रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय – Rabindranath Tagore biography in Hindi

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय – Rabindranath Tagore biography in Hindi: रबीन्द्रनाथ टैगोर या रबीन्द्रनाथ ठाकुर विभिन्न प्रतिभाओं से निपुण व्यक्ति थे. पूरी दुनिया भर में रबीन्द्रनाथ टैगोर को उनके साहित्यिक कार्य – कविता, नाटक और विशेष रूप से उनके गीत के लेखन के लिए पहचाना जाता हैं.

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय – Rabindranath Tagore biography in Hindi

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रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय - Rabindranath Tagore biography in Hindi

इसके अलावा गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर संगीतकार, दार्शनिक, समाज सुधारक और एक जाने माने चित्रकार थे. हमारे देश का राष्ट्रीय गान – जन गन मन… की रचना रबीन्द्रनाथ टैगोर की ही देन है. साहित्यिक क्षेत्र में अद्भुत योगदान के कारण रबीन्द्रनाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार भी मिल चूका है.

क्या आप जानते है? नोबल पुरस्कार को प्राप्त करने वाले एशिया के प्रथम व्यक्ति रबीन्द्रनाथ टैगोर थे.

सर रबीन्द्रनाथ टैगोर(Rabindranath Tagore information) ने कम उम्र से लेखन कार्य शुरू कर दिया था. Rabindranath Tagore जब केवल सोलह वर्ष के थे, तब उन्होंने अपनी पहली लघु कहानी ‘भानिसिंह’ प्रकाशित की.

इस पोस्ट में हम आपको रबीन्द्रनाथ टैगोर के सम्पूर्ण जीवन का परिचय (Rabindranath Tagore biography in Hindi) करवाएंगे. इसलिए आप इस बायोग्राफी को अंत तक जरूर पढ़े.

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म और परिवार

Rabindranath Tagore introduction in Hindi: सर रबीन्द्रनाथ टैगोर को रबीन्द्रनाथ ठाकुर के नाम से भी जाना जाता हैं. रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 07 मई 1861 को कोलकात्ता में ब्राह्मण कुल में हुआ था. रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिताजी का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर और माता का नाम शारदा देवी था. रबीन्द्रनाथ टैगोर देवेन्द्रनाथ टैगोर की चौदहवीं संतान थे. रबीन्द्रनाथ टैगोर सहित वे चौदह भाई बहन थे.

पिताजी देवेन्द्र ठाकुर एक दार्शनिक, शास्त्रीय संगीतकार और यात्री थे. 1870 में बंगाल के पुन:जागरण के समय टैगोर परिवार अग्रणी था और अनेक साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन किया.

कच्ची उम्र में ही माता के निधन हो जाने पर उनका पालन पोषण नौकरों के हाथो हुआ. कुछ समय बाद प्रारम्भिक शिक्षा समाप्त होने पर पढाई के लिए विदेश चले गए.

रबीन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा

उनकी आरंभिक शिक्षा कोलकत्ता के सम्मानित सैंट जेवियर स्कूल में हुई. इसके बाद उनका मन बैरिस्टर की पढाई करने का हुआ तो उन्होंने 1878 में अपना नाम इंग्लेंड के एक पब्लिक स्कूल में लिखा दिया. लेकिन, 1880 में डिग्री पूरी किये बिना ही वे भारत लौट आये.

रबीन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा इतनी प्रभाव शाली नहीं थी. स्कूल की शिक्षा का आनंद लेने की बजाय वे हमेशा कुछ न कुछ सोचते रहते थे. भले ही उनकी स्कूली शिक्षा अच्छी नही हुई हो लेकिन, वे हमेशा अपने साथ किताबें, कलम और स्याही रखते थे. रबीन्द्रनाथ टैगोर हमेशा कुछ न कुछ लिखते रहते थे.

रबिन्द्रनाथ टैगोर का करियर

life of Rabindranath Tagore in hindi: जब रबीन्द्रनाथ टैगोर मात्र आठ साल के थे, तब उन्होंने पहली बार एक कविता लिखी थी. उसके बाद सोलह वर्ष की उम्र में उनकी एक लघु कहानी ‘भानुसिंह’ नाम से प्रकाशित हुई. साहित्यिक क्षेत्र में उनका योगदान कीसी भी माप से परे हैं.

