सूफीवाद क्या हैं सूफी का तात्पर्यं | Sufi, Sufi Mat, Sufism Kya Hai In Hindi

सूफीवाद क्या हैं सूफी का तात्पर्यं Sufi, Sufi Mat, Sufism Kya Hai In Hindi:  चिश्ती सिलसिला, सुहारवर्दी, कादिरी, शत्तारी, कुब्रबिया, फिरदौस, नक्शबंदी, सिलसिला आदि मुख्य भारत के सूफी सम्प्रदाय हैं. भारत में सूफीवाद का आगमन इस्लाम के  साथ साथ ही हुआ, बाहरवी सदी में ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भारत आए थे, तथा इनकों ही भारत का प्रथम सूफी संत या भारत में सूफीवाद का जनक माना जाता हैं. सूफीवाद की उत्पत्ति इसका अर्थ, सूफी मत का विकास एवं प्रमुख सूफीवादी संतों के बारे में जानकारी इस आर्टिकल में दी जा रही हैं.

सूफीवाद क्या हैं Sufism Kya Hai In Hindi

सूफीवाद क्या हैं सूफी का तात्पर्यं Sufi, Sufi Mat, Sufism Kya Hai In Hindi

भारत में सूफी मत का अर्थ और उद्देश्य: कहा जाता हैं कि सूफी वे कहलाए जो सफ यानि सफ़ेद ऊन का कपड़ा पहनते थे. उनके सीधे, साधारण कपड़े पहनने का मतलब था कि ये वो लोग थे जो सीधे और सरल वस्त्र धारण करते थे. सीधी सरल जिंदगी जीते थे और लोगों को सीधे सरल तरीके से प्रेमपूर्वक रहने के लिए प्रेरित करते थे.

सूफी संतों ने इस्लाम के एकेश्वरवाद का पालन किया. ये आमतौर पर वे थे जिन्होंने मुस्लिम धार्मिक विद्वानों द्वारा स्थापित इस्लामिक परम्परा की जटिलताओं और आचार विचार का विरोध किया. सूफी संतों ने धर्म के बाहरी आडम्बरों को त्याग कर भक्ति और सभी मनुष्यों के प्रति दया तथा प्रेम भाव पर बल दिया.

संत कवियों की तरह भारत में सूफी संत भी अपनी बात कविता के जरिये कहते थे. वे अपना संदेश लोगों तक कहानी सुनाकर भी पहुचाते थे. सूफी मत के बारे में यह भी प्रचलित हैं कि इनमें कई दिव्य शक्तियाँ हैं. इन शक्तियों को लेकर अनेक तरह के किस्से कहानियाँ भी सूफी संतों के बारे में फैली हैं.

भारत में सूफी, सूफीवाद, सूफी मत का स्वरूप (Sufism In Hindi In India)

सूफियों में किसी उस्ताद, औलिया या पीर की देखरेख में अलग अलग तरह से दिव्य शक्ति के नजदीक आने के तरीके विकसित हुए. कभी नाच कर, कभी गा कर, तो कभी केवल मनन चितन करके. उस्ताद पीढ़ी दर पीढ़ी शागिर्दों को सीख देते थे. इस तरह कई सिलसिलों की शुरुआत हुई.

हर सूफी सिलसिले का काम करने का, विचारों का अपना ही तरीका था. धीरे धीरे हिंदुस्तान दुनिया में सूफी सिलसिलों के लिए जाना जाने लगा. उस समय के कई सिलसिले तो आज भी महत्वपूर्ण हैं.

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इस तरह के सिलसिलों में एक प्रमुख था- चिश्ती सिलसिला. इसमें औलियाओं की एक लम्बी कतार रही हैं. जो आज तक चली आ रही हैं.

अजमेर के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती , दिल्ली के कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, पंजाब के बाबा फरीद, दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन औलिया, शेख नरुद्दीन, बहाउदीन जकारिया, अमीर खुसरों, गेसुदराज आज भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं, इनकी रचनाएं, कोट्स आज भी काफी प्रसिद्ध हैं.

