पृथ्वी की कहानी Story Of Earth In Hindi

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हमारी धरती पृथ्वी की कहानी Story Of Earth In Hindi: हम एक बेहद खूबसूरत पृथ्वी पर रहते है। हमारे इस पृथ्वी में बड़े बड़े पहाड़, गहरे महासागर, घने और विशाल जंगल है। पृथ्वी पर हाथी जैसे बड़े बड़े जीव से लेकर अमीबा जैसे कई सारे छोटे-छोटे जीव मौजूद है।

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पृथ्वी की कहानी Story Of Earth In Hindi

पृथ्वी की कहानी Story Of Earth In Hindi

और हम इंसान इस खूबसूरत पृथ्वी का एक हिस्सा है। पृथ्वी का हर हिस्सा वैसे तो एक दूसरे से संबंधित है लेकिन हर हिस्से की अपनी एक अलग खासियत है। पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में ना सिर्फ तापमान का फर्क है बल्कि वहां की वनस्पतियां भी अलग-अलग होती हैं।

आज हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं‌! यहां पर बड़े-बड़े बिल्डिंग, शॉपिंग मॉल्स, इमारतें बनी हुई है। लेकिन हमारी पृथ्वी हमेशा से ही ऐसी नहीं थी। एक वक्त ऐसा भी था। जब इस पृथ्वी पर जीवन का नामोनिशान नहीं था। इंसान तो इंसान इस पृथ्वी पर कोई जानवर भी नहीं था।

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लेकिन वक्त के साथ धीरे-धीरे पृथ्वी पर जीवों का जन्म हुआ। और फिर समय बीतता गया और पृथ्वी भी वक्त के साथ बदलती गई। कई सारे जीवो का जन्म हुआ तो कई सारे जीवो का नामोनिशान मिट गया। लेकिन पृथ्वी अपनी गति पर चलती रही।

आज हम आपको इस लेख में पृथ्वी की जन्म की कहानी सुनाएंगे। जिस तरह एक बच्चे का जन्म होता है वह बड़ा होता है! ठीक उसी तरह पृथ्वी का भी जन्म हुआ था। समय के साथ उसमें भी बदलाव आए और देखते ही देखते पृथ्वी का पूरा रूप रंग ही बदल गया। लेकिन आज भी इस धरती को मां ही कहते है।

पृथ्वी के जन्म की कहानी The Story Of Earth In Hindi Download

आज से करीब 4500 करोड़ों वर्ष पहले ब्रह्मांड में सिर्फ उल्का पिंड, गैस, धूल कण ही दिखाई देते थे। लेकिन उस समय मिल्की वे यानी आकाशगंगा में ‌ गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गैस एक जगह एकत्र हो रही थे और‌ धूल कण के मिलन से गैस बादल बन गए थे।

इस गुरुत्वाकर्षण बल के खिंचाव से गैस निरंतर जमा होती गई और एक समय ऐसा आ गया कि गैसों के जमा होने से और रासायनिक प्रतिक्रिया होने से बादलों का बना समूह गर्म होने लगा।

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यह इतना ज्यादा गर्म हो गया कि इससे आग बाहर निकलने लगी। गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धूल कण और गैस ने गोलाकार रूप धारण कर लिया था। गुरुत्वाकर्षण बल के खिंचाव से मिले धूल कण और गैस से बनी ब्रह्मांड की वस्तु वही है जिसे हम हर सुबह सबसे पहले देखते हैं यानी कि सूरज।

जब सूरज बना था तब उस समय ब्रह्मांड में उल्का पिंड एक दूसरे से टकराते रहते थे। ऐसे ही एक बार एक बड़ा सा उल्कापिंड सूरज से टकराया, तो सूरज का एक हिस्सा टूटकर उससे अलग हो गया।

सूरज का हिस्सा होने के कारण यह बिल्कुल गर्म था और सूरज की तरह इसमें भी गुरुत्वाकर्षण बल था। अपने गुरुत्वाकर्षण शक्ति से सूरज का यह टूटा हुआ हिस्सा आसपास में मौजूद सभी गैसों और लोहा, तांबा जैसी चीजों को अपनी ओर खींच रहा था। यह सभी चीजें गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी के भूगर्भ में जमा हो रही थी।

