Satellite Internet क्या है इसके फायदे और नुकसान क्या है

Satellite Internet क्या है इसके फायदे और नुकसान क्या है दुनिया की अलग-अलग कंपनियों के द्वारा यूजर को तेज इंटरनेट स्पीड देने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रकार के एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं। कोई कंपनी 4जी पर काम कर रही है तो किसी कंपनी के द्वारा 5G की टेस्टिंग की जा रही है, वहीं कुछ ऐसी भी कंपनियां हैं जो एक कदम आगे बढ़ते हुए लोगों को Satellite Internet देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं जिसमें एलन मस्क की कंपनी स्टार लिंक प्रमुख है।

सेटेलाइट Internet की खासियत यह है कि यह लगभग हर जगह पर उपलब्ध हो सकता है, क्योंकि इसका विस्तार करने के लिए केबल की आवश्यकता नहीं है। इस पेज पर हम आपको जानकारी दे रहे हैं कि “सेटेलाइट इंटरनेट क्या है” तथा “सेटेलाइट इंटरनेट के फायदे-नुकसान क्या है।”

Satellite Internet क्या है फायदे नुकसान

Satellite Internet क्या है इसके फायदे और नुकसान क्या है

सेटेलाइट इंटरनेट क्या है?

Satellite Internet के तहत हमें अंतरिक्ष में छोड़े गए सेटेलाइट के द्वारा इंटरनेट की प्राप्ति होती है। आपने देखा कि अलग- अलग देश अपने-अपने सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ते हैं जिनका उद्देश्य अलग अलग होता है। ऐसी अवस्था में जिन सैटेलाइट को इंटरनेट की तेज स्पीड देने के लिए छोड़ा जाता है उन्हें सेटेलाइट इंटरनेट कहते हैं।

सेटेलाइट इंटरनेट के द्वारा भेजे जाने वाले सिग्नल को प्राप्त करने के लिए हमारे घर या फिर आसपास के इलाके में रिसेप्टर में डिस लगाई जाती है जिसकी वजह से वह सेटेलाइट के द्वारा भेजे जाने वाले इंटरनेट सिग्नल को ग्रहण करता है।

सेटेलाइट इंटरनेट की खासियत यह है कि इसमें केबल की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए इसे दूरदराज के ऐसे इलाकों के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है जहां पर इंटरनेट भेजने के लिए डाटा केबल बिछाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि सेटेलाइट इंटरनेट दूरदराज और दुर्गम इलाकों में भी अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हुआ है।

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Satellite Internet कैसे काम करता है?

जब किसी यूजर के द्वारा अपने डिवाइस का इस्तेमाल करते हुए डाटा की रिक्वेस्ट सेंड की जाती है तो यह रिक्वेस्ट सेटेलाइट तक पहुंचाने का काम सैटेलाइट डिश करती है और जब रिक्वेस्ट सेटेलाइट तक पहुंच जाती है तो उसके बाद रिक्वेस्ट नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर को सेंड की जाती है।

इसके पश्चात रिस्पांस सेंड किया जाता है, जिसके बाद यही रिस्पांस सेटेलाइट के द्वारा सैटेलाइट डिश के जरिए यूजर के डिवाइस तक पहुंचने में सफल होता है। इस प्रकार से टू-वे के द्वारा डाटा का आदान-प्रदान स्टार्ट होता है।

भारत में Satellite Internet कब तक आएगा?

हमारे देश में सेंट्रल गवर्नमेंट के द्वारा सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क के साथ भारत नेट परियोजना के अंतर्गत सीमा वाले इलाके और नक्सल प्रभावित राज्यों तथा द्वीप क्षेत्रों में 5000 ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लिए Hughes Communications का सिलेक्शन किया गया है। 

सिलेक्ट हुई सभी ग्राम पंचायतों को साल 2021 तक सेटेलाइट ब्रॉडबैंड के द्वारा जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था जो कि अब पूरा हो चुका है क्योंकि अब साल 2022 का अक्टूबर का महीना चल रहा है। गवर्नमेंट का यह प्रयास है कि वह आने वाले समय में 300000 से भी अधिक ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड वाली ब्रॉडबैंड सर्विस के साथ जोड़े।