आइने अकबरी में अबुल फजल ने 14 सूफी सिलसिलों का वर्णन किया है इनके नाम इस तरह हैं.

  1. चिश्ती
  2. सुहरावर्दी
  3. कादिरी
  4. शत्तारी
  5. हबीबी
  6. तफूरी
  7. जुनैदी
  8. करबी
  9. सकती
  10. इयादी
  11. तूसी
  12. दुबरी
  13. अधमी
  14. फिरदौसी

सूफीवाद का प्रभाव

धर्म प्रभाव:

सूफीवाद के प्रचार प्रसार ने भारत में धार्मिक कट्टरता को काफी हद तक कम करने में मदद की। भारतीय आबादी के एक बड़े वर्ग के हिंदू सूफी संतों के शिष्य बन गए।

इन सूफियो के देहांत के बाद बनी मजारे इस्लाम को मानने वालों के साथ-साथ हिंदुओं के लिए भी आस्था का केंद्र बनती चलती गई। परमेश्वर की एकता में उनके भरोसे ने आपसी मत मतान्तरों को कम करने में सहायता की।

सामाजिक प्रभाव:

समाज भलाई के लिए तथा समुदायों के आपसी तनाव ने धर्मार्थ प्रकृति के कार्यों की नींव रखी, अर्थात जगह जगह अनाथालयों और महिला सेवा सेंटर खुलने लगे।

इन संतों केके प्रयत्नों से समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में काम हुए, जातिवाद तथा छुआछूत को कम करने में मदद की। इन्होने पवित्रता और नैतिकता के भाव को जन जन तक पहुचाने का कार्य भी किया।

राजनीतिक प्रभाव:

अपने आध्यात्मिक और उदारवादी जीवन की प्रेरणा से दिल्ली के कुछ सुल्तानों को प्रेरित किया। कई मुगल शासक इन सूफी संतों को अपना गुरु मानकर इनकी हिदायतों के अनुसार कार्य करने लगे थे।

सांस्कृतिक प्रभाव:

भारत में सूफी संतों के आने और सिलसिलों के चलते कई सांस्कृतिक बदलाव भी दृष्टिगत हुए, यहाँ की वास्तुकला के विकास में भी इनका योगदान था। अजमेर के निजामुद्दीन, दिल्ली के औलिया के मकबरे का मध्यकालीन भारतीय वास्तुकला में अहम स्थान हैं.

सूफीवाद की संगीत और साहित्य के क्षेत्र में भी कुछ योगदान रहा हैं। भक्ति गीतों और संगीत को इन्होने लोकप्रिय बनाया, साथ ही कई बोलियों में रचनाएं भी की। खुसरो की गजले और कविताएँ आज भी लोकप्रिय हैं.

सूफी सन्तों का जीवन और सिद्धान्त

सूफीवाद और पवित्रता के साथ अपना जीवन जीते थे। इन्होने अपनी इच्छा से आध्यात्मिक उन्नति के लिए फकीर के जीवन को चुना था। इनका मानना था कि धन दौलत आदि आत्मिक विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।

इन संतों के रहने की जगह अमूमन मिट्टी की बनी कुटिया हुआ करती थी। हालांकि कई सूफियो ने विवाह भी किया मगर जीवन में सादगी और सरलता को सदैव महत्व दिया, इनके समय मुगल काल और पूर्ववर्ती के शासकों द्वारा पद और धन के प्रस्ताव मिलते रहे, मगर सूफी संत इस तरह की किसी पदवी या वजीफा को स्वीकार नही करते थे।

आमजन द्वारा प्राप्त दान राशि से ही जीवन यापन चलाते है कई बार भूखे ही सो जाया करते थे मगर कभी भी धन की याचना नहीं करते हैं. बताया जाता है निजामुद्दीन औलिया को कई बार भूखा सोना पड़ता था ऐसे में वो कहते थे हम तो अल्लाह के मेहमान हैं.

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