और पृथ्वी का ऊपरी भाग एक बाहरी आवरण में बदल रहा था। गुरुत्वाकर्षण से आकर्षित हुए गैस मिलकर बादल बना रहे थे। इस तरह पृथ्वी पर वायुमंडल का निर्माण हुआ था। बादल के टकराने से पृथ्वी पर बारिश शुरू हो गई।

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और बारिश की बूंदों ने गर्म पृथ्वी को बुझा दिया। जैसे-जैसे वक्त बीतता गया वैसे वैसे लगातार वर्षा के कारण पृथ्वी का गर्म बाहरी आवरण ठंडा हो गया। लेकिन कई वर्षों तक लगातार बारिश होने के कारण पृथ्वी पर बहुत सारा पानी जमा हो गया था और इस तरह पृथ्वी पर महासागरों का निर्माण हुआ। इस तरह पृथ्वी पूरी तरह जलमग्न हो गई थी।

महासागर बनने के बाद करीब 4000 करोड़ साल पहले महासागर में जीवन की उत्पत्ति हुई थीं। हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन से मिलने सैवाल का जन्म हुआ। 3500 करोड़ साल पहले पानी में इस प्रकार कई सारे जीवो की उत्पत्ति हुई।

यह छोटे छोटे जीव फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया करके ऑक्सीजन बनाते गए और वायुमंडल में ऑक्सीजन का संचार करते रहें। वायुमंडल में ऑक्सीजन का संचार होने से अन्य गैसों की मात्रा वायुमंडल से कम हो गई और ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा हो गई।

जिसके कारण समुंद्र तल में अन्यजीवों का जन्म होने लगा। सबसे पहले समुद्र में एक ऐसी मछली का जन्म हुआ जिसे हम आज Jellyfish के नाम से जानते हैं। इस बिना हड्डी वाली मछली की उत्पत्ति कई हजार करोड़ साल पहले हुआ था।

लेकिन लगातार विकसित होने के कारण इस जीव ने आज तक अपनी अस्तित्व को बचाए रखा है। इसके बाद महासागर में हड्डी वाले जीवो का जन्म होना शुरू हुआ। यह वह समय था जब शार्क जैसे बड़े-बड़े जीवो की उत्पत्ति हो रही थी।

डायनासोर के समय पृथ्वी का जीवन

The story of life on Earth during the time of the dinosaurs In Hindi: समय का पहिया घूमता रहा और वक्त के साथ-साथ समुंद्र में रहने वाले कुछ जीव तैरते हुए पानी के बाहर जमीन पर आ गए। और इन जीवो ने धरती पर ही रहना शुरू कर दिया।

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ऐसे जीवो में कुछ जीव हमेशा के लिए पृथ्वी पर ही रहने लगे और कुछ जीव धरती के साथ-साथ समुद्र में भी रहने लगे। वे प्राणी जो जमीन के साथ-साथ पानी में भी रहते थे वे उभयचर कहलाए।

धरती पर रहने वाले जीवो ने स्वयं को विकसित करते हुए खुद को धरती पर रहने योग्य बना लिया था। उसके बाद धरती पर बड़े-बड़े जीव पैदा होने लगे। सबसे पहले छोटे-छोटे तेज भागने वाले डायनासोर का जन्म हुआ।

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डायनासोर बहुत तेज भागते थे जैसे समय बीतता गया डायनासोर का आकार और भी बड़ा होने लगा। यह डायनासोर आकार में बहुत ही विशाल होते थे। लेकिन यह डायनासोर सिर्फ घास और पेड़ के पत्ते खाते थे। इन डायनासोर के साथ-साथ उस समय पृथ्वी लंबे पंख वाले पक्षी जैसे जीवो का भी जन्म हुआ था।

सबसे अंत में बड़े-बड़े मांसाहारी डायनासोर का जन्म हुआ यह वह जीव थे जो दूसरे जीवो को खाते थे। ‌पृथ्वी के इस दौर को जुरासिक काल के नाम से भी जाना जाता है। जब पृथ्वी पर चारों ओर सिर्फ डायनासोर थे उस समय ब्रह्मांड से कोई बड़ा सा उल्का पिंड पृथ्वी पर आकर गिरा जिसके कारण धरती के एक बड़े से भाग में कंपन पैदा हुई और भूकंप के साथ साथ कई प्राकृतिक आपदाएं आई।

