शिवजी के व्रत | Shravan Somwar Vrat Katha Food Aarti Rules In Hindi

Shravan Somwar Vrat Katha Food Aarti Rules In Hindi शिवजी के व्रत:– सोमवार भगवान शिव का दिन हैं, इस दिन भोलेनाथ का व्रत रखकर, व्रत कथा तथा पूजा की जाती हैं. इस दिन भोले भक्तों द्वारा महादेव के अतिरिक्त उनके नंदी व माता पार्वती का भी पूजन किया जाता हैं. मधु, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चन्दन, रोली, चावल,  अरक, धतूरा, कमल गट्टा, पान सुपारी, लौंग, इलायची, जल, दूध, दही, चीनी, घी, फूल, विल्वपत्र, पूर्वा, विजया, पंचमेवा, धूपदीप के साथ पाठ पूजा की जाती हैं, सोमवार एक वक्त ही खाना खाया जाता हैं. तथा व्रत या उपवास के बाद दान दक्षिणा देने का भी विशेष महत्व हैं.

शिवजी के व्रत | Shravan Somwar Vrat Katha Food Aarti Rules

Shravan Somwar Vrat Katha Food Aarti Rules In Hindi शिवजी के व्रत

सावन मास के समस्त सोमवारों के दिन यह व्रत मनाया जाता हैं. प्रत्येक सोमवार को गणेश, शिव पार्वती तथा नंदी की पूजा की जाती हैं.

जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, जनेऊ, चन्दन, रोली, बेलपत्र, भांग, धतूरा धूप दीप और दक्षिणा से भगवान पशुपति का पूजन करना चाहिए. यह सोमवार रखने वाले तथा गुणगान करने वालों पर भगवान शिव अपनी छाया रखते हैं.

Shravan Somwar Vrat Katha in hindi

श्रावण सोमवार के व्रत के पीछे एक पौराणिक कथा प्रसंग हैं, जिसके अनुसार अमरपुर नामक ग्राम में एक धनिक बनिया रहा करता हैं. उसका व्यापार दूर दूर के देशों तक एक सम्राज्य की भाँती फैला हुआ था. मगर उन्हें दुःख इस बात का था, कि वों निसंतान हैं इस कारण उसकी मृत्यु के बाद उनकी सम्पति का वारिश कौन होगा?

किसी महात्मा के कहने पर उसने सोमवार का व्रत रखना शुरू कर दिया, 16 सोमवार को व्रत रखने के बाद वह घंटो तक शिवालय में जाकर भगवान के आगे मत्था टेकता था तथा धूप दीप करता था.

एक दिन गौरी (पार्वती) ने शंकर से कहाँ- हे दीनानाथ ! आपके करोड़ो, सच्चे भक्त हैं आप उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं. इसी तरह यह बनिया भी आपका सच्चा भक्त हैं, वह नियमित रूप से सोमवार का व्रत कर विधि विधान के अनुसार आपकी पूजा आराधना करता हैं, फिर आप इसकी मनोकामना पूर्ण क्यों नही करते?

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शिव ने पार्वती के सवाल का जवाब बड़ी विनम्रता से देते हुए कहा- देवी ! इस संसार में सभी को अपने कर्मो के अनुसार फल मिलता हैं, जिसने जैसा कर्म किया उसे वैसा ही फल मिल रहा हैं.

इसके बावजूद पार्वती ने अपनी हठ नही मानी, और उस बणिक की मनोकामनाएं पूर्ण करने की हठ करने लगी. पार्वती कहती हैं, हे महादेव, ये आपका परम भक्त हैं, व्रत नियमों तथा विधि विधान के अनुसार आपका व्रत रखता हैं तथा एक समय भोग प्राप्त करता हैं. अतः आपको इसकी इच्छा पूर्ण करनी ही होगी.

पार्वती की अनुनय याचना के बाद भगवान शिव उस बणिक को स्वप्न में दर्शन देते हैं तथा एक पुत्र होने का वरदान देते हैं, तथा वह पुत्र 16 वर्ष तक ही जीवित रहेगा.

