सत्यनिष्ठा पर निबंध Satyanishtha essay in hindi

सत्यनिष्ठा पर निबंध Satyanishtha essay in hindi: प्रिय दोस्तों आपका स्वागत है आज के लेख में हम सत्यनिष्ठा का अर्थ क्या है पर निबंध को पढ़ेगे. स्टूडेंट्स इस निबंध, भाषण, अनुच्छेद को पढ़कर सत्य निष्ठा के बारे में विस्तार से जान सकते हैं तो चलिए सरल भाषा में लिखा गया probity, truthfulness, Integrity का निबंध पढ़ते हैं.

Satyanishtha essay in hindi

सत्यनिष्ठा पर निबंध Satyanishtha essay in hindi

हमने बचपन से ही सत्यनिष्ठा एवं ईमानदारी शब्दों को सुना है अक्सर कहा जाता है कि जीवन में हमें इन मूल्यों का पालन करना चाहिए. क्या ये दोनों शब्द एक ही हैं अथवा दोनों ही अलग अलग हैं. एक चोर ईमानदार हो सकता है मगर सत्यनिष्ठ नहीं हो सकता है क्योंकि वह सत्य की राह पर न चलकर असत्य की राह को चुनता हैं.

सत्यनिष्ठा का जीवन में बड़ा महत्व माना गया हैं. इसके जीवन में अनुसरण से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता हैं. सच्चाई एवं ईमानदारी इसके करीबी अर्थ वाले शब्द है अर्थात जो इंसान जीवन में सत्य की राह पर चलता है अथवा वह जो कुछ कहता है तथा उन्ही बातों को अपने जीवन में उतारता है उन्हें सत्यवादी व सत्यनिष्ठ कहा जाता हैं.

हमेशा सत्य को आधार बनाकर चलने वाले को कभी पराजय का मुहं नहीं देखना पड़ता हैं. उनके हर कार्य में सफलता मिलती है हर स्थिति चाहे वह उनके अनुकूल हो या प्रतिकूल सत्यनिष्ठा के साथ जीवन जीने वाला कभी पथ विचलित नहीं होता हैं. उन्हें इन गुणों के कारण समाज में उचित आदर व मान सम्मान भी अर्जित होता हैं. लोग ऐसे व्यक्ति को देवता कहकर पुकारते है जो सत्य की राह पर चलता है तथा सभी के दिलों पर राज करता हैं.

कई महान लोगों ने सत्य के लिए अपना सर्वस्व जीवन अर्पित कर दिया, हम जिन्हें माहापुरुशों के रूप में जानते हैं. जन जन की श्रद्धा के पात्र वे इसलिए बन पाए क्योंकि उनकी सत्य के प्रति गहरी निष्ठां थी. यहाँ हम सत्य को जीवन का आदर्श गुण अथवा देवत्व की उपाधि दे सकते हैं. अर्थात जो इंसान सत्यनिष्ठा में विश्वास करता है वह देवताओं की श्रेणी में गिना जाता हैं.

वहीँ इसके विपरीत ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो झूठ एवं मक्कारी की राह पर चलकर जीवन में क्षणिक सुखों एवं एश्वर्य का भोग करते हैं. वे अपने स्वार्थ को साधनों के लिए झूठ, प्रपंच का सहारा लेते है तथा दुसरे के नुकसान में भी अपना हित समझते हैं. उन लोगों को भी समझना चाहिए झूठ की धरातल पर खड़ी की गई बड़ी से बड़ी इमारत का एक दिन धराशायी होना निश्चित हैं.

हमें दूसरी श्रेणी के लोगों से बचकर रहने के साथ सत्य की राह पर चलने का यत्न करना चाहिए. ऐसा करने में हमें कई मुश्किलों तथा कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता हैं. मगर अंत हमेशा सच्चाई का अच्छा ही होता हैं. वह चरित्र, धन, दौलत, मान सम्मान पाता ही है जीवन की हर इच्छित सफलता उनका इन्तजार करती हैं. इसलिए सत्यनिष्ठा की राह में भले ही हमें संकट झेलने पड़े, शुरुआत में पीडाएं भुगतनी पड़े हमें इस राह को त्यागने की बजाय मजबूती से पकड़ना चाहिए.

सत्य की राह को बहुत कठिन समझा जाता हैं जीवनभर इस राह पर चलना भी कठिन होता है मगर इतिहास में जिन लोगों ने अपने नाम अमर किये है वे इस राह पर पूर्ण निष्ठा के साथ चले हैं. झूठ बोलने वाला व्यक्ति एक बार के लिए किसी को भी धोखा दे सकता है मगर बार बार ऐसा करने की सम्भावना समाप्त हो जाती हैं. सभी लोग उसे धोखेबाज एवं मक्कार प्रवृति का समझते हैं. एक सच्चे इंसान को हमेशा सत्य निष्ठ व्यक्ति के साथ खड़ा होना चाहिए.

