राहत इंदौरी की शायरी Rahat Indori Shayari In Hindi

राहत इंदौरी की शायरी Rahat Indori Shayari In Hindi: 21 वीं सदी में भारतीय हिंदी उर्दू शायर और गीतकारो का सबसे विख्यात नाम राहत इन्दौरी का हैं.

इनका वास्तविक नाम राहत कुरैशी है 1 जनवरी 1950 को जन्में राहत का 11 अगस्त को निधन हो गया था.

इंदौर वासी होने के नाते ये अपने नाम के साथ इन्दौरी लगाया करते थे. सदी के बड़े शायर के रूप में राहत इन्दौरी को सदैव याद किया जाएगा.

आज के लेख में हम राहत जी की कुछ प्रसिद्ध शेर शायरी यहाँ पोस्ट कर रहे हैं.

राहत इंदौरी की शायरी Rahat Indori Shayari In Hindi

राहत इंदौरी की शायरी Rahat Indori Shayari In Hindi

Rahat Indori Famous Shayari राहत इंदौरी का शायराना अंदाज बेहद बिरला था. बुलंद आवाज के धनी जब भी मंच पर शेर पढ़ने आते तो अच्छे अच्छे खामोश हो जाया करते थे. अपनी लय में आने तक इंदौरी थोड़ा वक्त लिया करते थे, मगर बाद में तो मंच उन्ही का ही हो जाता था.

भारत के बाहर अन्य एशियाई देशों में राहत इंदौरी एक बड़ा नाम था. खासकर शायरी मुशायरे के तो सरताज माने जाते थे. ये जहाँ भी जाते वहां के हो जाते, सरल और सादा स्वभाव, बुलंद आवाज और लफ्जों के साथ इशारों के तालमेल के बीच से निकला उनका हरेक शेर जन जन की आवाज बन जाया करता था. राहत इंदौरी कहने को तो उर्दू शायर थे.

मगर उनकी भाषा इतनी सरल और आम जीवन में काम आने वाली शब्दावली थी, जिसे हर कोई आसानी से समझ जाया करता था. वो बुलाती हैं मगर जाने का नहीं प्रसिद्ध शेर भी इंदौरी ने ही लिखा था.

जब वो आज हमारे बीच नहीं हैं तो उनका एक विख्यात शेर याद आता हैं. वो अपनी मृत्यु के बाद क्या चाहते हैं वो बात उन्होंने एक शेर के माध्यम से कही थी.

विगत 11 अगस्त को कोरोना के लक्षण दिखने के बाद इंदौरी अस्पताल में भर्ती हुए थे और वहां उनकी ह्रदयघात से मृत्यु हो गई थी. इस तरह पिछले 50 वर्षों से चला आ रहा, राहत शायरी का दौर यही थम गया.

"मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना
लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना"

Shayar Rahat Indori

"ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे 
मैं कितनी बार लूटा हूँ मुझे हिसाब तो दे।"

"जा के ये कह दो कोई शोलो से, 
चिंगारी से फूल इस बार खिले है 
बड़ी तय्यारी से बादशाहों से भी 
फेंके हुए सिक्के ना लिए हमने 
ख़ैरात भी माँगी है तो ख़ुद्दारी से।"

"प्यास तो अपनी सात समन्दर जैसी थी, 
ना हक हमने बारिश का अहसान लिया।"

"फूक़ डालूगा मैं किसी रोज़ दिल की दुनिया 
ये तेरा ख़त तो नहीं है की जला भी न सकूं।"

"एक ही नदी के है यह दो किनारे दोस्तो 
दोस्ताना ज़िन्दगी से, मौत से यारी रखो"

"आँखों में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो 
जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो।"

"शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं है हम 
आँधी से कोई कह दे के औकात में रहे।"

"लोग हर मोड़ पे रूक रूक के संभलते क्यूँ है 
इतना डरते है तो घर से निकलते क्यूँ है।"

Rahat Indori Shayri

"हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते"

"एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो"

"घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है"

"शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए"

"अजनबी ख़्वाहिशें , सीने में दबा भी न सकूँ
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे , कि उड़ा भी न सकूँ"

राहत इंदौरी की शायरी शेर हिंदी में 2023

यदि कोई शायरी करता हो और उन्हें शायरी से लगाव हैं तो निश्चय ही उसके दिल में राहत इंदौरी के प्रति ढेर सारा सम्मान भी होगा. क्योंकि उनके बिना किसी शायरी के मुशायरे की कल्पना नहीं की जाती हैं.

