मुंशी प्रेमचंद की मंत्र कहानी Summary Of Premchand’s Story Mantra In Hindi

मुंशी प्रेमचंद की मंत्र कहानी Summary Of Premchand’s Story Mantra In Hindi: हिंदी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद्र जी की रचनाएं विशेष स्थान रखती हैं। प्रेमचंद्र जी बहुत ही हल्के फुल्के शब्दों में बड़ी-बड़ी आलोचनाएं कर दिया करते थे। प्रेमचंद जी व्यंगात्मक कहानियां लिखने में माहिर थे। उन्होंने कई ऐसी व्यंग्यात्मक कहानियां लिखी है। जो पाठकों को बहुत रोचक तो लगती हैं। लेकिन इन कहानियों में एक बहुत गहरा संदेश छिपा होता है।

Summary Of Premchand’s Story Mantra In Hindi प्रेमचंद की मंत्र कहानी

मुंशी प्रेमचंद की मंत्र कहानी Summary Of Premchand’s Story Mantra In Hindi

प्रेमचंद की कहानियों में दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह होती थी कि उनके शीर्षक पाठकों के मन में अलग-अलग तरह के सवाल पैदा करते थे। और करें भी क्यों ना शीर्षक तो एक कहानी का वह दरवाजा होता है जिसे खोलकर पाठक कहानी की तरह बढ़ता है।

अतः आज हम आपके समक्ष मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा रचित “मंत्र” नामक एक ऐसी ही कहानी का वर्णन कर रहे है।

Summary of Mantra story by Munshi Premchand in Hindi

संध्या का समय था और डॉक्टर चड्ढा तैयार होकर गोल्फ खेलने के लिए अपने घर से निकल रहे थे घर से निकलते ही डॉक्टर चड्ढा ने देखा कि सामने से डोली निकल रही हैं और डोली के पीछे दो बूढ़े दंपत्ति एक दूसरे को सहारा देते हुए आगे बढ़ रहे थे।

डोली तो अपने रास्ते जाती रही, लेकिन वह दोनों बुढें लोग डॉक्टर चड्ढा के पास जाकर रुके।

“डॉक्टर चड्ढा गांव के विशेषज्ञ डॉक्टर थे इसलिए गांव के सभी लोग इन्हीं के पास इलाज करवाने के लिए आते थे लेकिन डॉक्टर चड्ढा समय के बहुत पाबंद थे।“

डॉक्टर चड्ढा ने उनसे कहा – “ कौन हो तुम ?” और “यहां क्यों आए हो ?”

तब बूढ़े ने जवाब दिया कि सरकार में बहुत गरीब आदमी हूं मेरा 7 साल का बेटा बहुत ज्यादा बीमार है उसने 4 दिन से आंखें नहीं खोली है।

डॉक्टर साहब अगर आप एक नजर मेरे बेटे को देख ले तो मेरे बेटे की जान बच जाएगी।

“कल सबेरे आना” – डॉक्टर चड्ढा ने कहा। क्योंकि यह मेरे गोल्फ खेलने का समय है।

बुजुर्ग ने एक फिर थोड़ा जोर देते हुए कहा एक बार देख लीजिए ना साहब, आपकी वजह से मेरे घर के आखिरी चिराग की जिंदगी बच सकती हैं। आपकी बड़ी कृपा होगी।

मैं बहुत गरीब हूं आप‌की दया से मेरे घर का चिराग वापस जल सकता है। मेरे 7 बेटों में से अब सिर्फ यही बेटा बचा है।

इतना कहने के बावजूद डॉक्टर चड्ढा ने कोई हरकत नहीं की और उस व्यक्ति को नजरअंदाज करके अपने रास्ते चल पड़े।

यह सब देखकर बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी पगड़ी उतार कर डॉक्टर चड्ढा के कदमों पर रख दी, लेकिन इससे भी उनका फैसला नहीं बदला।

और डॉक्टर चड्डा घर से निकलकर अपनी मोटर पर बैठकर गोल्फ खेलने के लिए आखिर चल ही दिए।

उस बुजुर्ग व्यक्ति ने मोटर के चलने के बाद भी पीछे से बहुत आवाज दी, लेकिन फिर भी इसका कोई असर डॉक्टर चड्डा पर नहीं पड़ा।

मोटर के चले जाने के बाद बूढ़ा व्यक्ति कुछ पल के लिए मूर्तिमय हो गया था। क्योंकि उस व्यक्ति ने इससे पहले इतनी कठोर घटना कभी नहीं देखी थी कि किसी व्यक्ति की जान से बढ़कर किसी के लिए अपना खेल जरूरी है।

मोटर गाड़ी के काफी दूर निकल जाने के बाद भी वह बुजुर्ग उसी तरफ देख रहा था उसे शायद उम्मीद थी कि डॉ चड्ढा वापस आ जाएंगे।

