प्राचीन भारत में वैज्ञानिक उपलब्धियां Scientific Achievements In ancient India In Hindi

प्राचीन भारत में वैज्ञानिक उपलब्धियां Scientific Achievements In ancient India In Hindi: भारत में विज्ञान और प्रोद्योगिकी का इतिहास बहुत पुराना हैं. भारतीय धर्म शास्त्र वेद पुराण, अतीत की खगोलीय, गणितीय, ज्योतिष गणना और सम्रद्ध चिकित्सा और वैज्ञानिक जीवन पद्धति के प्रमाण आज भी देखने को मिलते हैं. आज के इस लेख में हम प्राचीन भारत की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारें में जानेगे.

प्राचीन भारत में वैज्ञानिक उपलब्धियां Scientific Achievements In ancient India In Hindi

प्राचीन भारत में वैज्ञानिक उपलब्धियां Scientific Achievements In ancient India In Hindi

अंग्रेजी भाषा का एक शब्द है इन्फ्रियोरिटी कॉन्प्लेक्स, जिसका बोलचाल में ज्यादातर उपयोग अंग्रेजी में ही किया जाता है। लेकिन यह सबसे ज्यादा प्रासंगिक दुनिया के सबसे बड़े हिंदी भाषी देश में है क्योंकि सदियों तक वक्त और आधुनिकता की आंधी में बिखरे हुए भारत के गौरव हो जब भी समेटने की कोशिश की जाती है तो उस पर कोई ना कोई कुतर्क हावी हो जाता है और इस नासमझी का फायदा उठाकर भारत में इतना पाखंड और अंधविश्वास फैलाया जा चुका है की कोई अगर तथ्यों के साथ वेद या पुराणों की, प्राचीन इतिहास की, प्राचीन विज्ञान की बात भी करे तो दूसरी तरफ खड़े लोग उसको भी अंधविश्वासी की संज्ञा दे देते है।

अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई में हम शायद संस्कृति का संरक्षण नहीं कर पाए। भारत विज्ञान का गर्भ है जहां से विज्ञान को पहचाना गया, जाना गया, समझा गया, उस पर प्रयोग किए गए और परिणाम भी निकले।

इस बात से शायद आप सहमत होंगे कि भारत के इतिहास के साथ अतीत में बहुत कुछ फेरबदल किया गया है। तथ्य बदले गए हैं, नाम बदले गए है और यहां तक कि चरित्र भी बदला गया है। लेकिन इस खजाने को बटोरने की तरफ शायद हमारा ध्यान कम ही गया है, हर दौर में।

इस खजाने के भंडार यानी कि हमारे प्राचीन भारत के प्राचीन ग्रंथ जो कि संस्कृत में है, जिसने संस्कृत को पढ़ा वह प्रयोग नहीं कर पाया और जो प्रयोग कर सकता था उसने संस्कृत को पढ़ा नहीं और इसी जद्दोजहद में भारत को भारत का गौरव ना मिल सका।

देश में महज 18 संस्कृत यूनिवर्सिटी है जिनमें से 3 केंद्रीय और बाकी 14 राज्य स्तर पर है और एक डीम्ड है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बिना संस्कृत के जाने हम अपने प्राचीन भारत के प्राचीन विज्ञान के गौरव को हासिल नहीं कर पाएंगे। अनेकों प्रमाण होने के बावजूद भी हम प्राचीन विज्ञान को भारत के विकास से संबंधित मुख्यधारा में लाने का प्रयत्न नहीं कर रहे और विज्ञान भी उस कोटि तक समृद्ध था जहां तक आधुनिक विज्ञान भी नहीं पहुंच पाया अब तक।

राम सेतु इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण जिस के अस्तित्व को नासा ने भी माना है। निश्चित तौर पर हम यह कह सकते हैं की जैसे रामसेतु के बारे में सुना है उसको हम आज आधुनिक विज्ञान की तर्ज पर भी उसका अस्तित्व हम देख सकते हैं। हो सकता है प्रमाणों की कमी के कारण ऐसे बहुत से अन्य उदाहरण भी दब कर रह गए हैं जिन पर आज हमारा ध्यान नहीं है। जैसे महाभारत के युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग जिसमें भयंकर विनाश हुआ था, महाभारत के युद्ध में संजय के द्वारा दिव्य दृष्टि से धृतराष्ट्र के लिए लाइव टेलीकास्ट, इससे भी एक उत्कृष्ट विज्ञान का उदाहरण और सुनने को मिलता है, टेस्ट ट्यूब बेबी, 100 कौरव पुत्रों का जन्म एक ही भ्रूण से।