सत्यनिष्ठा की पालना में परिस्थिति कोई विशेष मायने नहीं रखती हैं. कुछ लोग जीवन में सत्य की राह पर चलने का दावा तो करते है मगर कुछ हालातों में झूठ बोल लेते है ऐसा करने के पीछे वे मजबूरी को इसका कारण समझते हैं. जबकि सत्यनिष्ठा की राह से विचलित होने की यह शुरुआत होती है जिसके बाद उनकी आदत सी बन जाती हैं. मन मुताबिक़ परिणामों की इच्छा में वह झूठ का सहारा लेने लग जाते हैं.

पूज्य स्वामी विवेकानंद जी कहा करते थे कि जीवन में हमेशा सत्य की राह पर चलना चाहिए. क्रोध तथा असत्य जीवन व चरित्र को खराब होता हैं. क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन माना गया है जो जीवन को अन्धकार की ओर धकेल देता हैं. जब तक उसे सच्चाई के दर्शन होते हैं बहुत कुछ बर्बाद किया जा चूका होता हैं.

प्रत्येक मानव को जीवन में सत्य के प्रति समर्पित होना चाहिए. असत्य की राह कुछ समय के लिए सुखदायक हो सकती है मगर इसके दूरगामी परिणाम बेहद घातक होते हैं. अतः प्रत्येक समस्या को सत्य के साथ सामना करे तथा सत्यनिष्ठा को अपने जीवन का आदर्श बनाए, इससे न केवल चरित्र को ऊँचा उठाया जा सकता है बल्कि जीवन में अपार सम्मान एवं सुख की प्राप्ति भी होती हैं.

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भूमिका

जीवन में सत्य का स्थान सर्वोच्च होता है। भले ही सत्य के प्रति सभी समर्पित ना हों लेकिन सत्य के प्रति लड़ने वाले एवं सत्य की भाषा बोलने वाले जीवन की बाधाओं का सामना करने का हौसला रखते हैं । सत्य के रास्ते भले कठिन हों लेकिन सही दिशा दिखाते हैं । सत्यनिष्ठा जीवन की सफलता में सहायक होती है । सत्यनिष्ठा जीवन को सत्कर्म की ओर उन्मुख करती है।

दोस्तों सत्य का पालन करने एवं सत्य के प्रति समर्पित भाव को सत्यनिष्ठा के अंतर्गत माना जाता है। प्रस्तुत निबंध में सत्यनिष्ठा के बारे में जानेगें और सत्यनिष्ठा से जुड़ी बातों को अच्छे से समझ पायेगें। सत्यनिष्ठा जीवन के लिए महत्वपूर्ण है इस बात को इस निबंध के माध्यम से आसानी से समझ पायेगें।

परिचय

“सत्यनिष्ठा” शब्द सत्य से जुड़ा हुआ है। सत्य के प्रति निष्ठा रखना। सत्य के प्रति समर्पण भाव रखना। सत्य के रास्ते पर चलना एवम् उसके नियमों का पालन करना। सही सत्य संदर्भों पर अपना जीवन जीना सत्यनिष्ठा के अंतर्गत आते हैं।

बचपन से विद्यालयों में पढ़ाया जाता रहा है कि हमें सत्य की राह पर चलकर एक आदर्श जीवन जीना चाहिए। सत्य के पक्ष में सही बातों का निर्णय लेना चाहिए। सत्य का साथ देना चाहिए। सत्य के लिए अगर लड़ना भी पड़े तो असत्य के विपरित सत्य के के लिए बोलना चाहिए। सत्यनिष्ठा का मार्ग सत्य का मार्ग दिखाता है जो जीवन को पुण्य ज्योति प्रदान करता है।

सत्यनिष्ठा का महत्व

सत्यनिष्ठा शब्द अपने आप में महत्वपूर्ण है। सत्यनिष्ठा का पालन करने वाला सदा जीवन में सफलता प्राप्त करता है। सच का साथ देने वाला और सत्य के रास्ते में चल कर उसके आदर्शों का पालन करने वाला मनुष्य सत्यनिष्ठ मनुष्य कहलाता है। सत्यनिष्ठ मनुष्य सम्मानीय जीवन जीता है और एक आदर्श मनुष्य कहलाता है।

सत्यनिष्ठा के रास्ते पर चलकर मनुष्य सुकून की ज़िन्दगी जीता है। रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर देता है। सत्य के मार्ग पर चलने वाला सत्यनिष्ठ मनुष्य कठिनाइयों का सामना आत्मविश्वास से करता है। किसी भी परेशानी में सत्यनिष्ठा मनुष्य को डगमगाने नहीं देती बल्कि हौसला देती है। ईश्वर भी सत्य के मार्ग पर चलने वालों का साथ देते हैं और अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं। सत्यनिष्ठा के मार्ग में भले कठिनाईयाँं आए लेकिन जीवन की सफलता में सत्यनिष्ठा साथ ही देती है।