जिसके कारण पृथ्वी से डायनासोर हमेशा के लिए खत्म हो गए और पूरी पृथ्वी बर्फ से ढक गई।

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति की कहानी इतिहास

The Story Of The Origin Of Life On Earth In Hindi: कई साल ऐसे ही बीत गए और उसके बाद सूर्य की गर्मी से बर्फ पिघलने लगा और बर्फ के पिघलने से फिर पृथ्वी पर महासागर की का निर्माण हुआ। ऐसा लग रहा था जैसे पृथ्वी समय में पीछे चली गई हो। फिर से महासागर में जीवन की उत्पत्ति हुई और जीवन महासागर से होते हुए धरती पर आ गया।

इस बार बड़े विशाल जीवो का नहीं बल्कि छोटी-छोटी जीवो का जन्म हुआ। ऐसा नहीं है कि सारे जीव छोटे थे कुछ बड़े जीव भी थे।

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बड़े बड़े दांत वाले हाथी उस समय के सबसे बड़े जीव हैं। सभी जानवरों के साथ मनुष्य के पूर्वज यानी आदिमानव का भी जन्म हुआ। यह वह समय था जब आदिमानव को रहन-सहन, बोलचाल, किसी भी चीज की जानकारी नहीं थी।

वे खुद को जिंदा रखने के लिए और अपने वंश को आगे बढ़ाने के बारे में ही सोचते थे। जानवरों को मारकर वे उन्हें कच्चा ही खा जाते थे। काफी लंबे समय तक ऐसा ही चला। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला वैसे-वैसे आदि मानव ने हर चीज में बदलाव लाना शुरू कर दिया। जहां पहले वे नग्न घूमते थे वहां उन्होंने अब पत्ते से बने कपड़े पहनना शुरू कर दिया था।

सभी चीजें सीखते सीखते आदिमानव पत्थर से पत्थर घिस कर आग जलाने लगे। शिकार करने के बाद अब वे उन्हें कच्चा नहीं बल्कि पका कर खाते थे।

आदिमानव ने जब आग जलाना सीखा तब उन्होंने पत्थर के महत्व को भी समझना शुरू कर दिया था। पत्थर के महत्व को समझते हुए उन्होंने पत्थर के अलग-अलग हथियार बनाना शुरू कर दिया। जिससे उन्हें शिकार करने में और जंगली जानवरों से खुद को बचाने में सहायता मिल सके।

ऐसे धीरे-धीरे आदि मानव विकास के मार्ग में बढ़ते रहें उन्होंने चक्के का आविष्कार किया। जिससे उनका काम और भी ज्यादा आसान हो गया। सभी जानवरों में से आदिमानव ही ऐसे जीव थे। जिनमें सोचने और समझने की काबिलियत थी।

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उन्होंने अपनी सोच से चीजों को समझा और लगातार विकास करते रहें। विकास के साथ-साथ उन्होंने बातचीत करना सिखा। बातचीत सीखने के बाद उन्हें एक दूसरे के साथ‌ सोशल होने का भी तरीका समझ आ गया। “ यही कारण है कि आज भी हम सभी सोशल होना इतना पसंद करते हैं”.

आदिवासियों ने निरंतर अपने जीवन को बेहतर करने के लिए नए नए तरह के आविष्कार किए और अलग-अलग चीजें बनाई। एक अलग तरह की वस्तुओं की खोज कर उन्होंने अपने जीवन को आसान बनाना शुरू कर दिया था।

जहां आदिमानव पहले गुफाओं में रहते थे। विकास करने के बाद वे लकड़ी और घास के बने घरों में रहने लगे। पत्ते के कपड़ों की जगह उन्होंने दूसरी चीजों के कपड़े बनाएं। आदिमानव पहले सिर्फ मांस खाते थे विकास होने के बाद उन्होंने फल खाना भी शुरू कर दिया था।

