रूमा देवी का जीवन परिचय Ruma Devi Biography In Hindi

रूमा देवी का जीवन परिचय Ruma Devi Biography In Hindi : हाथ का हुनर न शिक्षा का गुलाम रहता है न दौलत का, ऐसे ही बुलंद हौसलों और पारंपरिक हस्तकला में दक्ष फैशन डिजायनर बाड़मेर की बेटी रूमा देवी की कहानी हैं. बाड़मेर की झुग्गी झोपडी से शुरू हुआ रूमा का सफर नारी शक्ति अवार्ड 2018, कौन बनेगा करोड़पति से लेकर कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक जा चुका हैं. राजस्थानी वेशभूषा और संस्कृति की एम्बेसडर बनकर रुमा देश दुनियां में इसके रंगों को बिखेर रही हैं.

रूमा देवी का जीवन परिचय Ruma Devi Biography In Hindi

रूमा देवी का जीवन परिचय Ruma Devi Biography In Hindi

कौन है रूमादेवी

33 वर्षीय रूमा देवी की कहानी आज हर महिला के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं. बाड़मेर का यह मरुस्थलीय क्षेत्र जहाँ ये पली बढ़ी यहाँ कशीदाकारी और हस्तकला का काम कई सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा हैं. मगर आधुनिकता की आंधी के बीच पारंपरिक कला कही रेत के टीलों के बीच दब सी गई थी.

रूमा एक साधारण जाट परिवार में जन्मी थी, आम महिला की भांति इनका जीवन भी व्यतीत हो रहा था. मगर जीवन के संघर्ष ने इन्हें अतीत को याद दिलाया, जब इनकी दादी कशीदाकारी का छोटा मोटा काम कर लिया करती थी.

दादी के इस काम को अपनाने के विचार को लेकर उसे अधिक व्यवसायिक बनाने का निश्चय किया और साल 1998 में ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर (जीवीसीएस) से जुड़ी. ये संस्था महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण देने का कार्य करता था.

संक्षिप्त परिचय

नामरूमा देवी
जन्म1988
जन्म स्थानरावतसर बाड़मेर
शिक्षाआठवीं तक
व्यवसायफैशन डिजायनर
पति का नामटीकूराम
संतान1 बेटा (लक्षित)
संस्थानदीप देवल महिला स्वयं सहायता समूह
सम्माननारी शक्ति पुरस्कार, केबीसी, हार्वड यूनिवसिर्टीआमंत्रण
माता का नामइमरती देवी
पिता का नामखेताराम
इन्सटाग्रामhttps://www.instagram.com/drrumadevi/
फेसबुकhttps://touch.facebook.com/RumaDeviNariShaktiPresidentialAwardee/
ट्विटरhttps://twitter.com/RumaDeviBarmer
वेबसाइटhttps://rumadevi.com/
धर्म जातिहिन्दू, जाट (राड़)

जन्म

रूमा के जन्म के साथ ही इनकी संघर्ष की कहानी समानांतर चल पड़ी थी. नवम्बर 1988 को बाड़मेर शहर से 25 किमी दूरी पर स्थित रावतसर के एक मध्यमवर्गीय जाट परिवार में इनका जन्म हुआ था.

इनके पिता का नाम खेताराम जी और माँ का नाम इमरती देवी था. जन्म के करीब चार साल बाद ही रूमा देवी की माताजी का देहावसान हो गया. खेताराम जी की आठ बेटियों और एक बेटे में रुमादेवी सबसे बड़ी बेटी थी. माँ की मृत्यु के बाद रूमा के पिता ने दूसरी शादी कर दी और उन्हें चाचा के पास छोड़ दिया.

शिक्षा

डॉ की मानद उपाधि प्राप्त रूमा देवी की सफलता में बड़ा हाथ उनके हुनर का था. विषम पारिवारिक परिस्थतियों के चलते वह उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाई थी. सम्भवत ये कठिन हालात ही इन्हें इस मुकाम तक पहुचाने में कही न कही अपनी भूमिका अदा कर रहे थे.