हिन्दी उर्दू शायरी गजल और गीतो के रचयिता डोक्टर इन्दौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था. इनके पिताजी का नाम रफ्तुल्ला कुरैशी और माँ का नाम मकबूल उन निशा बेगम था. इन्होने भोज खुला विश्विद्यालय मध्यप्रदेश से उर्दू साहित्य में पीएचडी की थी.

Rahat Indori Ki Shayari

"रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है"

Rahat Indori Romantic Shayari In Hindi

"मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।"

"बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ"

"नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है"

"रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है"

Rahat Indori Shayari Hindi

"मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी"

"बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए"

Rahat Indori Motivational Shayari

"आखिर में उनका ये शेर
कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया
साहब अफवाह थी कि मेरी तबीयत खराब है
लोगों ने पूछ-पूछकर बीमार कर दिया
दो गज सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है
ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया"

"बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए"

"मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए"

"शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे"

Dr Rahat Indori Shayari In Hindi

"सूरज सितारे चाँद मिरे सात में रहे
जब तक तुम्हारे हात मिरे हात में रहे"

Rahat Indori Sher

"कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है"

"दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए"

"वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया"

"ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो"

"ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो"

हर शायरी महफिल में राहत इंदौरी के शेर पढने की बारी का इन्तजार होता था. उनका अनूठा शायरी पढ़ने का अंदाज इन्हें सदियों के लिए अमर बना गया. शेर की हर बात को कई बार दोहराकर बुलंद आवाज में शब्दों के अर्थ के मुताबिक़ भाव प्रकट करना इनकी सबसे बड़ी खूबी थी.

इनकी टोन बेहद नपी तुली हुआ करती थी. वे शेर पढ़ते समय पहली लाइन को कम से कम तीन बार दोहराते थे मगर यह दुहराव श्रोताओं के लिए सदैव नयेपन से लबरेज मिलता था.

अपने पर लगे आरोपों को भी इंदोरी अपनी लेखनी से जवाब देते थे. किसी ने उन्हें जेहादी कहा तो वे जवाब में अपना शेर अर्ज करते है मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना. बहुत कम शब्दों में अपनी बात को गम्भीरता से कहने की अदा इनमें कूट कूटकर भरी थी.

Rahat Indori Poetry In Hindi राहत इंदौरी शेरो शायरी

यदि आप इंटरनेट पर उर्दू के सबसे बेस्ट शायर की शेरो शायरी खोज रहे हैं, तो Dr Rahat Indori Ki Shayari आपकों जरूरी पढ़नी चाहिए. यहाँ हम उनकी एक सौ से अधिक 2 लाइन 4 लाइन की हिंदी उर्दू शायरी बता रहे हैं.

इंदौरी के शायरी कहने का अंदाज कैसा था, इसका जवाब उन्होंने स्वयं अपने एक शेर के माध्यम से प्रस्तुत किया था. उनसे उनका अंदाज ए बया पूछने वाले को इस शेर में जवाब दिया था.

"कभी अकेले में मिलकर झंझोड़ दूंगा उसे
जहां-जहां से टूटा है जोड़ दूंगा उसे
मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका
इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूंगा उसे
पसीने बांटता फिरता है हर तरफ सूरज
कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूंगा उसे"

Rahat Indori Sher Shayari

"आँख में पानी रखो , होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो , तरकीबें बहुत सारी रखो"

"रोज़ तारों को नुमाइश में , खलल पड़ता हैं
चाँद पागल हैं , अंधेरे में निकल पड़ता हैं"

"अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते"

"बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ"

"बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए"

"बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए"

"दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए"

"एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो"

"अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं
पता चला हैं की मेहमान आने वाले हैं
आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो
राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो"

राहत इंदौरी का राजनीतिक दलों तथा सरकारों के सम्बन्ध में भी प्रसिद्ध शेर हैं, अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों में वह कहते हैं कि सरकारे आती जाती रहेगी उनसे हमारा क्या, राहत का यह पूरा शेर पढ़िये.

"ऊंचे-ऊंचे दरबारों से क्या लेना !
नंगे भूखे बेचारों से क्या लेना !
अपना मालिक अपना खालिक तो अल्लाह है
आती-जाती सरकारों से क्या लेना!"