बणिक को कुछ समय बाद एक सुंदर बालक हुआ, जिनका नाम अमर रखा गया. उन्हें पुत्र होने की ख़ुशी से ज्यादा उसकी आयु मात्र 16 वर्ष होने का दुःख था. हालांकि यह बात अभी तक एक रहस्य बनी हुई थी, जिसके बारे में केवल उस बनिये को ही पता था.

जब अमर बारह साल का हुआ, तब पिता ने उसके मामा को बुलाकर इसे पढाने के लिए मामा के साथ काशी भेज दिया. मामा भांजा कई दिनों की यात्रा में जहाँ भी ठहरते विश्राम करते दान पुण्य करते थे.

एक दिन उनका पड़ाव एक गाँव में हुआ, जहाँ राजा की पुत्री का विवाह था. बारात आ चुकी थी, दुल्हे के पिता को यह भय सता रहा था, कि उनके बेटे के एक आँख से अंधे होने का राज राजा को पता चल गया तो बिना विवाह उनके बेटे की बरात लौट जाएगी.

वर का पिता इस ऊहापोह में फसा ही था, कि उसे अमर के दर्शन मिल गये, अमर को देखकर उनके दिमाग में एक विचार कौंध आया, क्यों न इसे अपने बेटे के स्थान पर मंडप में बिठा दिया जाए, तथा बाद में उसे बहुत सारी सम्पति देकर विदा कर देगे. यही बात वर के पिता ने अमर के चाचा से की. चाचा मोह के लालच में ऐसा करने के लिए तैयार हो गया.

वर के स्थान पर अमर को मंडप में बिठा दिया. राजा ने धूमधाम से विवाह सम्पन्न किया तथा बहुत सारा धन देकर राजकुमारी को विदा किया. राजकुमारी से अमर धोखा छुपा न सका, उसने राजकुमारी की ओढ़नी पर सारा राज लिख, दिया कि जिस लड़के के साथ तुम्हारा विवाह हुआ, जो मै वाराणसी पढ़ने जा रहा हूँ, जबकि आपका वर एक आँख से अँधा हैं.

जब राजकुमारी ने ओढ़नी पर लिखा यह संदेश पढ़ा तो वर को अँधा बताकर उसके साथ जाने से इनकार कर दिया. राजा ने अपनी कन्या की बात मान ली, दूसरी तरफ अमर अपने मामा के साथ काशी पहुच गया तथा अपनी पढ़ाई शुरू कर दी.

16 साल की उम्रः पूरी होने के बाद अमर ने बड़ा यज्ञ करवाया तथा ब्राह्मण आदि को दान वस्त्र भेट किए. उस रात को अमर अपने कमरे में सो रहा था, कि शिव के वचन के अनुरूप रात को ही उसकी आत्मा ने देह त्याग दी.

जब सुबह मामा तथा सभी लोगों ने अमर को मृत पाया तो जोर जोर से चिल्लाने लगा. तभी शिव और पार्वती वही से गुजर रहे थे. पार्वती ने कर्णतोड़ करुण रुदन सुनकर शिवजी से इस इंसान का दुःख समाप्त करने की विनती की.

पार्वती ने शिव से कहा कि हे भोलेनाथ आप इस व्यक्ति के कष्ट पीड़ा को समाप्त कर दे. इसके बिना माँ बाप किसके सहारे जिएगे, अमर के माँ बाप आपके सच्चे भक्त हैं आपके सोलह सोमवार का व्रत कर, आपको भोग लगाते हैं.

शिवजी ने पार्वती की बात मान ली तथा अमर को जीवित होने का वर दे दिया, कुछ ही वक्त बाद अमर जीवित होकर खड़ा हो गया. अब अमर ने काशी में रहकर अपनी शेष शिक्षा पूरी की, कुछ वक्त बाद वे दोनों उस नगर पहुचे जहाँ,

राजकुमारी के साथ अमर का विवाह हुआ था. राजा ने अमर को देखकर एक बड़े यज्ञ का आयोजन करवाया, कुछ समय बाद राजकुमारी व अमर को बहुत सा धन देकर विदा किया.