Satellite Internet प्रदाता कंपनी 

वर्तमान के समय तक दुनिया की कुछ गिनी चुनी हुई कंपनियां ही सेटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने पर काम कर रही हैं जिनमें से कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम और उनकी जानकारी हम नीचे आपको प्रोवाइड करवा रहे हैं।

1: SpaceX (Starlink)

टेस्ला कंपनी के मालिक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में शामिल एलन मस्क के द्वारा Starlink कंपनी की स्थापना की गई है। इसी कंपनी के द्वारा स्पेसएक्स के जरिए कनाडा, अमेरिका, जर्मनी और यूरोप के दूसरे देशों में सेटेलाइट ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सर्विस दिया जाना स्टार्ट कर दिया गया है और यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि हमारे भारत देश में साल 2022 के दिसंबर महीने में अथवा साल 2023 के मार्च महीने तक स्टारलिंक की सर्विस मिलना प्रारंभ हो जाएगी।

2: Airtel (OneWeb)

हाल ही में इसकी खरीदारी भारती ग्लोबल एवं ब्रिटिश गवर्नमेंट के द्वारा की गई है जिसके बाद एक बार फिर से सेटेलाइट की लॉन्चिंग किया जाना शुरू कर दिया गया है और जानकारी के अनुसार साल 2022 तक टोटल 648 में से 110 सैटेलाइट लॉन्च किए भी जा चुके हैं। इसके द्वारा साल 2022 के दिसंबर महीने तक टोटल 648 लो अर्थ आर्बिट सेटेलाइट लॉन्च किए जाने का प्रयास किया जा रहा है जिसके द्वारा हाई स्पीड और लो लेंटसी पर ग्लोबल कनेक्टिविटी हासिल होगी।

3: Amazon (Kuiper Systems)

ऐमेज़ॉन की सहायक कंपनी का नाम कूपर सिस्टम है। इस कंपनी के द्वारा भी सेटेलाइट इंटरनेट पर काम किया जा रहा है और ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2026 तक यह मार्केट में सेटेलाइट इंटरनेट को लॉन्च कर चुकी होगी। फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन के द्वारा अमेजॉन कंपनी को टोटल 3236 सेटेलाइट को लांच करने की परमिशन प्राप्त हुई है।

अमेजॉन कंपनी के द्वारा अपने इस प्रोजेक्ट पर 10 अरब डॉलर से भी अधिक रुपए का इन्वेस्टमेंट किया गया है। अमेजॉन कूपर प्रोजेक्ट के द्वारा एलटीई और 5जी सर्विस प्रदान करने वाले वायरस कैरियर के लिए बैकहौल सलूशन भी दिया जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कूपर सिस्टम के अध्यक्ष राजीव है।

4: Viasat Satellite Internet सेवा

इस कंपनी के द्वारा फिलहाल सिर्फ अमेरिका देश में ही अपनी सर्विस दी जा रही है। इस कंपनी ने हाई कैपेसिटी वाले संचार उपग्रह के तौर पर अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज करवाया है। आपको यह जानकर अति प्रसन्नता होगी कि Viasat पर रिसर्च हमारे भारत देश के तमिलनाडु राज्य में मौजूद चेन्नई शहर के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में हुआ है।

Satellite Internet के फ़ायदे 

Satellite Internet से हमें कई फायदे प्राप्त होते हैं जिनमें से कुछ प्रमुख फायदों की चर्चा नीचे हमने की है।

• सेटेलाइट इंटरनेट की सबसे बड़ी खासियत और इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हर जगह पर आसानी से उपलब्ध हो सकता है। अपनी इसी खासियत की वजह से अब भारत के ऐसे इलाके के लोगों को भी इंटरनेट की सुविधा प्राप्त होगी जो दुर्गम इलाकों में रहते हैं और जहां पर अभी तक इंटरनेट किसी ना किसी वजह से नहीं पहुंच पाया है।

• Satellite Internet के लिए केबल की आवश्यकता बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि जहां जहां पर सिग्नल और उपग्रह के रिसेप्टर मौजूद होंगे वहां वहां पर सैटेलाइट इंटरनेट काम करेगा।

