गुरु पूर्णिमा पर्व क्यों व कब मनाया जाता है? Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2022 In Hindi

नमस्कार आज का लेख गुरु पूर्णिमा पर्व क्यों व कब मनाया जाता है? Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2022 In Hindi पर दिया गया हैं. आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. आज के आर्टिकल में हम जानेगे कि गुरु पूर्णिमा का फेस्टिवल कब और क्यों मनाया जाता है.

गुरु पूर्णिमा पर्व क्यों कब मनाया जाता है Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2022 In Hindi

गुरु पूर्णिमा पर्व क्यों व कब मनाया जाता है Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2022 In Hindi

गुरु को ईश्वर के समकक्ष दर्जा दिया जाता हैं. गुरु शब्द का अर्थ अन्धकार या अज्ञान को मिटाने वाला होता हैं, यह शब्द दो संस्कृत शब्दों की संधि हैं.

गु+रु, जिसमें गु का अर्थ अन्धकार व रु का मतलब भगाने वाला, यानि जीवन में अज्ञान रूपी अँधेरे को मिटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश फैलाने वाले को गुरु का दर्जा दिया गया हैं. गुरु पूर्णिमा 2022 कब हैं, आपकों पता ही होगा आज यानि 16 जुलाई शुक्रवार के दिन गुरुओं के सम्मान में यह दिन मनाया जा रहा हैं.

गुरु पूर्णिमा कब और क्यों मनाई जाती हैं स्टोरी, कथा, कारण डेट इन इंडिया हिंदी

गुरु पूर्णिमा शिक्षकों को समर्पित एक दिन है। गुरु पूर्णिमा भारत, नेपाल और बौद्ध धर्म और जैन धर्म प्रभाव वाले अन्य देशों में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा की तारीख इस साल 13 जुलाई है। उत्सव हिंदू महीने अशधा में जून और जुलाई के बीच पूर्णिमा  दिवस (पूर्णिमा ) पर मनाया जाता है ।

इस दिन सौर चक्र की चोटी के बाद चंद्र चक्र के पहले शिखर को चिह्नित करता है। गुरु एक शिक्षक, मास्टर, एक गाइड है, जो छात्र को सही रास्ते पर निर्देशित करता है।

शब्द गुरु दो शब्दों, gu और ru से लिया गया है। संस्कृत रूट gu का मतलब अंधेरा या अज्ञानता है, और आरयू उस अंधेरे को हटाने का संकेत देता है। इसलिए, एक गुरु वह है जो हमारी अज्ञानता के अंधेरे को हटा देता है।

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कई हिंदू महान ऋषि व्यास के सम्मान में दिन मनाते हैं, जिन्हें प्राचीन हिंदू परंपराओं में सबसे महान गुरु माना जाता है। वह गुरु-शिष्य परंपरा (शिक्षक-छात्र) का प्रतीक प्रतीक है ।

योग परंपरा में, ऐसा कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा वह दिन था जब शिव आदी गुरु, या पहले गुरु बन गए थे। यह माना जाता है कि वह करने के लिए योग का प्रसारण शुरू हुआ।

बौद्ध भगवान बुद्ध के सम्मान में दिन मनाते हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश में सारनाथ में इस दिन अपना पहला उपदेश दिया था।

लोग अपने गुरु को अपना सम्मान दिखाने के लिए इस दिन उपवास करते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत और भारतीय शास्त्रीय नृत्य के छात्र, जो गुरु शिष्य परम्परा का भी पालन करते हैं ,

दुनिया भर में गुरु पूर्णिमा त्यौहार मनाते हैं। किसी के गुरु को प्रार्थना करने के लिए सार्वजनिक प्रवचन और पूजा भी आयोजित की जाती है।

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हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चारों वेद एवं प्राचीन ग्रथ महाभारत के रचियता वेद व्यास जी का जन्म आषाढ़ माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था. जिस कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता हैं,

वेदव्यास जी को भारत का पहला आदि गुरु होने का सम्मान प्राप्त हैं, इस कारण उनके इस जन्मदिन को गुरुओं के सम्मान का दिन गुरु पूर्णिमा के रूप में रखा गया.

गुरु का जीवन में बड़ा महत्व हैं, गुरु की महिमा एवं उनके आशीर्वाद से कोई भी व्यक्ति बड़े से बड़ा पद व हैसियत प्राप्त कर सकता हैं. गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति असम्भव हैं,

तभी तो इस दिन गुरुओं का पूजन किया जाता हैं तथा आज भी गुरु शिष्य परम्परा का निर्वहन करते हुए शिष्य श्रद्धानुसार अपने गुरु को दक्षिणा, वस्त्र, भेट इत्यादि देकर उनका सम्मान करता हैं.