राहत इंदौरी का जीवन विवाद और शायरी Rahat Indori Latest Shayari

आप शायद नहीं जानते हो राहत इन्दौरी ने लगभग अपने जीवन के बीस वर्ष मुंबई में बिताए, यहाँ रहकर उन्होंने कई फिल्मों के गीत लिखे, जिनमें मर्डर और मुन्ना भाई एमबीबीएस प्रमुख हैं. इंदौरी ने अपने करियर की शुरुआत व्याख्याता के रूप में की, ये उर्दू साहित्य पढाते थे.

मगर यही से उनका रुझान शायरी की ओर हो गया तथा देश विदेश में आयोजित होने वाले मुशायरे में बुलाया जाने लगा. इन्होने बहुत अल्प समय में प्रसिद्धि का मुकाम पाया. राहत जब उन्नीस साल के थे तब कॉलेज में पहली बार शायरी सुनाई थी.

शुरू शुरू से राहत की शायरी और शब्दों के चयन से उन पर जिहादी होने के आरोप लगते रहे. मगर जब 2019 में  नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में उतरे तो देश का बड़ा तबका उनसे स्वाभाविक रूप से नफरत करने लगा.

एनआरसी के विरोध में हो रहे आन्दोलन में राहत के शेर हिंदुस्तान किसी के बाप का थोड़े ही हैं स्लोगन ने खूब जहर घोला. एक तरफे सेक्युलरिज्म के ज्ञान बांचने वाले राहत उस गंगा जमुनी तहजीब और भाईचारे के हिमायते थे,

जिसमें हिन्दुओं को दबकर जीने पर विवश किया जाता था. इनकी नजर में यदि बहुसंख्यक अपने हक की आवाज उठाए तो वे साम्प्रदायिक हैं जबकि एक कथित अल्प संख्यक तबका जो विरोध के नाम पर राजधानी को आग के हवाले कर दे,

शहर वासियों को बंधक की जिन्दगी में जीने पर विवश कर दे यह एक तबके के लिए डेमोक्रेसी मानते थे. राहत की मृत्यु पर सोशल मिडिया पर लोगों ने तंज में उनकी ही कई शायरियों को बदल डाला, जिन्हें भी आपके साथ शेयर करेंगे.

Shayari By Rahat Indori In Hindi

"जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए
काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए
दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया
फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए"

"सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें"

"गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं
में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं
फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं"

Best Shayari Of Rahat Indori

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं
ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी
की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं

हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं
आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं
मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं

"बुलाती है मगर जाने का नहीं
बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं
मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं
ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं
सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं
वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं
वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं"

"जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं
अगर अनारकली हैं सबब बगावत का
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं"

Rahat Indori Ki Shero Shayari

"नए सफ़र का नया इंतज़ाम कह देंगे
हवा को धुप, चरागों को शाम कह देंगे
किसी से हाथ भी छुप कर मिलाइए
वरना इसे भी मौलवी साहब हराम कह देंगे"

"जवान आँखों के जुगनू चमक रहे होंगे
अब अपने गाँव में अमरुद पक रहे होंगे
भुलादे मुझको मगर, मेरी उंगलियों के निशान
तेरे बदन पे अभी तक चमक रहे होंगे"

"इश्क ने गूथें थे जो गजरे नुकीले हो गए
तेरे हाथों में तो ये कंगन भी ढीले हो गए
फूल बेचारे अकेले रह गए है शाख पर
गाँव की सब तितलियों के हाथ पीले हो गए"

"सरहदों पर तनाव हे क्या
ज़रा पता तो करो चुनाव हैं क्या
शहरों में तो बारूदो का मौसम हैं
गाँव चलों अमरूदो का मौसम हैं"

"काम सब गेरज़रुरी हैं, जो सब करते हैं
और हम कुछ नहीं करते हैं, गजब करते हैं
आप की नज़रों मैं, सूरज की हैं जितनी अजमत
हम चरागों का भी, उतना ही अदब करते हैं"

"ये सहारा जो न हो तो परेशां हो जाए
मुश्किलें जान ही लेले अगर आसान हो जाए
ये कुछ लोग फरिस्तों से बने फिरते हैं
मेरे हत्थे कभी चढ़ जाये तो इन्सां हो जाए"

"रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं
चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता हैं
उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो
धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं"

Rahat Indori Shayari On Love In Hindi

"लवे दीयों की हवा में उछालते रहना
गुलो के रंग पे तेजाब डालते रहना
में नूर बन के ज़माने में फ़ैल जाऊँगा
तुम आफताब में कीड़े निकालते रहना"

"जुबा तो खोल, नज़र तो मिला,जवाब तो दे
में कितनी बार लुटा हु, मुझे हिसाब तो दे
तेरे बदन की लिखावट में हैं उतार चढाव
में तुझको कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे"

राहत इंदौरी पर शायरी तंज व्यंग्य

इसमें कोई शक नहीं कि शायरी में इंदौरी एक बड़ा नाम था, हालांकि इनके जीवन से जुड़े कई सारे पहलू उनके समर्थकों के दिल में दूरियां बना गई.

