तारीखे फिरोजशाही | Tarikh I Firoz Shahi In Hindi | Ziauddin Barani Books

तारीखे फिरोजशाही Tarikh I Firoz Shahi In Hindi Ziauddin Barani Books:  जियाउद्दीन बरनी    मुहम्मद  बिन तुगलक और फिरोज शाह के शासनकाल के दौरान उत्तर भारत में स्थित दिल्ली सल्तनत का एक मुस्लिम राजनीतिक थिंकर था. 1285 में बरनी का जन्म हुआ था. इसने सल्तनत काल के तुगलक वंश का इतिहास तारीखे फिरोजशाही अपनी किताब में उस समय राजनीतिक सामाजिक स्थिति के बारे में लिखा हैं. Ziauddin Barani की Books Tarikh I Firoz Shahi के बारे में आपकों संक्षिप्त जानकारी देगे.

Tarikh I Firoz Shahi In Hindi

Tarikh I Firoz Shahi In Hindi

Ziauddin Barani Books तारीखे फिरोजशाही

तारीखे फिरोजशाही: इस ग्रंथ का लेखक जियाउद्दीन बरनी अपने युग का प्रतिभा सम्पन्न इतिहासकार था और वह गियासुद्दीन, मुहम्मद तुगलक तथा फिरोज तुगलक का समकालीन था. उसका ग्रंथ बलबन के राज्यारोहण से आरम्भ होकर फिरोज तुगलक के शासन के छठे वर्ष में समाप्त होता हैं. इस समय के लिए यह एक प्रमाणिक ग्रंथ हैं.

बरनी को अनेक महापुरुषों विद्वानों और राजनेताओं के सम्पर्क में आने का अवसर मिला.अलाउद्दीन के शासन को उसने अपनी आँखों से देखा था.और मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में उसे 17 वर्षों तक रहने का अवसर मिला उसने अपनी पुस्तक सुल्तान फिरोजशाह तुगलक को समर्पित की. उसने अंतिम दिन कष्ट और दरिद्रता में बिताएं.

बरनी ने लिखा कि इतिहासकार को तथ्यों को विकृत नहीं करना चाहिए और इतिहास को लिखते समय पक्षपात न करे, परन्तु अनेक विद्वानों ने स्वयं बरनी की निष्पक्षता और ईमानदारी पर संदेह प्रकट किया हैं. इलियट एवं डाउसन ने लिखा हैं कि जिया उद्दीन बरनी अन्य अनेक इतिहासकारों की भांति अपने समकालीन शासकों के आदेश से और उसके सामने लिखा करता था,

इसलिए वह ईमानदार इतिहासकार नहीं था. बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएं उसने बिलकुल छोड़ दी. या उन्हें साधारण थोडा सा स्पर्श किया हैं. अलाउदीन के शासनकाल में मंगोलों के कई आक्रमण हुए परन्तु उसका उल्लेख नहीं किया गया हैं. मुहम्मद तुगलक ने घोर हत्या और बेईमानी से राज्य प्राप्त किया था. उसका उल्लेख नहीं किया गया हैं. फरिश्ता ने भी बरनी पर यह आरोप लगाया हैं कि उसने इस सत्य को छिपाया हैं.

बरनी ने एक अन्य कृति फरवाए जहाँदारी में राज्य व्यवस्था सम्बन्धी कुछ महत्वपूर्ण उपदेश दिए गये हैं. इस ग्रंथ में आदर्श शासक के बारे में बरनी के विचारों के दर्शन होते हैं. वह काफिरों का विनाश का मंत्र अपने मुसलमान आदर्श शासक को देता हैं. इससे स्पष्ट होता हैं कि वह मजहबी संकीर्णता से ग्रस्त इतिहासकार था.

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