छठ पूजा क्यों मनाया जाता है | Why We Celebrate Surya Shashti Vrat in Hindi

छठ पूजा क्यों मनाया जाता है | Why We Celebrate Surya Shashti Vrat in Hindi: कार्तिक माह की शुक्ला षष्ठी को छठ पूजा का यह व्रत मनाया जाता हैं. इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व हैं. इसे करने वाली स्त्रियाँ धन धान्य, पति पुत्र तथा सुख सम्पति से परिपूर्ण तथा संतुष्ट रहती हैं. चर्म रोग आँख की बीमारी से भी छुटकारा मिल जाता हैं. पूजन तथा अर्ध्य दान देते समय सूर्य किरण अवश्य देखना चाहिए. पूजन विधि में फल, पकवान, मिष्ठान आदि का महत्व हैं. छठपूजा 2022 के बारे में आज यहाँ बात करेगे.

छठ पूजा क्यों मनाया जाता है Surya Shashti Vrat in Hindi

छठ पूजा क्यों मनाया जाता है Surya Shashti Vrat in Hindi
व्रत नामछठ पूजा
अन्य नामसूर्य षष्ठी
आराध्यछठी मैया
क्षेत्रपूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड
तिथिकार्तिक माह शुक्ल षष्ठी
तारीख30 अक्टूबर 2022, रविवार

छठ पूजा क्यों मनाया जाता है (surya shashti vrat katha in hindi): प्राचीनकाल में बिन्दुसर तीर्थ में महिपाल नाम का एक वणिक रहता था. वह धर्म कर्म तथा देवता विरोधी था. सूर्य भगवान की प्रतिमा के सामने होकर मल मूत्र त्याग किया. जिसके परिणाम स्वरूप उसकी दोनों आँखे चली गई.

एक दिन अपने आततायी जीवन से उब कर गंगा जी में कूदकर प्राण देने का निश्चय कट चक पड़ा. रास्ते में उसे ऋषिराज नारदजी मिले और पूछा-कहिये सेठ जी, कहाँ जल्दी जल्दी भागे जा रहे हो?

अँधा सेठ हो पड़ा और सांसारिक सुख दुःख की प्रताड़ना से प्रताड़ित होकर प्राण त्यागने का इरादा बताया.

मुनि दया से गदगद होकर बोले- हे अज्ञानी, तू प्राण त्याग कर मत मर. भगवान सूर्य के क्रोध से तुम्हे यह दुःख भुगतना पड़ रहा हैं. तू कार्तिक माह की सूर्य षष्ठी का व्रत रख तेरा दुःख दरिद्र मिट जाएगा. वणिक ने वैसा ही किया तथा सुख सम्रद्धि से पूर्ण दिव्य ज्योति वाला हो गया.

छठ पूजा का महत्व

दिवाली के छः दिन बाद मनाया जाने वाला यह हिन्दू त्यौहार है इसमें छठी मैया की पूजा एवं उन्हें अर्ध्य देने का विधान हैं. हिन्दू पंचाग के अनुसार यह कार्तिक शुक्ल माह की चतुर्थी से आरम्भ होकर षष्ठी तक व्रत रखा जाता है तथा सप्तमी तिथि को इसका पारण होता हैं इस तरह यह चतुर्थी से सप्तमी तक चार दिनों तक चलता हैं.

मूल रूप से छठ पूजा एक क्षेत्रीय पर्व है जो पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार एवं झारखंड राज्यों में मनाया जाता हैं. यहाँ के निवासियों की छठी माता के प्रति अगाध श्रद्धा हैं, एक बिहारी चाहे देश विदेश कही भी हो वह छठ माता की पूजा में भाग अवश्य लेता हैं. इसका व्रत रखना काफी जटिल माना जाता हैं.

छठ के व्रत में पहले दिन शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता है दूसरे दिन उपवास रहता है तथा सांयकाल के समय गुड की खीर और रोटी का भोजन किया जाता हैं इसके बाद संध्या में सूर्य देव को अर्ध्य दिया जाता हैं माँ छठी की पूजा अर्चना कर उनके गीत भजन गाये जाते हैं. अंन्ति के दिन उषा काल में नदी घाट पर उगते सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत पूरा किया जाता है जिसे पारण कहते हैं.

क्यों मनाया जाता है छठ, क्या है इसका पौराणिक महत्व

पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए किये जाने वाले छठ व्रत के पीछे कुछ कथाएँ प्रचलित हैं. ऐसी मान्यता है कि माता सीता ने इस परम्परा की शुरुआत सूर्य पूजा से की थी.

कहा जाता है कि जब रामजी सीता समेत चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर आयौध्या नगरी लौटे तो युद्ध में हुए पाप से मुक्ति के लिए भगवान राम ने राजसूर्य यज्ञ करवाने का फैसला किया. पूजा के लिए मुगदल महर्षि आए और उन्होंने गंगाजल छिडककर सीता को पवित्र किया और कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की उपासना का आदेश दिया.

एक अन्य मान्यता के अनुसार माना जाता है कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल के दौरान हुई, तथा सबसे पहले सूर्य पुत्र कहे जाने वाले कर्ण ने इसकी शुरुआत की थी. कर्ण सूर्य भगवान के बड़े भक्त थे रोजाना कई घंटों तक खड़े होकर सूर्य को जल चढाया करते थे. सूर्य कृपा से ही वे एक अजेय यौद्धा बन पाए थे, इस मान्यता के अनुसार कर्ण ही इस परम्परा के मुख्य सूत्रधार हैं.

एक मान्यता द्रोपदी द्वारा छठ व्रत रखे जाने से जुडी भी हैं. ऐसी किवदन्ती है कि जब पांडवों ने जुए में अपना सब कुछ गंवा दिया तब द्रोपदी छठ पूजा के व्रत में थी, उनकी मनोकामना के मुताबिक़ कुंती पुत्रों ने जुए में जो कुछ गंवाया था वो उन्हें वापिस हासिल हो गया.

FAQ

छठी मैया का सूर्यदेव से क्या सम्बंध हैं?

दोनों के बीच भाई बहिन का सम्बन्ध बताया जाता हैं.

छठ पर्व की शुरुआत कब से मानी जाती हैं?

महाभारत या रामायण काल से

साल 2022 में छठ पर्व कब मनाया जाएगा?

30 अक्टूबर को

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