राकेश टिकैत का जीवन परिचय Rakesh Tikait Biography In Hindi

राकेश टिकैत का जीवन परिचय Rakesh Tikait Biography In Hindi राकेश टिकैत पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बने हुए है। तो आइए आपको बताते हैं कि राकेश टिकैत आखिर कौन है? वह कहां का रहने वाले है? उनकी संपत्ति, गांव, जाति आदि चीजों के बारे में बताएंगे और इन सबके अलावा टिकैत अचानक इतनी चर्चा में क्यों आ गए हैं इसकी वजह भी हम आपको बताएंगे तो बने रहिए हमारे साथ।

राकेश टिकैत का जीवन परिचय Rakesh Tikait Biography In Hindi

राकेश टिकैत का जीवन परिचय Rakesh Tikait Biography In Hindi

आमतौर पर हम देखते हैं कि हमारे देश में अपने कार्यों की वजह से अक्सर कोई न कोई चर्चा का विषय बना रहता है। और विशेषकर राजनीति से  कोई ना कोई राजनेता अपने कार्यों या बयानों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। 

कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपनी दैनिक घटनाओं की वजह से भी चर्चा का विषय बन जाते हैं। इसी में एक व्यक्ति ऐसे भी हैं जो पिछले साल से चली आ रही उत्तरी भारत में किसान आंदोलन की वजह से अचानक से चर्चा में आ गए थे। 

जी हां आज हम आपको वर्तमान भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित व्यक्ति के बारे में बताने वाले हैं, जिनका नाम राकेश टिकैत है। जो पिछले कुछ समय से खुद को किसान नेता बता कर काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं।

राकेश टिकैत कौन है इनका जीवन परिचय

नामराकेश टिकैत
जन्म4 जून 1969
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश शिशोली
पिता का नाममहेंद्र सिंह टिकैत
माता का नामNot know
जातिजाट
धर्महिंदू
राष्ट्रीयताभारतीय
गृह नगरउत्तर प्रदेश लखनऊ
विवाह और बच्चेNot know
पेशाभारतीय किसान यूनियन के नेता।
संपत्ति4 करोड़ (लगभग)

4 जून 1969 को उत्तर प्रदेश लखनऊ में राकेश का जन्म हुआ था। टिकैत के पिता का नाम महेंद्र सिंह टिकैत हैं। ये मूल रूप से बलिया खाप गांव के रहने वाले हैं। इस खाप का मुख्य नियम यह था कि यहां पिता की मृत्यु के बाद घर का बड़ा ही घर का मुखिया होता है। 

चूंकि राकेश और नरेश में नरेश बड़े थे, इसलिए उन्हें बीकेयू अर्थात भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया। टिकैत की शुरुआती पढ़ाई उत्तर प्रदेश के मेरठ से पूर्ण हुई थी और बाद में वह मेरठ विश्वविद्यालय से ही आर्ट्स में डिग्री हासिल किए थे। आर्ट्स डिग्री हासिल करने के बाद टिकैत वकालत की पढ़ाई कर वकील बन गए थे। 

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जब राकेश न्यू दिल्ली में सब इंस्पेक्टर के पद पर जॉब कर रहे थे, तभी उसी दौरान उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई में वही पर किसान आंदोलन चल रहा था। 

राकेश टिकैत ने पुलिस की नौकरी क्यों छोड़ी?

राकेश टिकैत न्यू दिल्ली में बतौर सब इंस्पेक्टर कार्यरत थें। उसी दौरान जब राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा टिकैत के कार्य क्षेत्रों में ही किसान आंदोलन चलाया जा रहा था।

तब टिकैत पर दिल्ली की सरकार द्वारा काफी दबाव बनाया जा रहा था कि वह अपने पिता को समझा मना कर किसान आंदोलन को खत्म करें। 

परंतु टिकैत ने अपने पिता जी को मनाने और समझाने के बजाय खुद ही अपनी सब इंस्पेक्टर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। और अपने पिताजी के साथ किसान आंदोलन से जुड़कर किसानों के नेता बन गए। 

राकेश टिकैत की शादी और बच्चे

टिकैत अब बतौर किसान नेता चर्चा का विषय बन गए थे और इसी दौरान साल 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव के रहने वाले सुनीता देवी के साथ राकेश टिकैत की शादी कर दी गई। 

शादी के बाद राकेश टिकैत का एक पुत्र और दो पुत्री हुई। पुत्र का नाम था चरण सिंह और पुत्रियों का नाम सीमा और ज्योति था।  वर्तमान में उनकी दोनों पुत्रियों की शादी हो चुकी है। और उनका एक पुत्र था चरण सिंह उसका भी विवाह हो चुका है। 

राकेश टिकैत कौन है?

ऐसा कहा जाता है कि भारत के अंदर भारतीय किसान यूनियन की स्थापना 1987 में कि गई थी। जब बिजली के बढ़ते दामों को लेकर उस दौरान किसानों ने पहली बार किसान यूनियन नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में कर्मुखेड़ी गांव जो कि शामली जनपद में आता है। वहां पर एक बहुत बड़ा आंदोलन किया गया था।

टिकैत एक किसान नेता है, जो फिलहाल में भारतीय राष्ट्रीय किसान यूनियन के प्रवक्ता भी हैं। टिकैत किसान यूनियन के भूतपूर्व अध्यक्ष रह चुके महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे हैं। टिकैत का किसान यूनियन संगठन उत्तर प्रदेश और भारत के कई उत्तरी राज्यों में वर्तमान समय में सक्रिय है।

