राधा अष्टमी महालक्ष्मी की व्रत 2021 कथा और पूजन विधि | Radha Ashtami And Mahalaxmi Vrat katha Pooja Vidhi In Hindi

राधा अष्टमी महालक्ष्मी की व्रत 2021 कथा पूजन विधि Radha Ashtami And Mahalaxmi Vrat katha Pooja Vidhi In Hindi:14 सितम्बर मंगलवार को श्रीराधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत 13 से 28 सितम्बर 2021 को  है. इसी दिन भगवान कृष्ण के जन्म दिन (जन्माष्टमी) से ठीक पन्द्रह दिन बाद रावल गाँव में राधा जी का जन्म हुआ था. भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन महालक्ष्मी व्रत भी किया जाता हैं, जो 16 दिनों तक चलता हैं. इस दिन राधाअष्टमी पर राधा जी का तथा महालक्ष्मी व्रत में धन व एश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी का पूजन किया जाएगा.

राधा अष्टमी महालक्ष्मी की व्रत 2021 कथा और पूजन विधि

राधा अष्टमी महालक्ष्मी की व्रत 2021 कथा और पूजन विधि | Radha Ashtami And Mahalaxmi Vrat katha Pooja Vidhi In Hindi

यह व्रत भादों बदी अष्टमी को मनाया जाता हैं. इस दिन राधा जी का जन्म हुआ था. इस दिन राधा कृष्ण की पूजा करनी चाहिए. पहले राधा जी को पंचामृत से स्नान करवाएं फिर उनका श्रृंगार कर, भोग लगावे,

फिर धूप, दीप, फूल आदि से आरती उतारे. इस प्रकार राधा अष्टमी की पूजा करने पर मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता हैं और इस लोक तथा परलोक में सुख भोगता हैं.

आरती श्री राधा जी की (radha ji ki aarti)

आरती राधा जी की कीजैं. !!
कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा !
आरती, वृषभानु लली की कीजै. आरती…
कृष्णचन्द्र की करी सहाई मुँह में अग्नि रूप दिखाई !!
उस शक्ति की आरती कीजे,
नन्द पुत्र से प्रीत बढ़ाई, आरती…
आरती रास रसाई की कीजै !! आरती
प्रेम राह जिसने बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई !!
आरती !! श्री !! जी की कीजे !! आरती….
दुनियां की जो रक्षा करती, भक्तजनों के सब दुःख हरती !
आरती दुःख हरणी की कीजै !! आरती…
कृष्णचन्द्र ने प्रेम बढ़ाया, विपिन बिच रास रसाया !
आरती कृष्ण प्रिया की कीजै !! आरती…
दुनियां की जो जवानी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावें !!
आरती जगत माता की कीजै !! आरती…
निज पुत्रों के काज संवारे रनवीरा के कष्ट निवारे !
आरती विश्व माता की कीजै !! आरती…

राधा अष्टमी कब मनाई जाती हैं और मुहूर्त क्या है? (radha ashtami Vrat 2018 Date, time and Muhurat)

भाद्र शुक्ल अष्टमी को राधा अष्टमी कहा जाता हैं. इस दिन जगत मात राधा जी का जन्म हुआ था. भादों के कृष्ण अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, इस दिन को जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं.

जो इंसान राधा अष्टमी का व्रत कर राधे कृष्ण की पूजा नही करता हैं, उन्हें जन्माष्टमी का फल भी नही मिलता हैं. इस दिन से ही महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत भी होती हैं.

राधा को रुखमणी भी कहा जाता हैं, जिन्हें कृष्ण की पत्नी के रूप में सौभाग्य मिला. इस दिन व्रत रखने से घर धन संपदा से भरा रहता हैं. वर्ष 2021 में राधा अष्टमी की तिथि, समय, शुभ मुहूर्त एवं पूजा समय की जानकारी नीचे दी जा रही हैं.

