विश्व जनसंख्या दिवस पर भाषण 2021 | Speech On World Population Day In Hindi

विश्व जनसंख्या दिवस पर भाषण 2021 Speech On World Population Day In Hindi: नमस्कार साथियों स्कूल स्टूडेंट्स के लिए यहाँ सरल भाषा में जनसंख्या दिवस 2021 का भाषण स्पीच दिया गया हैं. 11 जुलाई को हर साल वर्ल्ड पोपुलेशन डे दुनियाभर में मनाया जाता हैं. भारत में भी इस दिन कई शिक्षण संस्थानों विद्यालयों महाविद्यालयों में निबंध, भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता हैं.

Speech On World Population Day In Hindi 2021

विश्व जनसंख्या दिवस पर भाषण 2021 | Speech On World Population Day In Hindi

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11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस 2021 पर भाषण

सम्मानित मंच मुख्य अतिथि महोदय और समस्त विद्वान् गुरुजनों आज के दिन पोपुलेशन डे के रूप में मुझे बोलने के लिए अवसर दिया गया इसके लिए सभी का धन्यवाद्, आज मैं आपके समस्त तीव्र गति से बढ़ रही जनसंख्या पर अपने उद्गार प्रकट करना चाहता हूँ.

किसी समय देश के मानव संसाधन को उसके मजबूत पक्ष माना जाता था. जहाँ लोग अधिक संख्या में  होते  वहां  प्रगति  का पहिया भी उतनी ही तेज गति से चलता था.   मगर     अब स्थितियां बदल चुकी हैं. मानव के हाथ मशीनों ने काट दिए है पहले जहाँ 20 लोग काम करते थे अब बस दो लोगों से ही काम चल रहा हैं. 

बेरोजगारी, भुखमरी, कालाबाजारी, मूल्य वृद्धि, हिंसा जैसी विकराल समस्याओं की जड़ तेजी से हो रही जनसंख्या वृद्धि ही हैं. आज दुनियां के सभी देश जनसंख्या की अनियंत्रित वृद्धि के विषय में चिंतित हैं. दूसरी तरफ हम है जो बिना भविष्य चिंतन के हर साल एक नया ऑस्ट्रेलिया भारत में ही बना देते हैं. जिस तरह पिछले दो दशकों से भारत की जनसंख्या बढ़ी है उतनी वृद्धि दर किसी देश की नहीं रही हैं.

आज हम 135 करोड़ हो चुके है हमसे आगे सिर्फ चीन ही हैं जिसकी कुल जनसंख्या हमसे मात्र १० करोड़ ही अधिक है. वक्त रहते हम न जगे तो अगली जनसंख्या के आकड़ों में भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा. यदि हम पिछले दशक के दोनों देशों की जनसंख्या वृद्धि दर के आकंडे देखे तो जान पाएगे कि हमारी और चीन की नीतियों में कितना अंतर है कौन कितना प्रभावी हैं.

भारत की विगत दशकीय वृद्धि दर 18 प्रतिशत के आस-पास थी, जबकि चीन की मात्र 4 प्रतिशत ही थी. आज भी चीन निरंतर इस वृद्धि को और कम करने की कोशिश में हैं. फिर हम कहाँ है और क्या कर रहे हैं. भारत में परिवार नियोजन का कार्यक्रम इसलिए निष्फल हो रहा है क्योंकि इसे सरकार चला रही हैं,

सरकार के भरोसे चलने वाले अभियानों से ये अपेक्षा करना कि वे रातो रात परिणाम दे देगे बेमानी ही होगी.किसी देश की जनसंख्या पर नियंत्रण वहां के नागरिकों में जागरूकता के जरिये ही लाई जा सकती हैं. सरकार द्वारा नौकरी और लाभ का लालच देकर दो बच्चों की नीति भी असरदार साबित नहीं हैं.

इस तरह की नीतियाँ पुरे समाज पर लागू न होने के कारण भी प्रभावी नहीं हो सकी हैं. सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द जनसंख्या नीति लाए तथा इसमें इतने कठोर व्यवस्था की जाए जिससे निर्धारित संख्या से अधिक संख्या में बच्चे पैदा करने वाले परिवारों को मतदान सभी प्रकार के अधिकारों से भी वंचित किया जाए.

वर्षों से हम World Population Day  को  11 जुलाई को मनाते आ रहे हैं. इस दिन अच्छे अच्छे Speech  और essay  की प्रस्तुती होती हैं. जनसंख्या रोकने के विषय पर टीवी पर भी खूब चर्चाए होती हैं मगर अगले दिन हम सामान्य हो जाते हैं. वक्त आ चुका है हम औपचारिकताओं का त्याग कर, देश के जिम्मेदारी इस दिशा में पहल करे तथा लोगों को भी जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए प्रेरित करे.

हमारे देश में कई दशकों से हम दो हमारे दो परिवार नियोजन का नारा प्रचलित हैं, मगर क्या आज तक हम इसे अमल में ले आए हैं. सच्चाई की धरातल पर देखे तो पायेगे हमारे शहरी क्षेत्र में फैमिली प्लानिंग के विषय में कुछ जागरूकता है मगर आज भी गाँवों तथा आदिवासी क्षेत्रो में सन्तान को इश्वर का वरदान मानकर संख्या को अधिक तवज्जु नहीं दी जाती हैं.

जनसंख्या के भयानक दुष्परिणाम क्या हो सकते हैं.इसे समझने के लिए यूपी, बिहार जैसे राज्यों के खेतों में निकलिए, आप पाएगे कि खेत प्लाट बनते जा रहे हैं. लोगों के घरों की बसावट इतनी तेजी से बढ़ रही है कि जिन्हें हम अन्न उगाने वाले खेत खलिहान कहते आए है अब वे जल्द ही नगरीय रूप लेने जा रहे हैं,

घर बनाने के लिए वनों की कटाई हो रही हैं. ऐसे में जब लोगों के लिए बसने की जगह नहीं रहेगी  अन्न कहां उगायेगे जो हमारी उर की आग को मिटा सकेगा.हमारे लिए जनसंख्या आने वाले समय में सबसे बड़ा संकट साबित होगा यदिहम समय रहते नही जगे तो स्थितियां बेहद विकट हो जाएगी.

सारे संसाधन खत्म होने के बाद मानव जीवन खतरे में पड़ जाएगा. विश्व जनसंख्या दिवस के मेरे Speech की मूल बात यही है कि हम जनसंख्या के विषय पर गम्भीरता से सोचे तथा सम्भावित उपायों पर अमल करे तो हम भविष्य में आने वाले सम्भावित खतरे को मिटा सकते हैं. जय हिन्द जय भारत.

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