राजनीति पर शायरी Politics Shayari in Hindi 2021

Politics Shayari in Hindi 2021 राजनीति पर शायरी -शीर्षक के इस आर्टिकल में राजनीति के लिए शायरी जिनमे हमारे पॉलिटिक्स नेताओं पर बेहद सक्षिप्त और रोचक शायरी पहेली और ठिठोरी व्यग्य भाषा में पढने को मिलेगी, जिन्हें आप किसी भाषण या कार्यक्रम की प्रस्तुती के रूप में उपयोग में ले सकते हैं.

राजनीति पर शायरी Politics Shayari in Hindi 2021

राजनीति पर शायरी Politics Shayari in Hindi 2021

सरकार को गरीबों का ख्याल कब आता है?
चुनाव नजदीक आ जाए तो मुद्दा उछाला जाता है.

मुर्दा लोहे को औजार बनाने वाले,
अपने आँसू को हथियार बनाने वाले,
हमको बेकार समझते हैं सियासतदां
मगर हम है इस मुल्क की सरकार बनाने वाले.

Political Shayari In Hindi

युद्धों में कभी नहीं हारे , हम डरते है छलचंदो से
हर बार पराजय पाई है , अपने घर के जयचंदो से

ये तेरे मन का खोट है जो तुझे सोने नहीं देता,
मत दे दोष किसी को वक्त किसी का नहीं होता.

कीमत तो खूब बढ़ गई दिल्ली में धान की,
पर विदा ना हो सकी बेटी किसान की.

वे सहारे भी नहीं अब जंग लड़नी है तुझे,
कट चुके जो हाथ उन हाथों में तलवारें न देख.

नेताओं पर शायरी – Rajneeti Shayari in Hindi

सियासत की रंगत में ना डूबो इतना,
कि वीरों की शहादत भी नजर ना आए,
जरा सा याद कर लो अपने वायदे जुबान को,
गर तुम्हे अपनी जुबां का कहा याद आए.

न मस्जिद को जानते हैं,
न शिवालो को जानते हैं,
जो भूखे पेट हैं,
वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.

जो मातृभूमि की जय कहते सकुचाते
मजहब को मुल्क से ऊपर बतलाते
नमक देश का खााते दुश्मन गुण गाते
ऐसे गद्दारों पे कुत्ते भी तो शरमाते.

बन सहारा बे-सहारो के लिये,
बन किनारा बे-किनारो के लिये,
जो जीये अपने लिये तो क्या जीये,
जी सके तो जी हज़ारो के लिये.

अब कोई और न धोखा देगा,
इतनी उम्मीद तो वापस कर दे.
हम से हर ख़्वाब छीनने वाले,
हमारी नींद तो वापस कर दे..

क्या खोया, क्या पाया जग में,
मिलते और बिछुड़ते मग में,
मुझे किसी से नही शिकायत
यद्यपि छला गया पग-पग में.

Rajneeti shayari 2021

बहुत खूब तुम ये
सियासत का खेल खेलते हो
हो देश भक्त
ये बोल बोल के देश लूटते हो

बड़ी चालाकी से तुम ने
खुद को छुपा रखा है.
अपने झूठे वादों से
लोगों को बेहला रखा है..

हम बार बार कहते रहे
हम हिंदुस्तानी हैं
वो बार बार हमें
धर्म समझा रहा था

जो तौर है दुनिया का उसी तौर से बोलो ,
बहरो का इलाका है जरा जोर से बोलो ।

बिक रहे है बाजारो मे जमीर आजकल ,
कुर्सी ने लोगो को इतना खुदगर्ज बना दिया ।

राजनीति का रंग भी बड़ा अजीब होता है ,
वही दुश्मन बनता है जो सबसे करीब होता है।

केजरीवाल पर शायरी

रोज मिडिया दरस दिखावे
देखि देखि के मन हरसावे
ना सखी केसरी
ना सखि केजरी

राहुल गाँधी पर शायरी

बात बात पर बांह चढ़ावे
प्रात प्रात उड़ उड़ कर जावे
का सखि बुलबुल?
ना सखि राहुल

अमित शाह पर शायरी

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रोज रोज कुछ क्लास लगावे
सीधे चलने को हडकावे
का सखि राह?
ना सखि शाह

