महिला सशक्तिकरण पर निबंध | Women Empowerment Essay In Hindi

नमस्कार दोस्तों आज का निबंध महिला सशक्तिकरण पर निबंध Women Empowerment Essay In Hindi पर दिया गया हैं. महिला सशक्तिकरण अर्थात वीमेन एम्पोवेर्मेंट अर्थ महत्व पर आसान भाषा में स्टूडेंट्स के लिए यहाँ निबंध दिया गया हैं.

महिला सशक्तिकरण पर निबंध Women Empowerment Essay In Hindi

महिला सशक्तिकरण पर निबंध Women Empowerment Essay In Hindi

यह जानना आवश्यक हैं आखिर महिला सशक्तिकरण हैं क्या ? सरल शब्दों में कहा जाए तो नारी (स्त्री,महिला) को उस स्तर तक ले जाना जहाँ से वह अपने निर्णय स्वय कर सके.

वे अपने करियर, शादी, रोजगार, परिवार नियोजन सहित सभी विषयों पर बिना किसी के मदद व दवाब के निर्णय ले सके. उन्हें वे सभी अधिकार प्राप्त हो जो पुरुष वर्ग को हैं, वह किसी के भरोसे जीने की बजाय इस काबिल बन जाए कि स्वय अपना कार्य कर सकने में सक्षम हो, यही महिला सशक्तिकरण हैं. चलिए महिला सशक्तिकरण (वीमेन एम्पोवेर्मेंट) के छोटे निबंध को.

हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत में महिलाओं का अति प्राचीनकाल से ही सम्मानजनक स्थान रहा हैं. वैदिक काल में महिलाओं को शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रो में पुरुषो के बराबर अधिकार प्राप्त थे.

लेकिन उत्तरवैदिक काल आते-आते पर्दा-प्रथा, अशिक्षा तथा अन्य कुरुतिया फैलती गईं और नारी सिर्फ घर की चारदीवारी में कैद होने लगी तथा पुरुषो के निजी स्वामित्व वाली वस्तु मानी जाने लगी. सामाजिक अंधविश्वास,पाखंड, अशिक्षा तथा पितर प्रधान समाज में महिलाओं की स्थति बद से बदतर होती चली गईं.

आधुनिक काल में शिक्षा के प्रचार, समाज सुधारकों के प्रयासों से महिला के सम्मान तथा अधिकारों के लिए आवाज उठने लगी.

महिला सशक्तिकरण जोर पकड़ने लगा. महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओ की सकारात्मक सहभागिता आवश्यक हैं. महिलाओं के प्रति समन्वयात्मक द्रष्टिकोण अपनाकर पुराने रूढ़ सामाजिक मूल्यों के रूपांतरण की आवश्यकता हैं.

महिला सशक्तिकरण का अर्थ

महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य ऐसा वातावरण सर्जित करने से हैं जिसमे प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओ का पूर्ण उपयोग करते हुए अपने जीवन व कार्यो के लिए निर्णय स्वय ले सके.

वर्तमान में नारी विकास के लिए हमारे सविधान में मूल अधिकारों व निति निर्देशक तत्वों में भी कई प्रावधान हैं. जिनमे नारी को पुरुष के समान अधिकार दिए हैं. 2005 में हिन्दू उतराधिकार कानून में संशोधन से बेटियों को भी बेटों के बराबर अधिकार प्रदान किये गये हैं.

राजनितिक क्षेत्र में भी नारी ने पुरुषो के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर अपनी पहचान बनाई हैं. देश के प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति व राज्यों के मुख्यमंत्री, लोकसभा के अध्यक्ष आदि पदों पर स्त्रियों अपना स्थान बना रही हैं.

सामाजिक क्षेत्र में भी नारी आगे रही हैं. जिनमे रमाबाई पंडित ने स्त्री शिक्षा पर कार्य किया तो मदर टरेसा ने सर्वधर्म समभाव से सभी गरीबो के लिए मुक्त में सेवा कार्य किया हैं.