जब अमर राजकुमारी के साथ अपने नगर की ओर चल पड़ा. अपने नगर से थोड़ी ही दूरी पर मामा ने एक दूत भेजकर उनके पिता बनिक को अमर के आने का संदेशा भिजवाया. 16 साल बाद भी अमर को जीवित देखकर बनिया बेहद प्रसन्न था.

उसने मन ही मन भगवान शंकर का धन्यवाद दिया, कि मैंने आपके सोलह सोमवार का व्रत कर उनकी कथा व पूजा की जिसका फल आपने मेरी सन्तान की आयु बढाकर मेरी मनोकामनाएं पूरी की.

हे भोलेनाथ, जो भी आपके सोमवार का व्रत रखकर कथा वाचन कर विधि विधान से पूजा करे उन्हें भी इस प्रकार लाभान्वित करे.

सावन के सोमवार के व्रत की पूजा सामग्री 

नीचे हमने आपको सावन के सोमवार के व्रत रखने के दरमियान आपको कौन सी पूजा सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी, उसके लिस्ट दी है, जिसका प्रबंध आप व्रत चालू करने के पहले कर सकते हैं।

  • बिल्वपत्र 
  • तांबे का लोटा 
  • शुद्ध पानी 
  • केसरिया, हलदी अथवा कुमकुम 
  • धूपबत्ती अथवा अगरबत्ती 
  • माचिस 
  • कोई भी मीठा प्रसाद जो शुद्ध हो 
  • चावल के थोड़े से दाने
  • शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए दूध 
  • दान देने के लिए कोई भी शुद्ध अनाज या फिर थोड़े से पैसे

सावन के सोमवार की व्रत विधि

कई लोग ऐसे होते हैं जो सावन के महीने में सिर्फ भगवान शंकर की ही पूजा करते हैं परंतु आपको बता दें कि भगवान शंकर के साथ-साथ अगर आप माता पार्वती की भी पूजा करते हैं तो आपको आपके व्रत का उचित फल प्राप्त होता है क्योंकि माता पार्वती भगवान शंकर की अर्धांगिनी है।

इसलिए इन दोनों की पूजा आपको एक साथ में करनी चाहिए। अगर आप सावन के सोमवार का व्रत रखना चाहते हैं तो नीचे आपको सावन के सोमवार की व्रत रखने की विधि बताई जा रही है।

  1. सावन के सोमवार का व्रत रखने के लिए आपको जब सावन का महीना चालू हो जाए तब, सावन के पहले सोमवार को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए और आपको ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान कर लेना चाहिए।
  2. इसके बाद आप को साफ और स्वच्छ लाल या फिर पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
  3. कपड़े पहनने के बाद आपको सबसे पहले तांबे के लोटे में शुद्ध पानी लेना चाहिए और उसके अंदर आपको थोड़ा सा सिंदूर डालना चाहिए और इसे ले जाकर के आपको सबसे पहले भगवान सूरज को अर्पित करना चाहिए।
  4. भगवान सूरज को जल चढ़ाने के बाद आपको अपने घर के मंदिर में आना चाहिए या फिर वहां पर जाना चाहिए जहां पर भगवान शंकर की प्रतिमा है।‌ प्रतिमा पर जाकर सबसे पहले आपको धूपबत्ती जलानी चाहिए और भगवान शंकर को धूपबत्ती दिखानी चाहिए।
  5. उसके बाद आपको तीन बार तांबे में रखे हुए जल से भगवान शंकर का अभिषेक करना चाहिए।
  6. इसके बाद आपको प्रसाद के तौर पर हलवा या फिर कोई भी शुद्ध मिठाई भगवान शंकर की प्रतिमा के चरणों में रखनी चाहिए।
  7. अब आपको हाथ जोड़कर के भगवान शंकर से अपने मनोकामना को पूरी होने की अरदास लगनी चाहिए।
  8. मनोकामना मांगने के बाद आपको तांबे के लोटे में साफ पानी भरना चाहिए और उसे आपको उस जगह पर ले जाकर के अर्पण करना चाहिए जिस जगह पर भगवान शंकर का शिवलिंग है क्योंकि सावन के सोमवार में शिवलिंग की पूजा करने का ही विशेष महत्व बताया गया है।
  9. शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के बाद अगर शिवलिंग के सामने कहीं पर नंदी महाराज की प्रतिमा है तो आपको उनके कानों में भी अपनी मनोकामना कह देनी चाहिए। ऐसा करने पर आपकी मनोकामना जल्दी पूरी होती है।
  10. उसके बाद आपको सावन के सोमवार का व्रत चालू कर देना चाहिए। 
  11. जब शाम हो जाए तो आपको फिर से स्नान करना चाहिए और उसके बाद फिर से आपको शंकर भगवान की पूरे विधि विधान से पूजा करनी चाहिए और रात में फलाहार को खा कर के आपको अपना व्रत संपूर्ण करना चाहिए।
  12. व्रत समाप्त होने के अगले दिन आपको किसी गरीब भिखारी को या फिर ब्राह्मण को यथाशक्ति चावल या फिर कुछ पैसों का दान देना चाहिए। ऐसा करने से सावन के सोमवार का व्रत संपूर्ण होता है और भगवान शंकर आप पर प्रसन्न होकर के आपकी सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

