क्रिया – परिभाषा, भेद, और उदाहरण : हिन्दी, Verb / Kriya in Hindi

क्रिया – परिभाषा, भेद, और उदाहरण : हिन्दी, Verb/Kriya in Hindi हिंदी व्याकरण में कई सारे ऐसे मुख्य भेद होते हैं जिनके बारे में हम सही तरीके से जानकारी प्राप्त नहीं कर पाते और कहीं ना कहीं हम अपने वाक्य को भी गलत तरीके से लिख लेते हैं। ऐसे में हमें भी निश्चित रूप से इन बातों का ध्यान रखना होगा ताकि हम आगे कोई भी गलती ना कर सके। आज हम आपको क्रिया के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे जिसे आप भी सही तरीके से वाक्यों का उपयोग कर सकें।

क्रिया – परिभाषा, भेद, और उदाहरण : हिन्दी, Verb/Kriya in Hindi

क्रिया - परिभाषा, भेद, और उदाहरण  हिन्दी, Verb Kriya in Hindi

क्रिया मुख्य रूप से एक ऐसा शब्द है या शब्दों का समूह होता है, जो हमें किसी भी कार्य के होने का बोध कराता है। उदाहरण के तौर पर

  1. मेरी बहन हंस रही है।
  2. दुर्गा कॉलेज जाने वाली है।
  3. हंसा गाना गा रही है।

इन सभी उदाहरणों में जो भी कार्य किया जा रहा है उन्हें क्रिया के रूप में माना जाता है। ऐसे में हम दिन में कई बार वर्ब का उपयोग करते हैं।

क्रिया के मुख्य भेद

वर्ब के अंतर्गत कुछ मुख्य भेदों को देखा जाता है, जो रचना की दृष्टि से निम्न प्रकार के होते हैं।

  1. अकर्मकक्रिया
  2. सकर्मकक्रिया
  3. द्विकर्मकक्रिया

अकर्मकक्रिया— ऐसी क्रिया जिनका मुख्य असर करता पर होता है और जिस से वाक्य का अर्थ कुछ हद तक बदल जाता है। ऐसे क्रियाओं को अकर्मक वर्ब कहते हैं। अगर आप दूसरी तरफ से देखते हैं, तो महसूस होगा कि अकर्मक क्रियाओं को कर्म करने की आवश्यकता नहीं होती है वह अपना कार्य स्वता ही करते हैं।

अकर्मक क्रियाओं के मुख्य उदाहरण

  1. राकेश हमेशा हंसता है।
  2. छिपकली रेंग कर बढ़ती है|
  3. ट्रेन चलती रहती है|

कुछ मुख्य अकर्मकक्रिया— 

खेलना, बैठना, चलना, ठहरना, चमकना, डोलना, कूदना, उछलना, मरना, जीना, जागना, उगना, सोना, होना, खोना, जीतना, हंसते रहना|

सकर्मकक्रिया— यह ऐसी क्रियाओं के रूप में होती हैं जिनका असर कर्म पर पड़ता है। इनका किसी भी तरह से करता पर असर नहीं होता है। ऐसी मुख्य वर्ब को सकर्मक वर्ब के नाम से जाना जाता है। जिनमें कर्म का होना मुख्य होता है।

सकर्मक क्रिया का उदाहरण

  1. मैं कहानी लिखती हूं|
  2. निधि नमकीन नहीं खाती है|
  3. मीरा को फूल पसंद है|
  4. उसे ऑरेंज जूस पसंद है|

द्विकर्मकक्रिया— इसे अन्य क्रियाओं के रूप में देखा जाता है जहां पर प्रत्येक क्रियाओं के दो कर्म होते हैं। सामान्य रूप से हम द्विकर्मक वर्ब का उपयोग कई बार करते हैं| आज हम आपको कुछ उदाहरण के माध्यम से इसकी जानकारी देंगे| इन में प्रयुक्त होने वाले दोनों कर्म में से मुख्य कर्म किसी पदार्थ के रूप में मुख्य रूप से शामिल होता है।

द्विकर्मकक्रिया के उदाहरण

  1. नेहा ने सुरेश को पेन दी थी।
  2. मैंने तुम्हें उस दिन अपनी ड्रेस दी थी।
  3. वीरु ने जय को ₹50 दिए।
  4. राजा ने ब्राह्मण को दान दिया|

रचना की दृष्टि से क्रिया के विभिन्न भेद

रचना की दृष्टि से क्रिया के दो प्रकार के भेद होते हैं जिनके बारे में भी हम विस्तार से जानकारी देंगे—

  1. रूढ़क्रिया— ऐसी क्रिया जिसकी रचना हम किसी धातु के माध्यम से करते हैं उसे रुढ़ क्रिया कहते हैं। उदाहरण के रूप में खाना-पीना, लिखना, जाना, आना आदि।
  2. योगिकक्रिया— ऐसी क्रिया जिनकी रचना एक से अधिक तत्वों से होती है उन्हें यौगिक क्रिया के नाम से जाना जाता है। कई बार हिंदी व्याकरण में इनका बहुलता से उपयोग भी होता है। उदाहरण के रूप में बताना, लिखवाना, कहीं जाना, बड़बड़ करते रहना, पढ़वाना आदि।