पिछले वर्ष 2020 में जब केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों में बदलाव करते हुए 3 नए नियमों को पारित किया था तो उसी के विरोध में गाजीपुर बॉर्डर पर लगभग कई महीनों तक धरना प्रदर्शन करने के कारण राकेश टिकैत अचानक से पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए थे।

टिकैत जहा भारतीय किसान यूनियन में राष्ट्रीय प्रवक्ता है तो वहीं इनके बड़े भाई नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन में राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। राकेश टिकैत इंडियन फार्मर एसोसिएशन के नेता भी हैं।

टिकैत की कुल संपत्ति

किसान आंदोलन करके खुद को चर्चा में लाने वाले टिकैत अपनी जिंदगी में अब तक करीब दो बार चुनाव भी लड़ चुके हैं। पहली बार जब 2014 के लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ने हेतु राकेश टिकैत ने जब नामांकन पत्र दायर किया था, तो उस समय राकेश टिकैत की कुल संपत्ति करीब करीब 4,25,18,029 रूपए की थीं। 

और उसी नामांकन पत्र के हिसाब से टिकैत के पास लगभग केस में 10,00000 रुपए उपलब्ध था। टिकैत की वर्तमान में अगर कुल संपत्ति के बात करें तो इसके बारे हमारे पास कोई निश्चित जानकारी तो नहीं है परंतु इतना जरूर अंदाजा लगा सकते हैं, कि राकेश टिकैत की कुल संपत्ति में कई गुना इजाफा हुआ होगा। 

किसान यूनियन की मुख्य मांगे

  1. वर्ष 1976 से 1997 के बीच में जितने भी किसानों का जमीन अधिकृत किया गया है उन्हें अपने जमीन का लगभग 10% तक मालिकाना हक दिया जाना चाहिए।
  2. किसान कोटा स्कीम की तहत जमीन की कीमतें कम होनी चाहिए।
  3. किसान यूनियन की एक प्रमुख यह भी थी जो योग्य और अयोग्य किसान है उनकी एक सूची तैयार की जाए और उस सूची को प्राधिकरण बोर्ड पर चिपकाया जाए।
  4. गांव में साफ सफाई का और अस्पतालों में इलाज का सिर्फ 10 प्रतिशत खर्चा ही किसानों से लिया जाय।
  5. गांव के रास्ते पर जितने भी मेट्रो स्टेशन बने है, उनका नाम उसी गांव के नाम पर रखा जाना चाहिए।
  6. किसानों की जितनी आबादी है उतनी ही रहने दी जाए और पीपी एक्ट के तहत जो भी केस उन पर दर्ज है उसको वापस लिया जाए।
  7. ऐसे गरीब लोग जो पटरी और रेहड़ी पर कार्य करते हैं, उनको अतिक्रमण हटाने के नाम पर परेशान नहीं किया जाए। और उनके रहने के लिए उनको उचित स्थान दिया जाए।
  8. सभी सेक्टर्स में बने हुए कॉन्वेंट स्कूलों में किसान घर से ताल्लुक रखने वाले बच्चों का भी प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।

किसान आंदोलन में टिकैत की भूमिका

पिछले कुछ समय से राकेश टिकैत किसान आंदोलनों में बतौर किसान नेता काफी बढ़ चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। वर्तमान समय में राकेश टिकैत किसान आंदोलन में बतौर किसान नेता लीड रोल में नजर आ रहे हैं। 

राकेश टिकैत के बारे में लोगों के बीच तरह-तरह की बातें निकल कर सामने आ रही है, सभी लोगों के अलग-अलग विचार हैं।

 परंतु आपको यह जानना चाहिए कि 26 जनवरी 2021 दिल्ली में जो हिंसा हुई तो उसके बाद से राकेश टिकैत काफी चर्चा में आ गए थे। आपको जानना चाहिए कि वर्तमान समय में टिकैत भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता हैं और इसी कारण वह पूरे देश में हर जगह किसान आंदोलन को बढ़ावा दे रहे हैं।

टिकैत का मंदिरों पर भड़काऊ बयान

आपको बता दें कि पूरे देश का ब्राह्मण समाज फिलहाल में टिकैत के खिलाफ हो चुका है। इसका कारण राकेश टिकैत का मंदिर के ऊपर दिया गया विवादित बयान हैं।

राकेश टिकैत के लिए यह बयान देना पूरी तरह से अशोभनीय थी। राकेश टिकैत द्वारा दिए गए इस बयान ने पूरे देश में अशांति का माहौल पैदा कर दिया था और राकेश टिकैत के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों में ब्राह्मणों द्वारा धरना प्रदर्शन और आंदोलन भी किया गया। 

वर्तमान में तो ये किसान आंदोलन की वजह से ही चर्चा में बने हुए हैं। और यह पूरे भारत में एक किसान नेता के तौर पर जाने जाते हैं। 

तीनो किसान बिल वापसी

करीब एक साल तक राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों के दिल्ली सीमा पर डेरा डाले रहने के बाद भारत सरकार ने तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापिस लेने का निर्णय ले लिया हैं. 29 नवम्बर को संसद के दोनों सदनों से बिल वापसी के बाद राष्ट्रपति ने 1 दिसम्बर को अपनी मुहर लगा दी.

पुरस्कार

21वीं सेंचुरी आइकॉन अवार्ड

के लिए राकेश टिकैत का नाम फाइनलिस्ट हो गया हैं. 10 दिसम्बर को लंदन में अतिम विजेता की घोषणा की जानी हैं. इससे पहले यह अवार्ड कई भारतीयों सोनू निगम, शंकर महादेवन, राघवेन्द्र राठौड़ और धीरज मुखर्जी को मिल चूका हैं.

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