इसके अलावा भी बहुत से और प्राचीन विज्ञान के उत्कृष्ट उदाहरण है जिन तक हम आज भी नहीं पहुंच पाए हैं। टाइम ट्रेवल कि हम बात कर रहे हैं लेकिन प्राचीन भारत में इस पर भी प्रयोग हुए है।राजा ककोमदी ने ब्रह्मा की यात्रा की थी और ऐसा बताया जाता है कि जब वह वापस धरती पर आए तब तक 108 युग बीत चुके थे और हनुमान चालीसा में सूर्य की दूरी बताई गई थी।
ऐसे ही मौसम विज्ञान विभाग भी उत्कृष्ट था।

आज भी भारत के दूरदराज गांवों में जो लोग प्रकृति से जुड़े रहते हैं वह पक्षियों के व्यवहार को देखकर मौसम का आंकलन कर लेते हैं जहां सुनने को आता है कि पक्षी का घोंसला अगर पेड़ के ऊपर होगा तो सूखा पड़ेगा, नीचे हो तो भयंकर बारिश होगी, अगर घोंसला पेड़ के मध्य में होगा तो सामान्य मौसम रहेगा, चींटियां ज्यादा भोजन इकट्ठा करने लग जाए तो उसका संकेत है कि बाढ़ आने वाली है

आज से हजारों साल पहले भी भारत अध्यात्म, योग, वैदिक, वास्तु, वनस्पति, दर्शन, तकनीक, खगोल, धातु और रसायन विज्ञान इन सब पर अपनी महारत हासिल कर चुका था और अनगिनत इनके उदाहरण मिलते भी है जिसमें खगोल विज्ञान, ब्रह्मांड का विज्ञान और अरस्तू से बहुत पहले आर्यभट्ट ने भी दिया था। एक कोलायाब्रेक वैज्ञानिक थे जिन्होंने महर्षि कणाद को यूरोपियन से भी महान वैज्ञानिक बताया था और यह जो प्रयोग चल रहे थे वह आज से तकरीबन 1500 से 2000 से लेकर 3000 साल या इससे भी ज्यादा पुराने रहे हैं।

उस समय भी प्राचीन भारत के विज्ञान की उत्कृष्टता इतनी थी। बौद्धयन ने परमाणु शास्त्र दिया था जिसपर ज्योमेट्री और अलजेब्रा आधारित है, भास्कराचार्य ने आज से 800 साल पहले गुरुत्वाकर्षण पर काम किया था, शल्य चिकित्सा में भी प्राचीन विज्ञान बहुत आगे था जिसमें महर्षि सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता लिखी थी उसमें तीन सौ से ज्यादा प प्रकार की शल्य क्रियाओं का विवरण था, 101 से ज्यादा शल्यक्रिया में काम आने वाले उपकरणों के नाम थे।

ऋषि चरक ने शरीर विज्ञान भ्रूण प्रतिरक्षा पाचन इन सब से संबंधित काम किए इसके अलावा पशु चिकित्सा में भी हम अग्रणी रहे हैं जहां पालकपी व शालिहोत्र जैसे महान पशु चिकित्सक रहे और बहुत से आज भी ऐसे प्रमाण उपलब्ध है जो भारतीय अभियांत्रिकी और विज्ञान का गौरव है।

महरौली के लौह स्तम्भ के बारे में हम सब जानते हैं जो 1600 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है और आज तक जंग रहित है, इस पर एक आईआईटी में अध्ययन भी हुआ है। जब कभी इन पर शोध किया जाएगा, अध्ययन किया जाएगा तो निश्चित रूप से यह भी रामसेतु की तरह एक दिन आधुनिक विज्ञान की नजर में आएंगे और प्रमाणिकता हासिल करेंगे।

जहां असल मायनों में विज्ञान वही होता है जिसका प्रभाव समाज के अंतिम व्यक्ति और वंचित वर्ग तक हो, उनका जीवन सुविधाजनक बने। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत 48 वें स्थान पर है जिससे पता चलता है कि विज्ञान को लेकर आज भारतीय किस दशा में है।

2018 से पहले प्राचीन विज्ञान पर हम शोध केंद्र बनाने का विचार भी नहीं कर पाए थे आने वाले समय में हमें हर राज्य में शोध केंद्रों की जरूरत होगी, संस्कृत विश्वविद्यालयों की जरूरत होगी, जहां आमजन के विज्ञान का विकास हो सके। आखिर विज्ञान का धक्का ही देश को आगे बढ़ा पाएगा।- विकाश बेनीवाल

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