चूंकि आषाढ़ माह की समाप्ति तक वर्षा हो जाती है तथा हरे भरे माहौल से हर किसी को आनन्द मिलता हैं, प्राचीन समय में गुरुकुलों में पढने वाले छात्र भी इस दिन अपने गुरुजनों के सम्मान में गुरु पूर्णिमा मनाते थे. तथा आगामी चौमासा की अवधि तक अध्ययन में रत रहते थे.

Guru Purnima 2022 Kab Hai July Date Story Guru Importance In India In Hindi

Guru Purnima Kab Hai 2022 : हर इंसान के जीवन में सफल और असफल होने का कारण उनका गुरु ही होता हैं. गुरु का जीवन में बड़ा महत्व है, गुरु की शिक्षाओं पर चलकर व्यक्ति जीवन में सब कुछ पा सकता है.

वही अज्ञानी, दुराचारी गुरु के पथ पर चलकर व्यक्ति अपना जीवन अंधकारमय भी बना सकता हैं. भारत ऋषि मुनियों तथा  गुरुओं का देश रहा हैं यहाँ वेदव्यास, द्रोणाचार्य तथा चाणक्य जैसे गुरुओं ने जन्म लिया हैं.

गुरु के सम्मान में गुरु पूर्णिमा  का पर्व मनाया जाता हैं. आषाढ़ माह  की शुक्ल पक्ष का पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता हैं. गुरु पूर्णिमा 2021 कब हैं, गुरु पूर्णिमा स्टोरी, गुरु पूर्णिमा इम्पोर्टेंस के बारे में जानकारी इस आर्टिकल में दी गई हैं.

कब हैं गुरु पूर्णिमा डेट (2022 Kab Hai Guru Purnima July Date)

इस साल 13 जुलाई, शुक्रवार के दिन गुरु पूर्णिमा का दिवस भारत में मनाया जाएगा. बौद्ध धर्म में इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता हैं, हिन्दू धर्म के आदि गुरु व महाभारत के रचियता श्री वेद व्यास जी की जयंती भी इसी दिन हैं. इस कारण इसे व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता हैं.

गुरु का पद  आपके माता-पिता, शिक्षक या आदर्श पुरुष कोई भी ले सकता हैं. गुरु मनुष्य को इस जीवन में अज्ञान रूपी अन्धकार को मिटाने के लिए ज्ञान का दीपक जलाकर उनके जीवन को रोशन करता हैं. न सिर्फ इस लोक में उनके जीवन को सफल बनाता हैं, बल्कि परलोक में मोक्ष प्राप्ति की राह भी गुरु ही निर्दिष्ट करता हैं.

Guru Purnima 2022 Importance In Hindi

भारत में गुरु परम्परा का इतिहास बहुत पुराना हैं, आदि शंकराचार्य , श्री रामानुजा आचार्य और श्री माधवचार्य  जैसे  आदि  गुरु इस धर्म में हुए है,

जिन्होंने लोगों को सही राह दिखाकर उनके जीवन को सफल बनाया हैं. गौतम बुद्ध को भारत के महान गुरुओं ने गुरु पूर्णिमा के दिन ही उत्तरप्रदेश के सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था.

गुरु पूर्णिमा के दिन अपने अपने गुरु की पूजा का विधान हैं. अतीत काल में आज की तरह पढ़ने के लिए  विद्यालय  नही  हुआ करते थे, तब छात्र पढ़ने के लिए गुरुकुलों में भेजे जाते थे.

एक निश्चित अवधि तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आषाढ़ पूर्णिमा को वें अपने गुरु को सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देकर विदा होते थे.

Story Of guru purnima 2022 in hindi

गुरुदेव को हमेशा श्रद्धेय माना जाता हैं, मगर आषाढ़ पूर्णिमा के दिन उनकी विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए. आपके गुरु का क्षेत्र जो भी चाहे वो शिक्षा से जुड़े हो, खेल जगत, धार्मिक जगत अथवा डिजिटल युग के किसी अन्य प्रभाग में. आज के दिन आपके उनके चरण छूकर पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए.

गुरु को परब्रह्म परमात्मा’ और ‘परब्रह्म ज्ञान का रूप माना जाता हैं. महाभारत के रचियता वेद व्यास जी जिनके जन्म दिवस पर गुरु पूर्णिमा मनाई जाती हैं. उनका मूल नाम कृष्ण द्वैपायन था.

इन्होने न केवल कौरव पांडव युद्ध का वृतांत लिखा, बल्कि हिन्दू धर्म के 6 शास्त्रों तथा 18 पुराणों की रचना की, जिसके कारण आज हम उन्हें आदि गुरु का सम्मान देते हैं.

