संतान सप्तमी व्रत, कथा, पूजा विधि 2022 | Santan Saptami Vrat, Katha, Mahatva in Hindi

संतान सप्तमी व्रत, कथा, पूजा विधि 2022 | Santan Saptami Vrat, Katha, Mahatva in Hindi संतान सप्तमी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि के दिन किया जाता है. इस वर्ष 3 सितंबर 2022 को रविवार के दिन हैं. यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा ही किया जाता हैं. दुबडी साते/संतान सप्तमी व्रत करने से संतान प्राप्ति, संतान सुख तथा संतान की रक्षा के लिए किया जाता हैं. इस व्रत के दौरान शिव तथा गौरी की पूजा आराधना की जाती हैं. संतान सप्तमी को ललिता सप्तमी के नाम से भी जाना जाता हैं. इसे भाद्रपद माह की शुक्ल सप्तमी को मनाया जाता हैं. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह व्रत हर साल अगस्त या सितम्बर में पड़ता हैं. इस साल 2022 में संतान सप्तमी 3 सितम्बर 2022 को हैं.

संतान सप्तमी व्रत, कथा, पूजा विधि 2022 | Santan Saptami Hindi

संतान सप्तमी व्रत, कथा, पूजा विधि 2022 | Santan Saptami Vrat, Katha, Mahatva in Hindi

दुबडी साते अर्थात संतान सप्तमी से जुड़ी आपकों एक पौराणिक व्रत कथा सुना रहे हैं. जिसके अनुसार किसी नगर में एक बनिया रहा करता था. उसके सात सन्तान थी. उसके साथ दर्दनाक घटनाएं घटित होती जा रही थी. जब भी वो अपने किसी बेटे का विवाह करता तो उसकी मौत हो जाती थी. इस प्रकार शादी करने से उस बनिए के 6 बेटों की मृत्यु हो गई थी. अब उनका सबसे छोटा बेटा जीवित बचा था.

एक समय की बात हैं, राजा ने उस सातवें बेटे की शादी भी तय कर दी तथा सभी दोस्त रिश्तेदारों को शादी में आने का न्यौता दे दिया. जब बनिये की बहिन यानि उस लड़के की बुआ अपने ससुराल से भतीज के विवाह में शामिल होने के लिए आ रही थी, तो उसे रास्ते में चक्की पीसती हुई एक बूढी औरत मिली.

बुआ उस बुढ़िया के पास गई, उनके पावं लगी तभी वो वृद्ध बुढ़िया बोली- बेटी तूं कहा से आई हो, और कहाँ जा रही हो. तब बुआ ने सारी बात बता डाली. सब कुछ सुनने के बाद उस बुढ़िया ने भतीजे के बारे में बताया कि वह तो घर से निकलते ही चौखट पर दरवाजा गिरने से मर जाएगा.

अगर तेरा भतीजा उस दरवाजे से बच गया तो बारात जाते वक्त राह में पेड़ गिरने से दबकर मर जाएगा, यदि वही बच गया तो ससुराल में दरवाजा गिरने से उसकी मौत हो जाएगी. यदि वहां भी तेरा भतीज बच गया तो सातवें समुद्र से सांप निकलकर काट लेगा, जिससे उसकी मृत्यु हो जाएगी.

तब घबराकर बुआ बोली- माँ इससे बचने का कोई उपाय नही हो सकता. तब उन्होंने कहा- बहुत कठिन हैं, मगर मेरे बताएं उपाय आप करे तो आप अपने भतीजे को बचा सकती हैं साथ ही मरे हुए 6 भतीजों को भी जीवित करवा सकती हैं.

बुढ़िया उपाय बताते हुए आगे कहती हैं.- अपने भतीजे की बारात दीवार तोड़कर ले जाना, रास्ते में बारात को पेड़ के नीचे मत रोकना, ससुराल में भी बारात को दरवाजे से मत निकालना, सांप के लिए एक कटोरा दूध ले जाना, जब काटने को सर्प आवे तो उन्हें दूध पिला देना एवं बंदी बना देना.

जब नागिन अपने सांप को लेने आए तो अपने छः भतीजों को जीवित मांग लेना तथा सर्प को छोड़ देना. इस बात का ध्यान रखना हमारे बिच चली बात का पता किसी तीसरे को नही चलना चाहिए, अन्यथा सुनने तथा सुनाने वाले की मौत हो जाएगी. यदि ऐसा हुआ तो तुम अपने भतीजे को नही बचा सकोगी. इतना कहकर बुढ़िया ने अपना नाम दुबड़ी बताकर वहां से चली गई.