लेकिन डॉक्टर चड्ढा वापस नहीं आएं और उसी रात्रि, बुजुर्ग के परिवार का आखिरी चिराग भी बुझ गया। उनका हंसता खेलता यह बच्चा भी अपने बालपन को छोड़कर मौत के आगोश में चला गया।

दोनों ममता के अंधकार में डूब गए। यह घटना बिन कहे, कई सारी बातें कह देती हैं। पुराने जमाने की तरह अब लोग अपना काम छोड़कर दूसरों की मदद करने के लिए नहीं आते हैं।

अपना काम तो छोड़ो लोग अपने आमोद प्रमोद की चीजें भी नहीं छोड़ते भले ही किसी की जान ही क्यों ना चली जाए।

इस घटना को काफी साल बीत गए थे। वक्त के साथ-साथ डॉक्टर चड्ढा ने अपने कुशलता और मेहनत के दम पर पैसे के साथ-साथ सौहरत भी कमा ली थी।

डॉक्टर चड्ढा के दो बच्चे थे। बेटे का नाम कैलाश था और बेटी को संध्या कहकर बुलाते थे।

संध्या की तो कब की शादी हो चुकी थी लेकिन कैलाश अभी कॉलेज में पढ़ता था। कैलाश एक धैर्यशील और बुद्धिमान लड़का था।

कैलाश में वह सभी गुण विद्यमान थे जो एक सज्जन और एक गौरवपूर्ण युवक में होते हैं। कैलाश ना सिर्फ गुणों से अच्छा था बल्कि उसका रूप रंग भी काफी आकर्षक था।

इस वर्ष कैलाश की 20वीं सालगिरह मनाई जा रही था। कैलाश के सालगिरह के अवसर पर डॉक्टर चड्ढा ने बहुत बड़ी पार्टी का आयोजन किया था। इस पार्टी में शहर के जाने-माने लोग और कैलाश के कॉलेज के भी सभी दोस्त आए थे।

इस पार्टी में कैलाश की प्रेमिका मृणालिनी भी आई थी। कैलाश को बचपन से ही सांप पालने का बहुत शौक था क्योंकि यह कला उसने एक सपेरे से सीखी थी उस सपेरे ने कैलाश को सांप को वश में करने के कई सारे मंत्र बताए थे।

जिसके कारण कैलाश अक्सर सांपों को अपने घर पर बिना उनके जहरीला दांत निकाले वश मेंकरके रखता था।

कैलाश के इस शौक के बारे में उसके दोस्तों को भलीभांति जानकारी थी और मृणालिनी को भी इस बारे में पता था। मृणालिनी ने कैलाश को अपने साप दिखाने का आग्रह किया लेकिन कैलाश ने उसे यह कहकर मना कर दिया कि अभी यहां काफी शोर-शराबा है अभी सांप दिखाना सही नहीं होगा।

लेकिन मृणालिनी कहां किसी की सुनने वाली थी। उसने कैलाश से कई बार अनुरोध किया। जिसके बाद कैलाश को मृणालिनी की बात माननी ही पड़ी।

मृणालिनी के साथ-साथ कैलाश के दोस्त भी सांप को देखने के लिए गए।

कैलाश के दोस्त कैलाश को यह कहकर टिप्पणी करने लगे थे कि तुमने जरूर सांप के दांत निकाल दिए होंगे और अभी तुम बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हो। कैलाश के दोस्तों ने इस तरह की कई सारी बातें कहकर कैलाश के ऊपर कई कटाक्ष किए।

जिसे सुनने के बाद कैलाश को काफी गुस्सा आ गया था। और उसने अपने दोस्तों से कहा कि रुको मैं तुम सभी को अपना सबसे जहरीला सांप दिखाता हूं। यह कहकर कैलाश सबसे जहरीले काले रंग के सांप को सबके सामने लाया।

लेकिन उसके दोस्त अब भी उस पर टिप्पणी किए जा रहे थे जिसके बाद कैलाश तिलमिला गया और उसने सांप का गला काफी जोर से दबा दिया जिसके कारण दबाव पड़ते ही सांप के जहरीले दांत और विशग्रंथि साफ साफ दिखाई दे रही थी।

सांप को देखकर कैलाश के दोस्त काफी डर गए थे जिसे देखकर कैलाश को काफी अच्छा लगा और उसने जैसे ही सांप के गर्दन की पकड़ ढीली की वैसे ही सांप ने कैलाश के हाथों पर डस लिया।

जहरीला सांप होने के वजह से उस सांप का जहर देखते ही देखते पूरे शरीर पर फैल गया था। और वह समारोह जो कुछ समय पहले हंसी और उल्लास की आवाजों से गूंज रहा था वह अचानक ही शोक और मातम में बदल गया।