कलकत्ता के रहने वाले रबीन्द्रनाथ टैगोर की मातृभाषा बांग्ला थी. रबीन्द्रनाथ टैगोर ने बांग्ला में नए छंद, गद्य पेश किये. रबीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी शिक्षा तो छोड़ दी लेकिन साहित्य को नहीं छोड़ा.

साहित्य और कला के क्षेत्र में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने अनेक कविताये, लघु कथाएं, नाटक और गीतों पर कई किताबें लिखी. रबीन्द्रनाथ टैगोर की सबसे प्रसिद्ध रचना ‘गीतांजलि’ हैं. पूरे भारत और इंग्लैंड सहित पूरे यूरोप में यह बहुत बड़े स्तर पर प्रकाशित हुई थी.

बांग्लादेश के राष्ट्र गान ‘अमर सोनार बांग्ला’ और भारत के ‘जन गन मन’ के रचियता रबीन्द्रनाथ टैगोर ही है.

इंग्लैंड से भारत लौटते ही सबसे पहले उन्होंने अपनी ‘मानसी’ पूस्तक को पूरा किया जो कि कविताओ कि श्रंखला थी. इस पुस्तक में राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य थे जो हास्यास्पद तरीके से बंगालियों पर सवाल उठाते और उनका मजाक उड़ाते थे. ऐसा कहा जाता हैं कि मानसी में उनकी सर्वश्रेष्ठ कवितायें लिखी गयी थी.

1883 में रबिन्द्रनाथ टैगोर ने मृणालिनी देवी से सादी कर ली थी. सादी के मात्र 4 महीनो के बाद उनकी भाभी कादम्बरी देवी ने आत्म हत्या कर ली थी. दरअसल इसके पीछे कुछ अनसुलझे तथ्य हैं, जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे.

रबीन्द्रनाथ टैगोर एक सफल साहित्यिकार और कवि थे. रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 2232 संगीत कृतियाँ लिखी और सफलतापूर्वक 12 पुस्तकें प्रकाशित की. उन्होंने बंगाली भाषा में प्राथमिक तौर पर लिखा लेकिन हिंदी क्षेत्र में भी उनका योगदान सराहनीय है. रबीन्द्रनाथ टैगोर की पुस्तके भारत के साथ साथ विदेशो में भी खूब चलती थी और आज भी चलती हैं.

साहित्य पर लिखने के अलावा उन्होंने अपना पारिवारिक व्यवसाय को भी संभाला. लगभग दस वर्षों तक वे शहजादपुर में अपनी पैतृक सम्पदा पर काम करते रहे.

60 वर्ष की उम्र में रबीन्द्रनाथ टैगोर (Rabindranath thakur) ने चित्रकारी क्षेत्र में अपना हाथ आजमाया, और समकालीन कलाकारों की सूची में अपना नाम शीर्ष पर दर्ज करवा लिया.

रविंद्रनाथ टैगोर का वैवाहिक जीवन

biography of Rabindranath Tagore: 1883 में रबिन्द्रनाथ टैगोर का विवाह 10 साल की लड़की मृणालिनी देवी से हुआ था. रबीन्द्रनाथ टैगोर और मृणालिनी के संयोग से पांच संतान हुई, जिसमे तीन पुत्रियाँ और दो पुत्र थे. लेकिन, मृणालिनी देवी और टैगोर का सम्बन्ध ज्यादा लम्बा नहीं चला. 1902 में मृणालिनी की मृत्यु हो गई. इसके बाद उनकी दो बेटियों की भी मृत्यु हो गई. इसके बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर ने फिर कभी सादी नहीं की.

नोबल पुरस्कार और रबीन्द्रनाथ टैगोर

रबीन्द्रनाथ टैगोर  शुरुआत में केवल बांग्ला भाषा में लिखते थे. लेकिन जब उनकी पुस्तकों का अनुवाद दूसरी भाषा होना शुरू हो गया तो रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित गीतांजलि पश्चिमी देशो में खूब चली थी. इसी के चलते उनको 1913 में महान साहित्यिक योगदान के लिए साहित्यिक नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

इसके कुछ समय बाद, 1915 में, ब्रिटिश सरकार द्वारा टैगोर को नाइट की उपाधि दी गई. 1940 में, टैगोर को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था.

रवींद्रनाथ टैगोर को गुरु देव की उपाधि

history of Rabindranath Tagore in hindi: 6 मार्च 1915 को रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी. उसके बाद महात्मा गांधीजी ने उनको गुरुदेव कहकर संबोधित किया. इसके अलावा महात्मा गाँधी ने रविंद्रनाथ को विश्वकवि की उपाधि दी. रवींद्रनाथ टैगोर महात्मा गाँधी के काम से काफी प्रभावित थे.