अनुपम खेर पर शायरी

अवसर देखि देखि बिछ जावे
शूटिंग से शिफ्टिंग कर जावे
ना सखि जाजम?
ना सखि अनुपम

नरेंद्र मोदी पर शायरी

उरतो-उरतो छत पर आवे
ताके झांके फिरि उड़ जावे
का सखि विरोधी?
ना सखि मोदी

ममता बनर्जी पर शायरी

छोटी कार मै बड़ो बतंगड़
नतमस्तक सब अक्कड़-बक्कड़
का सखि छमता?
ना सखि ममता

उद्दव ठाकरे पर शायरी

जकड़-जकड़ के पकड़ बनावे
चश्मे के पीछे मुस्कावे
का सखि संभव?
ना सखि उद्दव

राज ठाकरे पर शायरी

महाराष्ट्र को मस्त यों फूको
रोज दिखावे नयो शिगूफो
का सखि नाराज?
ना सखि राज

सोनिया गाँधी पर शायरी

ताश बिछावे, ताश उठावे
खेल को हर रोज दिखावे
का सखि रम्मी?
ना सखि मम्मी

भुजबल पर शायरी

ससुराल भी शान से जावे
मुछो पर भी ताव चढ़ावे
का सखि दल बल?
ना सखि भुजबल

महबूबा मुफ़्ती पर शायरी

चाय पिवे सबकुं पिलवावे
तिगनी का फिर नाच नचावे
का सखि अजूब?
ना सखि महबूबा

लालू यादव पर शायरी

पद बिन पद को लाभ उठावे
पुत्र पताका भी फहरावे
का सखि टालू?
ना सखि लालू

अरुण जेटली पर शायरी

कप भर-भरकर के झलक दिखावे
लेकिन चाय कटिंग पिलवावे
का सखि केटली?
ना सखि जेटली

शरद पवार पर शायरी

सबकी पीर हैं या के दिल में
चित्र दिखावे हर मुश्किल में
का सखि यार?
ना सखि पवार

देवेन्द्र फड़णवीस पर शायरी

गठबंधन को गणित सम्भाले
दिल्ली-मुंबई देखे भाले
का सखि जीएम?
ना सखि सीएम

Political Attitude Status In Hindi

सरहदों पर बहुत तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या,
और खौफ बिखरा है दोनों समतो में,
तीसरी समत का दबाव है क्या।


जरूरत पर सब यार होते हैं,
जरूरत न हो तो पलट कर वार होते हैं,
चुनाव नजदीक आ रहा हैं बच के रहना,
क्योंकि ज्यादातर नेता गद्दार होते हैं।


बुलंदी देर तक किस शख़्स के हिस्से में रहती है
बहुत ऊँची इमारत हर घड़ी खतरे में रहती है
~मुनव्वर राणा


कल सियासत में भी मोहब्बत थी
अब मोहब्बत में भी सियासत है
~ख़्वाजा साजिद


जनता ने माया को देखा
फिर माया का हाथी देखा।
दोनों की एक ही भाग्य रेखा
बस में दोनों के कुछ नहीं
बस करते रहो देखी देखा।।


सुना दीदी का है दिल दीवाना
बोले बंगाल है उसको दीवाना।
काम है उसका सबको रुलाना।
अतः राजनीती का काम दीदी दीदी
गुनगुनाते जाना गुनगुनाते जाना।।


केजरीवाल की खांसी से जंग है
दिल्ली प्यारी खांसी के संग है।
क्योंकि दिल्ली में प्रदुषण रंग है
यही केजरी के जीतने का ढंग है।


दोस्ती हो या दुश्मनी सलामी दूर से अच्छी लगती हैं,
राजनीति में कोई नही सगा, ये बात सच्ची लगती हैं.


ये संगदिलो की दुनिया हैं, संभल कर चलना “ग़ालिब”
यहाँ पलको पर बिठाते हैं नजरो से गिराने के लिए.


हर कोई यहाँ किसी न किसी पार्टी के विचारो का गुलाम हैं,
इसलिए भारत का ये हाल हैं, किसान बेहाल हैं. नेता माला-माल हैं.


जो धरापुत्र का वध कर दे, वह राजपुरूष नाकारा हैं,
जिस धरती पर किसान का रक्त गिरे उसका शासक हत्यारा हैं.

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