कैलाश की मानें तो रो-रो कर पूरा घर सर पर उठा लिया था। कई सारे झाड़-फूंक करने वाले लोगों को बुलाया गया लेकिन किसी भी झाड़-फूंक का असर कैलाश पर नहीं हो रहा था।

डॉक्टर चड्ढा ने भी रो-रो कर आंसू की नदियां बहा दी थी उन्होंने यहां तक कह दिया था कि आज जो मेरे बेटे को बचाएगा वह उसके नाम अपनी सारी संपत्ति कर देंगे। और कहने लगे बेटे से ज्यादा जरूरी उनके लिए और कुछ नहीं है।

कई लोगों ने काफी देर तक प्रयास किया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। तब लोगों को उस बूढ़े व्यक्ति का ख्याल आया जो मंत्र कहकर बड़े से बड़े सांप का जहर भी पल भर में उतार देता है।

डॉक्टर चड्ढा ने अपने एक खास व्यक्ति को उस बूढ़े के पास भेजा। जब उस व्यक्ति ने बूढ़े व्यक्ति को बताया कि डॉ चड्ढा के बेटे को सांप ने काट लिया है और उसका कोई इलाज नहीं मिल रहा है। तब बुढ़े ने जाने से साफ साफ मना कर दिया।

गांव के सभी लोग बूढ़े की इस प्रतिक्रिया को देखकर हैरान थे क्योंकि वह बूढ़ा व्यक्ति बहुत ही अच्छा और दयावान था जब भी किसी को उसकी जरूरत होती वह हमेशा दौड़े चला जाता था।

लेकिन इस बार उसने साफ इंकार कर दिया था।

“क्योंकि ये वही व्यक्ति था जिसके 7 साल के बच्चे की मौत सिर्फ इस वजह से हो गई थी कि डॉक्टर चड्ढा को गोल्फ खेलने के लिए जाना था।“

मना करने के बाद भी उस व्यक्ति के मन में अजीब सी हलचल चल रही थी। वह बार-बार इसी बारे में सोच रहा था कि इस बच्चे की क्या हालत होगी जिसके कारण उसके मन में बोझ बढ़ता जा रहा था।

इसलिए बुजुर्ग नअपने दिल का बोझ कम करने के लिए डॉक्टर के घर की तरफ चल दिया। जहां सभी लोग कैलाश को देखकर उसे मरा हुआ समझ रहे थे और डॉक्टर चड्ढा को आश्वासन देते हुए घर जा रहे थे।

तभी वह बूढ़ा व्यक्ति डॉक्टर चड्ढा के घर पर पहुंचा, उसने कहा कि अभी देर नहीं हुई है। उसने डॉक्टर चड्ढा को कहां कि इसे नहलाया जाए।

सभी लोग बाल्टी बाल्टी पानी लाकर कैलाश को नहा रहे थे और बुजुर्ग व्यक्ति मंत्र पर मंत्र पढ़े जा रहा था। जिससे कुछ समय बाद ही कैलाश की आंखें खुल गई।

कैलाश को होश में आते देखकर सभी लोग बहुत ज्यादा खुश हो गए।

कुछ देर बाद जब डॉक्टर चड्ढा ने बुजुर्ग व्यक्ति को अपने आस पास देखा तो पता चला कि वह बूढ़ा व्यक्ति वहां से जा चुका है।

डॉक्टर चड्ढा की पत्नी उनसे पूछती है कि वह बूढ़ा व्यक्ति कौन था ?

डॉक्टर चड्ढा ने अपनी पत्नी को कहा कि वह बूढ़ा व्यक्ति हमारे लिए ईश्वर के स्वरूप था यह वही व्यक्ति था। जिसकी मदद मैंने कई साल पहले नहीं की थी।

लेकिन इस गरीब लेकिन हृदय से अमीर व्यक्ति ने आज हमें हमारी सबसे बड़ी दौलत दे दी है। इस तरह डॉक्टर चड्ढा को अपनी गलती का एहसास हुआ।

इस घटना के बाद डॉक्टर चड्ढा ने अपने ऊपर घमंड की जो पट्टी चढ़ा कर रखी थी उसे उतार दी। जिसके बाद वह सभी लोगों का इलाज खुले दिल से करने लगा।

इस रोचक कहानी में मुंशी प्रेमचंद जी ने कई सारे संदेश छुपा कर रखे हैं – अमीर व्यक्ति चाहे कितना भी गुणवान हो लेकिन अपने ऐश्वर्य के आगे किसी गरीब को नहीं देखता है। वही गरीब के पास भले कुछ ना हो परन्तु उसमें प्रेम और दया अमीरों से ज्यादा ही होती हैं।

तो दोस्तों मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा रचित एक कहानी “मंत्र” आपको कैसी लगी नीचे कमेंट करके जरूर बताइए।

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