उमा महेश्वर व्रत 2022 कथा और पूजा विधि | Uma Maheshwar Vrat Katha Vidhi in Hindi

उमा महेश्वर व्रत 2022 कथा और पूजा विधि | Uma Maheshwar Vrat Katha Vidhi in Hindi भगवान शिव और पार्वती का इस दिन व्रत रखकर पूजा की जाती हैं, सालभर के हिन्दू व्रत त्योहारों उमा महेश्वर व्रत को सर्वोत्तम माना जाता हैं. शक्र नाम से इस दिन व्रत किया जाता हैं. स्त्रियों के इस व्रत को रखने से बुद्धिमान संतान, सुवर्ण वस्त्र और सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं. मार्गशीर्ष माह की शुक्ल तृतीया के दिन इस व्रत को रखने सबसे अधिक महत्व देता हैं.

उमा महेश्वर व्रत 2022 कथा और पूजा विधि

उमा महेश्वर व्रत 2022 कथा और पूजा विधि | Uma Maheshwar Vrat Katha Vidhi in Hindi

यह व्रत भाद्र पूर्णिमा को किया जाता हैं. इस दिन उमा शंकर की पूजा की जानी चाहिए. सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर की मूर्ति को स्नान कराके बेल पत्ते, फूल से पूजन कर प्रार्थना करे तथा रात्रि को मंदिर में जागरण करे.

इस प्रकार यह व्रत 15 वर्ष तक करना चाहिए. अंत में पूजन के बाद यथाशक्ति ब्राह्मण को भोजन दक्षिणा देकर व्रत का समापन करे. उमा महेश्वर व्रत करने से अत्यधिक धन सम्रद्धि की प्राप्ति होती हैं.

उमामहेश्र्वर व्रत तिथि (Uma Maheshwar 2022 Vrat date)

वर्ष 2022 में उमामहेश्र्वर व्रत 10 सितंबर 2022 को रखा जाएगा. सही मुहूर्त का समय तथा तिथि वार की जानकारी नीचे दी गई हैं. यह सारणी समय उज्जैन के अनुसार हैं. अलग अलग शहरों में इसकी भिन्नता हो सकती हैं.

पूर्णिमा तिथि शुरू09 सितंबर 2022 शाम 06:07 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त10 सितंबर 2022 दोपहर 03:28 बजे

उमा महेश्र्वर व्रत कथा (Uma Maheshwar Vrat Katha In Hindi)

एक बार विष्णु जी को दुर्वासा ऋषि ने शिव की माला दी. विष्णु ने उसे गुरुड को पहना दी. इससे दुर्वासा क्रोधित होकर बोले कि हे विष्णु तुमने शंकर का अपमान किया हैं. इससे तुम्हारे पास से लक्ष्मी चली जाएगी, और क्षीर सागर से भी हाथ धो दोगे. तथा शेषनाग भी तुम्हे सहायता नही कर पाएगे.

यह सुनकर विष्णु ने दुर्वासा को प्रणाम कर इस अपराध से मुक्त होने का उपाय पूछा. ऋषि ने बताया कि उमा महेश्वर का व्रत करो तभी सभी वस्तुएं मिलेगी तब विष्णु जी ने ऐसा ही किया. व्रत के प्रभाव से लक्ष्मी आदि समस्त शापित वस्तुएं भगवान विष्णु को पुनः मिल गई.

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उमामहेश्र्वर व्रत विधि (Uma Maheshwar Vrat Vidhi in Hindi)

उमा महेश्वर व्रत रखने का तरीका तथा विधि का विधान नारद पुराण में किया गया हैं. विधि विधान के अनुसार भादों पूर्णिमा के एक दिन पूर्व चतुर्दशी को एक वक्त ही भोजन करना चाहिए. रात्रि को शिव पार्वती की संयुक्त प्रतिमा के सामने उमामहेश्र्वर व्रत रखने का संकल्प कर उसी स्थान पर सो जाना चाहिए.

व्रत के दिन शिव जी का पूजन कर भोलेनाथ का जागरण करना चाहिए. इस दिन भस्म अथवा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए. इस व्रत को निरंतर पन्द्रह वर्षों तक करना चाहिए, तत्पश्चात पन्द्रह ब्राह्मणों को भोजन कराकर सोना, चांदी, मिट्टी या तांबे धातु के का कलश दान देना चाहिए.

उमा महेश्वर व्रत करने का तरीका 

  • पूर्णिमा तिथि को व्रत रखने वाले स्त्री पुरुष को सवेरे जल्दी उठकर उमा शंकर की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए.
  • ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करे.
  • फल तथा चीनी का शिव प्रतिमा पर अभिशेक करे तथा परिवार के सदस्यों को मिठाई व फल प्रसाद स्वरूप वितरित करे.
  • उमा महेश्वर व्रत के एक दिन बाद श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होती हैं इसमें पितरों का तर्पण किया जाता हैं.

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