अनुशासन पर भाषण व स्पीच Speech On Discipline In Hindi

Speech On Discipline In Hindi अनुशासन पर भाषण व स्पीच: अनुशासन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अनिवार्य है. चाहे वो विद्यार्थी हो या शिक्षक, व्यवसायी हो या रिक्शे वाला, सभी के जीवन की उन्नति एवं सही दिशा के लिए अनुशासन के साथ जीवन जीना बेहद आवश्यक हैं. परिक्षा में बच्चों को अनुशासन पर निबंध भाषण आदि लिखने को कहा जाता हैं. आज के इस स्पीच भाषण में हम आपकों अनुशासन के महत्व पर भाषण उपलब्ध करवा रहे हैं, जिन्हें आप कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के स्टूडेंट्स के लिए 100, 200, 300, 400 एवं 500 शब्दों तक का भाषण यहाँ से सरल भाषा में प्राप्त कर सकते हैं.

अनुशासन पर भाषण Speech On Discipline In Hindi

अनुशासन पर भाषण व स्पीच Speech On Discipline In Hindi

जीवन में अनुशासन का अर्थ है शासन, नीति नियमों को मानना या उनका अनुसरण करना, जो हमारे जीवन को सही दिशा या व्यवस्थित करने के लिए बनाए गये हो.

इस तरह के नियमों का पालन करने से हमारे जीवन में क्रमबद्धता आ जाती हैं. तथा इस तरह नियमबद्ध कार्य करने से आनन्द की प्राप्ति भी होती हैं.

जीवन का हर कार्य सरल प्रतीत होता हैं. इसी वजह से विद्यार्थी जीवन में बच्चे को अनुशासन के मध्य रखकर कार्य करना सीखाया जाता हैं.

देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाली पुलिस तथा सेना में भी अनुशासन का बड़ा महत्व हैं. इस तरह परिवार तथा हमारे समाज में भी कुछ निति नियमों का होना आवश्यक हो जाता हैं ताकि समाज सही दिशा में आगे प्रगति कर सके.

अनुशासन के साथ जीवन जीने वाले व्यक्ति को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं. उनके अंदर साहस, धैर्य, सह्न्सीलता जैसे गुणों का विकास होता हैं.

इसलिए हमें सरकार या समाज अथवा किसी भी संस्था मे बनाए गये नियमों तथा अनुशासन की पालना करनी चाहिए, तथा हमारे सिस्टम को भी चाहिए अनुशासनहीन लोगों के साथ किसी तरह की सहानुभूति न बरतकर उनके विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाए.

अनुशासन पर भाषण- Speech On Discipline For Kids In Hindi

किसी ने सही ही कहा है कि अनुशासन सफलता की कुंजी हैं. अनुशासन मनुष्य के विकास के लिए बेहद आवश्यक हैं. यदि मनुष्य अनुशासन में जीवन यापन करता हैं तो वह स्वयं के लिए सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की राह निर्धारित करता हैं.

मनुष्यों द्वारा नियमों में नियमित कार्य करने को ही अनुशासन कहा जाता हैं. यदि किसी व्यक्ति में अनुशासनहीनता का गुण होता है तो वह स्वयं की कठिनाइयों के लिए ही खाई खोदता हैं. 

विद्यार्थी हमारे देश के भविष्य के आधार स्तम्भ हैं यदि इनमें अनुशासन की कमी होगी, तो हम सोच सकते है हमारे देश का भविष्य क्या और कैसा होगा.

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का बड़ा महत्व हैं, अनुशासन के द्वारा ही विद्यार्थी स्वयं के लिए उज्ज्वल भविष्य की सम्भावना तैयार कर सकता हैं. यदि उसके जीवन में कोई अनुशासन नही होगा, तो वह जीवन की दौड़ में सबसे पिछड़ जाएगा, उसकी अनुशासनहीनता ही उन्हें असफल बना देगी.

विद्यार्थी के लिए अनुशासन में रहना और सभी कार्यों को व्यवस्थित रूप से करना अत्यंत आवश्यक हैं. यह वह मार्ग हैं जो जीवन में सफलता प्राप्त करवाता हैं, विद्यार्थियों को बचपन से ही अनुशासन में रहना चाहिए, अनुशासन में रहने की सीख उन्हें अपने घर से ही प्राप्त होती हैं.

विद्यार्थी को चाहिए कि विद्यालय में रहकर विद्यालय द्वारा बनाए गये सभी नियमों का पालन करे. अध्यापकों द्वारा पढाएं गये सभी पाठों का अध्ययन पूरे मन से करना चाहिए.

अध्यापकों द्वारा घर पर दिए गये गृहकार्य को नियमित रूप से करना चाहिए, समय पर अपने सभी कार्य करने चाहिए.

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन

विद्यार्थी को चाहिए कि प्रतिदिन प्रातकाल; उठकर व्यायाम करे, अध्ययन करे, स्नान करे और विद्यालय के लिए शीघ्र तैयार हो जाये. घर आकर समय पर भोजन करे. समय पर अध्यापन और खेलने भी जाए.

रात्रि के भोजन के पश्चात समय पर सोना भी विद्यार्थी के लिए उत्तम रहता हैं. इस तरह व्यवस्थित जीवन शैली उसे तरोताजा रखती हैं और जीवन में स्वयं को सुद्रढ़ रखती हैं.

यदि आँखे उठाकर देखा जाए तो अनुशासन हर रूप में विद्यमान हैं. सूर्य समय पर उगता और समय पर अस्त हो जाता हैं. जीव जन्तु भी इसी अनुशासन का पालन करते हुए दिखाई देते हैं.

पेड़ पौधों में भी अनुशासन व्याप्त रहता हैं. घड़ी की सुई भी अनुशासन का पालन करते हुए चलती हैं. ये सब अनुशासन की ही शिक्षा देते हैं.

यदि दृष्टि डाली जाए तो समाज में चारो तरफ अनुशासनहीनता दिखाई देती हैं. यही कारण है कि देश की प्रगति और विकास सही प्रकार से नही हो पा रहा हैं.

यदि विद्यार्थियों में अनुशासन नही होगा तो समाज की दशा बिगड़ेगी हगी और यदि समाज की दशा बिगड़ेगी तो देश कैसे उससे अछूता रहेगा. हमें चाहिए कि विद्यालयों में अनुशासन पर जोर देना चाहिए.

विद्यार्थियों का मन चंचल और शरारती होता हैं अनुशासन उनके चंचल मन को स्थिर करता हैं यह स्थिरता उन्हें जीवन के संघर्ष को द्रढ़तापूर्वक आगे बढ़ने में सहायक होती हैं यह सब अनुशासन के कारण ही संभव हो पाता हैं.

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