राधाअष्टमी समय तिथि पूजा मुहूर्त 

राधा अष्टमी मंगलवार, सितम्बर 14, 2021 को

  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 13, 2021 को 03:10 pm
  • अष्टमी तिथि समाप्त – सितम्बर 14, 2021 को 01:09 pm

राधाअष्टमी का महत्व एवं कथा (radha ashtami katha & mahatav in hindi)

प्राचीन ग्रंथ (स्कन्द पुराण) में राधा जी को नंदलाल (कृष्ण) की आत्मा माना गया हैं. यही वजह है, कि भक्त उन्होंने कृष्ण के समान दर्जा देते हैं राधे कृष्ण आम बोलचाल का शब्द बन चुका हैं.

पद्म पुराण में दोनों के बारे में कहा गया हैं, कि इनकी भक्ति के बिना मनुष्य कभी मोक्ष की प्राप्ति नही कर सकता. दोनों के जन्म दिन के मध्य 15 दिन का अंतर हैं

भादों कृष्ण अष्टमी को गोकुल गाँव के वासुदेव जी के यहाँ भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था. भादों शुक्ल अष्टमी (राधा अष्टमी) को राधा जी ने वृषभानु की पुत्री के रूप में जन्म लिया था.

राधाष्टमी का व्रत रखने से मनुष्य को ब्रज का रहस्य मालुम हो जाता हैं. इस दिन व्रत रखने वाले को दोनों की युगल मूर्ति वाले मंदिर में कोई भी सुगन्धित वस्तु जैसे इत्र इत्यादि अवश्य चढ़ाना चाहिए.

महालक्ष्मी व्रत कथा और पूजा विधि (mahalaxmi vrat katha & pooja vidhi in hindi)

यह व्रत राधा अष्टमी के दिन ही किया जाता हैं. महा लक्ष्मी जी का व्रत 16 दिन तक रखा जाता हैं. व्रत रखने से पूर्व स्त्री पुरुष को इस मंत्र के साथ महालक्ष्मी व्रत का संकल्प लेना चाहिए.

करिष्येअहं महालक्ष्मी व्रत से स्वत्प्रायाणा !
तदविध्नेन में यातु समाप्ति स्वप्रसादत :

अर्थात हे देवी ! मैं आपकी सेवा में तत्पर होकर इस महाव्रत का पालन करुगी. आपकी कृपा से यह व्रत बिना विध्नों के परिपूर्ण हो.

इतना कहकर अपने हाथ की कलाई में बंधा हुआ डोरा जिसमे 16 गाठ लगी हुई हो बाँध देवे और प्रतिदिन अश्विनी कृष्ण अष्टमी का यह व्रत और पूजा चलती रहे.

महालक्ष्मी व्रत पूरा होने पर वस्त्र से एक मंडप बनावें, उसमें लक्ष्मी की प्रतिमा रखे. फिर पंचामृत से स्नान करावें और सोलह प्रकार से पूजा करे.

रात में तारागणों को लक्ष्मी के प्रति अर्ध्य और लक्ष्मी की प्रार्थना करे. फिर व्रत रखने वाली स्त्री ब्राह्मण तथा ब्राह्मणियों को भोजन करावे और दान देवें.

महालक्ष्मी व्रत की उद्यापन विधि (mahalaxmi vrat Udyapan Vidhi in Hindi)

उनसे हवन करावे तथा खीर की आहुति देवें. चन्दन ताल पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दुर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल तथा नाना प्रकार के खाने के पदार्थ नयें सूप में 16-16 की संख्या रखे. फिर नयें दूसरे सूप से ढक देवें और नीचे के मंत्र को पढ़कर लक्ष्मी को समर्पित कर देवें.

क्षीरोदार्णवसम्भूता लक्ष्मिश्चन्द्र सहोदरा !
व्रतेनानेन सन्तुष्टा भवताद्विष्णुवल्लभा !!

अर्थात क्षीर सागर से प्रकट हुई लक्ष्मी, चन्द्रमा की सहोदर भगिनी श्रीविष्णु बल्लभा, महालक्ष्मी इस व्रत से संतुष्ट हो. इसके बाद 4 ब्राह्मण और 16 ब्राह्मणियों को भोजन कराके और दक्षिणा देकर विदा करे.

फिर घर में बैठकर स्वयं भोजन कर लेवे इस प्रकार जो महालक्ष्मी व्रत करते हैं, वे इस लोक में सुख भोगकर बहुत समय तक लक्ष्मी लोक में सुख भोगते हैं.

महालक्ष्मी व्रत की कहानी | Mahalaxmi Vrat Katha 2021 In Hindi

यह व्रत राधाअष्टमी से शुरू होता हैं. और आश्विन कृष्ण अष्टमी को समाप्त होता हैं. इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी जी की पूजा आराधना की जानी चाहिए.

महालक्ष्मी व्रत के दिन लक्ष्मी जी की मूर्ति को स्नान करावें फिर नयें वस्त्र पहनाकर भोग लगावें. और आचमन कराकर फूल धूप दीप चन्दन आदि से आरती करे और भोग को आरती के बाद बाँट देवे.

रात को चन्द्रमा के उगने पर अर्ध्य देवे और आरती करे फिर स्वयं भोजन करे. इस व्रत के करने से धन धान्य की वृद्धि होती है और सुख मिलता हैं.

एक समय की बात है किसी गाँव में एक निर्धन ब्राह्मण रहा करता था. वह अपनें नियमों का बेहद पक्का था. पास ही के एक जंगल में एक विष्णु जी का मंदिर था.

वह ब्राह्मण रोज उस मंदिर में जाकर नियम के अनुसार पूजा करता था. ब्राह्मण की भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने उसे दर्शन दिए.

जब भगवान ने ब्राह्मण को कुछ मांगने के लिए कहा तो ब्राह्मण ने धन प्राप्ति का उपाय पूछा. तब भगवान बोले इस मंदिर के सामने मेरी पत्नी तथा धन की देवी लक्ष्मी रोजाना कंडे थापने आती हैं.

हर रोज तुम यहाँ आना तथा उन्हें अपने घर ले जाने के लिए आग्रह करना, अपनी हठ तब तक न छोड़ना जब तक कि महालक्ष्मी जी तुम्हारे घर चलने को तैयार न हो जाए. यदि तुम इस कार्य में सफल हो गये तो तुम्हारे सम्पूर्ण दुःख एवं दरिद्रता समाप्त हो जाएगी.

इतना कुछ बताने के बाद विष्णु जी ओझल हो गये तथा ब्राह्मण अपने घर चला गया. अगले दिन भौर होने से पहले ही वह ब्राह्मण विष्णु मंदिर के सामने आकर बैठ गया.

जब लक्ष्मी जी कंडे थापने आई तो उसने लक्ष्मी को कस के पकड़ लिया. इससे लक्ष्मी जी चक्कर में पड़ गई कि किसने उनका आंचल पकड़ा हैं.

जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो ब्राह्मण खड़ा था. उन्होंने आंचल छोड़ने को कहा, फिर भी ब्राह्मण नही माना. ब्राह्मण बोला- आप वादा करो कि आप मेरे घर निवास करोगी तभी मैं आपकों छोड़ूगा.

उस ब्राह्मण की बात सुनकर लक्ष्मी जी ब्राह्मण की करतूत समझ गई तथा ब्राह्मण से बोली- हे ब्राह्मण देव आप अपनी पत्नी सहित 16 दिनों तक (महालक्ष्मी व्रत) करों.

सोलहवें दिन चन्द्रोदय के बाद महालक्ष्मी व्रत कथा वाचन के पश्चात उत्तर दिशा में मुह करके याद करना. मैं अवश्य आपके घर आ जाउगी.

ब्राह्मण ने देवी लक्ष्मी के बताए अनुसार सोलह दिनों तक महालक्ष्मी व्रत किया तथा अंतिम दिन रात को चन्द्रमा की पूजा के बाद उत्तर दिशा में आवाज दी तो लक्ष्मी जी उस ब्राह्मण के घर आ गई तथा उनके साथ भोजन कर वही निवास करने लगी.

इसीलिए यह व्रत महालक्ष्मी व्रत के नाम से प्रसिद्ध हैं. हे ,माँ लक्ष्मी जिस तरीके से आप उस ब्राह्मण के घर पधारी उसी तरह महालक्ष्मी व्रत करने वाले हर प्राणी के घर आना तथा हमारे घर आकर भी हमारी दरिद्रता का हरण करना.

