प्यारे हिरण पर निबंध Short Essay On Deer In Hindi Language

Short Essay On Deer In Hindi Language प्रिय स्टूडेंट्स आपका स्वागत हैं आज हम प्यारे हिरण पर निबंध आपके समक्ष पेश कर रहे हैं. छोटी बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए Short Essay On Deer In Hindi Language कक्षा 1,2, 3,4,5,6,7,8,9,10 के बच्चों के लिए सरल भाषा में Deer Hindi Essay बता रहे है. परीक्षा के लिहाज से स्टूडेंट्स इसे याद भी कर सकते है अक्सर परीक्षाओं में ये निबंध 5, 10 लाइन, 100, 200, 250, 400 अथवा 500 शब्दों में निबंध लिखने को कहा जाता हैं.

Short Essay On Deer In Hindi Language

प्यारे हिरण पर निबंध Short Essay On Deer In Hindi Language

Here Is a Short Essay On Deer In Hindi Language For Students & Kids And School & College Teachers: हिरण हम सभी ने कई बार देखा होगा. चार पैरों का यह एक शाकाहारी जानवर हैं. जिनका रंग हल्का भूरा होता है कई स्थानों पर कृष्ण मृग अर्थात काले हिरण भी पाए जाते हैं. इसकी आँखें सुंदरता को कई गुणा और बढ़ा देती हैं. बेहद छोटे आकार के इस प्राणी के शरीर पर छोटी छोटी धारियां होती हैं.

आमतौर पर हिरण इंसानों तथा हिंसक जानवरों से डरता है. इनके दो सींग एवं दो कान होते हैं. भोजन के रूप में हिरण घास फूस तथा सूखी पत्तियों को खाकर अपना भरण पोषण करते है.

ओस्ट्रेलिया तथा अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों में मानव बस्तियों व जंगलों में हिरण पाए जाते हैं. इनकी कई ख़ास बाते आम लोगों को पता नहीं होती हैं. हिरण रात में भी देख सकता हैं. इसके देखने सूघने तथा सुनने की क्षमता अन्य जीवों की तुलना में बहुत अधिक होती हैं.

यह स्वयं के लिए खतरे का आभास पाते ही भागने लगता हैं. इनके दौड़ने की गति काफी अधिक होती हैं. अधिकतम 30 वर्ष इसकी आयु होती हैं. हर साल हिरण के नयें सिंग आते है तथा पुराने सींग गिर जाते हैं.

प्राचीन समय में राजा महाराजाओं का निशाना हमेशा इसी प्राणी पर हुआ करता था. शिकार के रूप में हिरण को मारने की प्राचीन परम्परा को अवैध्य करार दिए जाने के उपरान्त भी चोरी छिपे हिरण का शिकार आज भी किया जाता हैं.

लोग इसकी सींग तथा मांस व चमड़ी के लिए इसका शिकार करते हैं. कहा जाता है कि हिरण की सींग का उपयोग कई प्रकार की दवाइयों तथा सौदर्य प्रसाधन के लिए भी उपयोग किया जाता हैं. सलमान खान द्वारा बहुप्रसिद्ध काले मृग के शिकार मामले से इसकी हत्या का परिणाम आसानी से समझा जा सकता हैं.

जिस गति से वनों का काटकर समाप्त किया जा रहा हैं मृग निरंतर समाप्त होते जा रहे हैं. उनके रहने का स्थान को उजाड़ने के चलते हिरणों की संख्या में निरंतर कमी दर्ज की जा रही हैं. हिंसक जानवर तथा मानव दोनों इस प्राणी के दुश्मन बन गये हैं. हमें इस तरह के मासूम जानवरों के जीवन के साथ खेलने की बजाय इनके संरक्षण के कदम उठाएं जाने चाहिए.

Short Essay On Deer In Hindi Language 250 Words For Kids

संसार के लगभग सभी भू क्षेत्र में पाया जाने वाला हिरण एक चौपाया स्तनपायी जन्तु हैं. हिरण के बच्चें के जन्म के डेढ़ दो वर्ष की आयु में उन्केव नयें सींग आने लगते है तथा ये हर साल गिरकर फिर से उग आते हैं. हिरणों के प्रजनन काल में मादा हिरण के प्रति उसका आकर्षण सींगों के ही मिलता हैं.

ये ही सींग जो हिरण की सुंदरता के प्रतीक होते है इसकी मृत्यु का कारण भी बनते हैं. लोग इसके सींग तथा चमड़े के व्यापार के लिए प्राणी का शिकार कर लेते हैं. दुनियाभर में इस जन्तु की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं. मगर सभी के रंग रूप एवं आकार में समानता ही पाई जाती हैं.

वसंत काल को हिरनों का प्रजनन काल माना जाता हैं इस अवधि में मादा हिरण बच्चों को जन्म देती है आपने भी देखा होगा छोटा हिरण का बच्चा जन्म के बाद माँ का पहला दूध पीते ही तेज गति से दौड़ने लग जाता हैं. अक्सर हिरण थोड़े बहुत सूखे पत्तों तथा पेड़ की शाखाओं से ही अपना निर्वहन कर लेते हैं.