आर्थिक क्षेत्रो में भी पुरुषो के बराबर व्यापार में हाथ आजमा रही हैं. व सफल भी हो रही हैं. इनमे चंदा कोचर, इंद्रा नूरी आदि महिलाओं के नाम आते हैं.

साहित्यिक क्षेत्र में मानवीय संवेदना को गहराई तक महसूस कर लिखने में महादेवी वर्मा, सरोजनी नायडू जैसी महिला लेखिकाओं के नाम मुख्य हैं. खेल के क्षेत्र में भी सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, अपुर्वी चन्देल जैसी खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय कार्य किया हैं.

महिला सशक्तिकरण के प्रयास

सरकार द्वारा भी महिला सशक्तिकरण के लिए 8 मार्च 2010 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रिय मिशन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल द्वारा शुरू किया गया था.

राज्य सरकारों ने भी महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ शुरू की गईं. जैसे स्वास्थ्य सखी योजना, कामधेनु योजना, स्वावलम्बन योजना, स्वशक्ति योजना आदि वर्तमान समय में महिला सशक्तिकरण के बारे में स्वय महिलाए भी जागरूक हो गईं हैं. यह शिक्षा के प्रचार का प्रभाव हैं.

महिला सशक्तिकरण पर निबंध Essay On Women Empowerment In Hindi

इसी गौरवगाथा में आज की युवा नारियां थल सेना, वायु सेना एवं जलसेना में भी प्रवेश कर अपने साहस का परिचय दे रही हैं. बीकानेर की तनुश्री पारिक वह पहली महिला हैं. जो सीमा सुरक्षाबल जैसे संघर्षपूर्ण क्षेत्र में एसिस्टेंट कमांडेंट के रूप में नियुक्त हुई. तेईस वर्ष की तनुश्री स्वयं को इस पद पर पाकर अत्यंत गौरवान्वित महसूस करती हैं.

उनका कहना है कि यदि नारी संकल्पित हो जाये तो उसको कोई शक्ति नही डिगा सकती हैं. बचपन से उनके मन में एक अदम्य इच्छा जागती थी. कि राष्ट्र के लिए उनका जीवन उत्सर्ग हो.

स्वयं के लिए तो सब जीते है पर राष्ट्र के लिए जीना और राष्ट्र को अपनी हर साँस में महसूस करना, दिल की हर धड्कन में इसे बसा लेना ही जीवन की सार्थकता है वे कहती है कि bsf में जाकर उनका यह सपना पूरा हुआ हैं.

सीमा सुरक्षा बल में पुरुष सैनिकों का वर्चस्व है कठिन से कठिन परिस्थियों में स्वयं को ढाल लेना एवं अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम देना उनके अनुकूल होता हैं. परन्तु इन भीषण एवं विषम परिस्थियों में महिलाओ का कार्य करना अत्यंत कठिन एवं दुष्कर होता हैं.

परन्तु तनुश्री ने इन असम्भव जैसे कठिन कार्य को आसान बना दिया. और उन युवा नारियों के लिए प्रेरणा बन गई, जो इस दिशा में सोचती है और इस क्षेत्र में अपना शौर्य और पराक्रम लगाना चाहती हैं.

crpf में बकायदा दो महिला बटालियन नियुक्त हैं और अपने साहस का शानदार परिचय दे रही हैं. दरअसल पुलिस एवं सेना क्षेत्र को महिलाओं के लिए उपयुक्त नही माना जाता,

परन्तु आज की नारियो ने इस तथ्य को न केवल झूठला दिया हैं, बल्कि अपनी समझदारी एवं अप्रितम शौर्य से सबको अचम्भित भी कर दिया हैं.