सत्य के राह भले कठिन हों लेकिन जीवन में इतिहास रचने का हौसला रखते हैं। प्राचीन काल से सत्य के प्रति समर्पित कितने महापुरुषों को आज भी सम्मान मिलता है उन्हें जाना जाता है। आधुनिक युग में भी पुराने समय के सत्यनिष्ठ महापुरुष इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करा चुके हैं जो आज भी पढ़े जाते हैं और जिनके आदर्शों का पालन कर सही राह ही मिलती है।

सत्य के सामने झूठ की अवधि कम होती है। भले झूठ आकर्षित करता है लेकिन सत्य अपनी विशिष्ट छाप छोड़ता है। सत्यनिष्ठा सम्मान दिलाती है। दुनिया में रहकर सत्यनिष्ठा का पालन कर मनुष्य अपनी अलग पहचान बना लेता है। झूठ कभी जीवन का भला नहीं करते भले क्षणिक खुशी दें लेकिन असली खुशी सत्य के रास्ते पर चलकर ही मिलती है। सत्यनिष्ठा जीवन में कैसी भी परिस्थिति आए उसका सामना करने और समाधान निकालने की प्रेरणा देती है। सत्यनिष्ठा भले कष्ट से भरी हो लेकिन मरहम लगाकर जीवन को असली खुशी एवम् सुकून भरा जीवन देती है।

सत्यनिष्ठा सत्कर्म

सत्यनिष्ठा का दायरा सीमित नहीं है बल्कि विस्तृत है। सत्यनिष्ठा व्यक्तिगत के साथ साथ बौद्धिक, कलाकार, ब्रांड, व्यवसाय आदि कई रूपों में देखने को मिलती है।

सत्यनिष्ठा स्वरूप महान आदर्श कहे जाने वाले विवेकानंद जी जिनके विचारों का पालन भी किया जाता है। ऐसे महापुरुष विद्यार्थियों को सच के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। चरित्र सत्य से बनता है झूठ से सिर्फ शोभा होती है लेकिन वास्तविक चरित्र सत्यनिष्ठा ही बनाती है।  एक क्रोधी मनुष्य अपनी भलाई के बारे में सही निर्णय नहीं ले पाता है। अपना क्रोध त्याग कर ही  सत्य के मार्ग को सही रूप से पहचान सकता है।

माया मोह के चक्कर में पड़कर मनुष्य अपना जीवन खराब कर लेता है कभी सही रास्ते में चल नहीं पाता। मोह माया एक जाल समान है जिसमें मनुष्य फंस कर रह जाता है। इन सब से निकलने के लिए मनुष्य को सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलना चाहिए जिससे जीवन सत्कर्म में लगा रहेगा और सही रास्ते में चलेगा। 

मनुष्य का घमंड सबसे बड़ा शत्रु होता है। घमंड जिसमें पड़कर मनुष्य सत्कर्म भूल जाता है सिर्फ “मैं” की सत्ता का ही गुणगान करता है और अपना जीवन बर्बाद कर लेता है। घमंड कभी दूसरों के बारे में नहीं सोच पाता सिर्फ स्वयं के बारे में ध्यान रहता है और घमंड के माया जाल में फंस कर रह जाता है। 

घमंडी मनुष्य को किसी पर भरोसा नहीं हो पाता है एवं वह किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए गलत कदम भी उठा लेता है। ऐसे मनुष्य कभी सही मार्ग नहीं देख पाते और गलत रास्ते में चले जाते हैं। सत्य के कर्म ही ऐसे मनुष्य को सही रास्ते पर ला सकते हैं अगर वह पूरी निष्ठा से सत्यनिष्ठा का पालन करें।

सत्य निष्ठा का पालन करने वाले ऐसे कितने महापुरुष हैं जैसे महावीर स्वामी, विवेकानंद जी, महात्मा गाँधी आदि ने सत्य के रास्ते में चलकर आदर्श बनकर दिखाया। सत्यनिष्ठा ऐसे महापुरुषों के चरित्र में दिखती है। झूठ, प्रपंच, लालच से कभी किसी का भला नहीं हो पाता। सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलकर ही एक आदर्श चरित्र की रूपरेखा बनाई जा सकती है। 

निष्कर्ष

“सत्यनिष्ठा” भले एक छोटा शब्द है लेकिन अर्थ की दृष्टि से अनेक बातों को अपने में समेट लेता है जिससे जीवन ही बदल जाता है। सत्यनिष्ठा के रास्ते पर चलकर जीवन का कल्याण किया जा सकता है और न चलकर जीवन बर्बाद भी हो सकता है। मनुष्य के ऊपर निर्भर है कि वह सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलकर जीवन का आदर्शरूप जीता है या सिर्फ मात्र जीवन जीता है और अनेक परेशानियों से घिर जाता है।

अन्तिम शब्द

दोस्तों इस निबंध में सत्यनिष्ठा के अनेक रूपों को सहज रूप से लिखा गया है। जो सत्यनिष्ठा के बारे में जानकारी देते हैं। सत्यनिष्ठा के महत्व के साथ सही दिशा की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

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आशा करता हूँ दोस्तों Satyanishtha essay in hindi का निबंध पसंद आया होगा. सत्यनिष्ठा क्या है इसके बारे में दिया गया निबंध पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

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