महालक्ष्मी की कथा

महालक्ष्मी को वैभव की देवी माना जाता हैं. सोलह दिनों तक लक्ष्मी जी का व्रत किया जाता हैं, जो भादों शुक्ल अष्टमी से आरम्भ होकर आश्विन (आसोज) कृष्ण अष्टमी तक चलता हैं.

इस व्रत को 16 दिनों तक बिना खाए पिए करना चाहिए, मगर जो इसे नही कर पाते है उन्हें आरम्भ मध्य तथा अंतिम के एक-एक दिन व्रत अवश्य करना चाहिए.

जो इंसान इस व्रत को कर महालक्ष्मी की कथा को सुनता हैं माँ उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण कर भक्त के जीवन के सभी कष्टों का हरण करती हैं.

वैभव महालक्ष्मी की कथा– एक समय महिषासुर नाम का दैत्य हुआ. उसने समस्त राजाओं को हराकर पृथ्वी और पाताल पर अपना अधिकार जमा लिया. जब वह देवताओं से युद्ध करने लगा तो देवता भी उससे युद्ध में हारकर भागने लगे. भागते भागते वे भगवान विष्णु के पास पहुचे और दैत्य से बचने के लिए स्तुति करने लगे.

देवताओं की स्तुति करने से विष्णु एवं शंकर जी प्रसन्न हुए, तब उनके शरीर से एक तेज निकला. जिसने महालक्ष्मी का रूप धारण कर लिया. इन्ही महालक्ष्मी ने महिषासुर दैत्य को युद्ध में मारकर देवताओं का कष्ट दूर किया.

महालक्ष्मी व्रत कथा 2- एक अन्य महालक्ष्मी व्रत कथा जो महाभारत काल से जुड़ी हुई हैं. उस समय भी महालक्ष्मी व्रत किया जाता था. जब भादों माह में लक्ष्मी व्रत आया तो रानी गांधारी उस व्रत के पूजन के लिए सभी स्त्रियों को न्यौता दे रही थी, मगर उसने पांडवों की माँ कुंती को आमन्त्रण नही दिया.

हस्तिनापुर की सभी महिलाएं 100 कौरवों की माँ गांधारी के महालक्ष्मी व्रत पूजन के लिए मिट्टी लाकर सुंदर हाथी बनाकर पूजन के लिए महल में लेकर जा रही थी.

वहीँ दूसरी तरफ माँ कुंती अकेली अपने घर में उदास बैठी थी. अर्जुन ने कुंती के इस तरह उदास बैठने का कारण पता कर कहा- माते आप महालक्ष्मी व्रत पूजन की तैयारी कीजिए मैं आपके लिए जीवित हाथी लेकर आ रहा हूँ.

अर्जुन ने इन्द्रदेव से प्रार्थना कर माँ लक्ष्मी के एरावत हाथी की पूजन के लिए मांग की ओर पूजन के लिए ले आए. कुंती ने सहर्ष एरावत का पूजन किया.

जब गांधारी को इस बात का पता चला तो वह सभी स्त्रियों सहित कुंती के द्वार आई तथा उनसे क्षमा मांगकर लक्ष्मी जी के एरावत का पूजन किया. 

महालक्ष्मी के नाम (goddess lakshmi names)

आदि लक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, आर्ना, श्रेया, विद्या, विभूति, सुधा, हिरण्मयीं, दीप्ता, वसुधा, दीपा, अशोक, अमृता, रमा, प्रसादाभिमुखी, चतुर्भुजा, प्रीता पुष्करिणी, कमलसम्भवा, कांता, हरिवल्लभी, चंद्रवंदना, दरिद्रियनशिनी, स्टरीनासौम्य, पुण्यगन्धा, पद्मगन्धिनी. इस तरह विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जी के 108 नाम माने गये हैं.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों राधा अष्टमी महालक्ष्मी की व्रत 2021 कथा और पूजन विधि Radha Ashtami Mahalaxmi Vrat katha Pooja Vidhi In Hindi का यह लेख आपको पसंद आया होगा. यदि आपको इस व्रत के बारे में दी जानकारी पसंद आई हो तो अपने फ्रेड्स के साथ भी शेयर करें.

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