जितना इनके शिकार का होता हैं हिरण उतना ही अधिक सावधान होता है इसके कानों में इस तरह की छोटी छोटी मांसपेशियां होती हैं जो इनके लिए छोटे से खतरे की आहट देने की कार्य करती है जिससे वे स्वयं को सुरक्षित स्थान पर पंहुचा सके. इस प्राणी के दौड़ने की क्षमता चीते के समान होती है जिसके चलते कुछ ही पलों में हम इसकों गायब पाते हैं.

हिरण का पीछा करके शिकार करना असम्भव हैं. पुराने जमाने में लोग तीर कमान या बंदूक से हिरणों का शिकार किया करते थे. आजकल लोग इसे मारने के लिए वाद्य यंत्रों को बजाकर उसे कोई आहट सुनाई नहीं दे. जिसके बाद नजदीक जाकर उस पर प्रहार कर देते हैं. कुछ लोग रात्रि में हिरण की आँखों में तेज प्रकाश डालकर इनके आँखे चौधियां जाने की प्रतीक्षा करते है और अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं.

फिटनेस हो तो हिरण जैसी ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि यह प्रति एक घंटे में 60 से 70 किमी की दूरी तय कर लेता मानकर चलिए प्रति किमी एक मिनट जितना कि अधिकांश वाहन भी नहीं चलते हैं. हिरण की फुर्ती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता हैं कि यह तकरीबन दस फीट तक की गहरी खाई को फाद सकता हैं.

हिरण जंगलों में भी बसते है तथा मानव बस्तियों तथा खेतों में मांद बनाकर रहते हैं. आजकल जंगल तेजी से काटे जा रहे हैं. बचे जंगलों में हिंसक जानवरों का बोलबाला है शेर चीता जैसे जानवर आसानी से इसको मार डालते है इसका दूसरा बड़ा दुश्मन मानव है जो अपने छोटे से स्वार्थ के कारण इस भोले से प्राणी की जान तक ले लेता हैं.

हिरण के प्रकार

आमतौर पर हम एक दो तरह के हिरणों से ही परिचित होते हैं. मगर संसार में हिरणों की कई प्रजातियाँ हैं जो दुनिया के अलग अलग हिस्सों में पाई जाती हैं. तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर हिमालय पर्वत पर भी हिरण रहते हैं. तिब्बत, साइबेरिया और कोरिया जैसे देशों में ठंडी जलवायु में भी हिरण रहते हैं. इन पहाड़ी हिरणों की टाँगे बेहद मजबूत होती हैं जो बर्फ पर भीं फिचलती नहीं हैं. ये हिरण 20 मीटर तक की छलांग लगा सकते हैं. इनके सुनने की क्षमता भी अन्य क्षेत्रों के हिरणों की तुलना में अधिक होती हैं.

यहाँ पाए जाने वाले नर मृग के पेट की खाल में एक विशेष प्रकार की ग्रंथि पाई जाती हैं जिन्हें कस्तूरी कहा जाता हैं. इस कस्तूरी के कारण ही हिरण को मृग कहा जाता हैं. हिरणों में पाई जाने वाली इस बहुमूल्य कस्तूरी के कारण ही अधिकतर लोग इनका शिकार करते हैं. एक मृग में एक ही कस्तूरी पाई जाती हैं. मनुष्य की छींकने की तरह हिरण आवाज निकलता हैं. घनी झाड़ियों के बीच यह अपना मांद बनाता हैं. थोड़ी सी आहट सुनकर भी यह अपना सिर उठाकर देखने लगता हैं.

भारत और श्रीलंका में चीतल मृग बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. ये हरें भरें जंगलों में रहना पसंद करते हैं. इनके शरीर का रंग भूरा और उस पर सफेद धब्बे बने होते हैं. सैकड़ों के झुण्ड में ये साथ साथ रहते हैं. जंगल में फल और पत्तियों को खाकर ये अपनी भूख शांत करते हैं. हिमालय के तराई और दक्षिणी पठार में चौसिंगा हिरण पाए जाते हैं. इनकें सींगों का जोड़ा होता हैं इस कारण इन्हें चौसिंगा कहते हैं.

भारत के सिक्किम और कश्मीर के कई क्षेत्रों में बारहसिंगा हिरण प्रजाति पाई जाती हैं. वही सादे रंग की धारियों वाला बोंगो हिरण अफ्रीका के जंगलों में पाया जाता हैं. कुछ दशकों से इनकी संख्या में लगातार गिरावट आ रही हैं. इस प्रजाति के नर व मादा दोनों हिरणों के सींग होते हैं तथा ये सींगो के सहारे पेड़ों के लटककर नींद लेते हैं. शाखादार प्रजाति के हिरण अमूमन पहाड़ों और घनी नदियों वाले प्रदेशों में पाए जाते हैं. काले हिरण जिन्हें कृष्णमृग कहा जाता हैं ये केवल भारत में ही पाए जाते हैं.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों Short Essay On Deer In Hindi Language का यह लेख आपकों अच्छा लगा होगा. यदि आपकों यह आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे. हिरण पर दिया गया निबंध आपकों कैसा लगा अपनी राय व सुझाव कमेंट कर जरुर बताए.

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