नारियों के इन अद्भुत कारनामों में एक और नाम अनीता पुरोरा का जुड़ता हैं, जो भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर तैनात रही हैं. उन्होने इस पद को अपनी कुशलता और विशेषज्ञता से सुशोभित किया था. उनका कहना है कि यह उनके लिए सपना सच होने जैसा था. बचपन से ही उमंग और उत्साह उनके मन में कुचाले मारा करते थे.

युवावस्था में कदम धरते ही उनकी असीमित मानसिक एवं शारीरिक ऊर्जा एक पथ खोज रही थी. जो इस चुनौतीपूर्ण पद को पाकर सही दिशा में बहने लगी. राष्ट्र के प्रति उनका यह जज्बा एवं समर्पण निसंदेह अविस्म्रिय एवं अद्भुत हैं.

भारतीय वायुसेना में नारियों का प्रवेश और उनका योगदान महत्वपूर्ण हो रहा हैं. इस क्षेत्र में उनकी अभिरुचि यह दर्शाती हैं कि आज की युवा नारियां युवाओं से किसी भी क्षेत्र में कमतर या कमजोर नही हैं.

बल्कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का जज्बा रखती हैं. उनकी इस अभिरुचि के कारण वर्ष 1991 में ही युवा नारियों को पायलट की भूमिका देनी शुरू हो गई थी.

मगर अब तक ये सिर्फ हेलीकॉप्टर और परिवहन विमान ही उड़ाती रही हैं. इस कड़ी में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2016 के अवसर पर एयर इंडिया की से चलाई गई दुनिया की सबसे लम्बी वीमेन फ्लाईट का नेतृत्व उतराखंड की बेटी क्षमता वाजपेयी ने किया.

उनके निर्देशन में पूरी टीम, जो युवा लड़कियों से सुसज्जित थी, ने 17 घंटे में 14500 किलोमीटर का सफर तय कर नया विश्व रिकॉर्ड बना डाला.

नई दिल्ली से सेनफ्रांसिस्को तक विमान का संचालन करने वाली क्षमता वाजपेयी को भारत की तीसरी और उत्तराखंड की पहली महिला कमांडर होने का गर्व प्राप्त हैं.

परन्तु इन सबके बावजूद अब युवा नारियों की चुनौती और भी बड़ी होने वाली हैं, भारत के इतिहास में पहली बार तीन कैडेट वाला महिला लड़ाकू पायलटों का पहला बैच भारतीय वायुसेना में शामिल हो रहा हैं. यह पल बेहद अहम एवं गौरवशाली हैं.

अवनी चतुर्वेदी, मोहना सिंह और भावना कंठ महिला पायलटों के इन जत्थों में शामिल हैं. ये तीनों ही युवा वय की हैं. और इनकी आँखों में दुश्मनों के लिए विनाश और विप्लव का सपना सजोया हुआ हैं.

इन तीनों अधिकारियों ने आसमान में बीजली की रफ्तार से विमान उड़ाने की साहसिक भूमिका में आने के साथ ही इस क्षेत्र में पुरुषों के आधिपत्य को चुनौती दे दी हैं.

देश की वीरांगनाओं में एक नाम निवेदिता का भी हैं, जो स्वामी विवेकानंद की मानसपुत्री के नाम से जानी जाती थी. उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अभूतपूर्व योगदान दिया था.

उनके गुरु स्वामी विवेकानंद ने नारियों के लिए कहा था- नारी शक्ति का प्रतीक हैं सरष्टि में ऐसी कोई शक्ति नही, जो उन्हें शक्ति प्रदान कर सके. उन्हें तो केवल बोध भर कराने की आवश्यकता हैं. शेष तो वे स्वयं अपना कार्य कर लेगी.

आज भी स्वामी जी का यह अग्निमंत्र सर्वकालिक हैं. आज भी प्रेरक हैं और कल भी रहेगा. इस अग्निमंत्र के सहारे युवा नारी को स्वयं को सबल बनाकर अपने शौर्य पराक्रम को राष्ट्रहित में लगा देना चाहिए.

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