Speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi | बाल गंगाधर तिलक पर भाषण स्पीच

This Article Providing Information On Bal Gangadhar Tilak in Hindi. Short Speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi Language –बाल गंगाधर तिलक पर भाषण स्पीच bal gangadhar tilak Par Bhashan lokmanya tilak Speech.

Speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi बाल गंगाधर तिलक पर भाषण

Speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi बाल गंगाधर तिलक पर भाषण स्पीच

Bal gangadhar tilak Jayanti punyatithi speech कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 : लोकमान्य तिलक यह नाम कौन नहीं जानता, स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार हैं. इसे मैं लेकर रहूँगा जैसे उत्साह भरने वाले नारे को तिलक ने ही दिया था. 23 जुलाई को तिलक जयंती मनाई जाती हैं. इस अवसर पर समस्त भारत उन्हें सच्चे दिल से नमन करता हैं. हमेशा तिलक हमारे प्रेरक रहेंगे.

Bal Gangadhar Tilak Speech in Hindi

तिलक जयंती 2019 के अवसर पर लोकमान्य बालगंगाधर तिलक के बारे में भाषण निबंध और तिलक के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं. तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था. इनका पूरा नाम बलवंतराय बाल गंगाधर तिलक था, बचपन में इन्हें बाल कहकर पुकारते थे, इनका यही नाम भारत भर में प्रचलित हो गया. जब तिलक आठ साल थे तभी इन्होने संस्कृत भाषा में विद्वता प्राप्त कर ली. वर्ष 1872 में इन्होने पूना सिटी कॉलेज से मेट्रिक की परीक्षा पास की. आगे की पढाई के लिए इन्होने पूना के डेक्कन कॉलेज में प्रवेश लिया, तिलक का यही से ह्रदय परिवर्तित हुआ और देश तथा समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय कार्य करने लगे.

वर्ष 1876 में बीए ओनर्स को क्लियर कर तिलक कानून की पढाई करने में लग गये. जब उन्होंने वकालत की पढाई पूरी कर ली, तो हिन्दू समाज के लडके लडकियों के लिए इन्होने न्यू इंग्लिश स्कूल की स्थापना भी की, जिसमें वे स्वयं पढाते थे. डेक्कन एड्यूकेशन सोसायटी की स्थापना लोकमान्य तिलक ने की, इस संस्था ने देशभर में कई स्कूल व कॉलेज खोले. अपने दोस्त आगरकर के साथ मिलकर बाल गंगाधर तिलक ने मराठा और केसरी पत्रिकाओं का सम्पादन भी शुरू किया. इन पत्रों में जनजागरण के लिए ओजस्वी भाषण छापते थे. इस तरह मात्र कुछ ही महीनों में तिलक व आगरकर की कलम की ताकत से ब्रिटिश हुकुमत घबरा गई और उन्होंने दोनों को छः छः माह की करावास की सजा सुना दी, मगर जेल से छूटने के बाद ये फिर से केसरी के सम्पादन में जुट गये. जनता ने उनके साहस को देखकर ह्रदय सम्राट की उपमा दी.

बाल गंगाधर तिलक जयंती स्पीच 2019

लोकमान्य गंगाधर तिलक पर भाषण-Bal Gangadhar Tilak In Hindi bal gangadhar tilak speech, gangadhar tilak speech in marathi, bal gangadhar tilak speech video, bal gangadhar tilak speech for school class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 Lokmanya Tilak Yanchi Mahiti, bal gangadhar tilak small speech, bal gangadhar tilak famous speech, gangadhar tilak speech in hindi, Lokmanya Tilak Bhashan, short speech on bal gangadhar tilak, बाल गंगाधर तिलक पर निबंध lokmanya speech bal gangadhar tilak death anniversary  स्पीच  कम्पटीशन   recitation  debate competition Speech on lokmanya tilak bal gangadhar tilak speeches, speech on bal gangadhar tilak in marathi, a short speech on bal gangadhar tilak, lokmanya tilak speech in english, lokmanya tilak speech for student.

जन संगठन के लिए लोकमान्य तिलक ने गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव आरंभ किये. इन में राजनितिक भाषण वाद विवाद और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जाता हैं. ये उत्सव इतने लोकप्रिय हुए कि महाराष्ट्र में आज भी इन्हें मनाया जाता हैं. तिलक अब लोकप्रिय नेता बन चुके थे. 1895 में वे बम्बई की प्रांतीय विधानसभा के सदस्य चुने गये. वहां भाषणों द्वारा ब्रिटिश सरकार की पोल खोलने लगे, उन्होंने सरकारी नीतियों की धज्जियां उड़ा दी.

1896 में महाराष्ट्र में अकाल फैला, उस समय तिलक ने पीड़ितों की सहायता का बीड़ा उठाया और सरकार की उदासीनता की आलोचना की. 1897 में प्लेग फैलने पर सरकार ने जनता की कोई सहायता मदद नहीं की, बल्कि गोर सिपाही जनता को लूटते और सताते थे, तिलक ने गोरे सिपाहियों की कटु निंदा की. इसी समय रैंड नामक अंग्रेज की हत्या हो गई. तिलक पर जनता को भड़काने का आरोप लगाया गया और मुकदमा चलाकर उन्हें डेढ़ वर्ष की कैद की सजा दी गई. इससे अग्रेजों के प्रति सारे भारत में नाराजगी फैल गई.

90 के दशक में ही तिलक सक्रिय राजनीति में आ गये. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में इनका प्रभुत्व था. गरमपंथी विचारधारा के प्रबल समर्थक तिलक नरमपंथी विचारधारा के घोर विरोधी भी थे. वर्ष 1895 में इन्हें पूना अधिवेशन में कांग्रेस के सेक्रेटरी का पद दिया गया. बाद में कांग्रेस के विभाजन पर बाल गंगाधर तिलक ने गरमपन्थ समूह का नेतृत्व किया. वर्ष 1905 में कर्जन की बंगाल विभाजन योजना के विरोध में तिलक ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया. वर्ष 1907 के कांग्रेस सूरत अधिवेशन में पार्टी गरम दल और नरम दल दो भागों में बंट गई. लाल पाल और बाल गरम दल के शीर्ष में थे. १९०८ में ही इनके भाषणों को आधार बनाकर तिलक को छः वर्ष के लिए मांडले जेल में बंद कर दिया गया.

यह भी पढ़े

दोस्तों आपकों Speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi का लेख अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *