राणा उदयसिंह का इतिहास | Udai Singh History In Hindi

राणा उदयसिंह का इतिहास Udai Singh History In Hindi : मेवाड़ के 53 वें महाराणा उदय सिंह द्वितीय थे इनके पिता राणा सांगा और माँ बूंदी राजघराने की कर्णावती थी. खानवा युद्ध में घायल होने के बाद राणा सांगा का देहावसान हो गया तथा उनकी मृत्यु के बाद उदय सिंह का जन्म हुआ था. बाल्यावस्था में ही गुजरात के बहादुरशाह के आक्रमण के चलते माँ कर्णावती ने जौहर कर लिया था. आगे चलकर उदय सिंह के बेटे के रूप में राणा प्रताप ने जन्म लिया और मेवाड़ के गौरव को पुनः स्थापित किया.

राणा उदयसिंह का इतिहास Udai Singh History In Hindi

राणा उदयसिंह का इतिहास Udai Singh History In Hindi
पूरा नाम‌‌‌‌‌‌‌राणा उदयसिंह
जन्म4 अगस्त, 1522 ई.
जन्म भूमिचित्तौड़गढ़, राजस्थान
मृत्यु तिथि28 फ़रवरी, 1572 ई.
पिताराणा साँगा
माताकर्णवती
पत्नीसात पत्नियाँ
संतान24 लड़के
उपाधिमहाराणा
शासन काल1537 – 1572 ई.
राजधानीउदयपुर
उत्तराधिकारीमहाराणा प्रताप

उदयसिंह को बनवीर से बचाकर कुम्भलगढ़ के किले में रखा गया. यहीं मालदेव के सहयोग से 1537 ई में उसका राज्याभिषेक हुआ तथा 1540 ई में मावली उदयपुर के युद्ध में मालदेव के सहयोग से बनवीर की हत्या कर मेवाड़ की पैतृक सत्ता प्राप्त की. उदयसिंह ने अखेराज सोनगरा एवं खैरवा के ठाकुर जैत्रसिंह की पुत्रियों से विवाह कर अपनी स्थिति को मजबूत किया

1543 ई में शेरशाह के चित्तौड़ पर आक्रमण की खबर पाकर किले की कुंजियाँ शेरशाह के पास भिजवा दी. जिससे शेरशाह ने किले पर आक्रमण नहीं किया और ख्वास खां को चित्तौड़ में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया. 1557 ई में उसने अजमेर के हाकिम हाजी खान पठान को परास्त किया. उदयसिंह ने 1559 ई में अरावली की उपत्यकाओं में उदयपुर नगर बसाकर उसे अपनी राजधानी बनाया. 

उदयपुर में उसने उदयसागर झील और मोती मगरी के सुंदर महलों का निर्माण कराया. 1562 ई में उसने मालवा के पराजित शासक बाज बहादुर व मेड़ता के शासक जयमल को शरण दी. अक्टूबर 1567 में अकबर ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया. अपने सरदारों की सलाह पर वह किले की भार की रक्षा जयमल और फत्ता को सौपकर गिरवा की पहाड़ियों में चला गया. अकबर ने राणा उदयसिंह को खोजने के लिए हुसैन कुली खां को गिरवा की पहाड़ियों में भेजा.

राणा उदयसिंह जीवन परिचय हिंदी में | Biography Of Udai Singh In Hindi

रात्रि के समय किले की दीवार की मरम्मत करवाते समय जयमल अकबर की संग्राम नाम की बंदूक से घायल हो गया. अतः अगले दिन 24 फरवरी 1968 को राजपूतों ने केसरिया बाना धारण कर मुगलों से युद्ध किया. जयमल ने कल्ला राठौड़ और फत्ता सिसोदिया भी लड़ते हुए मारे गये. फत्ता की पत्नी फूलकंवर के नेतृत्व में महिलाओं ने जौहर किया, जो चित्तौड़ का तीसरा साका कहलाता हैं.

जयमल और फत्ता और कल्ला राठौड़ की छतरियां चित्तौड़ में बनी हुई हैं. अकबर ने 25 फरवरी 1568 को चित्तौड़ के किले पर अधिकार करके 30, 000 व्यक्तियों का कत्लेआम करवाया. अकबर ने जयमल और फत्ता की वीरता से मुग्ध होकर आगरा के किले के बाहर गजारूढ़ पाषाण मूर्तियाँ लगवाई.

चित्तौड़ के पतन से महाराणा बीमार होने लगा और 28 फरवरी 1572 को होली के दिन गोगुन्दा में महाराणा उदयसिंह की मृत्यु हो गई.

राणा उदयसिंह की रानियां और संतान (Rana Uday Singh’s queens and Son)

राणा उदय सिंह की मृत्यु 1572 में हो गई थी. उस समय उदय सिंह की आयु मात्र 42 वर्ष थी. मगर उनका राजपरिवार बहुत बड़ा हो चुका था. बताया जाता है कि जब उदयसिंह का निधन हुआ तो उस समय उनके सात रानियों के कुल 24 लड़के थे. जिनमें महाराणा प्रताप भी एक थे. मगर अपनी छोटी रानी का बेटा जगमाल उदयसिंह को अति प्रिय था. इस कारण उन्होंने इसे अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया था.

मगर सामंतों की नजर में जगमाल से राणा प्रताप अधिक बेहतर थे. इस कारण से उन्होंने राणा प्रताप का राज्याभिषेक कर दिया था. राणा प्रताप ने जब मेवाड़ की सत्ता संभाली तो उस समय परिस्थितियाँ बेहद विकट थी. पहले तो उन्हें सभी राजकुमारों में स्वयं को सर्वश्रेष्ठ साबित करना था. दूसरा उन्हें अपने पिता उदयसिंह का खोया हुआ साम्राज्य अकबर से वापिस लेना था.

महाराणा उदयसिंह की मृत्यु

गुहिल वंश के मेवाड़ी शासकों में उदय सिंह की गिनती सबसे कमजोर शासकों में की जाती हैं. उनकी कमजोरियों के कई वाजिब कारण भी थे, इनके जन्म से पूर्व ही पिता सांगा की मृत्यु के बाद बचपन में ही माँ कर्णावती के नेतृत्व में जौहर का होना एक तरह से ऐसे राजनैतिक निराशा के वातावरण में उनके पास न कोई भविष्य योजना थी न विरासत में कोई बेहतरीन सेनानायकों का सहयोग इन्हें मिल सका.

इन सबके बावजूद इन्होने 32 वर्षों तक शासन किया. उस दौरान इन्होने उदयपुर को मेवाड़ की नई राजधानी बनाया गया. इन्ही के दौर में अकबर ने चित्तौड पर आक्रमण किया था. 28 फ़रवरी 1572 को 49 वर्ष की अवस्था में उदय सिंह का गोगुन्दा में देहावसान हो गया. उनके बाद जगमाल सिंह को अगला शासक बनाया मगर कुछ ही दिनों बाद इसे हटाकर राणा प्रताप मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठे.

यह भी पढ़े

आपको राणा उदयसिंह का इतिहास | Udai Singh History In Hindi का यह आर्टिकल कैसा लगा कमेंट कर जरुर बताएं, साथ ही इस लेख को कैसे बेहतर बना सकते है अपने सुझाव भी देवे, हमें आपकी प्रतिक्रिया का इन्तजार रहेगा.

Leave a Comment

Your email address will not be published.