70 साल की जिन्दगी जीने वाले राहत ने अपने अंतिम दस वर्षों में आजीवन कमाई इज्जत को कमतर खुद ही किया. वे एक तरफ हिन्दुओ को गंगी जमुनी तहजीब की घुट्टी पिलाकर शायरियाँ सुनाते दूसरी तरफ प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इस्लाम को संरक्षण देते रहे.

सेक्युलरिज्म के प्रतीक माने जाने वाले राहत इंदौरी ने प्रधानमंत्री मोदी, उनकी पार्टी समेत कई राष्ट्रीय मुद्दों पर भर्त्सना की और आजीवन विरोध का प्रतीक बने मगर वही किसी अन्य दल के नेता के खिलाफ वे शायरी करने की हिम्मत नहीं कर पाए थे. यहाँ हम राहत कुरैशी की मृत्यु पर कुछ सोशल मिडिया यूजर द्वारा प्रस्तुत की गई शेर शायरी बता रहे हैं.

जिनका हमसे या हमारी विचारधारा से कोई सरोकार नहीं हैं. हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं  हैं. मनोरंजन के लिहाज से आप इन शायरी चुटकलों का आनन्द ले सकते हैं.

"थोड़ी बहुत कानों को राहत मिली ,
देश के गद्दारों की कोई तो फरियाद सुनी ।
करोड़ों दिलों को , जिसने किया था आहत ।
उन देश भक्त योद्धाओं को , थोड़ी राहत मिली ।
।। जय हिंद , जय भारत ।।"

"अमित शाह के लिए दुआ कर रहे थे, 
कुबूल राहत इंदौरी के लिए हो गई ?
ये ससुरा
कोरोना भी अलग ही पैटर्न फॉलो करता है।?"

"जो केवल एक कौम का रहा..
कवि कहलाने लायक थोड़े ही हे..
जो मर कर भी ना हो सका अमर..
जिसे जन्नत मेँ भी राहत" थोड़े ही हे.."

“खफा होते हो तो होने दो, घर के मेहमान थोड़ी है
जहां भर से लताड़े जा चुके, इनका ईमान थोड़ी है
ये कान्हा राम की धरती, सजदा करना ही होगा
मेरा वतन मेरी माँ है, लूट का सामान थोड़ी है
बोहोत लूटा कभी बाबर तो कभी तैमूर की औलादो ने
ये मेरा देश कोई खैरात का सामान थोड़े है
मैं गर्व से कहता हूं कि
नही शामिल तुम्हारा खून, इस देश की पावन मिट्टी में
तुम्हारे बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है”


"मांगी थी दुआ #शाह की,
#राहत निकल लिया।
कोरोना तेरी दुआ का,
गुलाम थोड़ी है.....
लेटा दो इसे #खोद के
अब जमीन चार गज,
हूरों का बाग है ये,
#कब्रिस्तान थोड़े है।"

"दुआ की थी मोटा भाई के लिये, 
लेकिन कही अटक गए
नजाने क्या जादू हुआ, 
इंदौरी सटक गए ?
मस्जिदें कबूल थीं, 
बस मंदिर खटक गए।
भूमिपूजन से आहत, 
राहत सटक गए।।?"

"फैलेगा कोरोना तो आयेंगे सभी जद में,
ये कोरोना किसी इंदौरी का सगा थोड़ी है।
जा इंदौरी जी ले दोजख में देश भक्ति 
तेरे बस की बात नहीं है।"

"बिना मास्क निकलते है ,तो निकलने दो
ये सब बहम है, कोई वहशत थोड़ी है
लगेगा करोना तो आएंगे बहुत ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारी जान थोड़ी है
मैं जानता हूँ कि बिमारी भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है
हमारे मुंह से जो बोले वही सचाई है
हमारे हाथ मे करोना से लड़ाई थोड़ी है
*सभी को बीमार होने का हक‌‌ है*
*किसी के बाप का करोना थोडे ही है*"

"बुलाती है ?‍♀️
☝️मगर जाने का नहीं..
फिर भी चले गये.. ऐसे कैसे,
किसी के बाप का corona थोड़ी है ?
#आफत_इंदौरी ??"

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