योगिक क्रिया के प्रमुख भेद—

  1. संयुक्तक्रिया
  2. नामधातुक्रिया
  3. प्रेरणार्थकक्रिया
  4. अनुकरण आत्मकक्रिया

प्रयोग तथा संरचना के आधार पर विभिन्न क्रिया के भेद

  1. सामान्यक्रिया
  2. सहायकक्रिया
  3. संयुक्तक्रिया
  4. प्रेरणार्थकक्रिया
  5. पूर्वकालिकक्रिया
  6. सजातीयक्रिया
  7. नामधातुक्रिया

सामान्यक्रिया— यह क्रिया का सामान्य रूप का वह प्रतिबिंब होता है जिसमें एक कार्य एवं एक ही क्रियापद शामिल होता है। ऐसे वाक्य जिसमे मुख्य रुप से एक ही क्रियापद होते हैं उन्हें सामान्य क्रिया के रूप में देखा जाता है जिन्हें आसानी से ही पढ़ कर समझा जा सकता है।

उदाहरण—

1) राधाबाई आती है।

2) श्याम इमली खाता है।

3) प्रवीण खिलौना खेलता है।

4) मम्मी खाना देकर जाती है।

सहायकक्रिया– जिस प्रकार नाम से ही जाहिर होता है कि जब किसी वाक्य में मुख्य क्रिया की सहायता की जाती है और मुख्य रूप से ऐसा वाक्य जो किसी भी वाक्य को पूरा करने का दमखम रखता है उसे सहायक क्रिया कहा जाएगा।

उदाहरण

  • कविता पुस्तक पढ़ती है।
  • मुझे खाना खाना पसंद है।
  • मैंने पढ़ाई पूरी कर ली है।

यहां पर हम देख सकते हैं कि मुख्य क्रिया साथ-साथ सहायता करने वाला पद शामिल है, जहां पर किसी भी वाक्य को पूरा पढ़ाया जाता है।

संयुक्तक्रिया— संयुक्तक्रिया किसी भी क्रिया का वह भाग होता है, जो दो अलग-अलग क्रियाओं के माध्यम से पूरी होती है और दो अलग-अलग क्रियाओं को जोड़ने का भी कार्य करती है। ऐसी क्रियाओं को संयुक्तक्रिया कहा जाता है।

 उदाहरण

1) श्याम ने पानी पी लिया है।

2) सुरेश ने अच्छा गाना गाया है।

3) राधा ने अपना खाना बना लिया है।

इस प्रकार से हमने देखा कि पहले वाक्य में “पानी” और “पी” मिलकर एक क्रिया बना रहे हैं जिसमें संयुक्त क्रिया हो रही है। इसी प्रकार से हम दूसरे और तीसरे वाक्य में भी देखते हैं जहां पर क्रिया मिलकर संयुक्त क्रिया बनाती है।

प्रेरणार्थकक्रिया—  यह एक ऐसी क्रिया होती है जिसमें करता खुद की बजाय दूसरे क्रिया के लिए प्रेरित होता है और प्रेरणा देने का कार्य करता है। इसीलिए इस क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहा जाता है। जब भी क्रिया बनती है तो सकर्मक होती है, जो मुख्य रूप से हम उदाहरण से दर्शा सकते हैं।

उदाहरण

  1. नेहा ने निधि से होमवर्क करवाया है।
  2. संतोषी ने विमला से पूजा करने को कहा है।
  3. डॉक्टर ने नर्स से जरूरी सामान मंगवाया है।
  4. रवि अपनी पत्नी से कपड़े धुलवाता है।

इन सभी उदाहरणों में प्रेरणार्थक क्रिया बताई गई है जिसमें आसानी से ही हम इस वर्ब को समझ सकते हैं।

पूर्वकालिकक्रिया— यह प्रिया उस समय इस्तेमाल की जाएगी जब किसी भी वाक्य में वर्ब पहले से ही संपन्न हुई हो और दूसरी बाद में आई हो। ऐसे में पहले संपन्न हुई क्रिया को पूर्वकालिकक्रिया कहा जाएगा।

उदाहरण

  1. वह पढ़ कर चला गया।
  2. समीक्षा नहा कर खाना बनाएगी।
  3. श्याम खेलकर पढ़ने जाएगा।
  4. विकास पढ़कर खाना खाता है।
  5. रानी खेल कर सो जाती है।

यहां पर दो प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग किया गया है जिसमें पूर्वकालिक क्रिया बनती है। ऐसे में उदाहरण के माध्यम से ही ऐसी क्रियाओं को आसानी से समझा जा सकता है।