गुरु पूर्णिमा 2022 की पूजा विधि

इस दिन जो भी भाई-बहिन अपने गुरु जो कोई भी हो सकता हैं. अपने माता-पिता, बड़े भाई, बहिन, शिक्षक अथवा अन्य व्यक्ति. गुरु पूर्णिमा  के दिन सवेरे जल्दी उठकर साफ़ कपड़े पहनकर नहा धोकर अपने गुरु देव के यहाँ जाए, उनके चरण स्पर्श कर उनका विधिवत् पूजन करे.

गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये. इस गुरु पूर्णिमा मंत्र का जाप करते करते हुए गुरु के वस्त्र, फल फूल तथा दक्षिणा अपने गुरूजी को भेट करे, तथा चलने से पूर्व उनका आशीर्वाद जरुर ले. वे व्यक्ति जो दुर देश में बैठे हैं.

अपने गुरु के इस महान दिन को बिलकुल नही भूले. कम से कम इस दिन अपने गुरु को कॉल कर संदेश भेजकर उनका हाल चाल जरुर जाने तथा गुरु पूर्णिमा 2022 बधाई संदेश जरुर प्रेषित करे.

गुरु पूर्णिमा का त्यौहार का महत्व Importance Of Guru Purnima In Hindi

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Guru Purnima In Hindi भले ही सदियां बीत गईं मगर गुरु शिष्य का रिश्ता आज भी बरकरार हैं, भले ही गुरु आज शिक्षक, टीचर अध्यापक के रूप में इसकी परिभाषा बदल गयी हो.

वर्ष 2022 ,13 जुलाई को गुरूपौर्णिमा का त्यौहार (गुरु पूर्णिमा) आज भी उतने ही लग्न और प्यार से मनाया जाता हैं, जितना पहले. कहते हैं. वेदों की रचना करने वाले वेद व्यास को हमारा प्रथम गुरु माना जाता हैं.

आषाढ़ महीने की पूर्णिमा यानी इस महीने के आखिरी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था. गुरु को माता पिता और भगवान से उपर दर्जा दिया जाता हैं, शायद इसलिए कि यही इंसान हमे इस लायक बनाता हैं,

जिससे हम इस संसार की सरंचना और ईश्वर जो जानने का मार्ग गुरु ही दिखाता हैं, जिन्दगी को कैसे जिया जाए. कौनसा मार्ग उचित हैं कोनसा अनुचित. हमे किस राह पर चलना चाहिए यह एक सच्चा गुरु ही बता सकता हैं.

इस दिन अपने शिक्षक गुरु अथवा मार्गदर्शक की पूजा कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता हैं. सदियों से चली आ रही इस परम्परा का अत्यंत महत्व हैं. ज्ञान प्राप्ति के लिए सावन और उसके बाद के महीने सबसे उत्तम होते हैं,

वर्षा हो जाने से इस समय प्यासी धरती हरी भरी हो जाती हैं. गुरु ज्ञान की वह धारा होती हैं, जो अपने निरंतर वेग के साथ बहती रहती हैं. गुरु शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हैं

गू+रु = गुरु यानि गु से अज्ञान (अँधेरा) रु यानि उसका नाशक अर्थात जिन्दगी में उजाला लाने वाला, ज्ञान की रौशनी लाने वाला ही गुरु हैं.

आज ही का दिन महान गुरु और महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म दिन भी हैं. आदि गुरु को सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष भारतवर्ष में गुरु पूर्णिमा का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं.

पुराने समय में इसी दिन बालक अपनी शिक्षा पूरी करने के पश्तात गुरुकुल से विदा लेने से पूर्व गुरु की पूजा कर अपने सामर्थ्य के अनुसार गुरु दक्षिणा देते हैं.

गुरु पूर्णिमा के पर्व के उपलक्ष्य में सभी विद्यालयों में छात्र-छात्राए अपने गुरुजनों का आदर कर उन्हें इस दिन सम्मानित करते हैं. कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता हैं, गुरु के सम्मान में मेले भरते हैं.

Guru Purnima Importance In Hindi

गुरु पूर्णिमा को कुछ ही दिन बचे हैं, देशभर में इसकी तैयारी बड़ी धूमधाम से चल रही हैं. विद्यालय के छात्र-छात्राए अपने गुरुजनों के सम्मान में भाषण और निबंध गीत शायरी संदेश कविताओ के संग्रह में जुटे हैं.

गुरू पूजन के अवसर पर ब्रज में बहुत बड़ा आयोजन होने जा रहा हैं, जहा देश भर के कई राज्यों से शिष्यगण अपने गुरु देव के चरणों में शीश नवाने आने लग गये हैं.