• प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार कुछ सेटेलाइट इंटरनेट कंपनी ने यूजर को 25 एमबीपीएस डाउनलोड स्पीड प्रदान करना प्रारंभ कर दिया है।

• प्राकृतिक आपदा की अवस्था में सैटेलाइट इंटरनेट काफी काम का साबित होगा क्योंकि प्राकृतिक आपदा के दरमियान केबल आधारित इंटरनेट खराब हो सकते हैं परंतु सेटेलाइट इंटरनेट खराब नहीं होगा।

• देश के सैनिकों के लिए भी Satellite Internet बहुत ही सहायक साबित होगा क्योंकि कभी कबार सैनिकों की तैनाती ऐसी जगह पर हो जाती है जहां पर इंटरनेट की उपलब्धता नहीं होती है। जैसे कि लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी वाले इलाके, भारत- म्यांमार बॉर्डर इत्यादि।

सैटेलाइट इंटरनेट के नुक़सान 

एक तरफ जहां Satellite Internet के कुछ फायदे हैं तो वही दूसरी तरफ सेटेलाइट इंटरनेट के कुछ डिसएडवांटेज भी हैं। आइए अब यह भी जानते हैं कि आखिर सेटेलाइट इंटरनेट के नुकसान क्या है।

• सेटेलाइट इंटरनेट अभी तक हर जगह नहीं पहुंच पाया है। इसीलिए जिस जगह पर अभी इसकी पहुंच नहीं है वहां पर लोगों को सेटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा।

• सेटेलाइट इंटरनेट की सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए व्यक्ति को थोड़ा अधिक दाम देना पड़ेगा।

• कुछ जगह पर इसकी इंटरनेट स्पीड में कमी देखी जा रही है।

• सेटेलाइट इंटरनेट के द्वारा वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का सपोर्ट नहीं किया जाता है।

Satellite Internet की 5G से तुलना

डाटा स्पीड के मामले में 5G सेटेलाइट से इसलिए आगे हैं क्योंकि 5G का निर्माण टॉप सेल्यूलर इन्फ्राट्रक्चर पर किया गया है। अगर 5जी की तुलना स्टारलिंक से करी जाए तो 5G काफी तेजी के साथ डाटा का आदान प्रदान करने की कैपेसिटी रखता है।

परंतु गांव, देहात, छोटे शहर अथवा दुर्गम पहाड़ी वाले इलाकों में 5जी की तुलना में सेटेलाइट इंटरनेट एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है, क्योंकि सेटेलाइट इंटरनेट केबल के जाल का सेटअप करने की आवश्यकता नही होती है ना ही सेल्यूलर टावर का सेटअप करने की जरूरत होती है। 

इसके साथ ही साथ ऐसे इलाके जहां पर बाढ़, तूफान या फिर भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं अक्सर आती रहती है वहां पर भी सेटेलाइट इंटरनेट बिना बाधित अपनी सर्विस देने में सक्षम है।

FAQ: 

Q: Satellite Internet की लेटेंसी कितनी है?

ANS: Satellite Internet की लेटेंसी 638 एमएस है।

Q: पहले सैटेलाइट का नाम क्या था और कब लांच किया गया?

ANS: पहले सैटेलाइट का नाम स्पूतनिक 1 था। जिसे साल 1957 में अक्टूबर के महीने में लॉन्च किया गया था।

Q: Satellite Internet पर काम करने वाली प्रमुख कंपनी कौन सी है?

ANS: स्पेस एक्स

Q: सेटेलाइट से क्या तात्पर्य है?

ANS: सैटेलाइट को हिंदी भाषा में उपग्रह कहा जाता है।

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मित्रों उम्मीद करता हूँ “Satellite Internet क्या है इसके फायदे और नुकसान क्या है” शीर्षक से दिया गया यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा. हमने इस लेख में उपग्रह प्रणाली आधारित इंटरनेट सेवा की नवीन तकनीक के विषय में जाना हैं, यह लेख आपको कैसा लगा कमेंट कर अवश्य बताएं.

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