सजातीयक्रिया— मुख्य रूप से यह क्रिया का वह रूप होता है जिसमें कर्म और क्रिया एक ही धातु से बने होते हैं और एक साथ प्रयुक्त हो जाते हैं उन्हें सजातीय क्रिया में शामिल किया जाता है।

उदाहरण 

  1. भारत ने लड़ाई लड़ी।
  2. तुमने खाना खाया।

नामधातुक्रिया— यह वर्ब का वह रूप होता है जिसमें किसी भी क्रिया की रचना संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के माध्यम से होती है। इस क्रिया में किसी भी धातु का उपयोग नहीं होता है और इसीलिए इसे नामधातु वर्ब कहा जाता है।

उदाहरण

  1. अपना + ना = अपनाना
  2. चमक + ना = चमकना
  3. पटक + ना = पटकना 

काल के आधार पर वर्ब के भेद

काल के आधार पर क्रिया के मुख्य भेद होते हैं– 

  1. भूत कालिकक्रिया— इसमें वे क्रियाएं शामिल होती हैं जिनमें भूतकाल में किए गए कार्यों का बोध होता है और ऐसे क्रियाओं को भूतकालिक क्रिया कहा जाता है।

उदाहरण— 

  1. उसने खाना खा लिया था।
  2. मैंने खिलौना मंगवाया था।
  3. कविता ने पुस्तक पढ़ ली थी।

भूत कालिक क्रिया के मुख्य भेद

  1. सामान्य भूतकालक्रिया
  2. आसन्न भूतकालक्रिया
  3. पूर्ण भूतकालक्रिया
  4. संदिग्ध भूतकालक्रिया
  5. अपूर्ण भूतकालक्रिया
  6. हेतु हेतु मद भूतकालक्रिया

     2) वर्तमान कालिकक्रिया— यह क्रियाएं इस प्रकार से होती हैं जिनमें वर्तमान में संपन्न होने वाले कार्यों का बोध किया जाता है और उन्हें अपने वाक्यों में स्थान दिया जाता है।

वर्तमान कालिकक्रिया के मुख्य भेद

1) सामान्य वर्तमान कालिक क्रिया— इस वर्ब के माध्यम से कार्य का सामान्य समय में होने का बोध होता है। जिसके अंतर्गत ती है, ते हैं आते हैं।

2) अपूर्ण वर्तमान कालिकक्रिया— इस वर्ब के अंतर्गत कार्य का वर्तमान समय में जारी रखने का बोध होता है। जिसमें वाक्य के अंत में रहा है, रही है, रहे हैं शामिल होते हैं।

3) संदिग्ध वर्तमान कालिकक्रिया—  इस वर्ब के अंतर्गत कार्य के वर्तमान समय में होने पर संशय का बोध होता है। जिस से वाक्य के अंत में रहा होगा, रही होगी, रहे होंगे आता है।

4) आज्ञाथक वर्तमानकालिकक्रिया— यह वर्ब का वह रूप है जिसमें आज्ञा या  आदेश का बोध होता है।

5) संभाव्य वर्तमान कालिक क्रिया— इस वर्ब में वर्तमान समय में अपूर्ण क्रिया की संभावना या संशय होने का बोध किया जाता है। जिससे किसी वाक्य के अंत में रहा होगा, रही होगी, रहे होंगे शामिल होते हैं।

3) भविष्य कालिकक्रिया— वे क्रियाएं जिनके द्वारा भविष्य में होने वाले काम का बोध किया जाता है उन्हें भविष्य कालिक क्रिया कहा जाता है। 

उदाहरण

  1. हम कल जबलपुर जाएंगे।
  2. अगले सप्ताह सभी लोग अपने घर जाने वाले हैं।
  3. तुम लोग कब वापस आओगे?

भविष्य कालीक्रिया के भेद

  1. सामान्य भविष्य कालिक – इनमें मुख्य रूप से आने वाले समय का बोध होता है।
  1. आज्ञाथक भविष्य कालिक— इनमें आज्ञा या आदेश होने का बोध शामिल होता है।
  1. संभाव्य भविष्य कालिक— इसके माध्यम से भविष्य काल में होने वाले संभावना को व्यक्त किया जाता है।

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इस प्रकार से हमने देखा कि जिस वर्ब का उपयोग हम हिंदी व्याकरण में प्रमुखता से करते हैं उसके अंदर कई प्रकार के भेद और आधार होते हैं जिसके माध्यम से हम अलग अलग तरीके से वाक्य को वर्गीकृत कर सकते हैं और सही तरीके से उनका आकलन भी किया जा सकता है।

आज हमने आपको क्रिया – परिभाषा, भेद, और उदाहरण हिन्दी, Verb Kriya in Hindi के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है, जो निश्चित रूप से आपके लिए कामगर होगी और उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह हिंदी व्याकरण संबंधित लेख पसंद आएगा।

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