भारत की धर्मनगरी कहीं जाने वाली काशी में भी गुरु पूर्णिमा की तैयारी जोरो पर हैं. यहाँ के देवालयों आश्रमों मठो और शिक्षा केन्द्रों को विशेष तौर पर सजाया जा रहा हैं. राज्य सरकार भी इस आयोजन को लेकर सतर्क हैं, पुलिस और यातायात व्यवस्था की तैयारियां भी पूरी की जा चुकी हैं.

गुरु पूर्णिमा का त्यौहार का महत्व

यह दिन हमारे गुरुजनों को पूर्णत समर्पित है, गुरु पूजन के साथ ही इस दिन बड़ा महत्व हैं. आदि गुरु के सम्मान और अपने गुरुजनों के प्रति क्र्तग्यता व्यक्त करने के इस पर्व को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं.

इस दिन हमे अपने-अपने गुरुजनों की चरण पूजा करनी चाहिए. इस दिन में सिर्फ गुरु पूजन का विधान ही नही बल्कि बड़े भाई बहिन और माता-पिता की भी पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना शुभ माना जाता हैं.

सुबह उठते ही स्नानादि करने के बाद अपने घर की सफाई करे, स्वच्छ वस्त्र धारण करे. किसी साफ़ सुथरे स्थान पर बैठकर गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये मन्त्र का उच्चारण करने के साथ ही पूजा आरम्भ करनी चाहिए.

इसके पश्चात् सभी दिशाओं में अक्षत की निवृत करे. अपने गुरु यदि साक्षात् उपलब्ध हो तो उनकी पूजा करे अन्यथा उनके चित्र की पूजा कर यथेच्छ गुरु दक्षिणा दे.

Guru Purnima आषाढ़ की पूर्णिमा ही क्यों

आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को ही Guru Purnima मानने के पीछे पहला तथ्य यह हैं, कि इसी दिन आदि गुरु वेद व्यास जी का जन्म हुआ था. उनको सम्मानित करने के लिहाज से मनाया जाता हैं,

इसको मनाने के पीछे दूसरा लॉजिक यह हैं, कि आषाढ़ श्रावण महीने में अक्सर आसमान में बादल छाए रहते हैं.घने बादलो के बिच पूर्णिमा के चन्द्रमा के दर्शन नही हो पाते हैं.

इसी कारण उस अधंकार रूपी अज्ञान को समाप्त करने के लिए गुरु दीपक यानि इनके ज्ञान के उजाले से इस पर्व की सार्थकता सिद्ध की जाती हैं.

इस दिन को आडम्बर से मनाने की बजाय न मनाना अच्छा हैं, क्युकि गुरु जैसे पावन भगवान् को श्रद्धा ही सच्चा सम्मान दिया जा सकता हैं. सिख परम्परा में गुरुओ के स्थान हमेशा सर्वोपरी रहे हैं.

Guru Purnima का ज्ञान : सच्चा गुरु कौन

वैसे तो गुरु की पदवी भगवान से भी ऊपर रखी जाती हैं, मगर गुरु कौन एक सच्चा गुरु किसे मान सकते हैं. जरुरी नही आप शिक्षित हो या नही हो. भील बालक एकलव्य शिक्षित नही था, उनके कोई गुरु भी नही था.

मगर उनके मन में गुरु द्रोणाचार्य जी की तस्वीर थी. बस उसी तस्वीर को अपना गुरु मान कर आजीवन उनकी पूजा करता रहा. ठीक वैसा ही मनु स्मृति कहती हैं. आपकों किताबो या वेदों का ज्ञान देने वाला ही गुरु नही होता हैं.

बल्कि जो व्यक्ति आपकों जीवन जीने की सही राह दिखाए. वही सच्चा गुरु हैं. किताबी ज्ञान देने वाला अच्छा पंडित या ज्ञानी हो सकता हैं मगर गुरु नही.

आपका गुरु अपना बड़ा भाई पिता दोस्त अथवा आपका बॉस भी हो सकता हैं, जिन्होंने आपकों जीवन की सही राह दिखाकर

एक अच्छे मुकाम तक पहुचाने में आपकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद की हो. इतना जरुर हैं, एक शिक्षक भी हमारा गुरु हो सकता हैं. जो हमे सभी विषयों में पारंगत बनाता हैं. हमे अपने गुरु का आदर सम्मान करने का कोई अवसर नही छोड़ना चाहिए.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों गुरु पूर्णिमा पर्व क्यों व कब मनाया जाता है? Why And How Is Guru Purnima Celebrated 2022 In Hindi का यह लेख आपको पसंद आया होगा. यदि आपको गुरु पूर्णिमा के बारे में यहाँ दी गई जानकारी पसंद आई हो तो अपने फ्रेड्स के साथ जरुर शेयर करें.

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