जैसा उस वृद्ध महिला ने कहा बुआ सुनकर अपने मायके आ गई, उसी समय बारात जाने की तैयारी में थी. बुआ ने उनका रास्ता रोककर कहा- बारात को पीछे के रास्ते से ले आओं. दुल्हे को पिछले दरवाजा से निकाला गया, तभी पुराना दरवाजा गिर गया. बराती यह सब देखकर बुआ को कहने लगे आपने अच्छा किया.

अब बुआ भी बारात के साथ चलने लगी, सभी ने मना किया, क्योंकि स्त्रियों को बारात में जाने की अनुमति नही होती हैं. फिर भी उसने किसी की नही सुनी. राह में काफी देर चलने के बाद सभी ज्यों ही पेड़ की छाव में बैठने ने लगे, बुआ ने सबकों मना कर दुल्हे को धूप में बिठाया, दूल्हा जैसे ही बैठा पेड़ गिर गया. सभी लोग बुआ को भविष्यद्रष्टा मानते हुए बड़ाई करने लगे.

जब बारात सुसराल पहुची तो बुआ ने दुल्हे को आगे के दरवाजे की बजाय पीछे से प्रवेश करने को कहा, सभी ने बुआ की बात मान ली. दूल्हे ने जैसे ही अंदर प्रवेश किया आगे का दरवाजा गिर गया. इस तरह सांय पड़ने पर बुआ ने कच्चा दूध मंगवाया. जैसे ही सर्प आया उन्होंने आगे दूध रखकर उन्हें फास लिया.

नागिन अपने नाग लेने आई तो बुआ ने अपने छः भतीजे जीवित मांगे. इस तरह बुआ को अपने सात भतीजे जीवित मिल गये तथा बारात शादी होने के बाद अपने घर को लौट आई. बुआ ने सप्तमी के दिन दुबड़ी की पूजा कराई. इसी से इन्हें दुबड़ी सातें कहते हैं. जैसे बुआ को अपने भतीजे जीवित दिए वैसे सभी को दीजिए.

संतान सप्तमी कब मनाई जाती हैं और मुहूर्त क्या है? (Santan Saptami Vrat 2022 Date, time and Muhurat)

भाद्र शुक्ल सप्तमी को सन्तान सप्तमी कहा जाता हैं. इस दिन सप्त ऋषियों के सम्मान में व्रत रखा जाता हैं तथा सात ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दिया जाता हैं. इसके अतिरिक्त इस दिन पुत्र प्राप्ति, सन्तान सुख के लिए भी व्रत किया जाता हैं. वर्ष 2018 में संतान सप्तमी तिथि ३ सितम्बर हैं.

दुबड़ी सातें & संतान सप्तमी व्रत विधि (Saptami Fast Procedure vrat vidhi)

संतान सप्तमी एक त्यौहार न होकर एक व्रत हैं, यह भादों शुक्ल सप्तमी के दिन किया जाता हैं. इस दिन दुबड़ी माता की पूजा की जानी चाहिए. सुबह उठने के पश्चात् नित्य कर्मों से निवृत होने के बाद व्रत रखने वाली स्त्री को एक पट्टे पर दुबड़ी जिनमें कुछ बच्चों की मूर्तियाँ, सांप, मटके तथा एक औरत का चित्र मिट्टी से तैयार कर लेवे.

दुबड़ी माता को चावल, जल, दूध, रोली, आटा, घी, चीनी मिलाकर भोज बनावे तथा उनकों भोग लगावें. साथ ही भिगोया हुआ बाजरा भी चढावें. मोठ तथा बाजरे के धान का वायना निकालकर सास के पाय लगकर उनको देवे. इसके पश्चात व्रत रखने वाली महिला दुबड़ी सात की कथा सुनें.

इस व्रत को तोड़ते समय ठंडा खाना खाना चाहिए. यदि इस वर्ष आपकी किसी बेटी का विवाह सम्पन्न हुआ हो तो उनका उजमन भी करावें. इस उजमन में मोठ बाजरे की 13 कुड़ी एक थाल में लेकर तथा 1 रूपये का सिक्का साड़ी अथवा ओढ़नी के पल्लू पर हाथ फेरकर अपने सास के पाँव लगकर उनकों देवें.

संतान सप्तमी व्रत पूजन | Santan Saptami fast Worship

व्रत की कथा सुनने के बाद सांय काल में भगवान शिव- पार्वती की पूजा धूप, दीप, फल, फूल और सुगन्ध से करते हुए नैवैध का भोग लगाना चाहिए और भगवान शिव व पार्वती की पूजा आराधना की जानी चाहिए.

FAQ

Q : संतान सप्तमी 2022 में कब है ?

3 सितंबर को

Q : संतान सप्तमी किस तिथि को मनाया जाता है ?

Ans : भादों मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन

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