जब रूमा देवी की माताजी का देहावसान हुआ तब ये आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी. चाचा के यहाँ रहते हुए आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकी और इनकी शिक्षा को यही विराम लग गया. बाड़मेर के दैनिक जीवन के कठिन हालातों से इन्हें भी दो दो हाथ होना पड़ा. घर से दस किमी दूर से बैलगाड़ी पर पानी भरकर लाना और घर के काम में हाथ बटाना इनकी दैनिक दिनचर्या बन चुकी थी.

रूमा देवी का वैवाहिक जीवन

17 वर्ष की आयु में साल 2005 में इनका विवाह मंगले की बेरी के निवासी टीकूराम जी के साथ हुआ. यही से रूमा के जीवन सफर की एक नई कहानी शुरू हुई. वैवाहिक जीवन के दो वर्ष उपरान्त ही इनके एक बेटा हुआ,

मगर दुर्भाग्य से साँस की बिमारी के चलते उसकी मृत्यु हो गई. इस घटना ने रूमा को सिर्फ तोड़ ही नहीं दिया बल्कि संघर्षशील जीवन की प्रेरणा भी दी.

रूमा देवी ने मन में ठान लिया कि वह अब वह कुछ काम करेगी और जीवन की दशा को बदलने का हर सम्भव प्रयास करेगी. इनके पति टिकुराम नशा निषेध सेंटर जोधपुर के साथ काम करते हैं.

ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर से जुड़ना

रुमा ने अपने आस पास की गृहणी महिलाओं के साथ स्वरोजगार के काम की तलाश की और उनका ध्यान ग्रामीण विकास चेतना संस्थान बाड़मेर की ओर गया.

साल 2006 में यह दस महिलाओं के साथ इस संगठन के साथ जुडी और निष्ठापूर्वक कार्य करती रही. साल 2010 में वो इस संगठन की अध्यक्षा बन गई. ग्रुप की सदस्य महिलाएं अब अपने घर चलाने योग्य आजीविका का अर्जन करने लगी.

रुमा देवी के केरियर की शुरुआत

बचपन से दादी से सीखे कशीदाकारी के काम को आगे बढ़ाने के लिए इन्होने कुछ साथी महिलाओं को अपने साथ लिया और कुछ रो मेटेरियल के साथ एक सिलाई मशीन की मदद से काम शुरू किया.

2008 में दस सहयोगी महिलाओं के साथ दीप देवल महिला स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की और हस्तशिल्प के छोटे मोटे सामान बनाने लगी, जिसकी बिक्री अपने ही गाँव में हो जाया करती थी.

आज रूमा देवी के संगठन के साथ करीब 75 गाँवों की 22 हजार महिलाएं जुडी हुई हैं. जो इस पारम्परिक हस्तकला से स्वरोजगार प्राप्त कर रही हैं. इनके द्वारा तैयार राजस्थानी हस्तशिल्प जैसे साड़ी, बेडशीट, कुर्ता समेत अन्य कपड़े लंदन, जर्मनी, सिंगापुर और कोलंबो के फैशन वीक्स में प्रदर्शित हो चुके हैं.

रूमा देवी के फैशन शो

रुमा को अपनी हस्तकला की प्रदर्शनी का पहला अवसर दिल्ली के फैशन शो में मिला. विभिन्न तरह के कपड़ो और साड़ियों पर उनकी कशीदाकारी की इन शो में प्रदर्शनी की गई. इसके पश्चात राजस्थान हेरिटेज वीक जयपुर के फैशन शो में भी रूमा देवी ने भाग लिया. अब तक इन्हें कोई ख़ास लोकप्रियता हासिल नहीं हुई.

अगली बार राजस्थान स्थापना दिवस पर आयोजित मेगा शो की फैशन प्रदर्शनी में रुमा शामिल हुई. यह शो 112 देशों में प्रसारित किया गया था. राजस्थानी वेशभूषा को इस बार अच्छी पहुँच मिली और कई बड़े फैशन डिजायनरों के आर्डर आने लगे.

रूमा जर्मनी में आयोजित एक टेक्सटाइल शो में भी गई, जहाँ उसने सुई धागे की मदद से मंच पर अपने हुनर का प्रदर्शन किया तो उनकी कशीदाकारी के सभी दीवाने हो गये. रुमा ने हाल ही में दुबई समेत कई यूरोपीय देशों में भी अपने हुनर का प्रदर्शन किया हैं.

