने बंद हों ये समय आगे या पीछे भी हो सकता है।

अपने पीरियड्स की जानकारी कैसे रखें?

पीरियड्स के लिए तैयार होने इसकी जानकारी रखना एक अच्छा तरीका हो सकता है। इंटरनेट पर ऐसे बहुत सारे एप्स उपलब्ध हैं जो पीरियड्स को ट्रैक करते हैं।

इनमें आपको तारीख और फ्लो की जानकारी डालनी है और बाद में एप का अल्गोरिथम प्रेडिक्ट करता है कि अगली बार आपके पीरियड्स की शुरुआत कब होगी और कितना ज़्यादा या कम फ्लो होगा। और भी कई सारे फीचर्स होते हैं इन एप्स में।

या फिर आप खुद एक पीरियड कैलेंडर बना सकती हैं जिसमे सारी जानकारी एकत्रित करके डॉक्टर के साथ सांझा कर सकती हैं। इससे डॉक्टर आपको सही सलाह देगा और आपको क्या करना है और क्या नहीं करना है इसकी भी जानकारी देगा।

पीरियड्स दौरान ज़्यादा दर्द होने पर क्या करें?

आपको अगर पीरियड्स के दौरान ज़्यादा दर्द हो रहा है तो आपको लेट कर बॉल की स्थिति में आ जाना चाहिए। इसमें आपको दाएं या बाएं तरफ लेटना है और अपने घुटनों को छाती तक ले आएं। इससे आपका दर्द कुछ हद तक कम हो सकता है।

लेकिन अगर आपको कुछ ज़्यादा ही दर्द हो रहा है तो आपको तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए क्योंकि है किसी इंफेक्शन का खतरा भी हो सकता है। चिकित्सक जो भी सलाह देंगे उसका पालन करना आवश्यक समझें।

क्या लड़कों को भी पीरियड्स होते हैं?

जी नहीं! पुरषों में अंडाशय ना होने की वजह से उन्हें पीरियड्स नहीं होते लेकिन किशोरावस्था के दौरान उनमें भी बदलाव होते हैं। जैसे कि आवाज़ में बदलाव होना, जननांगों पर बाल आना और स्वप्नदोष होना।

स्वप्नदोष में पुरुषों को सोते समय महिलाओं के बारे में आकर्षक सपने आते हैं जिसे अंग्रेज़ी में Wet Dreams कहा जार है। इसके कारण सोते समय ही पुरषों का सीमन निकलता है जो अंडाशय में प्रवेश करने पर भ्रूण बनाता है। सीमन निकलने पर पुरुषों के चेहरे पर पिंपल्स और ऑयली स्किन हो सकती है।

क्या महीने में दो बार पीरियड्स हो सकते हैं?

जी! ये संभावित है कि महीने में दो बार पीरियड्स हों। कभी ऐसा भी हो सकता है कि आपके पीरियड्स कम दिनों तक रहें या पहले महीने के मुकाबले ज्यादा दिन तक रहें। कुछ मेडिकल कंडीशन्स में भी साइकल में बदलाव हो सकता है। अगर आप को ज़्यादा चिंता हो रही है तो आप डॉक्टर के साथ इस बारे में सलाह कर सकती हैं।

7 से अधिक दिनों तक पीरियड्स होने पर क्या करें?

ऐसा हो सकता है कि पीरियड्स में ब्लीडिंग 7 से ज़्यादा अधिक हो और ऐसा भी हो सकता है कि इस समय फ्लो इतना हो कि हर समय पैड बदलने की ज़रूरत पड़े। शुरुआती दिनों में फ्लो ज़्यादा होता है और दिन बीतते ये कम होने लगता है। चिंता या कोई डाउट होने पर आप चिकित्सक से संपर्क कर सकती हैं।

क्या पीरियड्स दौरान पैड्स मददगार साबित होते हैं?

पीरियड्स के दौरान पैड्स बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। इसे आपको अपनी अंडरवेयर के अंदर स्ट्राइप के सहारे लगाना होता है जिस की मदद से ये ब्लीडिंग को सोखते हैं जिससे कपड़े खराब नहीं होते।

ये पैड्स और भी कई तरह के कम्फर्ट प्रदान करते हैं। हालांकि पीरियड्स के लिए और भी कई सारे प्रोडक्ट होते हैं जिन्हें आप स्थिति के हिसाब से अपने उपयोग में ला सकती हैं।

PMS क्या है?

महावारी शुरू होने से लगभग 1 हफ्ता या कुछ दिन पहले मानसिक और शारीरिक असन्तुष्टि होती है उसे PMS कहा जाता है। ये पीरियड्स का ही एक हिस्सा है। इसमें महिला को अलग अलग भावनाएं महसूस होती हैं जैसे कि रोना आता है या फिर कभी गुस्सा आता है। या फिर कहें तो Mood Swings भी हो सकता है। किसी नार्मल चीज़ को देखकर भी रोना या गुस्सा आ सकता है।

पहली बार पीरियड्स आने पर किस से बात करें?

अगर आपको पहली महावारी का समय आया है तो अपनी माँ के साथ इस बारे में जरूर बात करें क्योंकि वो ही ऐसे समय में आपकी सहायता कर सकती हैं और बेस्ट फ्रेंड के रूप में आपकी मदद कर सकती हैं।

अगर अपनी माँ से इस बारे में बात करने में हिचकिचा रही हैं तो अपनी दोस्त या किसी रिश्तेदार से बात कर सकती हैं जिन्हें इस समय का एक्सपेरिएंस हो।

Conclusion

मुझे उम्मीद है पीरियड्स क्या है? इस टॉपिक पर आपको पूरी जानकारी मिल चुकी होगी. आपके लिए इस लेख में दी गई जानकारी उपयोगी साबित हुई है तो इसे शेयर करना ना भूलें।

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों पीरियड्स क्या होता है Periods Kya Hote Hai In Hindi का यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा, यदि आपको पीरियड्स के बारे में दी जानकारी पसंद आई हो तो अपने फ्रेड्स के साथ भी शेयर करें.

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