सावन के सोमवार का व्रत रखने के फायदे

भगवान शंकर को भोला भंडारी कहा जाता है अर्थात यह बहुत ही भोले होते हैं और इसीलिए यह अपने भक्तों पर जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।

यहां तक कि ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान शंकर को अगर आप सावन के पहले सोमवार को या फिर सावन के महीने के दरमियान किसी भी दिन अगर बिल्वपत्र उनके शिवलिंग पर चढ़ाते हैं तो वह ऐसा करने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की मनोकामना को पूरी करते हैं।

आपकी चाहे कोई भी मनोकामना क्यों ना हो फिर चाहे वह मनोकामना पुत्र प्राप्ति से संबंधित हो, स्वास्थ्य की कामना से संबंधित हो, आर्थिक उन्नति से संबंधित हो, कोर्ट मुकदमे से संबंधित हो, सभी प्रकार की मनोकामना सावन के सोमवार का व्रत विधि पूर्वक करने से पूरी होती है।

सावन के सोमवार के व्रत के दरमियान क्या करें?

यहां पर हम आपका ध्यान इस तरफ दिलाना चाहते हैं कि जब आप सावन के पहले सोमवार का व्रत रखें तो आपको व्रत के दरमियान दिन भर में जब भी टाइम मिले तब माता पार्वती का भी स्मरण करते रहना चाहिए क्योंकि हमने आपको पहले ही बताया है कि यह व्रत तभी संपूर्ण माना जाता है जब आप भगवान शंकर की अर्धांगिनी माता पार्वती का ध्यान भी व्रत करने के दरमियान करते हैं।

इसके लिए आप चाहे तो ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं अथवा माता पार्वती जी के मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं। इसके अलावा आपको व्रत काल के दरमियान किसी भी व्यक्ति से झूठ नहीं बोलना है ना ही किसी व्यक्ति के प्रति आपको गंदी नियत लानी है.

क्योंकि ऐसा करने से आपका व्रत सफल नहीं होता है। सच्चे मन से किया गया व्रत ही भगवान शंकर स्वीकार करते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामना को पूरी करते हैं।

सावन के सोमवार के व्रत दरमियान क्या ना करें?

हमने आपको जो तरीका सावन के सोमवार को रखने का बताया है आपको बिल्कुल उसी तरीके का पालन करके सावन के सोमवार का व्रत रखना चाहिए क्योंकि विधि विधान से किया गया व्रत ही भगवान तक पहुंचता है और वह उसका उचित फल अपने भक्तों को देते हैं।

सावन के सोमवार का व्रत रखने के दरमियान आपको किसी की भी चुगली नहीं करनी चाहिए ना ही किसी भी व्यक्ति के प्रति ईर्ष्या का भाव रखना चाहिए। इसके अलावा आप को जितना हो सके दिन भर में शांत रहना चाहिए और भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए।

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