यह दौर कई 1000 वर्षों तक चला और लगातार विकास के मार्ग पर चलने के कारण मनुष्य का जीवन बेहतर से बेहतर होने लगा। मनुष्य के जीवन में सुधार आने के साथ-साथ उनके रहने से आने और खाने-पीने का ढंग भी अब पूरा बदल चुका था।

आदिमानव अब बस्तियों में रहने लगे थे। उन्होंने हाथ गाड़ी का निर्माण किया और खेती करना भी शुरू किया। खेती करके भी अलग-अलग साग सब्जी उगाने लगे। इस समय आदि मानव ने शिकार करना पूरी तरह छोड़ दिया था। देखते ही देखते इंसानों की कई सारी बस्ती बनने लगी और यह बढ़ती ही चली गई।

इंसान अलग-अलग जाकर दुनिया के हर कोने में बस गए। जैसे-जैसे तरक्की होती चली गई वैसे-वैसे इंसानों ने नई नई चीजें लानी शुरु कर दी। पत्थर के समान के बाद जहां इंसानों ने लकड़ी के सामानों से काम चलाना शुरू कर दिया था। वही जब उन्हें लोहा तांबा जैसे अन्य खनिजों के बारे में पता चला तब उन्होंने अलग-अलग प्रयोग करना शुरू कर दिया और नई-नई चीजें बनाई।

अपने काम को और आसान बनाने के लिए इंसानों ने मशीन का निर्माण किया जिससे उनका काम काफी आसान हो जाए। एक के बाद एक कई सारी मशीनों का निर्माण हुआ। हर काम को करने के लिए अलग-अलग मशीनें बनाई गई। ऐसे जैसे पृथ्वी पर विकास होता रहा वैसे वैसे इंसानों में भी बदलाव आते रहे।

जहां एक तरफ इंसान पृथ्वी पर नए अविष्कार करके विकास कर रहे थे। तो वहीं दूसरी तरफ वे एक दूसरे के प्रति घृणा और द्वेष की भावना भी रखने लगे। जिसके कारण दोनों के बीच युद्ध होने लगा।

युद्ध में अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए इंसानों ने मशीनी हथियार बनाना शुरू कर दिया जिससे एक बार में ही इंसानों का खात्मा कर सके। कई अलग-अलग तरह के मशीनी हथियार बनाए गए जिससे एक बार में ही लोगो को मारा जा सके।

युद्ध और विकास दोनों ही अपने-अपने पथ पर चलते रहे। सभी व्यक्ति जहां रहते थे उन्होंने उस जगह को अपना एक अलग नाम दे दिया। जिससे पृथ्वी पर कई सारे देश और महादेश बन गए। पृथ्वी के जल वाले भाग को भी उन्होंने नाम दे दिया।

सभी देश एक दूसरे से अलग से सभी देशों में अपनी अलग बोली बोली जाती थी। सभी देशों का अपना एक अलग रहन-सहन का ढंग था। नई नई चीजों की खोज होती चली गई और नई नई चीजें बनती गई। जब लोगों को टेक्नॉलॉजी के बारे में जानकारी मिली तब उन्होंने इस बारे में और ज्यादा खोज करना शुरू कर दिया।

सभी देश अपने-अपने रफ्तार में विकास कर रहे थे। इसलिए वे देश जिन्होंने दूसरों के मुकाबले जल्दी विकास किया वह ज्यादा विकसित है जैसे अमेरिका। और जिन्होंने दूसरे देशों की तुलना में थोड़ा कम विकास किया वह अभी भी विकास के मार्ग में अग्रसर हैं।

हर क्षेत्र में विकास होने से पृथ्वी का रूप पूरी तरह से बदल गया था। जहां पहले पृथ्वी पर जंगल, झाड़ और पानी के अलावा कुछ नहीं था।

वहीं आज पृथ्वी पर बड़े-बड़े बिल्डिंग, इमारतें बनी हुई है। और पृथ्वी के इस स्वरूप बदलाव का सबसे बड़ा कारण मनुष्य और उसकी जिज्ञासा है। इस तरह हमारी पृथ्वी का जन्म हुआ था और इतने बदलाव के बाद हमने इस पृथ्वी पर जन्म लिया है।

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