रूमा देवी की कामयाबी व पुरस्कार

मेहनत, संघर्ष और सफलता का मिश्रण बनी रूमा ने न केवल एक पारम्परिक हस्त शिल्प उद्योग को पुनर्जीवित कर नई पहचान दी, बल्कि राज्य के तीन जिलों की करीब 22 हजार महिलाओं को इस शिल्प से जोड़ने का कार्य भी किया.

उनके इस कार्य के लिए भारत सरकार ने महिलाओं के सर्वोच्च सम्मान नारी शक्ति पुरस्कार 2018 से इन्हें सम्मानित किया गया.

इस अवार्ड को जीतने के बाद रूमा देवी को राजस्थान की फैशन डिजायनर के रूप में विशेष पहचान मिली. उन्हें देश विदेश के कई कार्यक्रमों में भी भाग लेने के न्यौते मिले. ये 15-16 फरवरी को अमेरिका में आयोजित दो दिवसीय हावर्ड इंडिया कांफ्रेंस में भी शामिल हुई.

हावर्ड यूनिवसिर्टी की ओर से उनके बच्चों को पढ़ाने का प्रस्ताव भी मिला. आपको बता दे रूमा के बेटे का नाम लक्षित है जो फिलहाल स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहा हैं.

रूमा देवी को अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय टेलिविज़न शो कौन बनेगा करोड़पति में भी शिरकत करने का मौका मिला. हालांकि सोनाक्षी सिन्हा के साथ हुए इस शो में संजीवनी बूटी के प्रश्न को लेकर सिन्हा और रूमा को सोशल मिडिया यूजर ने अल्प ज्ञान के लिए ट्रोल भी किया था.

हाल ही में ये मेंरिडियन कॉन्फ्रेंस सेंटर मे जीटो इंटरनेशनल की तरफ से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में रूमा देवी को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में UAE समेत 12 देशों की जानी मानी हस्तियाँ शामिल रही. इस दौरान डॉ रूमा ने फिल्म अभिनेता सुनली सेट्ठी से भी मुलाक़ात की.

16 नवम्बर 2021 को राजस्थानी हस्तशिल्प फैशन शो में प्रवासी राजस्थानी और मारवाड़ी युवा मंच की ओर से रूमा देवी को द महाराणा अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. रूमा कला और संस्कृति के संरक्षण में राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करते हुए दुबई एक्सपो में भाग लेने पहुची थी.

रोचक तथ्य और जानकारी

रेतीले धोरों के बीच बनी कच्ची झोपड़ियों से जीवन आरम्भ करने वाली रूमा आज तक कई देशों की यात्राओं पर जा चुकी हैं. परन्तु अपनी पारम्परिक वेशभूषा और संस्कृति में जीना इन्हें काफी पसंद रहा हैं.

आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाली रूमा को हावर्ड यूनिवसिर्टी में अपने बच्चें को पढ़ाने का आमंत्रण भी मिल चुका हैं. रूमा एक फैशन डिजायनर होने के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं.

कई सामाजिक कार्यक्रमों में ये हिस्सा लेती हैं. सोशल मिडिया पर रूमा देवी काफी सक्रिय रहती हैं. ये अपने कार्यक्रमों और अपनी कला से जुड़ी चीजों को इन माध्यमों से प्रचारित करती हैं. इन्हें लोकगीत गाने का भी शोक हैं ये अपने यूट्यूब चैनल पर इस तरह के विडियो भी अपलोड करती हैं.

ये रूमा देवी फाउंडेशन नामक एनजीओ भी चलाती हैं. इसके माध्यम से प्रतिभाशाली और होनहार बच्चों को छात्रवृत्ति और पुरस्कार दिए जाते हैं. रूमा फाउंडेशन खेल, कला और शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले होनहार युवक युवतियों को छात्रवृत्ति योजना अक्षरा के तहत 50 प्रतिभाओं को सम्मानित करती हैं.

रुमा देवी पर लिखी पुस्तक

लेखिका निधि जैन ने रुमा के जीवन से प्रभावित होकर इनकी कहानी को हौसले से हुनर शीर्षक से प्रकाशित किया हैं. बाड़मेर की रुमा ने किस तरह अल्प शिक्षा, साधनों की कमी और अभावों के बीच कामयाबी को पाया, उनकी इस कहानी को किताब में सभी पहलुओं और जीवन की प्रत्येक घटना को अच्छे से लिखा गया हैं.