रबीन्द्रनाथ टैगोर का आजादी लड़ाई में योगदान

चूँकि रबीन्द्रनाथ टैगोर एक कवि थे इसलिए समय समय पर उन्होंने अपनी कविताओं और लेखों के माध्यम से आवाज उठाई. रबीन्द्रनाथ टैगोर का आजादी लड़ाई में योगदान उनके द्वारा लिखे गए गीतों के माध्यम से देखा जा सकता हैं.

उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की निंदा की, उन्होंने ब्रिटिश शासन को जनता की सामाजिक “बीमारी” के रूप में देखा. उन्होंने अपने लेखन में, भारतीय राष्ट्रवादियों के समर्थन में आवाज उठाई.

रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में बंगाल विभाजन के बाद बंगाली आबादी को एकजुट करने के लिए बांग्लार माटी बांग्लार जोल (हिंदी में – बंगाल की मिट्टी, बंगाल का पानी) गीत लिखा था.

जातिवाद के खिलाफ उन्होंने राखी उत्सव की शुरुआत की, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर रंग-बिरंगे धागे बांधे.

जब अमृतसर में नरसंहार हुआ तो रबीन्द्रनाथ टैगोर ने लॉर्ड हार्डिंग द्वारा दी गई नाइटहुड का त्याग कर दिया. यह भी ब्रिटिश सरकर के विरुद्ध होने का प्रमाण हैं.

रबीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा में योगदान

Gurudeva Rabindranath Tagore in Hindi: गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर विश्वभारती विश्वविद्यालय के माध्यम से अद्वितीय योगदान दिया. विश्वभारती विश्वविद्यालय में स्वतंत्रतापूर्वक और रचनात्मक रूप से शिक्षा प्रदान की जाती थी. ग्रामीण विकास के लिए रबिन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था कि – ‘अगर गाँवो का विकास करना हैं तो पहले वहां के लोगो को शिक्षित करना होगा.’

सर रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा दिए गए योगदान से प्रभावित होकर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने निम्न पक्तियां कही हैं –

“टैगोर समझदारी के प्रतीक है, और मनुष्य की वह भावना है जिसने हमको नए समाज और नए सभ्यता को देखने के लिए मानव जाति के दिलों और और सोच को ऊपर उठाया.”

रवींद्रनाथ टैगोर और शांतिनिकेतन

शान्तिनिकेतन कोलकत्ता से 212 किलोमीटर की दुरी पर बीरभूम जिले में स्थित हैं. इसकी स्थापना टैगोर परिवार ने 22 दिसम्बर 2001 में की थी. आज के समय में शांति निकेतन एक पर्यटन स्थल के रूप ने गिना जाता हैं.

लेकिन शांतिनिकेतन उस समय एक बहुत बड़ा शिक्षण केंद्र था. शांतिनिकेतन का दूसरा नाम “विश्व भारती विश्वविद्यालय” हैं. रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इस जगह के बारें में कई कविताएँ और गीत लिखे.

यह विश्वविद्यालय प्रत्येक विद्यार्थी के लिए खुला था जो कुछ सीखने के लिए उत्सुक था. इस विश्वविद्यालय में कक्षाएं और सीखने का दायरा चार दीवारों के भीतर सीमित नहीं था. इसके बजाय, विश्वविद्यालय के मैदान में विशाल बरगद के पेड़ों के नीचे, खुली जगह में कक्षाएं लगती थीं. यह उस वक्त एक रस्म थी.

रवींद्रनाथ टैगोर की मौत के साथ मुठभेड़

Rabindranath Tagore in Hindi story: जब रबीन्द्रनाथ टैगोर मात्र चौदह वर्ष के थे तब उनकी मां शारदा देवी का निधन हो गया. अपनी माँ के अचानक मौत के बाद उन्होंने स्कूल से परहेज करना शुरू कर दिया, और शहरों में यात्रा करना शुरू कर दिया.

माँ की मृत्यु के बाद उनकी भाभी कादंबरी देवी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. रबीन्द्रनाथ टैगोर अपनी भाभी से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने इस पर एक उपन्यास ’नस्तानिरह’ लिख डाला.