प्रसिद्ध कथन कोट्स

रुमा देवी कहानी एक साधारण महिला की किवदन्ती जैसी लगने वाली असाधारण कहानी हैं.

अमिताभ बच्चन

श्रीमती रूमा देवी स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन हस्तशिल्पी कलाकार महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं जो बहुत ही कम मजदूरी पर कार्य कर रही है उनकी संस्था ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान लगभग 75 ग्रामों में कार्य कर रही है और इस संस्था के माध्यम से अब तक 11 हजार हस्तशिल्पी कलाकार प्रशिक्षित हो चुके हैं.

रामनाथ कोविंद

रुमा देवी वास्तव में एक असाधारण महिला है उनकी लग्न उनका समर्पण और उनकी प्रतिभा ने उन्हें एक ऐसे मुकाम पर पंहुचा दिया हैं जहाँ से वे हजारों महिलाओं को प्रेरित कर सकती हैं, उनका नेतृत्व कर सकती हैं. और उनका सशक्तिकरण कर सकती हैं वे स्त्री शक्ति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं.

शोभा डे

रुमा देवी एक ऐसी महिला है जो न केवल अपने पैरों पर खड़ी हुई हैं बल्कि हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक बनी, उनका कार्य अतुलनीय हैं.

सोनाक्षी सिन्हा

बाड़मेर की हस्तशिल्पी रूमा देवी को सर्वोच्च नारी शक्ति अवार्ड

अतंरराष्ट्रीय महिला दिवस 2019 के मौके पर भारत के महामहिम राष्ट्रपति के हाथों रूमा देवी को नारी शक्ति पुरस्कार 2018 से सम्मानित किया गया. हस्तशिल्प क्षेत्र में नवाचार के लिए उल्लेखनीय कार्य के लिए इन्हें नामित किया गया था. 32 वर्षीय रुमा देवी ने कसीदाकारी का काम अपनी दादी से सीखा था.

ग्रामीण चेतना विकास संस्थान के साथ मिलकर गाँवों में फैशन डिजायनिंग के कार्य के प्रोत्साहन में इनका बड़ा योगदान रहा हैं. आपको बता दे इस फैशन डिजायनर कलाकार को अब तक महिला शक्तिकरण अवार्ड, थार नारी शक्ति सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय सीएसआर अवार्ड, शिल्प सज्जन अवार्ड भी प्राप्त हो चुके हैं.

रूमा देवी को बनाया राजीविका का ब्रांड एंबेसडर

राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद ने दिसम्बर 2021 में अपने एक संवाद कार्यक्रम के दौरान अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर डाॅ. रूमा देवी को राजीविका का स्टेट ब्रांड एंबेसडर बनाया हैं. महिलाओं के उत्थान एवं स्वयं सहायता समूहों के जरिये महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही रूमा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.

राजविका प्रदेश के 2 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ा संगठन है जिसके तहत 20 लाख महिलाएं जुड़ी हैं. राजिविका के कार्यक्रमों में लघु उद्योग, पशुपालन, कृषि कार्य, मधुमक्खी पालन व हस्तकला से जुड़े कार्य शामिल हैं.

Faq

राजस्थान की फैशन डिजायनर रूमा देवी का सम्बंध किस गाँव से है.

रूमा देवी का मायका रावतसर गाँव तथा ससुराल मंगले की बेरी हैं.

रूमा देवी ने कहाँ तक शिक्षा प्राप्त की

ये आठवीं उत्तीर्ण हैं, इन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हैं.

हाल की में रूमा देवी को कौनसा सम्मान मिला?

दुबई के इंडिया क्लब में 16 नवंबर को आयोजित कार्यक्रमों में रूमा देवी जी को द महाराणा अवार्ड, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड लदंन से सम्मानित किया.

ये किन वस्त्रों पर कशीदाकारी का काम करती हैं?

रूमा अपने संगठन की 22 हजार महिलाओं के साथ बुनाई, एंब्रॉयडरी, एप्लिक वर्क, प्रिंट, गोटापत्ती, काचँ-कशीदा वर्क करती हैं.

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