सादी के चार महीनों के बाद भाभी कादम्बरी देवी ने आत्म हत्या कर ली थी. इस विषय को लेकर रविंद्रनाथ टैगोर पर कुछ अटकले लगाई जाती हैं कि उनके भाभी के साथ कुछ सम्बन्ध थे. लेकिन इसकी पुष्टि में कोई प्रमाण नहीं हैं.

बाद में, उनकी पत्नी मृणालिनी देवी की भी बीमारी के कारण मृत्यु हो गई. इसके बाद उन्होंने अपनी दो बेटियों को खो दिया, जिनको वे सबसे अधिक  प्रेम करते थे. अपने परिवार की इतनी मौतों ने उनको अंदर तक झकझोर कर रख दिया, लेकिन फिर भी उन्होंने कलम उठाने मे संकोच नहीं किया.

 रबीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु कैसे हुई

Rabindranath Tagore death: अपने अंतिम समय में रबीन्द्रनाथ टैगोर जोरासंको हवेली के उपर के कमरे में रहते थे. 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में रबीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु हो गई.

रबीन्द्रनाथ टैगोर की प्रमुख कृतियाँ

गीतांजलि, पूरबी प्रवाहिनी, शिशु भोलानाथ, महुआ, वनवाणी, परिशेष, पुनश्च, वीथिका शेषलेखा, चोखेरबाली, कणिका, नैवेद्य मायेर खेला, क्षणिका रबीन्द्रनाथ टैगोर की प्रमुख कृतियाँ हैं. इसके अलावा उन्होंने 2200 से अधिक गीत लिखे.  सुनो दीपशालिनी, सखी आए वो कौन, दिन पर दिन रहे बीत, क्यों आँखों में छलका जल, खोलो तो द्वार – ये रबीन्द्रनाथ टैगोर के कुछ प्रमुख गीत है.

रबीन्द्रनाथ टैगोर से जुड़े कुछ तथ्य  – Rabindranath Tagore facts in Hindi

गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर नोबेल साहित्य पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति थे.

आप में से बहुत से लोग जानते हैं कि टैगोर ने 2 राष्ट्रगान लिखे थे. भारत के लिए “जन गण मन” और बांग्लादेश के लिए “अमर सोनार बांग्ला”. बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रगान “श्रीलंका मठ” की रचना भी की थी.

सर रबीन्द्रनाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार में जो राशि मिली थी उस राशि से उन्होंने एक स्कूल का निर्माण करवाया, जिसका नाम विश्व-भारती रखा गया.

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर कलर ब्लाइंड थे. 60 साल की उम्र में उन्होंने पेंटिग का काम शुरू किया. उन्होंने पेंटिंग में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था. लेकिन वे हरे और लाल कलर के लिए ब्लाइंड थे.

रबीन्द्रनाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से मिले पदक को शांति निकेतन में रखा गया था. सन 2004 में उनका पदक चोरी हो गया था. बाद में पुन: दुसरे पदक उनको दिए गए.

सर रबीन्द्रनाथ टैगोर के नाम से आठ संग्रहालय बने हुए हैं. जिनमे से पांच बांग्लादेश में हैं और तीन भारत मे है.

उनकी बहन स्वर्णकुमारी देवी बंगाल की प्रसिद्ध और जानी मानी कवियत्रि और उपन्यासकार थी. संगीत और सामाजिक क्षेत्रों मे महत्व पाने वाली बंगाल की प्रथम महिला थी.

जब शुरुआत में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने चित्रकारी शुरू की तो उनका हाथ बिलकुल नहीं जमता था. इसी बात को लेकर वे काफी ना-खुश थे. इसी विचार पर उन्होंने एक बार जगदीशचंद्र बोस को लिखा, “जिस तरह एक माँ अपने बदसूरत बेटे को भी सबसे ज्यादा स्नेह करती हैं, उसी तरह मैं भी अपनी कलाकृति को चुपके से निहारता हूँ और खुश होता हूँ.

इस पोस्ट में आपने क्या सीखा(about Rabindranath Tagore in Hindi)…

रबीन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी (Rabindranath Tagore Jivani in Hindi) में हमने रबीन्द्रनाथ टैगोर  के जीवन (life of Rabindranath Tagore in Hindi) से जुड़े हर विषय को शामिल करने का प्रयास किया हैं. हमें पूरी उम्मीद हैं कि आपको यह बायोग्राफी जरूर पसंद आयी होगी. अगर आपको रबीन्द्रनाथ टैगोर के जीवन से जुड़े तथ्य अच्छे लगे हो तो इस पोस्ट को आगे शेयर जरूर करें.

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